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नई दिल्ली। विपक्षी दलों के लगातार हंगामे के कारण मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही एक बार फिर सुचारु रूप से नहीं चल सकी। सदन की बैठक सुबह 11 बजे शुरू होने के महज चार मिनट बाद ही विपक्षी सदस्यों के विरोध और नारेबाजी के बीच कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इसके साथ ही मॉनसून सत्र के चौथे सप्ताह के दूसरे दिन भी प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो सके।
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों के सदस्य अपनी-अपनी मांगों को लेकर सदन के बीचोंबीच आ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण सदन में सामान्य कामकाज शुरू नहीं हो पाया।
लगातार हो रहे हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से सदन की कार्यवाही चलाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की प्रमुख मांग पर चर्चा के लिए तैयार है, ऐसे में सदन को बाधित करना उचित नहीं है।
अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों से कहा कि छात्रों के आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की मांग सरकार ने स्वीकार कर ली है। उन्होंने कहा कि जब सरकार इस विषय पर जवाब देने के लिए तैयार है तो विपक्ष को भी सदन चलने देना चाहिए।
बिरला ने कहा कि सदन केवल सत्ता पक्ष का नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का है। दोनों पक्षों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चले और देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो।
उन्होंने कहा कि देश की जनता चाहती है कि संसद चले और विभिन्न विषयों पर गंभीर चर्चा हो। लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में संवाद और चर्चा का महत्वपूर्ण स्थान है तथा सांसदों को अपनी बात सदन के भीतर रखने का अवसर मिलना चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ने प्रश्नकाल के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल संसद की कार्यवाही का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इसके माध्यम से सरकार और कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
बिरला ने कहा कि प्रश्नकाल में सांसद सीधे सरकार से सवाल पूछ सकते हैं और संबंधित मंत्री को उनका जवाब देना पड़ता है। इससे शासन व्यवस्था में पारदर्शिता आती है और जनता से जुड़े मुद्दे सदन के सामने रखे जा सकते हैं।
उन्होंने कहा, “मैंने व्यक्तिगत रूप से कई बार आग्रह किया कि प्रश्नकाल सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसमें सत्ता की जवाबदेही तय होती है और कार्यपालिका में पारदर्शिता आती है।”
लोकसभा अध्यक्ष ने सोमवार को हुई कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान उन्होंने सभी दलों के प्रतिनिधियों से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने का आग्रह किया था।
उन्होंने कहा कि संसद में अलग-अलग दलों के सांसद अपने-अपने मुद्दे उठाना चाहते हैं और सभी को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि सदन की कार्यवाही लगातार चले।
बिरला ने कहा कि सरकार की ओर से विपक्ष की प्रमुख मांग पर सहमति दिए जाने के बावजूद यदि सदन में हंगामा जारी रहता है तो इसका नुकसान पूरे संसदीय कामकाज को होता है।
लोकसभा अध्यक्ष ने छात्रों से संबंधित विपक्ष की मांग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बीएसी की बैठक में स्पष्ट किया है कि गृह मंत्री अमित शाह इस विषय पर सदन में जवाब देने के लिए तैयार हैं।
बिरला ने विपक्षी सांसदों से कहा कि उनकी प्रमुख मांग को सरकार ने स्वीकार कर लिया है। इसलिए अब विपक्ष को सदन की कार्यवाही चलने देनी चाहिए और संबंधित विषय पर चर्चा के दौरान अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “आपकी प्रमुख मांग पर सरकार ने सहमति जताई है। अब आप सदन चलने दें।”
विपक्ष के विरोध के कारण मंगलवार को लगातार 17वें कार्यदिवस पर भी लोकसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो सका। इससे मॉनसून सत्र के कामकाज को लेकर लगातार चिंता बढ़ रही है।
सदन में प्रश्नकाल के दौरान सांसद विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से जुड़े सवाल पूछते हैं। इन सवालों के माध्यम से सरकार की नीतियों, योजनाओं और उनके क्रियान्वयन से संबंधित जानकारी सदन के सामने आती है। लेकिन लगातार हो रहे व्यवधान के कारण सांसदों को प्रश्न पूछने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
इसी तरह शून्यकाल में भी सांसद अपने-अपने क्षेत्रों और देश से जुड़े महत्वपूर्ण एवं तत्काल सार्वजनिक मुद्दों को उठाते हैं। कार्यवाही बाधित होने से इन मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पा रही है।
संसद के मॉनसून सत्र के चौथे सप्ताह में प्रवेश करने के बावजूद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध समाप्त नहीं हुआ है। पिछले तीन सप्ताह के दौरान भी कई मौकों पर विपक्षी हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई है।
मंगलवार को भी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं दिखा। सुबह 11 बजे सदन की बैठक शुरू होने के साथ ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। अध्यक्ष की अपील के बावजूद जब हंगामा जारी रहा तो कार्यवाही को दोपहर दो बजे तक स्थगित करने का फैसला लिया गया।
सदन स्थगित होने से उस समय निर्धारित प्रश्नकाल और शून्यकाल की कार्यवाही नहीं हो सकी। इसके साथ ही दिन की शुरुआत में ही संसद के कामकाज पर विपक्षी विरोध का असर साफ दिखाई दिया।
लोकसभा अध्यक्ष ने एक बार फिर सभी दलों से संसदीय परंपराओं का पालन करने और सदन को सुचारु रूप से चलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है और विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने तथा अपनी मांगें रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसके लिए सदन की कार्यवाही को लगातार बाधित करना समाधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि सांसदों को अपनी बात नियमों के तहत सदन में रखनी चाहिए और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। इससे सरकार की जवाबदेही भी तय होगी और जनता से जुड़े विषयों पर सार्थक बहस का रास्ता खुलेगा।
फिलहाल विपक्षी दलों के विरोध और सरकार के बीच जारी गतिरोध के कारण संसद की कार्यवाही प्रभावित है। मंगलवार को भी सदन के शुरुआती कुछ मिनटों के बाद ही कार्यवाही स्थगित होने से प्रश्नकाल और शून्यकाल दोनों बाधित रहे।


