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- 13h ago
नई दिल्ली। वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन 2026 ने खेल, फिटनेस और सामाजिक सरोकारों को एक मंच पर लाकर परोपकार के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। इस वर्ष मैराथन के माध्यम से सामाजिक कार्यों के लिए 8.87 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जुटाई गई है। यह उपलब्धि पिछले वर्ष जुटाई गई 4.12 करोड़ रुपये की राशि से दोगुने से भी अधिक है। धावकों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), कॉरपोरेट संस्थानों और व्यक्तिगत फंडरेज़र की सामूहिक भागीदारी से हासिल यह सफलता दर्शाती है कि खेल प्रतियोगिताएं केवल शारीरिक क्षमता और प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रभावी माध्यम भी बन सकती हैं।
आयोजकों के अनुसार, वर्ष 2005 में शुरू हुई वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन अब खेल और सामाजिक जिम्मेदारी के संगम के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी है। आयोजन के जरिए अब तक कुल 97.5 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जुटाई जा चुकी है। इस अभियान से 500 से अधिक गैर-सरकारी संगठनों को सहायता मिली है। इन प्रयासों ने जरूरतमंद बच्चों, युवाओं, महिलाओं और वंचित समुदायों के लिए काम करने वाले संगठनों को अपने सामाजिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का अवसर दिया है।
इस वर्ष 72 एनजीओ, 14 कॉरपोरेट संस्थानों और 169 से अधिक व्यक्तिगत फंडरेज़र ने विभिन्न सामाजिक उद्देश्यों के समर्थन में योगदान दिया। इन सभी की भागीदारी ने आयोजन को एक व्यापक जन-अभियान का रूप दिया है। इस पहल के माध्यम से लोगों को अपनी पसंद के सामाजिक कार्यों से जुड़ने और अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन का उद्देश्य केवल धावकों को दौड़ने का अवसर देना नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को साझा उद्देश्यों के लिए एकजुट करना भी है। इसमें शामिल प्रतिभागी अपनी दौड़ को किसी सामाजिक अभियान से जोड़कर जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए धन जुटाते हैं। इस तरह प्रत्येक धावक की भागीदारी सामाजिक बदलाव की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा बन जाती है।
मैराथन के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास, आजीविका, महिला सशक्तीकरण और वंचित समुदायों के कल्याण जैसे अनेक क्षेत्रों में काम करने वाले संगठनों को समर्थन मिलता है। आयोजकों की पहल लोगों को यह समझाने का प्रयास करती है कि सामाजिक बदलाव के लिए केवल बड़े दानदाताओं या संस्थानों का योगदान ही जरूरी नहीं है, बल्कि आम नागरिक भी अपने छोटे-छोटे प्रयासों से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
दौड़ के प्रति लोगों के उत्साह को सामाजिक उद्देश्यों से जोड़ने की यह पहल परोपकार की पारंपरिक अवधारणा को भी व्यापक बना रही है। अब प्रतिभागी अपनी शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं।
इस अभियान में लक्ष्य लगातार दूसरे वर्ष परोपकार भागीदार की भूमिका निभा रहा है। संगठन ने एनजीओ, व्यक्तिगत फंडरेज़र, कॉरपोरेट संस्थानों और धावकों को सामाजिक कार्यों के लिए धन जुटाने हेतु प्रोत्साहित किया। इस सहयोग का उद्देश्य विभिन्न सामाजिक संगठनों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना और उनके कार्यों के लिए अधिक संसाधन जुटाने में मदद करना है।
लक्ष्य के संस्थापक एवं पार्टनर निखिल पंत ने कहा कि मैराथन खेल, फिटनेस और सामुदायिक सहभागिता के जरिए दीर्घकालिक सामाजिक बदलाव लाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। उनके अनुसार, विभिन्न संगठनों और धावकों की बढ़ती भागीदारी से परोपकार अभियान का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है।
उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को सामाजिक उद्देश्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नागरिकों को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया। सामूहिक प्रयासों से जुटाई गई धनराशि सामाजिक संस्थाओं को अपने कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने तथा जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने में सहयोग देती है।
इस वर्ष व्यक्तिगत स्तर पर धन जुटाने के मामले में दीपक शर्मा ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। चेंज आइकन के रूप में सामने आए दीपक शर्मा ने उदयन केयर के समर्थन में 31 लाख रुपये जुटाए। यह संस्था वंचित परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों, युवाओं और महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए कार्य करती है।
