17 सितंबर से मथुरा में शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान, 5 लाख दीपों से जगमगाएंगे धार्मिक स्थल
- 11h ago
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से ठीक पहले बुधवार दोपहर हुई तेज बारिश ने मथुरा की जल निकासी व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए। महज करीब आधे घंटे की मूसलाधार बारिश के बाद शहर के कई प्रमुख मार्ग पानी में डूब गए। बीएसए कॉलेज रोड, नया बस स्टैंड और भूतेश्वर पुल के नीचे भारी जलभराव की स्थिति बन गई। सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और पानी के बीच से गुजरने वाले वाहनों की रफ्तार थम सी गई।
बारिश थमने के बाद भी कई इलाकों में पानी काफी देर तक सड़कों पर जमा रहा। सबसे खराब स्थिति बीएसए कॉलेज रोड पर दिखाई दी, जहां सड़क के बड़े हिस्से में पानी भर गया। राहगीरों और वाहन चालकों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति ज्यादा मुश्किल रही, जबकि पैदल निकलने वाले लोगों को भी जलभराव के कारण काफी परेशानी उठानी पड़ी।
जन्माष्टमी का पर्व नजदीक होने के कारण शहर में पहले से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है। ऐसे समय में प्रमुख मार्गों पर जलभराव ने प्रशासन और नगर निगम की तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
बुधवार दोपहर करीब एक बजे बारिश शुरू हुई। कुछ ही देर में बारिश ने तेज रफ्तार पकड़ ली। करीब आधे घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश के बाद शहर की तस्वीर बदल गई।
जहां कुछ देर पहले तक वाहन सामान्य रूप से चल रहे थे, वहीं बारिश थमने के बाद सड़कें पानी से लबालब नजर आईं। बीएसए कॉलेज रोड पर कई स्थानों पर इतना पानी जमा हो गया कि सड़क और उसके आसपास का अंतर तक दिखाई देना मुश्किल हो गया।
वाहनों को पानी के बीच से धीरे-धीरे निकलना पड़ा। कई दोपहिया वाहन चालक जोखिम उठाकर जलभराव वाले हिस्सों से गुजरते दिखाई दिए। कुछ लोगों को पानी की गहराई का अंदाजा लगाने के बाद अपना रास्ता बदलना पड़ा।
स्थानीय लोगों के मुताबिक बीएसए कॉलेज रोड पर जलभराव कोई नई समस्या नहीं है। बारिश होते ही सड़क के निचले हिस्सों में पानी जमा हो जाता है। लोगों का कहना है कि कई वर्षों से इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का कहना है कि हर मानसून में जलभराव के कारण परेशानी होती है। बारिश के बाद पानी निकलने में समय लगता है, जिससे सड़क पर यातायात भी प्रभावित रहता है।
लोगों का कहना है कि यदि सामान्य बारिश के बाद ही सड़क पर इस तरह पानी जमा हो रहा है तो जन्माष्टमी के दौरान अचानक तेज बारिश होने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
बारिश का असर नया बस स्टैंड क्षेत्र में भी देखने को मिला। बस स्टैंड के आसपास पानी जमा होने के कारण बाहर से आने वाले यात्रियों को परेशानी हुई।
जन्माष्टमी के कारण इन दिनों मथुरा पहुंचने वाले यात्रियों और श्रद्धालुओं की संख्या पहले से बढ़ी हुई है। ऐसे में बस से उतरने के बाद लोगों को जलभराव वाले रास्तों से होकर आगे जाना पड़ा।
कई लोगों के साथ सामान भी था। पानी भरी सड़क पर सामान लेकर निकलना उनके लिए मुश्किल रहा। यात्रियों का कहना है कि बस स्टैंड जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर जल निकासी की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए, क्योंकि यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं।
भूतेश्वर पुल के नीचे भी बारिश के बाद पानी भर गया। अंडरपास जैसे स्थानों पर जलभराव होने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा अधिक रहता है।
पानी बढ़ने के साथ वाहन चालकों को सावधानी से निकलना पड़ा। जलभराव के कारण अंडरपास से गुजरने वाले वाहनों की गति धीमी हो गई।
