17 सितंबर से मथुरा में शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान, 5 लाख दीपों से जगमगाएंगे धार्मिक स्थल
- 11h ago
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से कुछ दिन पहले बुधवार को हुई तेज बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की एक बार फिर परीक्षा ले ली। लगातार बारिश के चलते भूतेश्वर चौराहे और अंडरपास क्षेत्र में पानी भर गया। अंडरपास में जलभराव की सूचना मिलते ही नगर निगम की टीमें सक्रिय हो गईं। इसी बीच नगर आयुक्त ओजस्वी राज भी बारिश के बीच हाथ में छाता लेकर मौके पर पहुंच गए और उन्होंने अंडरपास की स्थिति का स्वयं जायजा लिया।
नगर आयुक्त के अचानक मौके पर पहुंचने से निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों में भी सक्रियता बढ़ गई। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से जलभराव की स्थिति, पानी की गहराई और निकासी की गति के संबंध में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने निर्देश दिए कि पंपों की मदद से अंडरपास में जमा पानी को जल्द से जल्द बाहर निकाला जाए, ताकि वाहनों और राहगीरों की आवाजाही प्रभावित न हो।
निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने जलभराव वाले क्षेत्र में सुरक्षा इंतजामों को भी देखा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जब तक अंडरपास से पानी पूरी तरह बाहर न निकल जाए, तब तक मौके पर निगरानी बनाए रखी जाए और आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग से निकाला जाए।
बुधवार को तेज बारिश के बाद भूतेश्वर क्षेत्र में जलभराव की स्थिति सामने आते ही नगर निगम की टीमें मौके पर पहुंच गईं। पानी की निकासी के लिए पंप लगाए गए और जलभराव वाले स्थानों से पानी निकालने का काम शुरू कराया गया।
नगर निगम के कर्मचारियों ने अंडरपास और आसपास के क्षेत्र में स्थिति पर नजर रखी। अधिकारियों को लगातार पानी के स्तर की जानकारी दी जाती रही। निगम का प्रयास रहा कि बारिश रुकने का इंतजार करने के बजाय उपलब्ध संसाधनों के जरिए पानी को जल्द से जल्द बाहर निकाला जाए।
नगर आयुक्त ने भी मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी जैसे बड़े पर्व से पहले जलभराव वाले स्थानों पर विशेष सतर्कता बरती जाए।
भूतेश्वर अंडरपास में जलभराव की समस्या लंबे समय से शहर के लिए चुनौती बनी हुई है। तेज बारिश के दौरान यहां पानी जमा होने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती रही है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम की ओर से जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ओजस्वी राज ने बताया कि जल निकासी की समस्या के समाधान के लिए करीब छह करोड़ रुपये की लागत से नई पाइपलाइन बिछाई गई है। उनके अनुसार इस नई व्यवस्था का असर अब बारिश के दौरान दिखाई दे रहा है।
नगर आयुक्त ने कहा कि पहले बारिश का पानी अंडरपास और आसपास के क्षेत्र में काफी समय तक जमा रहता था, लेकिन नई पाइपलाइन के जरिए पानी पहले की तुलना में तेजी से बाहर निकल रहा है।
नई पाइपलाइन के बावजूद तेज बारिश के कारण अंडरपास में पानी जमा होने पर नगर निगम ने पंपों की मदद से पानी निकालने की व्यवस्था की। अधिकारियों के अनुसार अत्यधिक बारिश के दौरान कुछ समय के लिए जलभराव होना संभव है, लेकिन प्रयास यह है कि पानी को अधिक देर तक जमा न रहने दिया जाए।
नगर निगम की टीमें पंपिंग व्यवस्था के साथ मौके पर निगरानी बनाए हुए हैं। पानी का स्तर बढ़ने की स्थिति में अतिरिक्त संसाधनों का इस्तेमाल करने की तैयारी भी रखी जा रही है।
4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाना है। जन्माष्टमी के दौरान मथुरा में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि, मंदिरों और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भीड़ बढ़ेगी।
ऐसे में शहर की सड़कों और अंडरपास पर जलभराव की स्थिति प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन सकती है। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या के कारण यातायात का दबाव भी बढ़ेगा। यदि बारिश के दौरान प्रमुख मार्गों पर पानी जमा होता है तो इसका असर यातायात व्यवस्था पर पड़ सकता है।
इसी को देखते हुए नगर निगम ने जलभराव वाले स्थानों पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी की है।
जन्माष्टमी पर मथुरा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की होती है जो पैदल मंदिरों तक पहुंचते हैं। इसके अलावा निजी वाहनों, बसों और अन्य साधनों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी काफी रहती है।
ऐसे में भूतेश्वर जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर जलभराव होने से आवागमन प्रभावित होने की आशंका रहती है। नगर निगम और प्रशासन के सामने चुनौती है कि बारिश होने की स्थिति में पानी को जल्द से जल्द निकालकर मार्ग को सामान्य रखा जाए।
