यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 13h ago
बागपत। बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा और कानून की जानकारी देने के उद्देश्य से जनपद के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान छात्र-छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम-2012 के प्रावधानों, बाल विवाह की कानूनी स्थिति और संकट की स्थिति में उपलब्ध सहायता सेवाओं के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी गई। बच्चों को बताया गया कि कम उम्र में होने वाली शादी और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को लेकर कानून में कड़े प्रावधान हैं तथा किसी भी प्रकार की परेशानी या खतरे की स्थिति में चुप रहने के बजाय तत्काल सहायता लेनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश तथा जनपद न्यायाधीश मनोज कुमार-।। के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अंकिता सिंह-।। द्वारा गांधी जयंती के उपलक्ष्य में विशेष पॉक्सो एक्ट-2012 जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान 25 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर तक जनपद के विभिन्न विद्यालयों में आयोजित किया जा रहा है।
अभियान के तहत विद्यालयों में प्रार्थना सभा के समय जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में न्यायिक अधिकारियों और विधिक सहायता से जुड़े अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद किया। बच्चों को कानूनी प्रावधानों को कठिन कानूनी भाषा में बताने के बजाय सामान्य और आसानी से समझ आने वाले तरीके से समझाया गया।
अधिकारियों ने बच्चों को बताया कि उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी होना जरूरी है। यदि किसी बच्चे के साथ गलत व्यवहार होता है, उसे किसी प्रकार का दबाव झेलना पड़ता है अथवा वह स्वयं को असुरक्षित महसूस करता है तो उसे किसी भरोसेमंद व्यक्ति, शिक्षक, अभिभावक अथवा संबंधित सहायता तंत्र को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
जागरूकता शिविरों में बच्चों को संरक्षण अधिनियम, 2012 यानी पॉक्सो एक्ट के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने समझाया कि बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए यह कानून बनाया गया है। बच्चों को यह भी बताया गया कि कानून के प्रावधानों को समझना केवल किसी घटना के बाद जरूरी नहीं है, बल्कि सुरक्षा और बचाव के लिए पहले से जागरूक रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
शिविरों में अज्ञानता के कारण होने वाले अपराधों और उनके कानूनी परिणामों पर भी चर्चा की गई। छात्र-छात्राओं को बताया गया कि कानून की जानकारी के अभाव में किसी गलत व्यवहार को सामान्य मान लेना उचित नहीं है। बच्चों को किसी भी अनुचित स्थिति की जानकारी होने पर सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।
जागरूकता अभियान के दौरान बच्चों को यह महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गई कि पॉक्सो कानून में 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को बच्चे की श्रेणी में रखा गया है और ऐसे मामलों में कानून विशेष सुरक्षा प्रदान करता है। अधिकारियों ने बच्चों को बताया कि नाबालिग से जुड़े मामलों में केवल यह कह देना कि दोनों की सहमति थी, कानूनी जिम्मेदारी को समाप्त नहीं करता।
इस जानकारी का उद्देश्य बच्चों को कानून के प्रति सजग करना और उन्हें ऐसी परिस्थितियों से बचाना है जिनमें उनकी कम उम्र या अज्ञानता का फायदा उठाया जा सकता है।
शिविरों में बाल विवाह के कानूनी निषेध के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। बच्चों को बताया गया कि बाल विवाह कानून के दायरे में आता है और इसके संबंध में कानून में प्रावधान निर्धारित हैं। आधिकारिक कानून के अनुसार पुरुष के लिए 21 वर्ष से कम और महिला के लिए 18 वर्ष से कम आयु में होने वाला विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है।
अधिकारियों ने विद्यार्थियों को समझाया कि कम उम्र में विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और भविष्य पर गंभीर असर डाल सकता है। इसलिए यदि कहीं बाल विवाह की तैयारी की जानकारी मिले तो समय रहते संबंधित अधिकारियों या सहायता तंत्र को सूचना देना जरूरी है।
अभियान के तहत बागपत और आसपास के क्षेत्रों के कई शिक्षण संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में न्यायिक अधिकारियों, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े अधिकारियों और लीगल एड डिफेंस काउंसिल के सदस्यों ने विद्यार्थियों को कानून की जानकारी दी।
सैंट ऐंजल्स पब्लिक स्कूल, चमरावल रोड बागपत में श्रीमती मनोरमा, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय बागपत, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अंकिता सिंह-।। और असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल सतीश कुमार ने विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम की जानकारी दी।
किस्तु ज्योति कान्वेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बागपत में प्रदीप कुमार, मोटर दुर्घटना दावा अधिकारी बागपत, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनिन्दर पाल सिंह और डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल पंकज मलिक ने बच्चों को कानूनी प्रावधानों से अवगत कराया।