भूतेश्वर क्षेत्र में जलभराव को लेकर नगर निगम की ओर से पहले भी व्यवस्थाएं किए जाने की बात कही जाती रही है। इसके बावजूद तेज बारिश के बाद पानी जमा होना यह संकेत देता है कि जल निकासी व्यवस्था को लगातार निगरानी और बेहतर रखरखाव की जरूरत है।
मथुरा में जन्माष्टमी का पर्व देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। पर्व के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शहर के अन्य धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
बाहर से आने वाले कई श्रद्धालु बस, ट्रेन और निजी वाहनों के जरिए शहर में प्रवेश करते हैं। ऐसे में शहर के प्रवेश मार्गों और प्रमुख सड़कों पर जलभराव होने से उन्हें परेशानी हो सकती है।
पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं के लिए पानी से भरी सड़कें सबसे बड़ी समस्या बन सकती हैं। बुजुर्ग, बच्चे और महिलाओं को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जलभराव का सीधा असर यातायात पर पड़ा। पानी से भरी सड़कों पर वाहन धीमी गति से चलते रहे। इससे कुछ स्थानों पर वाहनों की कतार लगने की स्थिति भी बनी।
मथुरा में जन्माष्टमी के दौरान पहले ही यातायात का दबाव कई गुना बढ़ने की संभावना है। ऐसे में यदि बारिश के कारण प्रमुख मार्गों पर पानी जमा रहता है तो जाम की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
प्रशासन के लिए चुनौती यह होगी कि जलभराव वाले मार्गों पर यातायात को सामान्य रखने के साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही भी सुनिश्चित की जाए।
बारिश के बाद जलभराव की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हुए। वीडियो में प्रमुख सड़कों पर पानी जमा दिखाई दे रहा है और वाहन पानी के बीच से गुजरते नजर आ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर स्थानीय लोगों ने जलभराव की समस्या को लेकर सवाल उठाए। कई लोगों ने नगर निगम और प्रशासन से बारिश के पानी की स्थायी निकासी व्यवस्था करने की मांग की।
लोगों का कहना है कि मथुरा एक प्रमुख धार्मिक नगरी है और जन्माष्टमी जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्व पर देशभर से लोग यहां पहुंचते हैं। ऐसे में शहर की बुनियादी व्यवस्थाओं को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
मथुरा में जलभराव से निजात दिलाने के लिए जल निकासी योजनाओं और पाइपलाइन पर काम किए जाने की बात कही जाती रही है। इसके बावजूद बारिश के बाद शहर की सड़कों पर पानी जमा होने से योजनाओं की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल पाइपलाइन बिछा देना पर्याप्त नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि पाइपलाइन की क्षमता कितनी है, पानी किस दिशा में जा रहा है और बारिश के दौरान निकासी कितनी तेजी से हो रही है।
लोग चाहते हैं कि नगर निगम जलभराव वाले सभी प्रमुख स्थानों का तकनीकी सर्वे कराकर समस्या का स्थायी समाधान करे।
बारिश के दौरान सड़कों पर पानी जमा होने के पीछे नालों की क्षमता और उनकी सफाई भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि नालों में कचरा जमा हो या पानी के निकास का रास्ता बाधित हो तो बारिश का पानी सड़क पर जमा होने लगता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून से पहले नालों की सफाई की जाती है, लेकिन बारिश के समय फिर जलभराव की स्थिति सामने आ जाती है। ऐसे में केवल सफाई अभियान चलाने के बजाय पूरे ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता की समीक्षा किए जाने की जरूरत है।
