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- 13h ago
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। इंडिया ब्लॉक के प्रस्तावित मार्च से पहले इंदिरा भवन में कार्यकर्ताओं और लोगों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय मुख्य चुनाव आयुक्त को बचाने में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि देश की जनता, संविधान और लोकतंत्र के भविष्य की लड़ाई है।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए कहा कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और वोट चोरी के आरोपों को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। उनके मुताबिक, इन सवालों का जवाब देना सरकार और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने दावा किया कि सरकार इस आंदोलन को रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन विपक्ष पीछे हटने वाला नहीं है।
राहुल गांधी ने दिल्ली में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राजधानी को किले में तब्दील कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती और प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर कथित रोक से सरकार की चिंता सामने आ रही है।
राहुल गांधी के अनुसार, दिल्ली में 20 से 30 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। उन्होंने दावा किया कि लोगों को दिल्ली पहुंचने से रोका जा रहा है और बसों तथा ट्रेनों से यात्रियों को उतारे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने वाले लोगों को रोकने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस नेता ने पुलिसकर्मियों को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के करीब 50 प्रतिशत कर्मचारी उनकी बातों से सहमत हैं और निजी तौर पर मानते हैं कि विपक्ष जो सवाल उठा रहा है, वे उचित हैं। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों को युवाओं के खिलाफ बल प्रयोग करने के आदेश दिए जा रहे हैं, जबकि कई पुलिसकर्मी ऐसा नहीं करना चाहते।
हालांकि, पुलिसकर्मियों के समर्थन और उनकी कथित सहमति से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि प्रस्तुत नहीं की गई।
अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने एक और महत्वपूर्ण दावा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के लगभग 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और उन्हें अंदरूनी जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार के अधिकारी उनसे संपर्क कर रहे हैं और उन्हें विभिन्न मामलों से संबंधित जानकारियां दे रहे हैं। उन्होंने इस दावे को अपने आरोपों के समर्थन में पेश किया, लेकिन अधिकारियों की पहचान, उनके पदों या कथित तौर पर दी जा रही जानकारी के बारे में कोई विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस दावे को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है। हालांकि, अधिकारियों की संख्या और उनके संपर्क में होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने आना अभी बाकी है।
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए उनके इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए और संबंधित पदों पर बैठे लोगों को अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए।
राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्ष उन मुद्दों को उठा रहा है, जिन पर पहले भी चुनाव आयोग के भीतर सवाल उठाए जाने की बात कही गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सवालों को गंभीरता से लेने के बजाय उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने अपने बयान में कहा, "ज्ञानेश कुमार, आपकी नींद उड़ गई है। हम आपको बख्शेंगे नहीं। हमें आपके अतीत और आपके भ्रष्टाचार के बारे में पता है।"
राहुल गांधी के इन आरोपों को उनके राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों के समर्थन में इस संबोधन के दौरान कोई विस्तृत सार्वजनिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने एक और चौंकाने वाला दावा किया। पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की है। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें ज्ञानेश कुमार के संदेश आते हैं और वह उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी देख रहे हैं।
जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि उन्होंने उन संदेशों का क्या जवाब दिया, तो राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को गवाह बन जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने गलती की है और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर रास्ते से हट जाना चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार अपनी भूमिका स्पष्ट करते हैं और गवाह बनने के लिए तैयार होते हैं, तो इस मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर रास्ता निकल सकता है। उन्होंने इसे देश की सेवा से जोड़ते हुए कहा कि चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।
हालांकि, राहुल गांधी के इस दावे के संबंध में संदेशों की सामग्री, समय या अन्य स्वतंत्र पुष्टि का विवरण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं रखा गया।
राहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा था। उनके मुताबिक, उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिला और याचिका दाखिल करने का सुझाव दिया गया।
राहुल गांधी ने कहा कि इंडिया ब्लॉक के सांसद सुप्रीम कोर्ट जाकर याचिका दाखिल करेंगे। उन्होंने इसके लिए दोपहर तीन बजे का समय बताया और कहा कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को न्यायिक मंच पर उठाना चाहता है।