इसी क्रम में वनस्थली पब्लिक स्कूल बड़ौत तथा श्रीराम इंटर कॉलेज, सराय रोड बड़ौत में ग्रामीण न्यायालय बड़ौत के अभिषेक कुमार और असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल अंकित तोमर ने जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को पॉक्सो कानून की जानकारी दी।
वहीं जनता इंटर कॉलेज पूठड सराय, वैदान्तिक इंटरनेशनल स्कूल अमीनगर सराय और शीलचंद इंटर कॉलेज अमीनगर सराय में सिविल जज जूनियर डिवीजन स्वाति वर्मा, जुडिशियल मजिस्ट्रेट अमनदीप और डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल अतेश कुमार ने छात्र-छात्राओं को कानून के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान बच्चों को विशेष रूप से बताया गया कि किसी भी प्रकार की परेशानी, डर, दबाव या असुरक्षा की स्थिति में चुप रहना समाधान नहीं है। उन्हें अपने भरोसेमंद शिक्षक, अभिभावक या संबंधित सहायता व्यवस्था को जानकारी देने की सलाह दी गई।
बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और पुलिस हेल्पलाइन 112 समेत उपलब्ध सहायता माध्यमों की जानकारी दी गई। केंद्र सरकार के मिशन वात्सल्य के तहत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को राज्य और जिला स्तर की व्यवस्थाओं के साथ संचालित किया जा रहा है और इसे आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली 112 के साथ भी जोड़ा गया है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता और मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है। बच्चों को यह संदेश दिया गया कि कानून केवल दंड देने का माध्यम नहीं है, बल्कि जरूरतमंद लोगों और बच्चों को सुरक्षा तथा सहायता उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
संकट की स्थिति में सपोर्ट पर्सन, चाइल्ड हेल्पलाइन, पुलिस, बाल कल्याण समिति अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जैसे माध्यमों से सहायता लेने के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी गई।
अभियान के दौरान अधिकारियों ने कहा कि बच्चों को अपने अधिकारों की जानकारी होना उनकी सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कई बार बच्चे डर, झिझक या जानकारी के अभाव में किसी घटना की जानकारी अपने परिवार अथवा जिम्मेदार व्यक्ति को नहीं दे पाते। ऐसी स्थिति में जागरूकता कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करने में मदद कर सकते हैं।
छात्र-छात्राओं को यह भी समझाया गया कि किसी भी अनुचित व्यवहार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और ऐसी स्थिति सामने आने पर विश्वसनीय व्यक्ति से बात करनी चाहिए।
जागरूकता अभियान में बच्चों के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रूप से शिक्षकों और अभिभावकों की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया गया। बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, भय, असहजता या किसी बात को लेकर लगातार परेशान रहने जैसी परिस्थितियों को गंभीरता से समझने की आवश्यकता बताई गई।
विद्यालयों में इस प्रकार के कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल कानून की धाराओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना भी है। बच्चों को यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि समस्या सामने आने पर उनकी बात सुनी जाएगी और उन्हें सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था मौजूद है।
अधिकारियों ने कहा कि कानून की जानकारी होने से बच्चों और समाज को कई प्रकार की समस्याओं से बचाया जा सकता है। पॉक्सो कानून और बाल विवाह से संबंधित प्रावधानों की जानकारी विद्यालय स्तर पर पहुंचाने से बच्चों को अपने अधिकारों और कानूनी सुरक्षा के बारे में समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रमों में यह संदेश दिया गया कि किसी भी बच्चे के साथ होने वाले अनुचित व्यवहार को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। समय पर सूचना और सहायता मिलने से स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से चलाया जा रहा विशेष पॉक्सो जागरूकता अभियान 25 सितंबर से शुरू होकर गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान जनपद के विभिन्न विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम-2012, बाल विवाह निषेध और कानूनी सहायता सेवाओं की जानकारी दी जा रही है।
अभियान का उद्देश्य बच्चों तक कानून की सरल और सही जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सकें और किसी संकट की स्थिति में उपलब्ध सहायता तंत्र का उपयोग कर सकें।
बाल सुरक्षा से जुड़े कानून तभी प्रभावी रूप से काम कर सकते हैं जब बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के अन्य वर्गों को उनके बारे में जानकारी हो। इसी उद्देश्य से विद्यालयों में आयोजित किए जा रहे ये जागरूकता शिविर महत्वपूर्ण हैं। बच्चों को कम उम्र में विवाह से होने वाले नुकसान, पॉक्सो कानून के संरक्षण और आपात स्थिति में उपलब्ध सहायता माध्यमों की जानकारी देकर उन्हें अधिक सजग बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
अभियान के दौरान विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि वे किसी भी ऐसी परिस्थिति में अकेले निर्णय लेने के बजाय भरोसेमंद बड़े व्यक्ति और उपलब्ध कानूनी सहायता तंत्र से संपर्क करें। जागरूकता, संवाद और समय पर सहायता को बच्चों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।