जन्माष्टमी से पहले हुई बारिश को नगर निगम और प्रशासन की तैयारियों की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। बारिश ने यह स्पष्ट कर दिया कि शहर में जलभराव वाले स्थान अभी भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर यही समस्या ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है। यदि बारिश के साथ जलभराव और यातायात का दबाव एक साथ बढ़ा तो पुलिस और प्रशासन को कई मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित मथुरा दौरे को लेकर भी प्रशासन सुरक्षा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटा है। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के साथ शहर की यातायात और साफ-सफाई व्यवस्था पर भी विशेष नजर रहेगी।
ऐसे में जन्माष्टमी से पहले हुई बारिश ने प्रशासन के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है। वीआईपी मूवमेंट और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच यदि बारिश होती है तो जलभराव वाले मार्गों पर यातायात को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।
शहर के अंडरपास जलभराव की दृष्टि से सबसे संवेदनशील माने जाते हैं। यहां पानी जमा होने पर कुछ ही समय में आवागमन बाधित हो सकता है। यदि पानी की गहराई बढ़ती है तो छोटे वाहनों के फंसने का खतरा भी रहता है।
इसलिए जन्माष्टमी के दौरान अंडरपासों पर विशेष निगरानी की आवश्यकता होगी। पानी बढ़ने की स्थिति में तत्काल बैरिकेडिंग कर वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से भेजना जरूरी होगा।
जलभराव के दौरान सबसे अधिक परेशानी पैदल चलने वालों को होती है। सड़क पर पानी भरने के कारण गड्ढे, खुले मैनहोल या सड़क की खराब सतह दिखाई नहीं देती। इससे हादसे की आशंका बढ़ जाती है।
जन्माष्टमी के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल मंदिरों की ओर जाएंगे। इसलिए प्रशासन को जलभराव वाले स्थानों पर पर्याप्त रोशनी, बैरिकेडिंग और पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करनी होगी।
बारिश के बाद केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि पानी जमा हुआ या नहीं। असली सवाल यह है कि जलभराव के बाद पानी कितनी देर में निकलता है।
यदि आधे घंटे की बारिश के बाद जमा पानी कई घंटे तक सड़क पर रहता है तो इसका सीधा असर यातायात और जनजीवन पर पड़ता है। इसलिए नई जल निकासी व्यवस्था की सफलता का आकलन पानी निकलने में लगने वाले समय के आधार पर भी किया जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव की समस्या का समाधान केवल बारिश के समय पंप लगाकर पानी निकालने से नहीं होगा। हर साल होने वाली समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है।
लोगों ने मांग की है कि जल निकासी व्यवस्था की समीक्षा कर कमियों को दूर किया जाए। साथ ही ऐसे स्थानों पर अतिरिक्त पंप और वैकल्पिक जल निकासी की व्यवस्था रखी जाए, जहां बारिश के दौरान सबसे ज्यादा पानी जमा होता है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने की संभावना है। धार्मिक स्थलों के आसपास भीड़ बढ़ेगी, बाजारों में चहल-पहल बढ़ेगी और प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव भी रहेगा।
ऐसे में यदि बारिश होती है तो जलभराव की समस्या प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। बुधवार की बारिश ने पर्व से पहले ही यह संकेत दे दिया है कि जल निकासी व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जन्माष्टमी के दौरान यदि दोबारा तेज बारिश हुई तो क्या मथुरा की सड़कें और अंडरपास पानी से भर जाएंगे या नगर निगम पहले से ऐसी व्यवस्था कर पाएगा कि बारिश का पानी कुछ ही समय में बाहर निकल जाए।
फिलहाल बुधवार की महज आधे घंटे की बारिश के बाद बीएसए कॉलेज रोड, नया बस स्टैंड और भूतेश्वर पुल के नीचे दिखाई दिया जलभराव शहर की तैयारियों पर सवाल खड़ा करने के लिए पर्याप्त है। जन्माष्टमी से पहले प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और जलभराव मुक्त रास्ता उपलब्ध कराने की है।
बारिश ने चेतावनी दे दी है—अब जन्माष्टमी पर व्यवस्था की असली परीक्षा बाकी है।


