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- 10h ago
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू और मौसमी बुखार के बढ़ते मामलों के बीच योगी सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में इन्फ्लुएंजा-ए (H1N1) संक्रमण की स्थिति की समीक्षा करते हुए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जांच और उपचार की व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी अस्पतालों में H1N1 की जांच के लिए मरीजों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों, जिला चिकित्सालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और मेडिकल कॉलेजों में H1N1 की जांच निशुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह है कि आर्थिक स्थिति के कारण कोई भी संदिग्ध मरीज जांच से वंचित न रहे और संक्रमण की समय रहते पहचान कर उसका उपचार शुरू किया जा सके।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह की मौजूदगी में हुई उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री को प्रदेश में H1N1 संक्रमण की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी गई। बैठक में विशेषज्ञों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 2 सितंबर तक प्रदेश में प्रयोगशाला जांच के माध्यम से H1N1 के 685 मामलों की पुष्टि हो चुकी है।
मामलों की संख्या सामने आने के बाद सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को निगरानी और जांच व्यवस्था और तेज करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि संक्रमण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी जिले में मामलों में अचानक बढ़ोतरी होने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वाइन फ्लू की निगरानी केवल अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रियता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से घर-घर सर्वे कर संदिग्ध मरीजों की पहचान करने पर जोर दिया गया है। बुखार, खांसी, गले में खराश और सांस से जुड़ी परेशानी जैसे लक्षण वाले लोगों की जानकारी जुटाकर जरूरत के अनुसार उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
इस व्यवस्था का मकसद यह है कि संक्रमित व्यक्ति की पहचान शुरुआती स्तर पर हो सके और संक्रमण को परिवार तथा समुदाय में फैलने से रोका जा सके।
सरकार ने स्वाइन फ्लू के मामले में उन लोगों को विशेष निगरानी में रखने के निर्देश दिए हैं, जिनमें संक्रमण गंभीर रूप लेने का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।
इनमें 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज शामिल हैं। ऐसे लोगों में बुखार या सांस संबंधी लक्षण दिखाई देने पर स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष सावधानी बरतने और चिकित्सकीय जांच कराने की सलाह दी गई है।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि ऐसे मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें उच्च स्तरीय स्वास्थ्य केंद्र पर रेफर किया जाए।
सरकार ने अस्पतालों में मरीजों की सुविधा के लिए स्वाइन फ्लू के लिए अलग काउंटर और हेल्प डेस्क बनाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य सामान्य मरीजों और संदिग्ध H1N1 मरीजों की भीड़ को अलग रखना तथा जांच और उपचार की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है।
अस्पताल प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि मरीजों को जांच, डॉक्टर से परामर्श और आगे के उपचार को लेकर अनावश्यक परेशानी न हो।
स्वास्थ्य विभाग को गंभीर मरीजों के उपचार के लिए अस्पतालों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। विशेष रूप से ऐसे मरीज, जिन्हें सांस लेने में गंभीर परेशानी हो या जिनकी स्थिति लगातार बिगड़ रही हो, उनके लिए ICU और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता पर जोर दिया गया है।
अस्पतालों में ऑक्सीजन, आवश्यक दवाओं, जांच सुविधाओं और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में भेजने में अनावश्यक देरी न हो।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हर H1N1 मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं होती। जिन मरीजों में हल्के या सामान्य लक्षण हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार घर पर रहकर उपचार लेने की अनुमति दी जा सकती है।
होम आइसोलेशन का उद्देश्य अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव कम करना और अस्पतालों में गंभीर मरीजों के लिए पर्याप्त बेड तथा चिकित्सा संसाधन उपलब्ध रखना है। हालांकि, मरीजों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही घर पर रहने और उपचार लेने की सलाह दी जाएगी।
यदि होम आइसोलेशन के दौरान मरीज की स्थिति बिगड़ती है या सांस लेने में परेशानी जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने की जरूरत होगी।
सरकार ने निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि H1N1 की जांच के नाम पर निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली न होने पाए।
स्वास्थ्य विभाग को निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों की निगरानी करने तथा मरीजों से अनावश्यक शुल्क वसूले जाने की शिकायतों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि बीमारी के समय मरीजों और उनके परिजनों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाली किसी भी मनमानी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार H1N1 एक संक्रामक श्वसन संबंधी बीमारी है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या नजदीकी संपर्क में आने से संक्रमण फैल सकता है। भीड़भाड़ वाले स्थानों और बंद कमरों में संक्रमण फैलने की संभावना को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है।
इसके सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, नाक बहना, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द और आंखों में लालिमा जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं।
हालांकि, केवल इन लक्षणों के आधार पर H1N1 की पुष्टि नहीं की जा सकती। संक्रमण की पुष्टि के लिए चिकित्सकीय जांच और आवश्यक होने पर प्रयोगशाला परीक्षण किया जाता है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को सलाह दी गई है कि स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर अनावश्यक घबराने के बजाय सावधानी बरतें। बुखार या फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेना बेहतर है।
खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना, हाथों की स्वच्छता बनाए रखना और बीमार होने की स्थिति में अनावश्यक रूप से भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचना संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद कर सकता है।
सरकार ने जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर स्थिति की लगातार समीक्षा करने को कहा है। संदिग्ध मामलों की पहचान, जांच, मरीजों की निगरानी और गंभीर मरीजों के लिए रेफरल व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो और मरीजों को समय पर जांच तथा उपचार उपलब्ध कराया जाए। सरकार की प्राथमिकता संक्रमण की जल्द पहचान करने के साथ-साथ गंभीर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
स्वास्थ्य विभाग का जोर अब इस बात पर है कि H1N1 संक्रमण के मामलों की पहचान जितनी जल्दी हो, उतनी ही जल्दी मरीज को उचित चिकित्सकीय सलाह और उपचार उपलब्ध कराया जा सके। सरकार ने आम लोगों से भी सावधानी बरतने और फ्लू जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की है।


