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- 11h ago
मथुरा। समय पर वेतन नहीं मिलने से नाराज नगर निगम के कचरा वाहन चालकों और सफाई कर्मचारियों का गुस्सा रविवार को फूट पड़ा। कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर हड़ताल शुरू कर दी और लंबित वेतन के भुगतान की मांग को लेकर नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का कहना है कि वे लगातार शहर की सफाई व्यवस्था को संभालने में जुटे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय से मेहनताना नहीं मिल रहा है। इससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
हड़ताल के दौरान कूड़ा उठाने वाले वाहनों के चालक और सफाई कर्मचारी एकजुट होकर धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक उनके लंबित वेतन का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। आंदोलन का नेतृत्व उत्तम चंद सहजन ने किया।
कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें कई महीनों से नियमित रूप से वेतन नहीं मिल रहा है। वेतन भुगतान को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखी गई, लेकिन हर बार जल्द भुगतान कराने का आश्वासन देकर मामला टाल दिया गया।
कर्मचारियों का कहना है कि आश्वासन मिलने के बाद भी जब स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उनके सामने आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। लगातार वेतन में देरी के कारण कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है।
उनका कहना है कि परिवार का राशन, बच्चों की पढ़ाई, मकान का किराया, बिजली-पानी के बिल और अन्य जरूरी खर्च समय पर पूरे करना मुश्किल हो गया है। कई कर्मचारियों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने तक की समस्या पैदा हो गई है।
नगर निगम की सफाई व्यवस्था में कचरा वाहन चालक और सफाई कर्मचारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने से लेकर शहर के अलग-अलग इलाकों में सफाई व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी इन्हीं कर्मचारियों पर रहती है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे सुबह से लेकर दिनभर अपने काम में जुटे रहते हैं। शहर के घरों और व्यावसायिक क्षेत्रों से कूड़ा उठाकर निर्धारित स्थानों तक पहुंचाया जाता है। इसके बावजूद वेतन के मामले में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों ने कहा कि सफाई कर्मचारी शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन उनके अपने घर की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। उनका सवाल है कि यदि कर्मचारी समय पर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं तो उन्हें समय पर वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा।
रविवार को कर्मचारियों ने काम बंद कर एकजुट होकर धरना दिया। कचरा वाहन खड़े कर दिए गए और कर्मचारियों ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें रखीं।
धरने के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि यह कदम मजबूरी में उठाना पड़ा है। उनका कहना है कि वह लंबे समय से अधिकारियों से वेतन भुगतान की मांग कर रहे थे, लेकिन लगातार देरी के कारण अब परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द से जल्द लंबित वेतन का भुगतान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।
कर्मचारियों की हड़ताल का सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। कचरा वाहन चालकों के काम पर नहीं आने से घर-घर से कूड़ा उठाने की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
यदि हड़ताल लंबी चली तो कई मोहल्लों में कूड़ा जमा होने की स्थिति पैदा हो सकती है। पहले से निर्धारित रूट पर कचरा वाहन नहीं पहुंचने के कारण लोगों को घरों में कूड़ा रखने की मजबूरी हो सकती है।
शहर के बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि यहां प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है।
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण नगर निगम के सामने सफाई व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना चुनौती बन सकता है। यदि समय रहते कर्मचारियों और निगम प्रशासन के बीच समाधान नहीं निकला तो इसका असर शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर दिखाई दे सकता है।
खासकर उन इलाकों में समस्या बढ़ सकती है, जहां रोजाना डोर-टू-डोर कूड़ा उठान होता है। वाहन नहीं चलने पर कूड़ा सड़कों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास जमा होने की स्थिति बन सकती है।
धरने पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं चाहिए। वेतन भुगतान की तारीख तय कर लंबित राशि का भुगतान कराया जाना चाहिए।
कर्मचारियों का कहना है कि पहले भी कई बार उन्हें भरोसा दिलाया गया कि जल्द ही वेतन जारी कर दिया जाएगा, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। इसी कारण इस बार उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक वास्तविक भुगतान नहीं होता, तब तक काम शुरू नहीं किया जाएगा।
कर्मचारियों ने बताया कि नियमित वेतन न मिलने का असर केवल उन तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके पूरे परिवार को इसका सामना करना पड़ रहा है। बच्चों की फीस और घर के जरूरी खर्चों के लिए उन्हें उधार तक लेना पड़ रहा है।
कुछ कर्मचारियों का कहना है कि वेतन मिलने में देरी होने से महीने का बजट पूरी तरह बिगड़ जाता है। एक तरफ रोजमर्रा के खर्च बढ़ रहे हैं और दूसरी ओर समय पर आय नहीं मिल रही है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने काम से पीछे नहीं हटते, लेकिन बदले में समय पर वेतन मिलना उनका अधिकार है।
कर्मचारियों की हड़ताल ने नगर निगम प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर कर्मचारियों की लंबित वेतन की समस्या का समाधान करना है, वहीं दूसरी ओर शहर की सफाई व्यवस्था को प्रभावित होने से बचाना भी जरूरी है।
यदि कर्मचारियों की मांग जल्द पूरी नहीं हुई तो आंदोलन लंबा खिंच सकता है। ऐसी स्थिति में शहर के कई हिस्सों में कूड़ा उठान और सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाएगी।
कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि उनकी मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि वह किसी टकराव की स्थिति नहीं चाहते, लेकिन आर्थिक परेशानी के बीच बिना वेतन काम करना भी संभव नहीं है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे उत्तम चंद सहजन ने कर्मचारियों की मांग को लेकर आवाज उठाते हुए कहा कि लंबित वेतन का जल्द भुगतान होना चाहिए। कर्मचारियों ने प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
कर्मचारियों की हड़ताल के बाद अब शहरवासियों की नजर नगर निगम प्रशासन के अगले कदम पर है। यदि जल्द बातचीत के जरिए समाधान निकलता है तो सफाई व्यवस्था को बड़े स्तर पर प्रभावित होने से बचाया जा सकता है।
वहीं, यदि विवाद लंबा खिंचता है तो आने वाले दिनों में शहर में जगह-जगह कूड़ा जमा होने की समस्या बढ़ सकती है। इससे नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल कर्मचारी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं और उन्होंने लंबित वेतन का भुगतान होने तक काम पर लौटने से इनकार कर दिया है। अब देखना होगा कि निगम प्रशासन कर्मचारियों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और शहर की सफाई व्यवस्था को सामान्य करने के लिए कितनी जल्दी समाधान निकाला जाता है।
कर्मचारियों की मांग स्पष्ट है—लंबित वेतन का भुगतान किया जाए और भविष्य में वेतन समय पर मिले। वहीं, हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए निगम प्रशासन के सामने तत्काल समाधान निकालने की चुनौती है।