दीपक शर्मा की इस पहल ने व्यक्तिगत फंडरेज़िंग के महत्व को रेखांकित किया है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सामाजिक कार्यों के लिए संसाधन जुटाने में व्यक्तिगत स्तर पर की गई पहल भी बड़ा योगदान दे सकती है। सही उद्देश्य के लिए लोगों को जोड़ना, जागरूकता फैलाना और सामूहिक सहयोग प्राप्त करना सामाजिक बदलाव की दिशा में प्रभावशाली कदम साबित हो सकता है।
व्यक्तिगत फंडरेज़र किसी संस्था के कार्यों को लोगों तक पहुंचाने और संभावित सहयोगियों को उससे जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस प्रकार के प्रयास सामाजिक संस्थाओं के लिए आर्थिक सहयोग के साथ-साथ जनसमर्थन का दायरा बढ़ाने में भी मददगार बनते हैं।
दीपक शर्मा की उपलब्धि इस वर्ष के अभियान की प्रमुख विशेषताओं में शामिल रही। उनके द्वारा जुटाई गई धनराशि से उदयन केयर के सामाजिक उद्देश्यों को समर्थन मिलेगा और वंचित वर्गों के सशक्तीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सामाजिक भागीदारी के क्षेत्र में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कक्षा 10 के 15 वर्षीय छात्र रेहान गयान ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया। आयोजन के सबसे कम उम्र के फंडरेज़र के रूप में उन्होंने एटाशा सोसाइटी के लिए 50 हजार रुपये जुटाए।
एटाशा सोसाइटी कौशल विकास और आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में काम करती है। रेहान गयान की पहल इस बात का उदाहरण है कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है। कम उम्र में ही समाज की जरूरतों के प्रति जागरूक होकर सकारात्मक प्रयास किए जा सकते हैं।
रेहान की उपलब्धि युवाओं को सामाजिक कार्यों से जुड़ने के लिए प्रेरित करने वाली है। विद्यार्थी अपने आसपास की समस्याओं को समझकर, लोगों को जागरूक करके और किसी सामाजिक संस्था के उद्देश्य का समर्थन कर समाज में उपयोगी योगदान दे सकते हैं।
मैराथन में उनकी भागीदारी यह संदेश भी देती है कि सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया में युवा पीढ़ी की सक्रिय भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यदि बच्चों और युवाओं को शुरुआत से ही सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति प्रोत्साहित किया जाए, तो समाज में सहयोग, संवेदनशीलता और सेवा की भावना को मजबूत किया जा सकता है।
मैराथन के टाइटल प्रायोजक वेदांता ने अपनी सामाजिक पहल ‘नंद घर’ के माध्यम से इस आयोजन को कुपोषण के खिलाफ अभियान से जोड़ा है। ‘रन फॉर जीरो हंगर’ पहल के तहत प्रतिभागियों द्वारा तय किया गया प्रत्येक किलोमीटर वेदांता की 50 लाख पोषण पैक उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता में योगदान देगा।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों और पशुओं की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहायता करना है। इसके माध्यम से दौड़ जैसी लोकप्रिय खेल गतिविधि को पोषण और भूख से जुड़े सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयास से जोड़ा गया है।
कुपोषण और खाद्य असुरक्षा समाज के सामने मौजूद महत्वपूर्ण चुनौतियों में शामिल हैं। बच्चों को पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराना उनके शारीरिक विकास और बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है। ऐसे में पोषण से जुड़े अभियानों को व्यापक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण माना जाता है।
‘रन फॉर जीरो हंगर’ पहल इस विचार पर आधारित है कि व्यक्तिगत प्रयासों को सामूहिक उद्देश्य से जोड़कर बड़े स्तर पर सामाजिक योगदान दिया जा सकता है। धावकों की भागीदारी को पोषण संबंधी प्रतिबद्धता से जोड़ने के कारण आयोजन को एक अतिरिक्त सामाजिक आयाम मिला है।
आयोजकों के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में मैराथन से जुड़े सामूहिक प्रयासों के माध्यम से 2.2 करोड़ भोजन उपलब्ध कराने में मदद मिली है। यह आंकड़ा आयोजन के सामाजिक प्रभाव और भोजन संबंधी जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करने के प्रयासों को दर्शाता है।
वेदांता की ‘नंद घर’ पहल के माध्यम से मैराथन को पोषण संबंधी उद्देश्यों से जोड़ना इस आयोजन की महत्वपूर्ण विशेषता है। इस तरह खेल गतिविधि और सामाजिक कल्याण के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
आयोजन में शामिल लोग अपनी दौड़ को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक अभियान के हिस्से के रूप में भी देख सकते हैं। पोषण से जुड़े उद्देश्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने से समुदायों में इस विषय पर संवाद को प्रोत्साहन मिलता है।
भोजन और पोषण की उपलब्धता से जुड़े प्रयासों में नागरिकों, संस्थानों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सामूहिक प्रतिबद्धता के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने के उद्देश्य को आगे बढ़ाया जा सकता है।
इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (आईआरएफसी) भी इस आयोजन के माध्यम से सामाजिक उद्देश्यों का समर्थन करने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के रूप में शामिल है। कंपनी अपनी कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास, वंचित समुदायों के सशक्तीकरण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में काम करती है।
कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से कंपनियां अपने संसाधनों और संस्थागत क्षमता का उपयोग सामाजिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कर सकती हैं। वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन जैसे मंचों पर कॉरपोरेट संस्थानों की भागीदारी से सामाजिक कार्यों के लिए सहयोग जुटाने और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने का अवसर मिलता है।
आईआरएफसी की भागीदारी यह भी रेखांकित करती है कि सामाजिक विकास में सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों की भूमिका केवल अपने मूल व्यावसायिक कार्यों तक सीमित नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में सीएसआर गतिविधियां समुदायों की जरूरतों को पूरा करने में सहयोग दे सकती हैं।
प्रोकैम इंटरनेशनल के संयुक्त प्रबंध निदेशक विवेक बी. सिंह ने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में धनराशि में दोगुने से अधिक की वृद्धि धावकों, एनजीओ, कॉरपोरेट साझेदारों और लक्ष्य के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि मैराथन का उद्देश्य लोगों को अपने पसंदीदा सामाजिक कार्यों के लिए योगदान देने का अवसर उपलब्ध कराना है। इस मंच के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले सामाजिक संगठनों को लोगों से जुड़ने और अपने उद्देश्यों के लिए आर्थिक सहयोग प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
धनराशि में हुई वृद्धि को अभियान से जुड़े विभिन्न पक्षों की सक्रिय भागीदारी के रूप में देखा जा रहा है। इसमें व्यक्तिगत फंडरेज़र की भूमिका भी अहम है, जो अपने संपर्कों और प्रयासों के जरिए सामाजिक उद्देश्यों के लिए सहयोग जुटाते हैं।
आयोजन से जुड़ी संस्थाओं का प्रयास है कि खेल और सामाजिक जिम्मेदारी को एक-दूसरे का पूरक बनाया जाए। इसके तहत धावकों की ऊर्जा, नागरिकों की भागीदारी और संस्थानों के सहयोग को सामाजिक जरूरतों की ओर केंद्रित किया जा रहा है।
आयोजकों के अनुसार, मैराथन से जुड़ा धन जुटाने का अभियान 31 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। व्यक्ति, युवा, रनिंग क्लब, संस्थान और कॉरपोरेट संगठन इस अभियान से जुड़कर विभिन्न सामाजिक उद्देश्यों के लिए धन जुटा सकते हैं।
अभियान का विस्तार इस बात पर जोर देता है कि सामाजिक कार्यों में भागीदारी केवल मैराथन के दिन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इच्छुक प्रतिभागियों और संस्थानों के पास निर्धारित समयसीमा तक अपने पसंदीदा सामाजिक उद्देश्यों का समर्थन करने का अवसर रहेगा।
इस पहल के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को परोपकार से जोड़ने, सामाजिक संस्थाओं के कार्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सामूहिक योगदान को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया है।
वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन 2026 की उपलब्धि यह दर्शाती है कि खेल आयोजनों को सामाजिक विकास से जोड़कर व्यापक जनसमर्थन हासिल किया जा सकता है। 8.87 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जुटना, 72 एनजीओ की भागीदारी और 169 से अधिक व्यक्तिगत फंडरेज़र का योगदान इस अभियान के विभिन्न आयामों को सामने लाता है।
वर्ष 2005 से अब तक 97.5 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने और 500 से अधिक एनजीओ को सहायता पहुंचाने का सफर आयोजन के विस्तार को रेखांकित करता है। इस दौरान खेल के साथ परोपकार, सामाजिक जिम्मेदारी और सामुदायिक सहभागिता को भी प्रमुखता मिली है।
इस वर्ष दीपक शर्मा और रेहान गयान जैसे व्यक्तिगत फंडरेज़र की उपलब्धियां यह बताती हैं कि सामाजिक कार्यों के लिए योगदान देने के अनेक रास्ते हैं। वहीं, वेदांता की पोषण पहल, आईआरएफसी की सीएसआर गतिविधियां और लक्ष्य की भागीदारी इस अभियान में विभिन्न संस्थानों की भूमिका को सामने लाती हैं।
मैराथन का यह प्रयास समाज के विभिन्न वर्गों को एक साझा उद्देश्य से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जब खेल के प्रति उत्साह को जरूरतमंदों की सहायता और सामाजिक कल्याण से जोड़ा जाता है, तो व्यक्तिगत उपलब्धि सामूहिक जिम्मेदारी का रूप ले सकती है। यही वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां दौड़ के साथ-साथ समाज के लिए कुछ बेहतर करने का संकल्प भी आगे बढ़ रहा है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


