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नई दिल्ली। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में लगातार अपनी वैश्विक मौजूदगी मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की बढ़ती ताकत अब पूरी दुनिया में दिखाई दे रही है और भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र भी वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
प्रधानमंत्री ने देश की जनरेशन जेड की तकनीकी क्षमता और नई सोच की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि आज भारत के युवा इंजीनियर, वैज्ञानिक, डिजाइनर और कोडर ऐसी अत्याधुनिक तकनीकों पर काम कर रहे हैं, जिनकी कुछ वर्ष पहले तक कल्पना करना भी मुश्किल था।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 के अवसर पर इसरो अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन ने भी भारत की अंतरिक्ष यात्रा, चंद्रयान-3 की सफलता और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की दिशा में आगे ले जाने के लिए नवाचार, सहयोग और महत्वाकांक्षी लक्ष्यों पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों का एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि भारत वैश्विक व्यवस्था में अपनी अंतरिक्ष उपस्थिति का लगातार विस्तार कर रहा है और इसका स्पष्ट प्रतिबिंब देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम में दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प लिया है और इस लक्ष्य को हासिल करने में अंतरिक्ष विज्ञान एवं तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
अंतरिक्ष क्षेत्र अब केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। संचार, मौसम पूर्वानुमान, कृषि, आपदा प्रबंधन, नेविगेशन, सुरक्षा, परिवहन और डिजिटल सेवाओं में अंतरिक्ष तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में भारत की विकास यात्रा में स्पेस सेक्टर की भूमिका आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण होने की संभावना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के तेजी से विकसित हो रहे निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की भी सराहना की।
उन्होंने कहा कि भारत की निजी अंतरिक्ष प्रतिभा दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रही है और देश का स्पेस सेक्टर अब वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत में रॉकेट निर्माण, सैटेलाइट, पृथ्वी अवलोकन, अंतरिक्ष डेटा, प्रोपल्शन, स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस और अन्य क्षेत्रों में कई निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स ने अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं।
इससे भारत के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में सरकारी संस्थानों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भूमिका भी लगातार मजबूत हुई है।
प्रधानमंत्री ने देश की युवा पीढ़ी की क्षमता की विशेष रूप से सराहना की।
उन्होंने कहा कि आज जनरेशन जेड के इंजीनियर, डिजाइनर, कोडर और वैज्ञानिक अंतरिक्ष क्षेत्र में नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं।
युवा प्रोपल्शन सिस्टम, कंपोजिट मटेरियल, रॉकेट स्टेज, सैटेलाइट प्लेटफॉर्म और अंतरिक्ष डेटा जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री के मुताबिक युवाओं की यह तकनीकी क्षमता भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इसरो की सफलता देश की अगली पीढ़ी को प्रेरित कर रही है।
अंतरिक्ष मिशनों की सफलता के बाद देश के बच्चों और युवाओं में विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के प्रति रुचि बढ़ी है। चंद्रयान, मंगलयान और अन्य अंतरिक्ष अभियानों ने युवाओं के सामने यह विश्वास मजबूत किया है कि भारत के वैज्ञानिक भी दुनिया के सबसे जटिल अंतरिक्ष मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दे सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इसरो की उपलब्धियों को देखकर देश के अनेक बच्चे वैज्ञानिक बनने का सपना देखने लगे हैं।
भारत में हर वर्ष 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जाता है।
यह दिन वर्ष 2023 में चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग की ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में मनाया जाता है।
चंद्रयान-3 की सफलता भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में शामिल है। इस मिशन ने भारत की तकनीकी क्षमता, वैज्ञानिक तैयारी और जटिल अंतरिक्ष अभियानों को अंजाम देने की क्षमता को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 का आयोजन ‘टुवर्ड्स विकसित भारत: इनोवेटिंग, कोलैबोरेटिंग एंड एस्पायरिंग टू ग्लोबल स्पेस लीडरशिप’ थीम के तहत किया जा रहा है।
हिंदी में इसका भावार्थ है—‘विकसित भारत की ओर: नवाचार, सहयोग और वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की आकांक्षा।’
