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- 13h ago
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों और संगठनात्मक तैयारियों को देखते हुए राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के लिए नए प्रभारी और सह-प्रभारियों की नियुक्ति की है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की ओर से बुधवार को घोषित संगठनात्मक बदलाव में दिल्ली के कई नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। पार्टी ने कुल 36 प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं। इनमें कई ऐसे नेता शामिल हैं जिन्हें चुनावी संगठन, प्रदेश स्तर की राजनीति और प्रबंधन का अनुभव है।
दिल्ली से जुड़े नेताओं को पंजाब, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, लद्दाख और अंडमान-निकोबार सहित विभिन्न क्षेत्रों की जिम्मेदारियां मिली हैं। वहीं दिल्ली संगठन की जिम्मेदारी पूर्व राज्यसभा सांसद विनय सहस्रबुद्धे को दी गई है। उनके साथ दर्शनाबेन जरदोश और जामयांग त्सेरिंग नामग्याल को सह-प्रभारी बनाया गया है।
पार्टी के इस संगठनात्मक फेरबदल को आने वाले चुनावों से पहले राज्यों में संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग क्षेत्रों में अनुभवी नेताओं की तैनाती के तौर पर देखा जा रहा है।
नई सूची में दिल्ली से जुड़े कई प्रमुख नेताओं को अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का दायित्व दिया गया है। पूर्व दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा को पंजाब का सह-प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ राजस्थान के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी और अलका गुर्जर को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।
दिल्ली की नई दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद बांसुरी स्वराज को उत्तराखंड का सह-प्रभारी बनाया गया है। उत्तराखंड की जिम्मेदारी भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव को दी गई है और उनके साथ अरविंद मेनन तथा बांसुरी स्वराज को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है।
घोंडा से विधायक राजकुमार भाटिया को लद्दाख का प्रभारी बनाया गया है। वहीं दिल्ली की लोकसभा सांसद कमलजीत सहरावत को महाराष्ट्र का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। महाराष्ट्र का प्रभारी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा को बनाया गया है। महाराष्ट्र में सह-प्रभारियों की टीम में कमलजीत सहरावत के साथ राज्यसभा सांसद सदानंद तानावडे और अमित मालवीय भी शामिल हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव जय प्रकाश को अंडमान और निकोबार का प्रभारी बनाया गया है। जय प्रकाश दिल्ली की नगर निगम की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं और दिल्ली संगठन में उनका अनुभव रहा है।
भाजपा ने पूर्व राज्यसभा सांसद विनय सहस्रबुद्धे को दिल्ली का प्रभारी नियुक्त किया है। उनके साथ दर्शनाबेन जरदोश और जामयांग त्सेरिंग नामग्याल को सह-प्रभारी बनाया गया है।
सहस्रबुद्धे का संगठनात्मक राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। दिल्ली में उनकी नई जिम्मेदारी ऐसे समय में आई है जब पार्टी को आने वाले समय में राजधानी में संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाना है।
दिल्ली भाजपा के लिए स्थानीय संगठन को मजबूत करना, मंडल और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय तथा नगर निगम से जुड़े राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर तैयारी महत्वपूर्ण होगी।
दिल्ली के पूर्व भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा को पंजाब का सह-प्रभारी बनाया जाना भी संगठनात्मक बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। भाजपा ने पंजाब के लिए सतीश पूनिया को प्रभारी और वीरेंद्र सचदेवा तथा अलका गुर्जर को सह-प्रभारी बनाया है।
पंजाब में भाजपा का संगठन पिछले कुछ वर्षों में लगातार विस्तार की कोशिश कर रहा है। पार्टी की रणनीति में राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में संगठनात्मक नेटवर्क मजबूत करना और चुनावी तैयारियों को समय रहते गति देना महत्वपूर्ण रहेगा।
पंजाब में भाजपा की आगामी गतिविधियों में किसानों, युवाओं, उद्योग, रोजगार, नशे और कानून-व्यवस्था जैसे स्थानीय मुद्दे भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रह सकते हैं। हालांकि चुनावी रणनीति और मुद्दों को अंतिम रूप पार्टी की राज्य इकाई और केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर तय किया जाएगा।
हाल के दिनों में पंजाब में भाजपा ने ‘नशा मुक्त यात्रा’ जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं, जो राज्य की 2027 विधानसभा चुनावी तैयारियों के संदर्भ में सामने आए हैं।
