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- 13h ago
मथुरा। शहर की जल निकासी व्यवस्था और सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निगम ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। बरसात के दौरान जलभराव की समस्या और नालों में जमा गंदगी को लेकर नगर आयुक्त ओजस्वी राज ने गुरुवार को शहर के विभिन्न क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर नाला-नालियों की स्थिति, जल प्रवाह, सफाई व्यवस्था और जल निकासी से जुड़ी समस्याओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर सफाई व्यवस्था में लापरवाही और गंदगी मिलने पर नगर आयुक्त ने नाराजगी जताई। लापरवाही के मामले में संबंधित सफाई एजेंसी नेचर ग्रीन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
नगर आयुक्त के निरीक्षण के बाद नगर निगम के अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों में भी हलचल दिखाई दी। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि शहर की सफाई और जल निकासी व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नालों की नियमित सफाई, जल निकासी व्यवस्था की लगातार निगरानी और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।
नगर आयुक्त ओजस्वी राज ने सबसे पहले वार्ड संख्या 49 डेम्पियर नगर, बनखंडी और भरतपुर गेट क्षेत्र का निरीक्षण किया। इन क्षेत्रों में उन्होंने प्रमुख नालों और जल निकासी से जुड़ी व्यवस्थाओं को देखा। अधिकारियों से नालों की वर्तमान स्थिति, सफाई की आवृत्ति और जल निकासी में आ रही परेशानियों के बारे में जानकारी ली।
उन्होंने मौके पर यह भी देखा कि नालों में पानी का प्रवाह किस स्थिति में है और किन स्थानों पर पानी रुकने अथवा ओवरफ्लो की संभावना बनी हुई है। जल निकासी व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
इसके बाद नगर आयुक्त ने वार्ड संख्या 35 बनखंडी क्षेत्र स्थित भैंस बहोरा नाले का निरीक्षण किया। अधिकारियों के साथ पैदल भ्रमण करते हुए उन्होंने नाले की स्थिति को करीब से देखा और मौके पर मौजूद कर्मचारियों से सफाई व्यवस्था की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने नालों में जल प्रवाह, जलभराव, ओवरफ्लो और जल निकासी की स्थिति का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने यह समझने का प्रयास किया कि किन स्थानों पर जल निकासी में बाधा उत्पन्न हो रही है और उसका कारण क्या है।
नाला निर्माण अथवा जल निकासी से जुड़े कार्यों में आ रही बाधाओं के बारे में भी अधिकारियों से जानकारी ली गई। नगर आयुक्त ने कहा कि जल निकासी से जुड़े कार्यों को केवल कागजी स्तर पर नहीं रखा जाए, बल्कि मौके पर उनकी स्थिति की नियमित समीक्षा की जाए। जहां निर्माण या अन्य कारणों से जल निकासी प्रभावित हो रही है, वहां संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर समस्या का समाधान कराया जाए।
निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त को कुछ स्थानों पर GVP और डलावघरों पर गंदगी दिखाई दी। इस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों और सफाई एजेंसी के प्रतिनिधियों को व्यवस्था में तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि शहर में कूड़ा एकत्र करने के निर्धारित स्थानों पर नियमित सफाई होनी चाहिए। डलावघरों के आसपास कूड़ा बिखरा हुआ नहीं मिलना चाहिए और कूड़े का समय से उठान सुनिश्चित किया जाए। सफाई व्यवस्था की निगरानी केवल निरीक्षण के समय ही नहीं, बल्कि नियमित रूप से की जानी चाहिए।
नगर आयुक्त ने अधिकारियों से कहा कि जिन क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था अपेक्षाकृत कमजोर है, वहां विशेष निगरानी रखी जाए। सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति, कार्यक्षेत्र और नियमित सफाई की भी समीक्षा की जाए, ताकि शहर में कहीं भी गंदगी का ढेर दिखाई न दे।
निरीक्षण के दौरान सफाई व्यवस्था में लापरवाही मिलने पर नगर निगम ने संबंधित एजेंसी नेचर ग्रीन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इस कार्रवाई को नगर निगम की ओर से सफाई व्यवस्था को लेकर सख्ती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
नगर आयुक्त ने संबंधित एजेंसी को निर्देशित किया कि उसके जिम्मे आने वाले क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाए। नालों और जल निकासी से जुड़े क्षेत्रों में नियमित सफाई कराई जाए और निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों को समयबद्ध तरीके से दूर किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि कार्यदायी एजेंसियों के काम की नियमित समीक्षा की जाए। यदि निरीक्षण में बार-बार एक ही तरह की कमी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
