17 सितंबर से मथुरा में शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान, 5 लाख दीपों से जगमगाएंगे धार्मिक स्थल
- 10h ago
नई दिल्ली। बीकानेर हाउस में आयोजित दस दिवसीय तीज मेले में राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति, कला, संगीत, परंपराओं और युवा प्रतिभाओं का शानदार संगम देखने को मिल रहा है। शनिवार को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में राजस्थान की लोक विरासत के विविध रंग देखने को मिले। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों, रंगमंच से जुड़े कलाकारों की मौजूदगी और युवा प्रतिभाओं की सक्रिय भागीदारी ने पूरे आयोजन को जीवंत बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान बीकानेर हाउस का वातावरण राजस्थानी लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आया। कला प्रेमियों, युवाओं और गणमान्य अतिथियों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और विभिन्न प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
प्रमुख आवासीय आयुक्त रोहित कुमार ने बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम में लिविंग रूम थिएटर से जुड़े रंगमंच कलाकारों ने अपनी उपस्थिति और प्रस्तुतियों से आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
उन्होंने कहा कि तीज मेला केवल खरीदारी या मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को राजधानी दिल्ली के लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रम इसी उद्देश्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रंगमंच कलाकारों की सहभागिता ने कार्यक्रम में अभिनय और नाट्य कला का रंग भी जोड़ा। लोक संस्कृति और आधुनिक रंगमंच के इस मेल ने दर्शकों को राजस्थान की परंपराओं को एक अलग दृष्टिकोण से देखने का अवसर दिया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण पुरस्कार वितरण समारोह रहा। इस अवसर पर प्रथम शर्मा, अधिवक्ता एवं स्टैंडिंग काउंसिल, आयकर विभाग तथा सुश्री कविता सेठ, टीवी एवं फिल्म कलाकार ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।
विजेताओं को सम्मानित करते हुए अतिथियों ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और कहा कि ऐसे आयोजन युवा प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए मंच प्रदान करते हैं।
पुरस्कार मिलने से प्रतिभागियों में उत्साह देखने को मिला और कार्यक्रम स्थल पर मौजूद दर्शकों ने तालियों के साथ विजेताओं का स्वागत किया।
कार्यक्रम में लेडी श्रीराम कॉलेज की दो प्रतिभाशाली छात्राओं—सुश्री मानसी एवं सुश्री काफ़ी— ने भी पुरस्कार वितरण में सहभागिता की और विजेताओं का उत्साह बढ़ाया।
इसके अलावा कॉलेज की करीब 35 छात्राओं ने तीज मेले में उत्साहपूर्वक भाग लिया। छात्राओं ने मेले में आयोजित विभिन्न गतिविधियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को करीब से देखा और राजस्थान की लोक कला एवं परंपराओं को समझने में रुचि दिखाई।
युवाओं की यह भागीदारी मेले को नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम को देश के प्रतिष्ठित लोक कलाकारों की मौजूदगी ने और खास बना दिया। कार्यक्रम में पद्मश्री से सम्मानित कलाकार गफूरुद्दीन मेवाती जोगी तथा पद्मश्री अनवर खान, उपाध्यक्ष, संगीत नाटक अकादमी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
दोनों कलाकारों का राजस्थान की लोक कला और संगीत के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व प्रदान किया।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने लोक कला के संरक्षण और संवर्धन में उनके योगदान की सराहना की। कलाकारों की मौजूदगी से युवा प्रतिभागियों को भी लोक कला की समृद्ध परंपरा को करीब से समझने का अवसर मिला।
तीज मेले में युवाओं की भागीदारी इस आयोजन की विशेष उपलब्धियों में शामिल रही। एक तरफ जहां राजस्थान के वरिष्ठ और प्रतिष्ठित लोक कलाकार मौजूद रहे, वहीं दूसरी ओर कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने भी आयोजन में सक्रिय भागीदारी की।
इससे कार्यक्रम में परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मेल देखने को मिला।
