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- 13h ago
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में धरना-प्रदर्शन करने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाते हुए प्रदर्शन और विरोध कार्यक्रमों के लिए तीन नए स्थान निर्धारित किए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड शामिल हैं। यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। <Cite refs={["turn754374search11","turn754374search12"]}/>
दिल्ली पुलिस के नए स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर L&O/48/2026 के तहत यह बदलाव किया गया है। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि गृह मंत्रालय ने नागरिकों के प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के लिए वैकल्पिक स्थानों की समीक्षा करने हेतु एक समिति गठित की थी। समिति की सिफारिशों के बाद जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के दर्जे से हटा दिया गया है।
दिल्ली पुलिस के नए आदेश के अनुसार, राजधानी में प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन स्थान निर्धारित किए गए हैं।
1. रामलीला मैदान: दिल्ली का प्रमुख सार्वजनिक मैदान, जहां पहले भी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम, रैलियां और जनसभाएं आयोजित होती रही हैं।
2. बुराड़ी मैदान: राजधानी के बुराड़ी क्षेत्र में स्थित यह मैदान बड़े जमावड़े और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए वैकल्पिक स्थल के रूप में निर्धारित किया गया है।
3. सीबीडी ग्राउंड, पूर्वी दिल्ली: पूर्वी दिल्ली में स्थित इस मैदान को भी धरना-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए नए निर्धारित स्थलों में शामिल किया गया है।
इन तीनों स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए विस्तृत नियम और नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग से जारी की जाएगी। इसलिए आयोजकों को अनुमति, समय, भीड़ प्रबंधन और अन्य शर्तों से संबंधित अंतिम निर्देशों का इंतजार करना होगा। <Cite refs={["turn754374search0","turn754374search9"]}/>
दिल्ली पुलिस का नया आदेश 28 अप्रैल 2022 को जारी स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर L&O/48/22 में आंशिक संशोधन करता है। नए निर्देशों के तहत जंतर-मंतर अब आधिकारिक रूप से निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं रहेगा और उसकी जगह तीन वैकल्पिक स्थानों को नामित किया गया है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। बदलाव मुख्य रूप से उन स्थानों से संबंधित है, जिन्हें प्रदर्शन आयोजित करने के लिए आधिकारिक तौर पर निर्धारित किया गया है। शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के संवैधानिक अधिकार और निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शन करने की प्रशासनिक प्रक्रिया अलग-अलग विषय हैं। <Cite refs={["turn754374search9","turn754374search11"]}/>
दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से देश के प्रमुख विरोध-प्रदर्शन स्थलों में गिना जाता रहा है। संसद और केंद्र सरकार के कार्यालयों के नजदीक स्थित होने के कारण राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, कर्मचारियों, किसानों, छात्रों और विभिन्न जन आंदोलनों के लिए यह एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
भ्रष्टाचार, महंगाई, रोजगार, किसानों की समस्याओं, पेंशन, महिला सुरक्षा और चुनाव सुधार जैसे अनेक मुद्दों पर यहां धरने और प्रदर्शन आयोजित किए गए। वर्ष 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने भी जंतर-मंतर को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई।
जंतर-मंतर से जुड़े प्रदर्शनों ने कई बार राष्ट्रीय राजनीति और सार्वजनिक विमर्श का ध्यान अपनी ओर खींचा। ऐसे में इस स्थल को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का फैसला महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
दिल्ली पुलिस के आदेश के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय की समिति को नागरिकों के प्रदर्शन आयोजित करने के लिए वैकल्पिक और उपयुक्त स्थानों की पहचान करने का काम सौंपा गया था। समिति की सिफारिशों के आधार पर नए स्थलों को निर्धारित किया गया।
हालांकि, उपलब्ध आदेश में उन विशिष्ट कारणों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है, जिनके आधार पर जंतर-मंतर को हटाकर इन तीन स्थानों का चयन किया गया। इसलिए इस फैसले के पीछे किसी विशेष सुरक्षा घटना या राजनीतिक उद्देश्य को निश्चित कारण बताना उचित नहीं होगा।
नई व्यवस्था के व्यावहारिक प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेंगे कि प्रस्तावित SOP में अनुमति लेने, प्रदर्शनकारियों की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और कार्यक्रम के समय को लेकर क्या नियम बनाए जाते हैं।
जंतर-मंतर मध्य दिल्ली में स्थित होने के कारण राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्रों के नजदीक प्रदर्शन करने के लिए जाना जाता था। अब प्रदर्शनकारियों को नए निर्धारित स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित करने की व्यवस्था अपनानी होगी।
इस बदलाव से आयोजकों को अपने कार्यक्रमों की योजना, प्रतिभागियों की आवाजाही और संबंधित प्रशासनिक अनुमति की प्रक्रिया पर नए सिरे से ध्यान देना पड़ सकता है। विशेष रूप से बड़े संगठनों और देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले प्रदर्शनकारियों के लिए आयोजन स्थल तक पहुंचना और व्यवस्थाएं करना महत्वपूर्ण होगा।
नई SOP जारी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि तीनों स्थलों पर प्रदर्शन के लिए आवेदन कैसे करना होगा, किन शर्तों का पालन करना पड़ेगा और अलग-अलग प्रकार के आयोजनों के लिए क्या व्यवस्थाएं लागू होंगी।
दिल्ली पुलिस के नए आदेश ने राजधानी में धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों की व्यवस्था बदल दी है। जंतर-मंतर की जगह रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को नए प्रदर्शन स्थलों के रूप में नामित किया गया है।
अब इन स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए विस्तृत SOP जारी होने का इंतजार है। इसके बाद ही नई व्यवस्था की व्यावहारिक शर्तों और प्रदर्शन आयोजकों पर पड़ने वाले प्रभाव की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
जंतर-मंतर का ऐतिहासिक महत्व और देश के जन आंदोलनों से उसका जुड़ाव देखते हुए यह बदलाव आने वाले समय में नागरिक अधिकारों, सार्वजनिक व्यवस्था और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए उपयुक्त स्थानों को लेकर चर्चा का विषय बना रह सकता है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


