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- 10h ago
मथुरा। लंबे समय से बंद पड़ी छाता चीनी मिल परिसर को एक बार फिर औद्योगिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में छाता चीनी मिल परिसर में ड्यूल-मोड एथेनॉल प्लांट स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई है। इस परियोजना को छाता क्षेत्र के औद्योगिक विकास के साथ-साथ गन्ना किसानों, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब छाता चीनी मिल परिसर में प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट को स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है। लंबे समय से बंद पड़े मिल परिसर का औद्योगिक उपयोग होने से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को नया आधार मिलने की संभावना जताई जा रही है।
प्रस्तावित ड्यूल-मोड एथेनॉल प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता करीब 3.96 करोड़ लीटर बताई गई है। प्लांट को लगभग 11 महीने तक संचालित करने की योजना है। ड्यूल-मोड तकनीक की खासियत यह होगी कि प्लांट केवल गन्ने पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि अलग-अलग मौसम में उपलब्ध कच्चे माल के आधार पर उत्पादन जारी रखा जा सकेगा।
गन्ने के पेराई सत्र के दौरान गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन के लिए किया जाएगा। वहीं ऑफ सीजन में मक्का और धान जैसे अनाजों को कच्चे माल के रूप में उपयोग किए जाने की योजना है। इससे प्लांट को साल के अधिक समय तक संचालित रखने की संभावना बनेगी और किसी एक फसल के पेराई अथवा उपलब्धता चक्र पर निर्भरता कम हो सकेगी।
छाता और आसपास के क्षेत्रों में गन्ने की खेती बड़ी संख्या में किसान करते हैं। ऐसे में चीनी मिल परिसर में एथेनॉल उत्पादन शुरू होने से स्थानीय स्तर पर गन्ने की खपत का एक अतिरिक्त औद्योगिक आधार तैयार हो सकता है। परियोजना के संचालन के साथ गन्ने से जुड़े किसानों, परिवहन क्षेत्र और अन्य संबंधित गतिविधियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
मिल परिसर के दोबारा औद्योगिक उपयोग में आने से क्षेत्र में कृषि और उद्योग के बीच संबंध मजबूत होने की उम्मीद है। गन्ने के अलावा ऑफ सीजन में मक्का और धान जैसे कच्चे माल के इस्तेमाल की व्यवस्था होने से आसपास के कृषि क्षेत्र को भी नए बाजार से जोड़ने की संभावना बनेगी।
परियोजना में को-जनरेशन बिजली संयंत्र स्थापित करने की योजना भी शामिल है। को-जनरेशन व्यवस्था के माध्यम से प्लांट की ऊर्जा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है। इससे परियोजना के संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने के साथ-साथ ऊर्जा उपयोग की दक्षता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
बिजली संयंत्र और एथेनॉल उत्पादन इकाई के साथ मिल परिसर में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार होने की संभावना है। इससे लंबे समय से निष्क्रिय पड़े परिसर का उपयोग भी हो सकेगा।
एथेनॉल प्लांट के निर्माण और संचालन से छाता क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। प्लांट के संचालन के लिए तकनीकी कर्मचारियों, श्रमिकों, सुरक्षा कर्मियों और अन्य मानव संसाधन की आवश्यकता होगी। इसके अलावा कच्चे माल की ढुलाई, परिवहन, रखरखाव और अन्य सहायक गतिविधियों से भी स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
परियोजना से जुड़े औद्योगिक कार्यों के बढ़ने पर स्थानीय बाजार में भी आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि की संभावना है। इससे आसपास के छोटे व्यापार और सेवा क्षेत्र को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है।
छाता चीनी मिल के लंबे समय से बंद रहने के कारण मिल परिसर का औद्योगिक उपयोग सीमित हो गया था। अब उसी परिसर में एथेनॉल प्लांट स्थापित करने की योजना से इसे नई औद्योगिक भूमिका मिलने की संभावना है।
परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद बंद पड़े परिसर में गतिविधियां शुरू होने की उम्मीद बढ़ी है। इससे क्षेत्र के लोगों में भी औद्योगिक गतिविधियों को लेकर उम्मीद जगी है। हालांकि परियोजना के वास्तविक संचालन और रोजगार के अवसरों का आकार आगे की कार्यवाही, निर्माण और संचालन शुरू होने के बाद स्पष्ट होगा।
छाता क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भी परियोजना के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। क्षेत्र नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अपेक्षाकृत निकट है। एयरपोर्ट के आसपास भविष्य में परिवहन, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाओं को देखते हुए छाता क्षेत्र के लिए भी नए अवसर बन सकते हैं।
एथेनॉल प्लांट जैसी औद्योगिक परियोजना के साथ क्षेत्र में आधारभूत ढांचे और परिवहन से जुड़ी गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव परियोजना के संचालन और क्षेत्र में होने वाले अन्य औद्योगिक निवेश के साथ आगे चलकर स्पष्ट होगा।
परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका ड्यूल-मोड स्वरूप है। सामान्य तौर पर गन्ना आधारित इकाइयों का संचालन पेराई सत्र से काफी हद तक जुड़ा रहता है। लेकिन प्रस्तावित प्लांट में गन्ने के अलावा मक्का और धान का उपयोग करने की योजना होने से ऑफ सीजन में भी उत्पादन जारी रखने की संभावना रहेगी।
इस व्यवस्था से प्लांट की उत्पादन क्षमता का लंबे समय तक उपयोग किया जा सकेगा। करीब 11 महीने संचालन की प्रस्तावित योजना इसी उद्देश्य से जुड़ी हुई है। इससे प्लांट के लिए निरंतर औद्योगिक गतिविधि बनाए रखने का प्रयास किया जा सकेगा।
एथेनॉल प्लांट के शुरू होने से केवल मिल परिसर तक ही गतिविधियां सीमित रहने की संभावना नहीं है। इसके लिए कच्चे माल की आपूर्ति, परिवहन, श्रमिकों, मशीनरी के रखरखाव, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और अन्य सेवाओं की जरूरत होगी। इन गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ सकता है।
गन्ने के पेराई सत्र में किसानों से कच्चा माल प्राप्त करने तथा ऑफ सीजन में मक्का और धान का उपयोग करने से कृषि आधारित आपूर्ति श्रृंखला को भी नया बाजार मिल सकता है।
कैबिनेट से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब परियोजना को धरातल पर उतारने से जुड़ी आगामी प्रक्रियाएं आगे बढ़ेंगी। इसमें परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना, आवश्यक औपचारिकताएं, निर्माण और अन्य तकनीकी प्रक्रियाएं शामिल होंगी। प्लांट के वास्तविक संचालन की समयसीमा आगामी प्रक्रिया के आधार पर स्पष्ट होगी।
सरकार की मंजूरी के बाद अब क्षेत्र की नजर परियोजना के अगले चरण पर रहेगी। स्थानीय लोगों के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे लंबे समय से बंद पड़े औद्योगिक परिसर के दोबारा उपयोग की संभावना बनी है।
छाता चीनी मिल परिसर में प्रस्तावित ड्यूल-मोड एथेनॉल प्लांट को केवल एक औद्योगिक परियोजना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। गन्ना, मक्का और धान जैसे कृषि उत्पादों के उपयोग से यह परियोजना कृषि क्षेत्र को उद्योग से जोड़ने का माध्यम भी बन सकती है।
इसके साथ ही रोजगार, परिवहन, स्थानीय कारोबार और अन्य सहायक गतिविधियों में संभावित वृद्धि से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि परियोजना के प्रभाव का वास्तविक आकलन इसके निर्माण और संचालन शुरू होने के बाद ही किया जा सकेगा।
कैबिनेट की मंजूरी के साथ छाता चीनी मिल परिसर को एक नई औद्योगिक पहचान देने की दिशा में कदम आगे बढ़ा है। अब परियोजना की आगामी प्रक्रिया और उसके धरातल पर उतरने का इंतजार है। यदि प्रस्तावित योजना के अनुसार प्लांट स्थापित होकर लगभग 11 महीने संचालित होता है, तो बंद पड़े मिल परिसर का उपयोग दोबारा शुरू होने के साथ छाता क्षेत्र में कृषि आधारित औद्योगिक गतिविधियों को भी नया आधार मिल सकता है।