राजस्थान की लोक कला जहां पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करती है, वहीं युवा वर्ग इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
शनिवार को तीज मेले में बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथियों ने भी शिरकत की। प्रमुख आवासीय आयुक्त रोहित कुमार ने बताया कि इनमें संजय कुमार मिश्रा, सहपत्निक, सदस्य, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद, अनिल राजपूत, सहपत्निक, अध्यक्ष, आईटीसी, निदेशक, शहरी परिवहन, तथा महेंद्र कुमार, आईएएस, सहपत्निक, निदेशक, नीति आयोग सहित कई विशिष्ट अतिथि शामिल रहे।
इसके अलावा डॉ. अमरजोत, अतिरिक्त आयकर आयुक्त, आईआरएस, डॉ. डॉली जमवाल, आईआरएस तथा राजस्थान कैडर के अनेक वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के परिवारों ने भी मेले में पहुंचकर कार्यक्रमों का आनंद लिया।
गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
दस दिवसीय तीज मेले के दौरान बीकानेर हाउस राजधानी दिल्ली में राजस्थान की संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां आने वाले लोगों को राजस्थान की लोक कला, संगीत, हस्तशिल्प, पारंपरिक परिधान, खान-पान और त्योहारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं को करीब से देखने और समझने का अवसर मिल रहा है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम इस पूरे आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इसके माध्यम से राजस्थान की परंपराओं को केवल प्रदर्शित ही नहीं किया जा रहा, बल्कि उन्हें मंचीय प्रस्तुतियों और कलाकारों के माध्यम से जीवंत रूप में पेश किया जा रहा है।
राजस्थान की पहचान उसके लोक संगीत के बिना अधूरी मानी जाती है। तीज मेले में लोक कलाकारों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास रंग दिया।
लोक संगीत की पारंपरिक धुनों और कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को राजस्थान के ग्रामीण और लोक जीवन की झलक दी। लोक वाद्ययंत्रों और पारंपरिक गायन शैली ने कार्यक्रम के वातावरण को और अधिक जीवंत बनाया।
दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया और कई अवसरों पर तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया।
राजस्थान में तीज का पर्व महिलाओं, लोकगीतों, झूलों, श्रृंगार और पारंपरिक उत्सव से जुड़ा हुआ है। इसी सांस्कृतिक भावना को दिल्ली में आयोजित तीज मेले के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।
मेले में आने वाले लोग राजस्थान की परंपराओं को केवल देखने के बजाय उनके साथ जुड़ने का अनुभव भी कर रहे हैं।
लोक कला, संगीत और हस्तशिल्प को एक ही मंच पर प्रस्तुत करने से तीज मेले ने सांस्कृतिक आयोजन का व्यापक रूप ले लिया है।
इस तरह के आयोजनों की एक बड़ी भूमिका कलाकारों को सीधे दर्शकों तक पहुंचाने की भी होती है। खासतौर पर युवा कलाकारों के लिए मंच और दर्शक मिलना उनकी कला यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव होता है।
पुरस्कार वितरण के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रोत्साहन दिया गया। इससे उन्हें भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलेगी।
आयोजकों का मानना है कि सांस्कृतिक गतिविधियों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है, ताकि कला और परंपरा का सिलसिला नई पीढ़ी तक लगातार चलता रहे।
राजस्थान की लोक कला में संगीत, नृत्य, रंगमंच, हस्तशिल्प और लोक कथाओं की लंबी परंपरा रही है। आधुनिक जीवनशैली और बदलते मनोरंजन माध्यमों के बीच इन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना एक चुनौती भी है।
बीकानेर हाउस का तीज मेला इस चुनौती के बीच लोक संस्कृति को आधुनिक शहरी दर्शकों तक पहुंचाने का एक प्रयास है।
ऐसे आयोजनों से कलाकारों को मंच मिलता है और दर्शकों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है।
लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्राओं की बड़ी संख्या में भागीदारी से यह भी स्पष्ट हुआ कि युवाओं में भारतीय लोक संस्कृति और पारंपरिक कला के प्रति रुचि बनी हुई है।
