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- 13h ago
प्रतापगढ़। गुरु कृपा स्टूडियो के बैनर तले निर्मित की जा रही बहुप्रतीक्षित भोजपुरी फिल्म 'सच की जीत' की शूटिंग उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद के विभिन्न खूबसूरत और कहानी के अनुरूप चुने गए लोकेशनों पर सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। जाने-माने फिल्म निर्देशक विनोद चौरसिया के कुशल निर्देशन में बनी इस फिल्म की शूटिंग बड़े कैनवास पर रिच और रियल लोकेशन को ध्यान में रखते हुए की गई है। फिल्म की कहानी की मांग के अनुसार प्रतापगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों को शूटिंग के लिए चुना गया, जिससे फिल्म में स्थानीय परिवेश, सामाजिक जीवन और ग्रामीण मिट्टी की वास्तविक खुशबू को पर्दे पर उतारने का प्रयास किया गया है।
फिल्म 'सच की जीत' में अभिनेता प्रेम सिंह और अभिनेत्री ऋतु सिंह पहली बार एक साथ केंद्रीय भूमिका में नजर आएंगे। दोनों कलाकारों की जोड़ी को लेकर भोजपुरी सिनेमा के दर्शकों में भी उत्सुकता देखने को मिल रही है। फिल्म में उनके साथ भोजपुरी सिनेमा के दिग्गज कलाकार संजय पांडेय, देव सिंह और उदय श्रीवास्तव भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इनके अलावा जे नीलम, रूपेश मिश्रा, इंद्रसेन यादव, प्रीति राज, रागिनी यादव सहित कई कलाकार फिल्म का हिस्सा हैं।
फिल्म 'सच की जीत' की सबसे खास बात इसकी कहानी और विषयवस्तु को बताया जा रहा है। आमतौर पर भोजपुरी फिल्मों में सास-बहू के रिश्ते को पारिवारिक विवाद, घरेलू संघर्ष और भावनात्मक टकराव के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है, लेकिन इस फिल्म में सास-बहू के रिश्ते को एक अलग सामाजिक और कानूनी संदर्भ में दिखाने का प्रयास किया गया है।
फिल्म में शिक्षा, कानून, पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक मूल्यों को कहानी का आधार बनाया गया है। सास और बहू के बीच उत्पन्न परिस्थितियां कहानी को अदालत तक ले जाती हैं, जहां सच और न्याय के बीच संघर्ष दिखाई देता है। फिल्म की कहानी में पारिवारिक भावनाओं के साथ-साथ कानून और सामाजिक सोच को भी प्रमुखता दी गई है।
निर्माताओं के अनुसार फिल्म का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं है, बल्कि दर्शकों को यह सोचने के लिए भी प्रेरित करना है कि किसी भी पारिवारिक या सामाजिक विवाद में जल्दबाजी के बजाय सच्चाई, संवाद, शिक्षा और कानून के रास्ते को अपनाया जाना चाहिए।
फिल्म की शूटिंग के लिए प्रतापगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे लोकेशन चुने गए, जो कहानी के परिवेश के साथ पूरी तरह मेल खाते हैं। ग्रामीण क्षेत्र, स्थानीय रास्ते, प्राकृतिक वातावरण और क्षेत्र की सामाजिक पृष्ठभूमि को कैमरे में कैद किया गया है।
निर्देशक विनोद चौरसिया ने बताया कि कहानी को वास्तविकता के करीब रखने के लिए शूटिंग में रियल लोकेशन का विशेष ध्यान रखा गया। उनका मानना है कि जब किसी कहानी की पृष्ठभूमि को वास्तविक स्थानों पर फिल्माया जाता है तो दर्शकों को उससे जुड़ाव महसूस होता है और फिल्म की कहानी अधिक प्रभावी ढंग से सामने आती है।
उन्होंने कहा कि प्रतापगढ़ की मिट्टी, यहां का वातावरण और स्थानीय जीवन फिल्म की कहानी के कई दृश्यों के लिए बिल्कुल उपयुक्त रहा। यही वजह है कि टीम ने स्टूडियो आधारित सेट के बजाय अधिक से अधिक वास्तविक लोकेशन पर शूटिंग करने को प्राथमिकता दी।
प्रतापगढ़ में फिल्म की शूटिंग के दौरान स्थानीय लोगों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। जैसे ही लोगों को जानकारी मिलती कि किसी स्थान पर फिल्म की शूटिंग होने वाली है, वहां स्थानीय लोगों और कलाकारों के प्रशंसकों की भीड़ जुट जाती थी।
भोजपुरी सिनेमा के लोकप्रिय कलाकारों को अपने बीच देखकर लोग काफी उत्साहित नजर आए। कई लोग शूटिंग स्थल पर कलाकारों की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते दिखाई दिए। कलाकारों के साथ फोटो लेने और शूटिंग को करीब से देखने को लेकर भी स्थानीय लोगों में उत्सुकता रही।
फिल्म यूनिट की ओर से शूटिंग के दौरान स्थानीय लोगों के सहयोग की भी सराहना की गई। स्थानीय सहयोग के कारण कई दृश्यों को निर्धारित समय में पूरा करने में मदद मिली।
फिल्म 'सच की जीत' में प्रेम सिंह और ऋतु सिंह पहली बार एक साथ मुख्य भूमिका में दिखाई देंगे। दोनों कलाकारों की नई जोड़ी फिल्म के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है।
