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- 13h ago
नई दिल्ली/लखनऊ। डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों और कारोबारियों के लिए यूपीआई से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) चार्ज लागू करने के फैसले को दिवाली तक टाल दिया गया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के इस फैसले से त्योहारों के दौरान कारोबार करने वाले व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। पहले यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने की चर्चा थी, लेकिन अब इसे दिवाली के बाद लागू करने का निर्णय लिया गया है।
त्योहारों के मौसम में बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है। कपड़े, जूते, इलेक्ट्रॉनिक्स, मिठाई, आभूषण, घरेलू सामान और दूसरे उत्पादों की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ रहती है। ऐसे समय में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ता है। ऐसे में यूपीआई लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क की आशंका को लेकर व्यापारी वर्ग में चिंता थी। व्यापारियों का कहना था कि त्योहारों के बीच नया शुल्क लागू होने से उनकी लागत बढ़ सकती है और छोटे कारोबारियों पर इसका असर पड़ सकता है।
दुर्गा पूजा, धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहारों पर बाजारों में बड़े पैमाने पर खरीदारी होती है। ग्राहक अब नकदी के साथ-साथ यूपीआई के माध्यम से भुगतान करना अधिक पसंद करते हैं। छोटी दुकानों से लेकर बड़े शोरूम तक डिजिटल पेमेंट की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में भुगतान से जुड़ी किसी भी नई व्यवस्था का असर कारोबारियों के खर्च और भुगतान प्रणाली पर पड़ सकता है।
व्यापारी संगठनों की मांग थी कि प्रस्तावित एमडीआर शुल्क को त्योहारों के बाद तक टाल दिया जाए, ताकि कारोबारियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके। इसी मांग को ध्यान में रखते हुए फैसले को स्थगित करने की बात सामने आई है। हालांकि, शुल्क लागू होने की अंतिम तारीख और इससे संबंधित विस्तृत नियमों की आधिकारिक पुष्टि देखना जरूरी होगा।
एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो कुछ प्रकार के डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारी से लिया जा सकता है। यह ग्राहक के भुगतान और व्यापारी के खाते में प्राप्त होने वाली राशि के बीच अंतर पैदा कर सकता है। हालांकि, हर यूपीआई भुगतान पर एमडीआर लागू नहीं होता। इसका निर्धारण भुगतान के प्रकार, इस्तेमाल किए गए माध्यम और संबंधित नियमों के आधार पर होता है।
प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के कुछ चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की बात कही गई है। इसमें अधिकतम 300 रुपये की सीमा का भी उल्लेख किया गया है। इस व्यवस्था को सभी यूपीआई भुगतानों पर लागू मानना सही नहीं होगा।
यदि किसी पात्र लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर दर लागू होती है, तो गणना इस प्रकार होगी:
3,000 रुपये के भुगतान पर: 12 रुपये।
10,000 रुपये के भुगतान पर: 40 रुपये।
25,000 रुपये के भुगतान पर: 100 रुपये।
50,000 रुपये के भुगतान पर: 200 रुपये।
75,000 रुपये के भुगतान पर: 300 रुपये।
प्रस्तावित 300 रुपये की अधिकतम सीमा के अनुसार, इससे अधिक राशि के पात्र लेनदेन पर भी शुल्क की सीमा 300 रुपये बताई गई है। लेकिन ये गणनाएं तभी लागू होंगी, जब संबंधित भुगतान पर ऐसी दर और सीमा आधिकारिक रूप से लागू हों।
एमडीआर शुल्क का उल्लेख होने का अर्थ यह नहीं है कि हर ग्राहक को यूपीआई से भुगतान करने पर अलग से चार्ज देना होगा। यह समझना जरूरी है कि व्यापारी से लिया जाने वाला शुल्क और ग्राहक पर लगाया जाने वाला शुल्क अलग-अलग विषय हैं। ग्राहक के भुगतान पर कोई अतिरिक्त राशि लागू होगी या नहीं, यह संबंधित नियमों और भुगतान व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
आम लोगों के बीच होने वाले पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) यूपीआई ट्रांसफर और छोटे कारोबारियों के लेनदेन को लेकर भी अलग-अलग नियम लागू हो सकते हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि अब 2,000 रुपये से अधिक के हर यूपीआई भुगतान पर चार्ज देना अनिवार्य है।
यूपीआई ने छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, स्थानीय व्यापारियों और आम ग्राहकों के लिए भुगतान करना काफी आसान बनाया है। ग्राहक बिना नकदी रखे खरीदारी कर सकते हैं, जबकि दुकानदारों को भुगतान सीधे बैंक खाते में प्राप्त हो जाता है। यदि किसी श्रेणी के डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है, तो कारोबारियों को अपनी लागत और भुगतान विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है।
फिलहाल, एमडीआर संबंधी प्रस्ताव को दिवाली तक टालने की खबर से त्योहारों के दौरान कारोबार करने वाले व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। इससे बाजार में डिजिटल भुगतान की मौजूदा व्यवस्था जारी रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ग्राहकों और दुकानदारों को किसी भी नए नियम को लेकर एनपीसीआई, संबंधित बैंक या आधिकारिक भुगतान सेवा प्रदाता की सूचना पर ही भरोसा करना चाहिए।
यूपीआई से भुगतान करते समय ग्राहकों को भुगतान स्क्रीन पर दिखाई देने वाली राशि और किसी अतिरिक्त शुल्क की जानकारी ध्यान से देखनी चाहिए। वहीं, व्यापारियों को यह स्पष्ट कर लेना चाहिए कि प्रस्तावित एमडीआर नियम उनके कारोबार और भुगतान के किस प्रकार पर लागू होते हैं।
निष्कर्ष: दिवाली तक एमडीआर चार्ज लागू करने के फैसले को टालने की खबर व्यापारियों के लिए राहत भरी है। लेकिन इसे सभी यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लागू होने की घोषणा नहीं समझना चाहिए। शुल्क की दर, पात्र लेनदेन, अधिकतम सीमा और लागू होने की तारीख की पुष्टि आधिकारिक अधिसूचना से करना जरूरी है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


