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- 12h ago
मुंबई। भारतीय सिनेमा के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि के रूप में नवोदित बाल कलाकार रियान मुखर्जी ने अपनी हिंदी फिल्म ‘मंज़िल’ के लिए प्रतिष्ठित लॉस एंजिल्स फिल्म अवार्ड्स (LAFA) 2026 में सर्वश्रेष्ठ बाल अभिनेता का पुरस्कार अपने नाम किया है। इस उपलब्धि के साथ रियान ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म जगत में अपनी पहली प्रभावशाली पहचान बनाई है। इतनी कम उम्र में अपने स्वाभाविक अभिनय और सहज स्क्रीन प्रेजेंस के दम पर यह सम्मान हासिल करना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
फिल्म ‘मंज़िल’ का निर्देशन रियान के पिता और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता राम कमल मुखर्जी ने किया है। फिल्म में रितुपर्णा सेनगुप्ता, संजय सूरी और अभिषेक कुमार जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आते हैं। धनबाद टॉकीज और एंडेवर फिल्म्स के बैनर तले निर्मित इस फिल्म ने अपनी कहानी, संवेदनशील विषयवस्तु और कलाकारों के अभिनय के कारण दर्शकों तथा फिल्म समारोहों का ध्यान आकर्षित किया है।
‘मंज़िल’ एक लेखक और एक फोटोग्राफर की कहानी है, जिनकी मुलाकात एक रिसॉर्ट में संयोगवश होती है। यह मुलाकात आगे चलकर रिश्तों, भावनाओं और जीवन के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती है। फिल्म की कहानी में मानवीय संवेदनाओं को विशेष स्थान दिया गया है।
रियान मुखर्जी ने फिल्म में आरोन की भूमिका निभाई है, जो रितुपर्णा सेनगुप्ता द्वारा अभिनीत लेखिका अनन्या का बेटा है। आरोन का किरदार कहानी में एक महत्वपूर्ण भावनात्मक कड़ी के रूप में उभरता है। रियान ने अपने अभिनय से इस किरदार को सहजता प्रदान की और अपनी उपस्थिति से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
बाल कलाकार के रूप में रियान की सबसे बड़ी विशेषता उनका स्वाभाविक अभिनय बताया जा रहा है। कैमरे के सामने सहज रहना, संवादों को आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करना और दृश्य की भावनाओं को समझना किसी भी नए कलाकार के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। रियान ने इन पहलुओं में अपनी क्षमता का परिचय दिया, जिसका परिणाम उन्हें मिले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान के रूप में सामने आया।
रियान की इस सफलता से उनके पिता और फिल्म के निर्देशक राम कमल मुखर्जी बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि जूरी सदस्यों ने रियान के अभिनय को पहचानने योग्य समझा, यह उनके लिए गर्व और खुशी का विषय है।
राम कमल मुखर्जी के अनुसार, रियान ने किसी प्रकार का औपचारिक अभिनय प्रशिक्षण नहीं लिया था। इसके बावजूद उसने कैमरे का सामना सहजता से किया और अपने संवाद याद रखकर आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत किए। एक नए कलाकार के लिए यह अनुभव महत्वपूर्ण है, विशेषकर तब जब उसे अनुभवी कलाकारों के साथ काम करने का अवसर मिले।
उन्होंने कहा कि रियान ने अपने स्वाभाविक अंदाज में काम किया। उसके अभिनय में बनावटीपन के बजाय सहजता दिखाई दी, जो उसके किरदार को प्रभावशाली बनाने में सहायक रही।
पिता के निर्देशन में काम करना रियान के लिए एक अलग अनुभव भी रहा। फिल्म के सेट पर उसे न केवल अभिनय करने का अवसर मिला, बल्कि अपने पिता को उनके पेशेवर जीवन में काम करते हुए करीब से देखने और फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को समझने का मौका भी मिला।
