17 सितंबर से मथुरा में शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान, 5 लाख दीपों से जगमगाएंगे धार्मिक स्थल
- 11h ago
मथुरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित मथुरा दौरे और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से ठीक पहले हुई बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की तैयारियों की पोल खोल दी है। बारिश के बाद मथुरा के कई प्रमुख इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। सड़कें पानी में डूबी नजर आईं तो कई स्थानों पर अंडरपास और पुलों के नीचे पानी भरने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। ऐसे में जन्माष्टमी पर मथुरा-वृंदावन पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दो दिवसीय प्रस्तावित दौरे को लेकर प्रशासन और पुलिस पहले से ही तैयारियों में जुटे हैं। वहीं, 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा और वृंदावन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। ऐसे समय में बारिश के बाद सड़कों पर जमा पानी ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
एक ओर मुख्यमंत्री की सुरक्षा और कार्यक्रम को लेकर व्यवस्थाएं की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर आम श्रद्धालुओं के आवागमन वाले रास्तों पर जलभराव की स्थिति प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही है।
मथुरा में लंबे समय से जलभराव एक बड़ी समस्या बना हुआ है। बारिश के मौसम में शहर के कई हिस्सों में पानी जमा होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी समस्या से निजात दिलाने के लिए नगर निगम की ओर से करीब 6 करोड़ रुपये की लागत से जल निकासी पाइपलाइन बिछाने का दावा किया गया था।
पाइपलाइन और जल निकासी व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी बारिश के दौरान यदि प्रमुख सड़कों और अंडरपास में पानी जमा हो जाता है तो योजना की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव से राहत दिलाने के लिए हर वर्ष तैयारियां की जाती हैं, नालों की सफाई और नई पाइपलाइन डालने की बातें होती हैं, लेकिन तेज बारिश के बाद शहर की स्थिति फिर पहले जैसी दिखाई देने लगती है।
लोगों का सवाल है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी यदि बारिश का पानी सड़कों से जल्द नहीं निकल पा रहा है तो जल निकासी व्यवस्था में कमी कहां रह गई।
जन्माष्टमी से पहले हुई बारिश को प्रशासन की तैयारियों के लिए एक तरह की परीक्षा माना जा रहा है। पर्व के दौरान मथुरा-वृंदावन में सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है।
ऐसे में यदि बारिश के बाद जलभराव लंबे समय तक बना रहा तो इसका सीधा असर यातायात व्यवस्था पर पड़ सकता है। सड़क पर पानी जमा होने से वाहनों की रफ्तार धीमी होगी और प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति पैदा हो सकती है।
इसके अलावा पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों के लिए पानी से भरी सड़कों से होकर गुजरना मुश्किल हो सकता है।
बारिश के बाद अंडरपासों में जलभराव की स्थिति ने सबसे अधिक चिंता बढ़ाई है। पानी अधिक भर जाने के कारण लोगों और वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। एहतियात के तौर पर कुछ स्थानों पर जेसीबी मशीनों की मदद से रास्ता बंद किया गया, ताकि कोई वाहन गहरे पानी में फंसने या किसी तरह की दुर्घटना का शिकार होने से बच सके।
हालांकि रास्ता बंद करने से तत्काल हादसे का खतरा कम किया जा सकता है, लेकिन इससे यह सवाल भी सामने आता है कि अंडरपासों में बारिश के पानी की निकासी की स्थायी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
जन्माष्टमी के दौरान यदि इसी तरह बारिश होती है और अंडरपास जलमग्न होते हैं तो वैकल्पिक मार्गों पर अचानक यातायात का दबाव बढ़ सकता है।
मथुरा में जन्माष्टमी केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर होने वाला श्रद्धालु समागम है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग श्रीकृष्ण जन्मभूमि और वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पैदल और वाहनों से आने के कारण पहले ही प्रमुख मार्गों पर दबाव रहता है। यदि इन रास्तों पर बारिश का पानी जमा हो गया तो स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
पानी भरी सड़कों पर पैदल श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित होने के साथ वाहनों के फंसने की स्थिति भी बन सकती है। इसके कारण जाम बढ़ने और यातायात व्यवस्था बिगड़ने की आशंका रहेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित दौरे के कारण पुलिस-प्रशासन पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हाई अलर्ट पर है। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड, आवागमन मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया जाना है।
दूसरी ओर जन्माष्टमी के कारण शहर में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन के सामने एक साथ कई मोर्चे होंगे।
मुख्यमंत्री की सुरक्षा, श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और जल निकासी—चारों व्यवस्थाओं को एक साथ संभालना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।
बारिश के बाद जलभराव वाले स्थानों पर प्रशासन को तत्काल पंप लगाकर पानी निकालने, नालों की सफाई कराने और यातायात को सुरक्षित तरीके से संचालित करने की जरूरत है।
जन्माष्टमी के दौरान किसी भी मार्ग पर पानी अधिक जमा होने की स्थिति में तत्काल वैकल्पिक मार्ग तैयार रखना भी जरूरी होगा। इसके लिए प्रशासन को पहले से ऐसे स्थान चिह्नित करने होंगे जहां जलभराव की संभावना अधिक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल बारिश के बाद पानी निकालने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी। शहर की जल निकासी व्यवस्था का स्थायी समाधान जरूरी है।