उत्तराखंड में भाजपा ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव को प्रभारी बनाया है। उनके साथ अरविंद मेनन और नई दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है।
उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए राज्य में संगठनात्मक गतिविधियों, चुनावी तैयारी और बूथ स्तर तक पार्टी के नेटवर्क को सक्रिय रखना नए प्रभारियों की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होगा।
बांसुरी स्वराज का दिल्ली में चुनावी और संगठनात्मक अनुभव रहा है। नई जिम्मेदारी के साथ उन्हें अब दूसरे राज्य के संगठन और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों के साथ काम करना होगा।
दिल्ली की पूर्व मेयर और लोकसभा सांसद कमलजीत सहरावत को महाराष्ट्र का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। महाराष्ट्र का प्रभारी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा को बनाया गया है। उनके साथ कमलजीत सहरावत, सदानंद तानावडे और अमित मालवीय सह-प्रभारी के रूप में काम करेंगे।
महाराष्ट्र भाजपा के लिए संगठनात्मक रूप से महत्वपूर्ण राज्य है। यहां पार्टी के सामने राज्य स्तर पर संगठन के विस्तार के साथ गठबंधन राजनीति और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को संभालने की चुनौती रहती है।
कमलजीत सहरावत की नियुक्ति के जरिए दिल्ली संगठन से जुड़े अनुभव को महाराष्ट्र की जिम्मेदारी में भी इस्तेमाल किया जाएगा।
दिल्ली के घोंडा विधानसभा क्षेत्र से विधायक राजकुमार भाटिया को लद्दाख का प्रभारी बनाया गया है। लद्दाख की राजनीतिक और भौगोलिक परिस्थितियां दिल्ली से काफी अलग हैं। यहां संगठन को स्थानीय परिस्थितियों और क्षेत्रीय मुद्दों के अनुरूप काम करना होगा।
प्रभारी के तौर पर उनकी भूमिका पार्टी संगठन और स्थानीय नेतृत्व के बीच समन्वय स्थापित करने की होगी।
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव जय प्रकाश को अंडमान और निकोबार का प्रभारी बनाया गया है। दिल्ली की नगर निगम राजनीति में सक्रिय रहने के कारण उन्हें स्थानीय संगठनात्मक ढांचे और चुनावी प्रबंधन का अनुभव है।
केंद्रशासित प्रदेश में संगठन को मजबूत करना, स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और पार्टी की गतिविधियों को बूथ स्तर तक ले जाना उनके दायित्व का हिस्सा होगा।
गुजरात को लेकर मूल खबर में दिए गए नामों में भी बदलाव हुआ है। नई सूची के मुताबिक गुजरात का प्रभारी तरुण चुग को बनाया गया है, जबकि अजय महावर और गोमती साई को सह-प्रभारी बनाया गया है। गुजरात में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।
गुजरात भाजपा के लिए महत्वपूर्ण संगठनात्मक राज्य है। आगामी चुनाव को देखते हुए प्रभारी और सह-प्रभारियों की नियुक्ति के साथ पार्टी की राज्य इकाई में चुनावी तैयारी और संगठनात्मक समीक्षा की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
राजस्थान को लेकर भी नई सूची में अलग व्यवस्था की गई है। संजय भाटिया को राजस्थान का प्रभारी नियुक्त किया गया है। इसलिए मूल ड्राफ्ट में कुलजीत चहल को राजस्थान का सह-प्रभारी बताए जाने वाली जानकारी नई सूची से मेल नहीं खाती।
यह बदलाव बताता है कि पार्टी ने कई राज्यों में अनुभवी संगठनात्मक नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियों में लगाया है।
भाजपा ने इस फेरबदल में कुल 36 प्रभारियों और सह-प्रभारियों की नियुक्ति की है। यह बदलाव केवल दिल्ली या चुनाव वाले राज्यों तक सीमित नहीं है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए नए संगठनात्मक दायित्व तय किए हैं।
उत्तर प्रदेश में विनोद तावड़े को प्रभारी बनाया गया है। बिहार की जिम्मेदारी हरीश द्विवेदी को मिली है। छत्तीसगढ़ में स्मृति ईरानी को प्रभारी बनाया गया है, जबकि हरियाणा की जिम्मेदारी भी स्मृति ईरानी को दी गई है।
इससे स्पष्ट है कि भाजपा ने आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक जिम्मेदारियों का व्यापक पुनर्गठन किया है।
नई नियुक्तियों में कई ऐसे राज्य हैं जहां 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, हिमाचल प्रदेश, गुजरात और मणिपुर जैसे राज्य शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा सीटों के कारण उसका राष्ट्रीय राजनीतिक महत्व भी है। वहां विनोद तावड़े को प्रभारी बनाया गया है और उनके साथ चार सह-प्रभारी नियुक्त किए गए हैं।
भाजपा की नई नियुक्तियों में कई ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है जिनके पास पहले प्रदेश संगठन, चुनाव प्रबंधन या केंद्रीय संगठन में काम करने का अनुभव रहा है।
