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- 11h ago
मथुरा। दीवानी न्यायालय, मथुरा कर्मचारी संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक कचहरी परिसर में संघ के प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष रूप किशोर शर्मा ने की, जबकि आम सभा का संचालन संघ के सचिव रामनरेश शर्मा ने किया। बैठक में कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और सर्वसम्मति से उत्तर प्रदेश सरकार तथा माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष तेरह सूत्रीय मांगें रखने का निर्णय लिया गया।
बैठक में कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से उनकी विभिन्न मांगें शासन स्तर पर लंबित हैं। इन मांगों के समाधान के लिए अब संगठन के स्तर से प्रभावी तरीके से आवाज उठाई जाएगी। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान होना जरूरी है, जिससे न्यायालयों के प्रशासनिक कार्य सुचारु रूप से संचालित हो सकें।
कर्मचारियों ने जनपद न्यायालयों में समाप्त हो चुके वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी/प्रशासनिक अधिकारी के पद को पुनर्सृजित किए जाने की प्रमुख मांग उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि न्यायालयों में प्रशासनिक कार्यों का लगातार विस्तार हो रहा है, ऐसे में महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों की व्यवस्था मजबूत किया जाना आवश्यक है।
संघ ने मांग की कि पूर्व में मौजूद पदों को पुनः बहाल किया जाए, ताकि न्यायालयों के प्रशासनिक कामकाज को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके और कर्मचारियों को पदोन्नति के अवसर भी उपलब्ध हो सकें।
बैठक में फास्ट ट्रैक कोर्ट में कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि लंबे समय से न्यायिक व्यवस्था में सेवाएं दे रहे संविदा कर्मियों के भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।
कर्मचारियों ने नियमितीकरण के साथ-साथ उनके वेतन और सेवा संबंधी सुविधाओं में सुधार की मांग भी रखी।
संघ के अध्यक्ष रूप किशोर शर्मा ने बताया कि वर्ष 2021 और 2022 से लंबित जिला न्यायालय सेवा नियमावली में संशोधन का प्रख्यापन भी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में शामिल है।
उन्होंने कहा कि सेवा नियमों में समय के अनुसार आवश्यक बदलाव किए जाने जरूरी हैं। नियमावली में संशोधन से कर्मचारियों की सेवा संबंधी कई समस्याओं का समाधान हो सकता है और पदोन्नति सहित अन्य मामलों में भी स्पष्टता आएगी।
बैठक में न्यायालयों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के वेतन और सेवा सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया। संघ की ओर से त्वरित न्यायालयों के संविदा कर्मियों के वेतन में बढ़ोतरी और नियमितीकरण की मांग की गई।
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों से लंबे समय से सेवाएं ली जा रही हैं, इसलिए उनके वेतन और सेवा शर्तों पर भी सरकार को सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
कर्मचारियों ने अपने लिए आवासीय व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई। इसके अलावा वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मकान किराया भत्ता की दरों का पुनरीक्षण किए जाने पर भी जोर दिया गया।
कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और आवासीय खर्च को देखते हुए वर्तमान मकान किराया भत्ता पर्याप्त नहीं है। इसलिए इसकी दरों में समयानुकूल संशोधन किया जाना आवश्यक है।
बैठक में तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के लिए वर्दी भत्ता दिए जाने की मांग भी रखी गई। संघ का कहना है कि कर्मचारियों की कार्य प्रकृति और कार्यालयीन जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
इसके साथ ही कर्मचारियों की अन्य सेवा संबंधी समस्याओं को भी मांगपत्र में शामिल किया गया है।
संघ ने कर्मचारियों की प्रोन्नति से संबंधित नियमावली में आवश्यक संशोधन किए जाने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि पदोन्नति के अवसर समय पर मिलना कर्मचारियों के मनोबल और कार्यक्षमता के लिए महत्वपूर्ण है।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि पदोन्नति से संबंधित नियमों को स्पष्ट और व्यवहारिक बनाया जाना चाहिए, जिससे पात्र कर्मचारियों को समय पर उनका अधिकार मिल सके।
संघ अध्यक्ष ने बताया कि पूर्व वेतनमान में 4600 ग्रेड पे वाले कर्मचारियों को उसी विभाग में अन्य राजपत्रित प्रतिष्ठा प्रदान किए जाने की मांग भी शासन के समक्ष रखी जाएगी।
इस मांग को कर्मचारियों की सेवा स्थिति और पद की गरिमा से जोड़कर देखा जा रहा है। संघ का कहना है कि इस विषय में लंबे समय से विचार-विमर्श की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
संघ अध्यक्ष रूप किशोर शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों से जुड़ी कई मांगें शासन स्तर पर काफी समय से लंबित हैं। संगठन की कोशिश है कि इन सभी मुद्दों को एकजुट होकर सरकार और उच्च न्यायालय के समक्ष रखा जाए।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान होने से न्यायालयों के कामकाज में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। न्यायालय प्रशासन को मजबूत करने के लिए कर्मचारियों की सेवा शर्तों और सुविधाओं में सुधार आवश्यक है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 13 सितंबर 2026 को जनपद न्यायालय संघ मथुरा का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपेगा।
ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों की तेरह सूत्रीय मांगों को शासन के समक्ष रखा जाएगा। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि मांगों के समाधान के लिए संगठन लोकतांत्रिक एवं निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी बात सरकार तक पहुंचाएगा।
प्रतिनिधिमंडल शासन से मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द निर्णय लिए जाने का अनुरोध करेगा।
बैठक के दौरान कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर एकजुटता दिखाई। पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन का उद्देश्य कर्मचारियों के हितों से जुड़े मामलों को उचित मंच पर उठाना और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करना है।
बैठक में यह भी जोर दिया गया कि कर्मचारियों की समस्याओं को व्यक्तिगत स्तर के बजाय संगठनात्मक स्तर पर मजबूती से उठाया जाए, ताकि शासन और उच्च न्यायालय के समक्ष उनकी मांगों को प्रभावी तरीके से रखा जा सके।
कर्मचारी संघ की ओर से रखी जाने वाली प्रमुख मांगों में—
बैठक के अंत में संघ पदाधिकारियों ने कहा कि 13 सूत्रीय मांगों को लेकर आगे की कार्रवाई निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार की जाएगी और कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों को संबंधित स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा।
बैठक में जिला शाखा संरक्षक एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी चंद्र प्रकाश शर्मा, चंद्रहंस दीक्षित, हरेकृष्ण, बबलू, बन्टी सिंह, यशु पचौरी, यशपाल सिंह, मनीष कुमार सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
मथुरा-रिपोटर, (पीयूष पुरोहित)।


