यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 13h ago
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने इंडिया ब्लॉक के नेताओं से मुलाकात नहीं करने को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं की ओर से मुलाकात का अनुरोध करने वाला पत्र उन्हें मिला था और उन्होंने रविवार रात ही इसका जवाब दे दिया था। सीजेआई ने कहा कि उन्होंने अपने जवाब में उन कारणों का उल्लेख किया है, जिनकी वजह से वह विपक्षी नेताओं से मुलाकात नहीं कर सकते।
मुख्य न्यायाधीश ने इस दौरान न्यायपालिका तक आम नागरिकों की पहुंच को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं और प्रत्येक भारतीय नागरिक को कानून के अनुसार अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है। उन्होंने विपक्ष के प्रस्तावित मार्च को लेकर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के अन्य नेताओं ने कथित चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे पर मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करने की मांग की थी। विपक्षी नेताओं का कहना था कि वे अपने सवालों और मांगों को लेकर सीजेआई को ज्ञापन सौंपना चाहते हैं।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें विपक्षी नेताओं की ओर से मुलाकात का अनुरोध प्राप्त हुआ था। उन्होंने बताया कि रविवार रात ही इस पत्र का जवाब भेज दिया गया था और उसमें मुलाकात नहीं कर पाने के कारण स्पष्ट किए गए थे।
सीजेआई ने कहा, "मुझे मीटिंग के अनुरोध के बारे में एक पत्र मिला था और मैंने कल रात ही उसका जवाब दे दिया था, जिसमें उन कारणों का जिक्र किया गया था जिनकी वजह से मैं मिल नहीं पाऊंगा।"
उनके इस बयान से स्पष्ट हुआ कि विपक्षी नेताओं के अनुरोध पर जवाब दिया जा चुका था। हालांकि, उन्होंने पत्रकारों के सामने अपने जवाब के सभी बिंदुओं का विस्तार से उल्लेख नहीं किया।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में किसी भी आम नागरिक या निर्वाचित निकाय के सदस्य की ओर से दायर की गई याचिका पर कानून के अनुसार विचार किया जा सकता है। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से अपनी बात रखने के अधिकार पर जोर दिया।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। किसी भी आम नागरिक या चुने हुए निकाय के सदस्य की याचिका का स्वागत है। हर भारतीय नागरिक को कोर्ट जाने का अधिकार है, और हम उनकी बात सुनेंगे और कानून के तहत जो भी उचित होगा, वह करेंगे।"
उनके इस बयान को विपक्ष की ओर से उठाए गए मुद्दों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीजेआई ने मुलाकात के बजाय अदालत की स्थापित प्रक्रिया के माध्यम से अपनी बात रखने के विकल्प पर जोर दिया।
इसका अर्थ यह है कि किसी मुद्दे पर न्यायिक राहत चाहने वाले पक्ष को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अदालत में याचिका दाखिल करनी होती है। याचिका पर सुनवाई होगी या नहीं और उसमें उठाए गए सवालों पर क्या आदेश दिया जाएगा, इसका निर्णय लागू कानून और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी समेत इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात के लिए समय मांगा था। विपक्षी नेताओं का उद्देश्य कथित चुनावी अनियमितताओं और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताओं को सामने रखना था।
विपक्ष ने 'वोट चोरी' के आरोपों को उठाते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। इसके साथ ही मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने की बात भी कही थी। हालांकि, ये विपक्ष की ओर से उठाए गए राजनीतिक आरोप और मांगें हैं। उनकी सत्यता और उनसे संबंधित कानूनी सवालों का निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों तथा संबंधित संस्थाओं के पक्ष के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
विपक्षी नेताओं के अनुरोध को अस्वीकार किए जाने के संबंध में सामने आई जानकारी के अनुसार, सीजेआई की ओर से कहा गया कि जिन मुद्दों को उठाया जा रहा है, वे पहले से विचाराधीन मामले से संबंधित हैं। ऐसे में इन विषयों पर अदालत के समक्ष उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से बात रखी जानी चाहिए।
सूत्रों के हवाले से बताया गया कि विपक्षी नेताओं को ईमेल के माध्यम से जवाब भेजा गया था। इसमें कथित तौर पर यह स्पष्ट किया गया कि उठाए गए मुद्दों पर विचार करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन सौंपने के बजाय न्यायिक कार्यवाही का रास्ता अधिक उपयुक्त होगा।
इस घटनाक्रम में महत्वपूर्ण अंतर यह है कि मुख्य न्यायाधीश से व्यक्तिगत मुलाकात का अनुरोध और अदालत में विधिवत याचिका दाखिल करना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। किसी पक्ष को मुलाकात का समय नहीं मिलने का अर्थ यह नहीं है कि वह कानून के अनुसार अदालत में अपना पक्ष रखने का अधिकार खो देता है।
सीजेआई से मुलाकात का अनुरोध ऐसे समय किया गया था, जब इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की योजना बनाई थी। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाने और ज्ञापन सौंपने की बात कही थी।
राहुल गांधी ने इससे पहले कहा था कि विपक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान से जुड़े सवालों पर पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार और चुनाव आयोग से संबंधित मुद्दों पर जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
विपक्षी नेताओं ने नागरिकों से भी मार्च में शामिल होने की अपील की थी। इस दौरान पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में मार्च के उद्देश्य, उसके राजनीतिक स्वरूप या विपक्ष की मांगों के गुण-दोष पर कोई प्रत्यक्ष टिप्पणी नहीं की। उन्होंने मुख्य रूप से मुलाकात के अनुरोध का जवाब देने और अदालत तक नागरिकों की पहुंच के अधिकार पर बात की।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब ध्यान विपक्ष की ओर से अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रिया और संबंधित मुद्दों पर अदालत के समक्ष रखे जाने वाले तथ्यों पर रहेगा।
विपक्षी दलों की ओर से उठाए गए सवालों में कथित वोट चोरी, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका जैसे विषय शामिल हैं। इन मुद्दों पर अदालत में क्या दलीलें दी जाएंगी और संबंधित पक्षों का क्या जवाब होगा, यह आगे की कार्यवाही से स्पष्ट होगा।
यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि किसी राजनीतिक दल की ओर से लगाए गए आरोप अपने आप में न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं होते। इसी तरह, मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया जाना भी अपने आप में आरोपों की सत्यता या असत्यता का फैसला नहीं है।
जस्टिस सूर्यकांत के बयान का मुख्य संदेश यह है कि सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सभी भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध है, लेकिन न्यायिक मुद्दों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से उठाया जाना चाहिए।
विपक्षी नेताओं के मुलाकात अनुरोध पर जवाब देते हुए उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट की और अदालत में याचिका दाखिल करने के रास्ते पर जोर दिया। दूसरी ओर, इंडिया ब्लॉक चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों को उठाने पर कायम है।
अब इस मामले में आगे की दिशा विपक्ष की कानूनी कार्रवाई, संबंधित पक्षों के जवाब और न्यायालय के समक्ष रखे जाने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