शहर में जलभराव की समस्या को लेकर भी नगर आयुक्त ने अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां भी जल निकासी की समस्या सामने आती है, वहां केवल तत्काल पानी निकालने तक सीमित न रहा जाए, बल्कि जलभराव के मूल कारण की पहचान की जाए।
नालों में सिल्ट, कचरा अथवा अन्य अवरोध के कारण पानी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है तो उसे तत्काल हटाया जाए। नालियों के मुहानों और क्रॉसिंग प्वाइंट पर विशेष निगरानी रखी जाए। ऐसे स्थानों की सूची तैयार कर नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
नगर आयुक्त ओजस्वी राज ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल निकासी और सफाई से संबंधित नागरिकों की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए। किसी क्षेत्र से नाला चोक होने, पानी जमा होने या गंदगी की शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित अधिकारी मौके की स्थिति का सत्यापन करें और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि नागरिकों को जलभराव अथवा सफाई संबंधी समस्या के कारण अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। शिकायतों के निस्तारण की केवल रिपोर्ट तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मौके पर समस्या वास्तव में दूर हुई या नहीं, इसकी भी जांच की जानी चाहिए।
नगर आयुक्त ने कहा कि नाला-नालियों की सफाई एक बार की जाने वाली प्रक्रिया नहीं है। नालों में लगातार कचरा और सिल्ट जमा होने की स्थिति में जल प्रवाह प्रभावित हो सकता है। ऐसे में नियमित सफाई और निगरानी आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रमुख नालों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए। जहां सफाई कार्य की आवश्यकता हो, वहां समय से कार्रवाई की जाए। सफाई के बाद निकली सिल्ट और कचरे का भी तत्काल निस्तारण कराया जाए, ताकि वह दोबारा नालों में न पहुंचे।
निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने नालों से संबंधित निर्माण कार्यों की प्रगति की भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि किन स्थानों पर नाला निर्माण का कार्य चल रहा है, कहां कार्य पूरा हो चुका है और किन स्थानों पर किसी कारण से काम प्रभावित है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण कार्यों के कारण जल निकासी प्रभावित न हो। जहां निर्माण कार्य चल रहे हैं, वहां अस्थायी जल निकासी की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि स्थानीय लोगों को परेशानी न हो।
नगर आयुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। जिस क्षेत्र में सफाई की जिम्मेदारी जिस अधिकारी या एजेंसी की है, वहां नियमित निरीक्षण किया जाए और कमियां मिलने पर तत्काल सुधार कराया जाए।
उन्होंने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य केवल जुर्माना लगाना नहीं, बल्कि शहर की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को प्रभावी बनाना है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा।
नगर निगम की ओर से नागरिकों से भी अपील की गई कि वे नालियों में कूड़ा, प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट न डालें। घरों और दुकानों से निकलने वाले कचरे को निर्धारित स्थान पर ही डालें, ताकि नालियां चोक न हों।
नालियों में कूड़ा जमा होने से पानी का प्रवाह रुकने के साथ जलभराव की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए नगर निगम के साथ नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है।
नगर आयुक्त के अचानक स्थलीय निरीक्षण से संबंधित अधिकारियों और सफाई व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों में भी हड़कंप की स्थिति रही। नगर आयुक्त ने कई स्थानों पर पैदल भ्रमण कर व्यवस्थाओं को देखा और मौके पर ही अधिकारियों से जवाब मांगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि सफाई व्यवस्था में सुधार केवल निरीक्षण के दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। नियमित रूप से क्षेत्रवार समीक्षा की जाए और जहां भी कमी मिले, उसे तत्काल दूर किया जाए।
नगर आयुक्त ने दो टूक कहा कि शहर की जल निकासी और सफाई व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नालों की सफाई, जलभराव की रोकथाम और कूड़ा उठान को प्राथमिकता देते हुए संबंधित अधिकारी और एजेंसियां अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करें। आने वाले दिनों में भी नगर निगम की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण जारी रहने के संकेत दिए गए हैं।


