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- 11h ago
मथुरा। दिल्ली की स्लीपर बस में नाबालिग छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म की घटना के विरोध में सोमवार को लोकतांत्रिक युवा जनसंघ पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मथुरा में प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने घटना पर आक्रोश जताते हुए पीड़िता को न्याय दिलाने और मामले में शामिल आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के बाद पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया।
ज्ञापन के माध्यम से पार्टी ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने की मांग की। पदाधिकारियों का कहना था कि नाबालिग से संबंधित मामले में जांच के दौरान सभी पहलुओं को गंभीरता से देखा जाना चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जांच निर्धारित समय सीमा में पूरी कर दोष सिद्ध होने पर आरोपियों के खिलाफ कानून के तहत कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि घटना के बाद पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने ज्ञापन में मांग की कि पीड़िता और उसके परिजनों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे बिना किसी भय या दबाव के कानूनी प्रक्रिया में अपना पक्ष रख सकें।
उन्होंने यह भी मांग की कि पीड़िता को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श और विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। पदाधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार की घटना का प्रभाव केवल शारीरिक स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पीड़ित के मानसिक स्वास्थ्य और पूरे परिवार पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में पीड़िता को आवश्यक उपचार और विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।
संगठन ने शासन की ओर से निर्धारित आर्थिक सहायता भी पीड़िता और उसके परिवार को शीघ्र उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि घटना के बाद परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं के साथ अपराध की घटनाओं को किसी भी स्थिति में सामान्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने मामले में दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की।
पदाधिकारियों ने कहा कि कानून का प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब अपराध की जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो और दोष सिद्ध होने पर अदालत के समक्ष प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले की निगरानी गंभीरता से करने की अपील की।
पार्टी ने सार्वजनिक परिवहन और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किए जाने की मांग भी उठाई। पदाधिकारियों का कहना था कि बसों में यात्रा करने वाली महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था होना आवश्यक है।
उन्होंने मांग की कि स्लीपर बसों सहित सार्वजनिक परिवहन के साधनों में सुरक्षा मानकों का प्रभावी ढंग से पालन कराया जाए। इसके साथ ही बस संचालन से जुड़े कर्मचारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी नियमानुसार निगरानी की जाए।
ज्ञापन में बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, बाजारों, पार्कों, शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और पर्यटन स्थलों जैसे सार्वजनिक एवं भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की गई।
पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि इन स्थानों पर बड़ी संख्या में महिलाएं, छात्राएं और बच्चे आते-जाते हैं। ऐसे में पर्याप्त सुरक्षा बल की तैनाती और नियमित पुलिस गश्त से असामाजिक तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।
उन्होंने संवेदनशील स्थानों पर प्रभावी सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की। उनका कहना था कि सीसीटीवी कैमरों की केवल स्थापना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित निगरानी और रिकॉर्डिंग की व्यवस्था भी प्रभावी होनी चाहिए।
संगठन ने शिक्षण संस्थानों और पर्यटन स्थलों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था विकसित किए जाने पर जोर दिया। पदाधिकारियों का कहना था कि छात्राओं की सुरक्षा के लिए स्कूल-कॉलेजों के आसपास नियमित पुलिस गश्त होनी चाहिए।
इसी प्रकार पर्यटन स्थलों पर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को देखते हुए पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी आवश्यक है। पार्टी ने ऐसे स्थानों को चिन्हित कर सुरक्षा की नियमित समीक्षा किए जाने की मांग की।
पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा केवल किसी घटना के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अपराध की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पहले से प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि पुलिस, प्रशासन, परिवहन विभाग और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां नियमित निगरानी, पुलिस गश्त और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
पार्टी ने महिलाओं और बालिकाओं को उपलब्ध सुरक्षा सेवाओं एवं कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। पदाधिकारियों ने कहा कि स्कूल-कॉलेजों और सार्वजनिक संस्थानों में समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि छात्राएं किसी भी अप्रिय स्थिति में तत्काल सहायता प्राप्त कर सकें।
उन्होंने आपात स्थिति में पुलिस और अन्य सहायता सेवाओं तक त्वरित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित किए जाने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि महिलाओं और नाबालिग बालिकाओं की सुरक्षा सरकार और समाज दोनों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना में पीड़िता को न्याय दिलाने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
पार्टी की ओर से जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में पीड़िता की सुरक्षा, परिवार को सहायता, निःशुल्क चिकित्सा सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श, विधिक सहायता, आर्थिक सहायता और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सहित सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई।
पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि शासन और प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़िता को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएगा तथा जांच प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। फिलहाल पार्टी की ओर से सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से विभिन्न मांगें प्रशासन और केंद्र सरकार तक पहुंचाई गई हैं। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया के आधार पर स्पष्ट होगी।