करीब 35 छात्राओं ने कार्यक्रम में भाग लेकर सांस्कृतिक गतिविधियों का अनुभव किया। उनके लिए यह आयोजन राजस्थान की कला और परंपरा को करीब से समझने का अवसर भी रहा।
आयोजकों की कोशिश है कि ऐसे आयोजनों में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ाई जाए।
शनिवार का कार्यक्रम विशेष रूप से कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। एक ही मंच पर लोक कलाकारों, रंगमंच से जुड़े कलाकारों, युवा प्रतिभाओं और प्रतिष्ठित अतिथियों की मौजूदगी ने आयोजन को विविधता प्रदान की।
पुरस्कार वितरण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ कार्यक्रम ने दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर भी दिया।
बीकानेर हाउस में आयोजित तीज मेला राजस्थान और दिल्ली के बीच सांस्कृतिक संवाद का भी माध्यम बन रहा है।
राजस्थान के कलाकारों और शिल्पकारों को दिल्ली जैसे बड़े महानगर में अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है, वहीं दिल्ली के लोगों को राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित होने का मौका मिल रहा है।
यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान लोक कलाओं को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पद्मश्री कलाकार गफूरुद्दीन मेवाती जोगी और पद्मश्री अनवर खान की उपस्थिति ने कलाकारों और युवा प्रतिभागियों के बीच विशेष उत्साह पैदा किया।
ऐसे प्रतिष्ठित कलाकारों का किसी आयोजन में शामिल होना युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है। इससे उन्हें यह संदेश मिलता है कि लोक कला और पारंपरिक संगीत में भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।
तीज मेले की एक खास बात यह भी रही कि कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों के साथ आम दर्शकों और युवाओं की भी सक्रिय भागीदारी रही।
इससे आयोजन का स्वरूप अधिक व्यापक और जनभागीदारी वाला दिखाई दिया। कला और संस्कृति किसी एक वर्ग तक सीमित न रहकर समाज के अलग-अलग वर्गों को जोड़ने का माध्यम बनी।
बीकानेर हाउस के तीज मेले में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम को यदि तीन शब्दों में परिभाषित किया जाए तो वे होंगे—कला, संस्कृति और प्रतिभा।
राजस्थान की लोक विरासत ने संस्कृति का आधार दिया, कलाकारों ने इसे मंच पर जीवंत किया और युवा प्रतिभाओं ने इसमें नई ऊर्जा जोड़ दी।
इसी मेल ने कार्यक्रम को दर्शकों के लिए यादगार बनाया।
कार्यक्रम में मौजूद कलाकारों और अतिथियों की सहभागिता ने यह संदेश भी दिया कि लोक कला और संस्कृति को संरक्षित करने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समाज, युवा पीढ़ी, कलाकार और सांस्कृतिक संस्थाओं की सामूहिक भागीदारी भी जरूरी है।
ऐसे मेले इस दिशा में एक प्रभावी मंच बन सकते हैं, जहां परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
प्रमुख आवासीय आयुक्त रोहित कुमार ने कहा कि बीकानेर हाउस में आयोजित यह तीज मेला राजस्थान की लोक संस्कृति, कला, संगीत और परंपराओं को राजधानी दिल्ली में जीवंत रूप से प्रस्तुत करने का सराहनीय प्रयास है।
उन्होंने कहा कि युवाओं, कला प्रेमियों और गणमान्य अतिथियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
दस दिवसीय मेले में अभी अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, ऐसे में आने वाले दिनों में राजस्थान की लोक संस्कृति के और भी रंग देखने को मिलेंगे।
बीकानेर हाउस का तीज मेला इस समय केवल एक आयोजन नहीं बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का जीवंत मंच बन गया है। यहां लोक कलाकारों की आवाज, पारंपरिक कला की रंगत, युवाओं का उत्साह और दर्शकों की भागीदारी मिलकर एक ऐसा माहौल तैयार कर रहे हैं, जिसमें राजस्थान की मिट्टी की खुशबू महसूस की जा सकती है।
तीज मेले में कला, संस्कृति और प्रतिभा का यह संगम न केवल राजस्थान की समृद्ध विरासत को दिल्ली तक पहुंचा रहा है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी काम कर रहा है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