उनके अनुसार, यह कदम केवल किसी व्यक्ति या सरकार के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और चुनाव प्रक्रिया में जनता के विश्वास से जुड़े मुद्दों को उठाना है।
हालांकि, याचिका में किन विशिष्ट राहतों की मांग की जाएगी और अदालत इस पर क्या रुख अपनाएगी, यह संबंधित याचिका और न्यायिक कार्यवाही के विवरण से ही स्पष्ट होगा।
राहुल गांधी ने अपने आंदोलन को देश के भविष्य से जुड़ा हुआ बताते हुए कहा कि संविधान की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है, लेकिन विपक्ष अपने सवालों से पीछे नहीं हटेगा।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल कांग्रेस या इंडिया ब्लॉक की नहीं है। जो भी व्यक्ति लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करना चाहता है, वह इस मुहिम में शामिल हो सकता है।
राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं को भी संबोधित करते हुए कहा कि यदि उन्हें लगता है कि संविधान पर हमला हो रहा है, तो वे भी इस मार्च में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने विचार खुलकर रखें और लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन में आवाज उठाएं।
उन्होंने कहा कि लोगों को डरने की जरूरत नहीं है और लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना नागरिकों का अधिकार है।
इंडिया ब्लॉक के प्रस्तावित मार्च को लेकर राहुल गांधी ने अनोखी उपमा देते हुए इसे भगवान शिव की बारात जैसा बताया। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी दल या विचारधारा से जुड़ा व्यक्ति शामिल हो सकता है, बशर्ते वह संविधान की रक्षा के उद्देश्य से आगे आना चाहता हो।
राहुल गांधी के अनुसार, यह मार्च किसी एक राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों से जुड़े सवालों को सामने लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलता, विपक्ष अपना आंदोलन जारी रखेगा।
उन्होंने इस अभियान को लेकर यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन का स्वरूप परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है और इसे किसी एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं समझा जाना चाहिए।
राहुल गांधी ने आंदोलन की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर भगवान शिव के तांडव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी बहन प्रियंका गांधी ने उनसे कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की बात कही थी, लेकिन उनके अनुसार यह आंदोलन किसी एक तय योजना के तहत नहीं चल रहा।
राहुल गांधी ने कहा, "यह तांडव है, भगवान शिव का डांस है। इसमें कोई योजना शामिल नहीं है। आज हम सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं, कल कुछ और होगा।"
उनके इस बयान से स्पष्ट है कि कांग्रेस नेतृत्व आंदोलन को लगातार जारी रखने और बदलती परिस्थितियों के अनुसार आगे की रणनीति तैयार करने का संकेत दे रहा है। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही सुनिश्चित होने तक उसका विरोध जारी रहेगा।
राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और युवाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस को युवाओं की पिटाई करने के आदेश दिए गए हैं। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कुछ वीडियो दिखाने की बात भी कही।
कांग्रेस नेता ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों के साथ उचित व्यवहार किया जाना चाहिए और उनकी आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया कि यदि विपक्ष के आरोप गलत हैं, तो सरकार और संबंधित संस्थाएं सामने आकर उनका जवाब क्यों नहीं देतीं।
इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन और पुलिस का पक्ष तथा प्रस्तुत वीडियो का स्वतंत्र सत्यापन भी मामले की पूरी तस्वीर समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
राहुल गांधी के संबोधन से पहले और बाद में इंडिया ब्लॉक की रणनीति को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने 'चलो दिल्ली मार्च फॉर डेमोक्रेसी' के तहत सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की योजना की घोषणा की।
विपक्ष का कहना है कि वह चुनावी प्रक्रिया से संबंधित कथित अनियमितताओं और जवाबदेही के सवालों को उठाता रहेगा। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद में लगाए गए आरोपों, अधिकारियों के कथित संपर्क, संदेशों के दावे और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर संबंधित पक्षों का जवाब तथा स्वतंत्र रूप से उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।
राहुल गांधी के बयानों ने चुनाव आयोग की भूमिका, मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही और विपक्ष के आंदोलन को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अब इस मामले में सबकी नजरें विपक्ष की ओर से दाखिल की जाने वाली याचिका, उसमें उठाए जाने वाले कानूनी सवालों और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर रहेंगी।
यह विवाद आने वाले दिनों में संसद, राजनीतिक दलों और सार्वजनिक विमर्श में महत्वपूर्ण मुद्दा बना रह सकता है। हालांकि, राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके विभिन्न दावों की सत्यता का निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों, संबंधित पक्षों के जवाब और आवश्यक होने पर न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकेगा।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