फिल्म में रियान की मां अनन्या की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री रितुपर्णा सेनगुप्ता भी इस उपलब्धि से बेहद उत्साहित हैं। वह फिल्म की क्रिएटिव प्रोड्यूसर भी हैं। रियान के साथ अपने पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने उसे अपनी आंखों के सामने बड़ा होते देखा है और उसे बचपन से जानती हैं।
रितुपर्णा के मुताबिक, राम कमल मुखर्जी और सरबानी उनके परिवार की तरह हैं। जब राम कमल ने फिल्म में रियान को उनके बेटे की भूमिका के लिए चुना, तब उन्हें विश्वास था कि रियान अपनी अलग पहचान बनाने में सफल होगा।
उनका यह विश्वास अब अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार के रूप में सामने आया है। रियान की उपलब्धि उनके परिवार और फिल्म से जुड़े कलाकारों के लिए भावनात्मक रूप से भी खास है, क्योंकि यह सम्मान एक ऐसे युवा कलाकार को मिला है, जिसने अपने शुरुआती अभिनय सफर में ही दर्शकों और जूरी का ध्यान आकर्षित किया है।
लॉस एंजिल्स फिल्म अवार्ड्स की जूरी में शामिल अनुभवी अभिनेता जीन विन्सेंटेली ने भी रियान के अभिनय की प्रशंसा की। उनके अनुसार, रियान भारत के एक होनहार बाल कलाकार हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य बाल कलाकारों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए अपनी स्वाभाविक उपस्थिति और संयमित अभिनय के बल पर पुरस्कार हासिल किया।
किसी अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में विभिन्न देशों के कलाकारों के बीच पहचान बनाना अपने आप में महत्वपूर्ण है। रियान की उपलब्धि यह दर्शाती है कि एक प्रभावशाली अभिनय प्रस्तुति के लिए केवल अनुभव ही नहीं, बल्कि किरदार को समझने, भावनाओं को व्यक्त करने और कैमरे के सामने सहज रहने की क्षमता भी अहम होती है।
रियान के अभिनय की सराहना इस बात को भी रेखांकित करती है कि नए कलाकारों को अवसर मिलने पर वे अपनी प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान बना सकते हैं।
फिल्म ‘मंज़िल’ का पहला लुक मुंबई में आयोजित एक पुरस्कार समारोह में विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया था। इस अवसर पर मौजूद कई प्रमुख कलाकारों ने रियान की स्क्रीन प्रेजेंस और अभिनय क्षमता की सराहना की। फिल्म के पहले लुक को मिली प्रतिक्रिया ने इसके प्रति उत्सुकता बढ़ाने में योगदान दिया।
फिल्म फिलहाल दुनिया भर के फिल्म समारोहों में प्रदर्शित की जा रही है। ऐसे में रियान को मिला यह सम्मान फिल्म के प्रचार और अंतरराष्ट्रीय पहचान के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। फिल्म समारोह किसी भी स्वतंत्र या विशिष्ट विषयवस्तु वाली फिल्म को नए दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करते हैं। ‘मंज़िल’ के लिए यह मंच फिल्म की कहानी और कलाकारों के काम को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है।
उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, रियान मुखर्जी LAFA 2026 में पुरस्कार जीतने वाले एकमात्र भारतीय कलाकार हैं। समारोह में अन्य विजेताओं में जिंगनु निंग शामिल रहे, जिन्होंने ‘ए पामफुल ऑफ स्टार्स’ के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीता। फिल अमन को ‘साउंडचेक’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया, जबकि नाज़कती मैहेमुती को ‘ए पामफुल ऑफ स्टार्स’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान मिला।