यह थीम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की भविष्य की दिशा को दर्शाती है, जिसमें तकनीकी नवाचार के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक स्तर पर नेतृत्व हासिल करने की महत्वाकांक्षा शामिल है।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 के अवसर पर इसरो अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर बात की।
उन्होंने कहा कि भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए विज्ञान और तकनीक की सीमाओं को लगातार आगे बढ़ाना होगा।
उन्होंने ऐसे सहयोग और साझेदारियां विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जो भारत के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत कर सकें।
उनके अनुसार, नवाचार, सहयोग और महत्वाकांक्षी लक्ष्य भारत को वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की दिशा में आगे ले जाने में महत्वपूर्ण होंगे।
डॉ. नारायणन ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि देश ने बेहद सीमित संसाधनों के साथ अपना अंतरिक्ष सफर शुरू किया था।
उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में रॉकेट के पुर्जों को पुराने साइकिलों पर ले जाया जाता था क्योंकि उस समय जरूरी परिवहन सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं।
उन्होंने कहा कि बेहद साधारण संसाधनों से शुरू हुआ भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम आज दुनिया के प्रमुख अंतरिक्ष कार्यक्रमों में अपनी पहचान बना चुका है।
उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय पूरे भारतीय अंतरिक्ष समुदाय, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, अकादमिक जगत और औद्योगिक साझेदारों को दिया।
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की कहानी तकनीकी उपलब्धियों के साथ-साथ आत्मनिर्भरता और लगातार सीखने की कहानी भी है।
शुरुआती वर्षों में संसाधनों की कमी के बावजूद वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने स्वदेशी तकनीक विकसित करने पर जोर दिया। धीरे-धीरे भारत ने सैटेलाइट निर्माण, लॉन्च व्हीकल, रिमोट सेंसिंग, नेविगेशन और ग्रहों के मिशन जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमता विकसित की।
आज भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को दुनिया में लागत प्रभावी और तकनीकी रूप से सक्षम कार्यक्रमों में गिना जाता है।
चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई।
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हुआ, जिन्होंने चंद्रमा की सतह पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग की है।
इस उपलब्धि ने भारत की तकनीकी क्षमता के साथ-साथ मिशन प्रबंधन और वैज्ञानिक तैयारी को भी दुनिया के सामने मजबूती से रखा।
डॉ. नारायणन ने कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता केवल लैंडिंग तक सीमित नहीं है।
मिशन के दौरान हासिल किए गए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आंकड़ों का इस्तेमाल चंद्रमा के वातावरण और सतह को बेहतर ढंग से समझने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि मिशन से प्राप्त पूरा डेटा दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदाय के लिए उपलब्ध कराया गया है, जिससे अलग-अलग देशों के वैज्ञानिक इस डेटा का इस्तेमाल अपने शोध और नई वैज्ञानिक खोजों के लिए कर सकें।
डॉ. नारायणन ने चंद्रयान-3 की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मिशन ने केवल वैज्ञानिक इतिहास ही नहीं बनाया, बल्कि देश के करोड़ों लोगों को प्रेरित भी किया।
उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता ने 140 करोड़ भारतीयों में गर्व और आत्मविश्वास की भावना पैदा की।
विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के बीच अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति बढ़ती रुचि को इस मिशन का महत्वपूर्ण प्रभाव माना जा रहा है।
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं है। निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी ने पूरे सेक्टर के स्वरूप को बदलना शुरू किया है।
रॉकेट निर्माण से लेकर सैटेलाइट और स्पेस डेटा तक अलग-अलग क्षेत्रों में निजी कंपनियां काम कर रही हैं।
इससे एक ओर नए रोजगार और निवेश के अवसर पैदा हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और नवाचार को भी बढ़ावा मिल रहा है।
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश और स्टार्टअप गतिविधियों को लेकर उत्साह बढ़ा है।
अंतरिक्ष तकनीक का इस्तेमाल संचार, कृषि, मौसम, मैपिंग, रक्षा, आपदा प्रबंधन और अन्य क्षेत्रों में बढ़ने से स्पेस-टेक कंपनियों के लिए बाजार का दायरा भी व्यापक हो रहा है।
भारत की बड़ी युवा आबादी, तकनीकी प्रतिभा और अपेक्षाकृत लागत प्रभावी इंजीनियरिंग क्षमता भी अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने वाले कारकों में शामिल हैं।