फिल्म की कहानी पारिवारिक रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, इसलिए दोनों कलाकारों के किरदारों में भावनात्मक दृश्यों के साथ-साथ सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों का भी प्रभाव देखने को मिलेगा। फिल्म में रिश्तों की जटिलता, परिवार के भीतर बदलती सोच और न्याय के लिए संघर्ष को कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
भोजपुरी सिनेमा के अनुभवी और चर्चित कलाकार संजय पांडेय तथा देव सिंह भी फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। दोनों कलाकार अपनी अभिनय क्षमता और अलग-अलग तरह के किरदारों के लिए जाने जाते हैं।
फिल्म में उनके अलावा उदय श्रीवास्तव, जे नीलम, रूपेश मिश्रा, इंद्रसेन यादव, प्रीति राज और रागिनी यादव सहित अन्य कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। कलाकारों की विविध टीम के चलते फिल्म में पारिवारिक, सामाजिक और न्यायालय से जुड़े कई तरह के भावनात्मक और नाटकीय दृश्य देखने को मिल सकते हैं।
फिल्म को तकनीकी रूप से बेहतर बनाने के लिए अनुभवी टीम को जिम्मेदारी दी गई है। फिल्म के डीओपी नीरज त्रिपाठी हैं, जबकि असिस्टेंट डायरेक्टर संदीप सिंह, विशाल बुराडे और दिनेश पाल हैं।
निर्देशक विनोद चौरसिया के नेतृत्व में पूरी टीम ने फिल्म की शूटिंग को कहानी के अनुरूप पूरा किया। फिल्म के दृश्यों में लोकेशन की वास्तविकता, कलाकारों के अभिनय और कहानी की गंभीरता को संतुलित रखने पर विशेष ध्यान दिया गया।
फिल्म का शीर्षक 'सच की जीत' अपने आप में कहानी के मूल भाव को सामने रखता है। फिल्म में यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अंततः सत्य और न्याय की राह महत्वपूर्ण होती है।
सामाजिक और पारिवारिक मुद्दों को मनोरंजन के साथ जोड़कर प्रस्तुत करने का प्रयास फिल्म को सामान्य पारिवारिक फिल्मों से अलग रूप देने की कोशिश है। कहानी में पारिवारिक रिश्तों के साथ शिक्षा और कानून को जोड़ना भी फिल्म की प्रमुख विशेषताओं में शामिल बताया जा रहा है।
फिल्म से जुड़े लोगों का कहना है कि 'सच की जीत' की कहानी पारंपरिक भोजपुरी फिल्मों से अलग विषय को सामने रखने का प्रयास करती है। फिल्म में मनोरंजन के साथ सामाजिक सरोकारों को भी स्थान दिया गया है।
फिल्मी जानकारों के बीच भी इस बात को लेकर चर्चा है कि यदि कहानी और प्रस्तुति दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है तो ऐसी सामाजिक और पारिवारिक कहानियों के लिए भोजपुरी सिनेमा में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि फिल्म के वास्तविक प्रभाव का आकलन इसके रिलीज होने के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया के आधार पर ही किया जा सकेगा।
फिल्म के निर्देशक विनोद चौरसिया ने बताया कि 'सच की जीत' केवल मनोरंजन तक सीमित फिल्म नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी के अनुरूप प्रतापगढ़ के अलग-अलग लोकेशन का चयन किया गया। इन लोकेशन ने कहानी को यथार्थ के करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वास्तविक परिवेश के कारण फिल्म के दृश्यों में स्थानीय रंग और मिट्टी की सोंधी महक महसूस होगी।
उन्होंने आगे बताया कि प्रतापगढ़ में शूटिंग के दौरान स्थानीय लोगों का भरपूर सहयोग मिला। जैसे ही लोगों को शूटिंग की जानकारी मिलती थी, बड़ी संख्या में प्रशंसक कलाकारों को देखने के लिए पहुंच जाते थे। कलाकारों को भी स्थानीय लोगों का उत्साह और प्यार देखने को मिला।
निर्देशक के अनुसार फिल्म सामाजिक और पारिवारिक विषयों पर आधारित फैमिली ड्रामा है, जिसमें मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश को भी प्रमुखता दी गई है।
प्रतापगढ़ के विभिन्न लोकेशन पर फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद अब फिल्म से जुड़े लोगों की नजर इसके अगले चरण पर है। शूटिंग पूरी होने के बाद पोस्ट प्रोडक्शन से जुड़े कार्यों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद फिल्म की रिलीज को लेकर आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
दर्शकों के लिए यह फिल्म इसलिए भी खास हो सकती है क्योंकि इसमें एक नई जोड़ी के साथ अनुभवी कलाकारों का अभिनय देखने को मिलेगा और कहानी का केंद्र पारिवारिक रिश्तों के साथ कानून एवं न्याय के मुद्दों पर रखा गया है।
फिल्म 'सच की जीत' के निर्माता पक्ष को उम्मीद है कि भोजपुरी दर्शक इस अलग विषय वाली कहानी को पसंद करेंगे और फिल्म को अपना समर्थन देंगे। प्रतापगढ़ में शूटिंग पूरी होने के साथ ही फिल्म की निर्माण यात्रा का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो चुका है और अब दर्शकों को इसके सिनेमाघरों अथवा निर्धारित रिलीज प्लेटफॉर्म पर आने का इंतजार रहेगा।
मुंबई-रिपोर्टर,(हितेश जैन)।