पार्टी की कार्यप्रणाली में राज्य प्रभारी की भूमिका संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय स्थापित करने की होती है। प्रभारी नियमित रूप से प्रदेश इकाई के साथ बैठकें करते हैं, संगठनात्मक स्थिति की समीक्षा करते हैं और केंद्रीय नेतृत्व तक प्रदेश की राजनीतिक एवं संगठनात्मक रिपोर्ट पहुंचाते हैं।
चुनावी समय में यह भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि टिकट चयन, संगठनात्मक गतिविधियों, चुनावी कार्यक्रमों और केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों के क्रियान्वयन में राज्य संगठन के साथ लगातार संवाद आवश्यक होता है।
दिल्ली में भाजपा ने 2025 विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को हराकर सरकार बनाई थी। अब पार्टी के सामने राजधानी में अपने संगठन को लगातार सक्रिय रखने की चुनौती है।
नई नियुक्तियों के साथ विनय सहस्रबुद्धे को दिल्ली का प्रभारी बनाए जाने से राजधानी के संगठन पर केंद्रीय नेतृत्व की निगरानी की नई व्यवस्था बनी है।
दिल्ली में नगर निगम की राजनीति भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। ऐसे में वार्ड स्तर से लेकर मंडल और बूथ स्तर तक संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करना नए प्रभारी की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हो सकता है।
दिल्ली भाजपा के नेताओं को दूसरे राज्यों की जिम्मेदारी मिलने का एक पहलू यह भी है कि राजधानी में चुनाव और संगठन संचालन के उनके अनुभव का इस्तेमाल दूसरे राज्यों में किया जा सकता है।
वीरेंद्र सचदेवा को पंजाब, बांसुरी स्वराज को उत्तराखंड, कमलजीत सहरावत को महाराष्ट्र और राजकुमार भाटिया को लद्दाख की जिम्मेदारी मिलना इसका उदाहरण है।
हालांकि हर राज्य की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए प्रभारियों को स्थानीय नेतृत्व, कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय मुद्दों के अनुरूप संगठनात्मक रणनीति तैयार करनी होगी।
भाजपा की नई नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं जब कई राज्यों में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। राज्य प्रभारी और सह-प्रभारी पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को चुनावी गतिविधियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पार्टी के लिए चुनावी रणनीति केवल उम्मीदवारों और प्रचार अभियानों तक सीमित नहीं रहती। बूथ प्रबंधन, मतदाता संपर्क, स्थानीय नेतृत्व, कार्यकर्ता नेटवर्क और संगठन की नियमित गतिविधियां भी चुनावी तैयारियों का हिस्सा होती हैं।
बाहर से भेजे गए प्रभारी नेताओं के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी संबंधित राज्य की स्थानीय राजनीति को समझने की होगी। प्रत्येक राज्य में जातीय-सामाजिक समीकरण, स्थानीय मुद्दे, क्षेत्रीय दलों की स्थिति और संगठनात्मक ढांचा अलग होता है।
इसलिए केंद्रीय नेतृत्व द्वारा नियुक्त प्रभारी को प्रदेश अध्यक्ष, विधायक, सांसद, जिला संगठन और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संवाद करना होगा।
भाजपा में दिल्ली संगठन से जुड़े नेताओं को देश के दूसरे हिस्सों में जिम्मेदारी मिलना पार्टी के भीतर संगठनात्मक जिम्मेदारियों के विस्तार को भी दर्शाता है।
राजधानी की राजनीति में काम करने वाले नेताओं को अब दूसरे राज्यों में संगठन के साथ समन्वय करना होगा। इससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में काम करने का अनुभव भी मिलेगा।
नई नियुक्तियों के बाद आने वाले महीनों में संबंधित राज्यों में संगठनात्मक बैठकों, प्रदेश दौरों, जिला स्तर की समीक्षा और बूथ स्तर की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।
प्रभारियों के सामने संगठन की मौजूदा स्थिति की समीक्षा, कमजोर क्षेत्रों की पहचान, स्थानीय नेतृत्व से संवाद और चुनावी तैयारियों की रूपरेखा तैयार करने जैसे काम होंगे।
भाजपा के इस फेरबदल से यह संकेत मिलता है कि पार्टी ने आने वाले चुनावों से काफी पहले संगठनात्मक जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब संबंधित प्रभारी राज्यों में जाकर स्थानीय संगठन के साथ काम करेंगे और चुनावी तैयारियों की निगरानी करेंगे।
दिल्ली के कई नेताओं को दूसरे राज्यों की जिम्मेदारी मिलने से राजधानी भाजपा का संगठनात्मक अनुभव राष्ट्रीय स्तर पर भी इस्तेमाल होगा। वहीं दिल्ली में विनय सहस्रबुद्धे के नेतृत्व में नई टीम संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाएगी।
कुल मिलाकर भाजपा की नई प्रभारी व्यवस्था में अनुभव, संगठनात्मक प्रबंधन और चुनावी राज्यों पर फोकस दिखाई देता है। हालांकि इन नियुक्तियों का वास्तविक प्रभाव संबंधित राज्यों में आने वाले महीनों में होने वाली संगठनात्मक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों के दौरान सामने आएगा।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