मथुरा में जलभराव की समस्या का एक बड़ा कारण नालों और जल निकासी मार्गों में अवरोध को भी माना जाता है। कई स्थानों पर बारिश के दौरान नालियां और नाले ओवरफ्लो होने लगते हैं।
लोगों का कहना है कि यदि बरसात से पहले नालों की सफाई और जल निकासी मार्गों की प्रभावी जांच की गई होती तो कई इलाकों में पानी इतनी तेजी से जमा नहीं होता।
अब जन्माष्टमी से ठीक पहले हुई बारिश के बाद नगर निगम और प्रशासन के सामने इन व्यवस्थाओं को दोबारा जांचने की जरूरत महसूस हो रही है।
छह करोड़ रुपये की जल निकासी योजना को लेकर अब लोगों की निगाहें इसकी जमीनी उपयोगिता पर टिक गई हैं। सवाल यह नहीं है कि पाइपलाइन बिछाई गई या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि बारिश के समय वह कितनी प्रभावी तरीके से पानी निकाल पा रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक किसी भी जल निकासी परियोजना की असली परीक्षा कागजों पर नहीं, बल्कि बारिश के दौरान होती है। यदि तेज बारिश के बाद सड़कें और अंडरपास पानी में डूब जाते हैं तो व्यवस्था की क्षमता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
लोग चाहते हैं कि प्रशासन योजना की तकनीकी समीक्षा कर यह पता लगाए कि किन क्षेत्रों में पानी रुक रहा है और उसका कारण क्या है।
जलभराव और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ एक साथ आने पर यातायात व्यवस्था के प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। जिन मार्गों से सामान्य दिनों में वाहन आसानी से गुजरते हैं, वहीं जन्माष्टमी पर पैदल श्रद्धालुओं और वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
यदि किसी प्रमुख मार्ग पर जलभराव के कारण वाहनों की गति धीमी होती है या मार्ग बंद करना पड़ता है तो उसका असर आसपास के दूसरे मार्गों पर भी पड़ सकता है।
इसलिए प्रशासन के सामने अब जलभराव वाले स्थानों की पहचान कर वहां पहले से ट्रैफिक प्लान तैयार करने की जरूरत है।
मथुरा-वृंदावन आने वाले सभी श्रद्धालु वाहन से नहीं पहुंचते। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल भी मंदिरों और धार्मिक स्थलों तक जाते हैं। सड़कों पर पानी भरने से पैदल यात्रियों के सामने सबसे बड़ी समस्या सुरक्षित रास्ते की होगी।
पानी में गड्ढे या खुले मैनहोल दिखाई न देने से दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए जलभराव वाले स्थानों पर बैरिकेडिंग और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करना भी जरूरी होगा।
जन्माष्टमी के दौरान मौसम का मिजाज भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। यदि पर्व के दौरान दोबारा तेज बारिश होती है तो पहले से जलभराव वाले स्थानों पर स्थिति और खराब हो सकती है।
ऐसे में नगर निगम को पंपिंग मशीनों, सफाई कर्मचारियों और जल निकासी से जुड़े संसाधनों को तैयार रखना होगा। पुलिस को भी ऐसे स्थानों पर अतिरिक्त यातायात व्यवस्था करनी पड़ सकती है।
मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे से पहले प्रशासन के पास जलभराव वाले स्थानों की व्यवस्था सुधारने का समय सीमित है। मुख्यमंत्री के दौरे के कारण जहां शहर की व्यवस्थाओं पर विशेष निगाह रहेगी, वहीं जन्माष्टमी के कारण आम श्रद्धालुओं की सुविधाएं भी महत्वपूर्ण होंगी।
ऐसे में अधिकारियों के सामने चुनौती है कि बारिश से पैदा हुई समस्या को केवल अस्थायी रूप से न संभाला जाए, बल्कि उन स्थानों पर स्थायी समाधान की दिशा में भी कदम उठाए जाएं जहां हर वर्ष जलभराव होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मथुरा धार्मिक नगरी होने के कारण पूरे देश से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। ऐसे शहर में सड़क, जल निकासी और यातायात जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं मजबूत होनी चाहिए।
लोगों का सवाल है कि यदि जन्माष्टमी जैसे बड़े पर्व से पहले ही बारिश के बाद सड़कें जलमग्न हो जाती हैं तो लाखों श्रद्धालुओं के आने पर व्यवस्था कैसे संभाली जाएगी।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन जलभराव वाले सभी स्थानों का निरीक्षण कर तत्काल पानी निकासी की व्यवस्था करे और जहां तकनीकी खामी है, उसे दूर कराया जाए।
बारिश ने जन्माष्टमी से पहले प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या शहर की जल निकासी व्यवस्था वास्तव में लाखों श्रद्धालुओं के दबाव को झेलने के लिए तैयार है?
छह करोड़ रुपये की पाइपलाइन परियोजना के बावजूद यदि बारिश के बाद जलभराव की तस्वीर सामने आती है तो इसकी प्रभावशीलता की समीक्षा जरूरी हो जाती है। प्रशासन के लिए अब चुनौती केवल पानी निकालने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि जन्माष्टमी के दौरान श्रद्धालुओं को जलभराव, जाम और अव्यवस्था का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बीच बारिश ने मथुरा की व्यवस्थाओं की वास्तविक परीक्षा शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन जलभराव को महज पंप लगाकर अस्थायी रूप से दूर करता है या छह करोड़ रुपये की जल निकासी योजना की कमियों को भी चिन्हित कर स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ाता है।
फिलहाल बारिश के बाद मथुरा की सड़कों और अंडरपास की तस्वीरें शहर की जल निकासी व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों को और गंभीर बना रही हैं। जन्माष्टमी पर लाखों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ के बीच अब प्रशासन की असली परीक्षा जलभराव, यातायात और श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही को लेकर होगी।


