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- 11h ago
मथुरा। अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में साहस, सूझबूझ और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने वाले उपनिरीक्षक अजय वर्मा को उनकी वीरतापूर्ण कार्रवाई के लिए वीरता पदक से सम्मानित किया गया। मंगलवार को डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय ने गोविंद नगर थाना प्रभारी उपनिरीक्षक अजय वर्मा को मुख्यमंत्री की ओर से प्रदान किया गया वीरता पदक सौंपकर सम्मानित किया। इस दौरान अधिकारियों ने उनकी साहसिक कार्रवाई की सराहना करते हुए इसे पुलिस विभाग के लिए गौरव का विषय बताया।
उपनिरीक्षक अजय वर्मा उस पुलिस टीम का हिस्सा रहे थे, जिसने 10 मई 2025 को हाईवे क्षेत्र में एक लाख रुपये के इनामी कुख्यात बदमाश फाती उर्फ असद के साथ हुई मुठभेड़ में साहसिक कार्रवाई करते हुए उसे ढेर किया था। पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान टीम के सामने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां थीं। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने बिना पीछे हटे मोर्चा संभाला और बदमाश का मुकाबला किया।
10 मई 2025 की कार्रवाई पुलिस टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी गई थी। एक लाख रुपये के इनामी बदमाश की तलाश में पुलिस लगातार प्रयास कर रही थी। हाईवे क्षेत्र में बदमाश के होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने घेराबंदी की। आमना-सामना होने पर स्थिति मुठभेड़ में बदल गई। पुलिस टीम ने परिस्थितियों का आकलन करते हुए मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई की।
इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक अजय वर्मा की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। मुठभेड़ के दौरान उन्होंने जिस तरह साहस और संयम का परिचय दिया, उसे देखते हुए उनके नाम की वीरता पदक के लिए संस्तुति की गई। पुलिस विभाग की ओर से उनकी कार्रवाई को कर्तव्य के प्रति समर्पण, साहस और सूझबूझ का उदाहरण माना गया।
वीरता पदक प्रदान करते हुए डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय ने उपनिरीक्षक अजय वर्मा के साहसिक कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराधियों के खिलाफ चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावी कार्रवाई करना भी पुलिस के कर्तव्यों का अहम हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि अजय वर्मा ने जिस साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया, वह पुलिस विभाग के अन्य जवानों के लिए भी प्रेरणादायी है। ऐसे पुलिसकर्मियों के प्रयासों से विभाग का मनोबल बढ़ता है और जवानों में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी पूरी जिम्मेदारी के साथ ड्यूटी निभाने का उत्साह पैदा होता है।
वीरता पदक मिलने की जानकारी के बाद पुलिस विभाग में खुशी का माहौल रहा। अधिकारियों और साथी पुलिसकर्मियों ने उपनिरीक्षक अजय वर्मा को बधाई दी। सहकर्मियों ने उनकी बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी निभाने वाले पुलिसकर्मियों को मिलने वाला ऐसा सम्मान पूरे विभाग के लिए गौरव की बात है।
साथी पुलिसकर्मियों ने कहा कि पुलिस की नौकरी में कई बार ऐसे हालात सामने आते हैं, जहां कुछ ही सेकेंड में निर्णय लेना पड़ता है। अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों को अपनी सुरक्षा के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना होता है। ऐसे में साहस के साथ सही निर्णय लेने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होती है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि वीरता पदक जैसे सम्मान से न केवल सम्मानित पुलिसकर्मी का उत्साह बढ़ता है, बल्कि पूरे पुलिस बल का मनोबल मजबूत होता है। अपराधियों के खिलाफ अभियान में जुटे पुलिसकर्मियों को यह भरोसा मिलता है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किए गए उनके साहसिक कार्यों को विभाग और शासन स्तर पर पहचान और सम्मान दिया जाता है।
अजय वर्मा को मिला यह सम्मान भी इसी कड़ी में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस विभाग में इसे एक ऐसे अधिकारी के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है, जिसने ड्यूटी के दौरान सामने आई चुनौती का डटकर सामना किया और अपराधी के खिलाफ कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वर्तमान में उपनिरीक्षक अजय वर्मा गोविंद नगर थाना प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। थाना प्रभारी के रूप में उनकी भूमिका कानून व्यवस्था बनाए रखने, अपराध पर नियंत्रण, फरियादियों की समस्याओं के समाधान और क्षेत्र में पुलिस की सक्रियता बनाए रखने से जुड़ी है।
वीरता पदक मिलने के बाद उनकी जिम्मेदारी और अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं। पुलिस अधिकारियों और सहकर्मियों ने उम्मीद जताई कि वह भविष्य में भी इसी तरह पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे।
पुलिस सेवा में कई बार जवानों और अधिकारियों को ऐसे हालात का सामना करना पड़ता है, जहां सामान्य परिस्थितियों से बिल्कुल अलग तरीके से काम करना पड़ता है। अपराधियों से मुठभेड़ के दौरान जोखिम काफी बढ़ जाता है। ऐसे समय में पुलिसकर्मी का साहस, प्रशिक्षण, निर्णय लेने की क्षमता और टीम के साथ तालमेल कार्रवाई की दिशा तय करता है।
अजय वर्मा को वीरता पदक मिलना इस बात का प्रमाण है कि 10 मई 2025 की कार्रवाई में उनके योगदान और साहस को उच्च स्तर पर महत्व दिया गया। एक लाख रुपये के इनामी बदमाश फाती उर्फ असद के खिलाफ हुई कार्रवाई में टीम के साथ मिलकर निभाई गई भूमिका के लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया है।
डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय द्वारा मुख्यमंत्री की ओर से वीरता पदक प्रदान किए जाने के बाद पुलिस अधिकारियों ने अजय वर्मा को शुभकामनाएं दीं। अधिकारियों ने कहा कि पुलिस बल में ऐसे सम्मान जवानों और अधिकारियों को बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं।
साथ ही, साथी पुलिसकर्मियों ने कहा कि यह सम्मान केवल एक अधिकारी का सम्मान नहीं है, बल्कि उन सभी पुलिसकर्मियों के लिए प्रेरणा है, जो दिन-रात कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।
वीरता पदक किसी भी पुलिसकर्मी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है। अजय वर्मा के लिए भी यह सम्मान उनके पुलिस सेवा के सफर में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। उनके साहसिक कार्य को शासन स्तर पर पहचान मिलना उनके परिवार और सहकर्मियों के लिए भी गर्व का विषय है।
पुलिस विभाग में चर्चा रही कि ऐसे सम्मान से न केवल संबंधित अधिकारी को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि अन्य पुलिसकर्मियों को भी अपने कर्तव्यों को और अधिक जिम्मेदारी, निष्ठा और साहस के साथ निभाने की प्रेरणा मिलती है। कुल मिलाकर, 10 मई 2025 की मुठभेड़ में साहसिक भूमिका निभाने वाले उपनिरीक्षक अजय वर्मा को मिला वीरता पदक मथुरा पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सम्मान है। डीआईजी द्वारा मुख्यमंत्री की ओर से प्रदान किए गए इस पदक ने पुलिस विभाग के उस जज्बे को सम्मान दिया है, जिसमें जवान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण के लिए मोर्चे पर डटे रहते हैं।