नगर आयुक्त ने मौके पर अधिकारियों को इसी दिशा में काम करने के निर्देश दिए हैं।
नगर आयुक्त ने केवल पानी की निकासी की स्थिति ही नहीं देखी, बल्कि जलभराव के कारण पैदा होने वाले संभावित सुरक्षा जोखिमों का भी जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जलभराव वाले स्थानों पर लोगों की आवाजाही को लेकर विशेष सावधानी बरती जाए।
अंडरपास में पानी अधिक होने की स्थिति में वाहनों को प्रवेश करने से रोकने और जरूरत के अनुसार बैरिकेडिंग करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया, ताकि कोई वाहन पानी में फंसकर दुर्घटना का शिकार न हो।
नई पाइपलाइन के जरिए पानी तेजी से निकलने के नगर आयुक्त के दावे के बीच अब बारिश के दौरान इसकी क्षमता को परखा जा रहा है। बुधवार की बारिश को निगम की नई जल निकासी व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण परीक्षण माना जा रहा है।
नगर निगम के सामने चुनौती यह है कि लगातार या बहुत तेज बारिश होने पर भी पानी की निकासी बनी रहे। इसके लिए पाइपलाइन के साथ पंपिंग व्यवस्था को भी तैयार रखना होगा।
मथुरा में जलभराव की समस्या नई नहीं है। हर साल मानसून के दौरान शहर के कई हिस्सों में पानी जमा होने की शिकायतें सामने आती हैं। भूतेश्वर क्षेत्र भी लंबे समय से इस समस्या से प्रभावित रहा है।
यही वजह है कि नई पाइपलाइन परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों की उम्मीदें बढ़ी हुई हैं। लोगों का कहना है कि यदि नई व्यवस्था के बाद पानी पहले की तुलना में तेजी से निकल रहा है तो यह राहत की बात है, लेकिन इसका वास्तविक आकलन तेज और लगातार बारिश के दौरान ही हो सकेगा।
जन्माष्टमी के दौरान मथुरा में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के कारण सामान्य दिनों की तुलना में शहर की व्यवस्थाओं पर कई गुना अधिक दबाव रहेगा। ऐसे में जल निकासी व्यवस्था को लगातार सक्रिय रखना जरूरी होगा।
नगर निगम के कर्मचारियों को जलभराव की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचने, पंप लगाने और पानी निकालने के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख मार्गों और अंडरपास पर भी निगरानी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
बारिश के बीच नगर आयुक्त का स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति देखना भी चर्चा का विषय रहा। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से सीधे मौके पर जानकारी ली और जल निकासी की गति को देखा।
इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि जलभराव की समस्या को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। जन्माष्टमी जैसे बड़े पर्व को देखते हुए निगम की टीमों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
भूतेश्वर अंडरपास के अलावा शहर के अन्य ऐसे क्षेत्रों पर भी निगरानी बढ़ाने की जरूरत है जहां तेज बारिश में पानी जमा होने की संभावना रहती है। नगर निगम के लिए जरूरी होगा कि ऐसे सभी स्थानों को पहले से चिन्हित कर वहां पंप, कर्मचारी और अन्य संसाधन उपलब्ध रखे जाएं।
इससे बारिश शुरू होने के बाद राहत कार्य शुरू करने में समय कम लगेगा और श्रद्धालुओं की आवाजाही भी कम प्रभावित होगी।
जलभराव की समस्या केवल बारिश के दौरान ही नहीं, बल्कि बारिश रुकने के बाद पानी कितनी देर में निकलता है, यह भी महत्वपूर्ण है। अंडरपास में जमा पानी लंबे समय तक रहने पर यातायात प्रभावित होता है और आसपास के क्षेत्रों में भी परेशानी बढ़ती है।
इसलिए नगर निगम की टीमों को बारिश थमने के बाद भी पानी के स्तर और निकासी की गति पर नजर रखने की जरूरत होगी।
बुधवार की बारिश ने जन्माष्टमी से पहले नगर निगम की जल निकासी व्यवस्था को एक तरह से ट्रायल का मौका दे दिया है। नई पाइपलाइन से पानी तेजी से निकलने का दावा किया जा रहा है, वहीं पंपों के जरिए अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था भी की गई है।
अब असली चुनौती जन्माष्टमी के दिन होगी, जब मथुरा-वृंदावन में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाएगी। यदि उस दौरान बारिश होती है तो जल निकासी के साथ यातायात व्यवस्था को भी एक साथ संभालना होगा।
नगर निगम के सामने फिलहाल लक्ष्य यही है कि शहर के प्रमुख मार्गों और अंडरपासों पर जलभराव अधिक समय तक न रहे और श्रद्धालुओं को आने-जाने में परेशानी न हो।
नगर आयुक्त ओजस्वी राज के मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करने और तत्काल पंप लगाकर पानी निकालने के निर्देश देने से नगर निगम की तैयारियों को गति मिली है। नई पाइपलाइन से जल निकासी पहले से तेज होने के दावे के बीच बुधवार की बारिश ने व्यवस्था की जमीनी स्थिति भी सामने रख दी है। अब जन्माष्टमी के दौरान होने वाली भारी भीड़ और संभावित बारिश के बीच नगर निगम की तैयारियों की वास्तविक परीक्षा होगी।