भारत में नए स्पेस-टेक स्टार्टअप्स के आने से अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रयोग और नवाचार की गति बढ़ी है।
कई कंपनियां ऐसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं, जहां पहले मुख्य रूप से सरकारी संस्थानों की भूमिका रही थी।
रॉकेट लॉन्च, सैटेलाइट निर्माण, अर्थ ऑब्जर्वेशन, स्पेस डेटा एनालिटिक्स और अंतरिक्ष में वस्तुओं की निगरानी जैसे क्षेत्रों में निजी कंपनियों की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं।
स्पेस सेक्टर के विस्तार का असर केवल वैज्ञानिक संस्थानों तक सीमित नहीं है। इससे इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर, डेटा साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइन जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
युवा प्रतिभाओं के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र अब केवल सरकारी नौकरी या वैज्ञानिक संस्थान तक सीमित करियर विकल्प नहीं रह गया है।
निजी स्पेस कंपनियों के विस्तार से स्टार्टअप संस्कृति और अनुसंधान आधारित रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भरता पर लंबे समय से जोर रहा है।
रॉकेट इंजन, सैटेलाइट सिस्टम, प्रोपल्शन, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य तकनीकों में घरेलू क्षमता बढ़ने से भारत की अंतरिक्ष क्षेत्र में बाहरी निर्भरता कम करने की दिशा में मदद मिल रही है।
निजी कंपनियों की भागीदारी इस आत्मनिर्भरता को औद्योगिक स्तर पर विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अंतरिक्ष क्षेत्र का महत्व अब केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों और राष्ट्रीय गौरव तक सीमित नहीं है। यह तेजी से उभरती हुई आर्थिक गतिविधि का क्षेत्र भी बन रहा है।
सैटेलाइट आधारित सेवाओं, पृथ्वी अवलोकन डेटा, संचार, नेविगेशन और अन्य स्पेस-टेक सेवाओं की मांग बढ़ने से आने वाले समय में अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ने की संभावना है।
भारत के लिए यह क्षेत्र विकसित भारत के लक्ष्य के साथ तकनीकी और आर्थिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण हो सकता है।
डॉ. नारायणन ने नवाचार के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
अंतरिक्ष विज्ञान आज वैश्विक सहयोग का क्षेत्र बन चुका है। विभिन्न देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां वैज्ञानिक डेटा, मिशन तकनीक, अनुसंधान और अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्रों में सहयोग कर रही हैं।
भारत भी अपनी तकनीकी क्षमता और वैज्ञानिक अनुभव के आधार पर वैश्विक अंतरिक्ष सहयोग में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है।
चंद्रयान-3 के बाद भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाएं और व्यापक हुई हैं। चंद्र अन्वेषण, मानव अंतरिक्ष उड़ान, सैटेलाइट तकनीक और गहरे अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में देश की योजनाएं अंतरिक्ष कार्यक्रम के अगले चरण की ओर संकेत करती हैं।
प्रधानमंत्री के विकसित भारत के लक्ष्य और इसरो की महत्वाकांक्षी योजनाओं के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र आने वाले वर्षों में देश की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
डॉ. नारायणन ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा को किसी एक संस्था या व्यक्ति की उपलब्धि मानने के बजाय पूरे अंतरिक्ष समुदाय के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया।
वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों, शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत और अब तेजी से बढ़ते निजी क्षेत्र ने इस यात्रा में योगदान दिया है।
इसी सामूहिक प्रयास ने भारत को शुरुआती संसाधन सीमाओं से निकालकर वैश्विक अंतरिक्ष मंच पर एक मजबूत स्थिति तक पहुंचाया है।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डॉ. वी. नारायणन के संदेशों में एक बात स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई—भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब केवल उपलब्धियां हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है।
सरकारी संस्थानों की विशेषज्ञता, निजी कंपनियों की तेजी, स्टार्टअप्स का नवाचार, युवाओं की तकनीकी प्रतिभा और बढ़ता वैश्विक सहयोग इस यात्रा के महत्वपूर्ण स्तंभ बन रहे हैं।
साइकिल पर रॉकेट के पुर्जे ढोने से शुरू हुआ भारत का अंतरिक्ष सफर आज वैश्विक निवेश, अत्याधुनिक तकनीक और अंतरिक्ष नेतृत्व की महत्वाकांक्षा तक पहुंच चुका है। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 पर सामने आया संदेश यही है कि आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष भारत के विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प का एक महत्वपूर्ण आधार बनने जा रहा है।/
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