इन अंतरराष्ट्रीय विजेताओं के बीच रियान का नाम शामिल होना उनके शुरुआती करियर के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है। बाल कलाकार के रूप में यह पुरस्कार उन्हें आगे बेहतर भूमिकाओं और नई परियोजनाओं के लिए अवसर दिलाने में मदद कर सकता है। हालांकि, किसी भी कलाकार के लिए इस सफलता को निरंतर मेहनत, सीखने और अच्छे किरदारों के चयन के साथ आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण होता है।
अपनी सफलता और अभिनय के अनुभव के बारे में रियान मुखर्जी ने बेहद सहज अंदाज में कहा, “मैं संयोगवश अभिनेता बन गया। मुझे अभिनय करना पसंद है, क्योंकि यही एकमात्र समय है जब मुझे अपने बाबा को काम करते हुए देखने का मौका मिलता है। वे अपने काम के प्रति बेहद समर्पित हैं।”
रियान का यह बयान उनके अभिनय सफर के पीछे छिपे पारिवारिक जुड़ाव को सामने लाता है। जहां कई कलाकार अभिनय को अपने करियर के रूप में चुनते हैं, वहीं रियान के लिए शुरुआत में यह अपने पिता के काम को करीब से देखने और समझने का अवसर भी रहा। धीरे-धीरे यही अनुभव उनके लिए अभिनय की दुनिया में कदम रखने का माध्यम बना।
उनके शब्द बताते हैं कि फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को नजदीक से देखना किसी बच्चे के लिए कितना प्रेरणादायक हो सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीतने के बाद अब रियान की पहचान केवल एक फिल्म निर्माता के बेटे तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वह अपने अभिनय के आधार पर भी चर्चा में आ गए हैं।
रियान मुखर्जी की सफलता उन बच्चों के लिए प्रेरणादायक है, जो अभिनय, सिनेमा और रचनात्मक क्षेत्रों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि प्रतिभा को सही अवसर, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले तो कम उम्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
हालांकि, बाल कलाकारों के लिए शिक्षा, व्यक्तिगत विकास और अभिनय के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। फिल्म उद्योग में सफलता केवल पुरस्कारों से तय नहीं होती, बल्कि निरंतर सीखने, मेहनत करने और अलग-अलग भूमिकाओं को समझने से कलाकार का विकास होता है।
रियान के सामने अब अपने अभिनय कौशल को और बेहतर बनाने तथा नई कहानियों और किरदारों के साथ प्रयोग करने के अवसर खुल सकते हैं। ‘मंज़िल’ से मिली यह पहचान उनके फिल्मी सफर की एक महत्वपूर्ण शुरुआत साबित हो सकती है।
राजेश सिंह और शर्मिष्ठा मुखर्जी द्वारा निर्मित ‘मंज़िल’ में अनुभवी कलाकारों के साथ एक नए बाल कलाकार को महत्वपूर्ण भूमिका में प्रस्तुत करना फिल्म की विशेषताओं में शामिल है। राम कमल मुखर्जी का निर्देशन, रितुपर्णा सेनगुप्ता की अभिनय भूमिका और क्रिएटिव प्रोडक्शन में भागीदारी तथा अन्य कलाकारों का योगदान फिल्म की रचनात्मक टीम को एक साथ लाता है।
रियान को मिला सर्वश्रेष्ठ बाल अभिनेता का पुरस्कार पूरी टीम के लिए उत्साह बढ़ाने वाला है। इससे फिल्म के प्रति दर्शकों की जिज्ञासा और बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में मिलने वाली पहचान किसी फिल्म को नए बाजारों, दर्शकों और समीक्षकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कुल मिलाकर, रियान मुखर्जी का LAFA 2026 में सर्वश्रेष्ठ बाल अभिनेता का पुरस्कार जीतना उनके अभिनय सफर का एक उल्लेखनीय पड़ाव है। फिल्म ‘मंज़िल’ के माध्यम से उन्होंने अपनी स्वाभाविक प्रतिभा का परिचय दिया है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर रहेगी कि यह युवा कलाकार आने वाले समय में किन नई कहानियों और किरदारों के जरिए अपनी पहचान को आगे बढ़ाता है।
मुंबई-रिपोर्टर,(हितेश जैन)।


