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- 13h ago
नई दिल्ली। दुनिया की दिग्गज धाविकाओं में शुमार बहामास की शौना मिलर-उइबो ने अब महिलाओं की 400 मीटर दौड़ का विश्व रिकॉर्ड तोड़ने को अपना अगला बड़ा लक्ष्य बनाया है। दो बार की ओलंपिक चैंपियन और वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन 2026 की अंतरराष्ट्रीय इवेंट एंबेसडर मिलर-उइबो ने कहा कि 400 मीटर में बड़े खिताब जीतने के बाद अब वह अपनी उपलब्धियों में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ना चाहती हैं। उनकी नजर न केवल विश्व रिकॉर्ड पर है, बल्कि वर्ष 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों में पदक जीतने पर भी टिकी है।
नई दिल्ली में रविवार को आयोजित होने वाली 21वीं वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन से पहले हुए संवाददाता सम्मेलन में मिलर-उइबो ने अपने करियर, वापसी, मातृत्व के अनुभव और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि 400 मीटर में विश्व रिकॉर्ड हासिल करना उनके प्रमुख लक्ष्यों में शामिल है। उनका मानना है कि महिला एथलेटिक्स में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और शीर्ष धाविकाओं के बीच लगातार बेहतर होते प्रदर्शन से इस लक्ष्य तक पहुंचने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
मिलर-उइबो ने कहा कि हाल के वर्षों में महिला धाविकाओं ने 400 मीटर की दौड़ में 48 सेकंड से कम समय दर्ज किया है। इससे उन्हें विश्वास मिलता है कि वह भी अपनी क्षमता के अनुरूप ऐसा प्रदर्शन कर सकती हैं। उनके मुताबिक, जब दुनिया की शीर्ष धाविकाएं एक-दूसरे को कड़ी चुनौती देती हैं, तो इससे खेल का स्तर ऊपर उठता है और विश्व रिकॉर्ड की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
शौना मिलर-उइबो ने 400 मीटर की दौड़ में अपनी पहचान दुनिया की सर्वश्रेष्ठ धाविकाओं में बनाई है। ओलंपिक स्वर्ण पदक और विश्व चैंपियनशिप की सफलता के बाद अब उनका लक्ष्य इस स्पर्धा में एक नया कीर्तिमान स्थापित करना है। विश्व रिकॉर्ड तोड़ने की उनकी महत्वाकांक्षा बताती है कि वह अपने करियर के अगले चरण में भी नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं।
400 मीटर की दौड़ में गति के साथ-साथ रणनीति, सहनशक्ति और दौड़ के दौरान ऊर्जा का सही इस्तेमाल बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस स्पर्धा में धावक को शुरुआती गति बनाए रखने के साथ अंतिम चरण में अपनी ताकत और लय का प्रभावी इस्तेमाल करना पड़ता है। विश्व रिकॉर्ड के लिए केवल तेज शुरुआत ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि पूरी दौड़ में संतुलित प्रदर्शन करना भी जरूरी होता है।
मिलर-उइबो का अनुभव और उनका अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड उन्हें इस लक्ष्य के लिए मजबूत दावेदारों में शामिल करता है। हालांकि, विश्व रिकॉर्ड की राह में उन्हें दुनिया की अन्य शीर्ष धाविकाओं से कड़ी चुनौती मिलने की संभावना है। ऐसे में उनकी तैयारी, फिटनेस और प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
उनके लिए यह लक्ष्य केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं है। विश्व रिकॉर्ड स्थापित करना महिला एथलेटिक्स में एक नया मानक तैयार कर सकता है और युवा खिलाड़ियों को अपनी क्षमता से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकता है।
भारत की अपनी पहली यात्रा पर आईं मिलर-उइबो ने वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन को केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने और सामाजिक उद्देश्यों को समर्थन देने का महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों के जरिए विभिन्न समुदायों को एक साथ आने और सकारात्मक बदलाव के लिए योगदान देने का अवसर मिलता है।
दिल्ली हाफ मैराथन देश की प्रमुख सड़क दौड़ प्रतियोगिताओं में शामिल है। इसमें पेशेवर धावकों के साथ बड़ी संख्या में शौकिया धावक भी हिस्सा लेते हैं। प्रतिभागियों के लिए यह आयोजन अपनी फिटनेस को परखने, व्यक्तिगत लक्ष्य निर्धारित करने और दौड़ने की आदत विकसित करने का अवसर प्रदान करता है।
मिलर-उइबो ने इस वर्ष प्रतिभागियों की संख्या में बढ़ोतरी, विशेषकर महिलाओं की भागीदारी को लेकर खुशी जताई। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि इस तरह के आयोजन अधिक महिलाओं को दौड़ने और खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित करेंगे।
उनका मानना है कि किसी भी खेल में पहला कदम उठाना महत्वपूर्ण होता है। कई लोग दौड़ना शुरू करना चाहते हैं, लेकिन फिटनेस, समय या अपनी क्षमता को लेकर आशंकित रहते हैं। ऐसे में सामूहिक दौड़ आयोजन उन्हें अपने डर से बाहर निकलने और छोटे लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
दिल्ली हाफ मैराथन का सामाजिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है। इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से लोग विभिन्न सामाजिक उद्देश्यों के लिए समर्थन जुटा सकते हैं और स्वास्थ्य तथा फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ा सकते हैं।
शौना मिलर-उइबो ने अपने जीवन के उस दौर के बारे में भी बात की, जिसने उनके खेल करियर और व्यक्तिगत नजरिए को बदल दिया। दो बार मां बनने के बाद प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स में वापसी करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती रही। उन्होंने बताया कि उनके बेटे का जन्म 2023 में और बेटी का जन्म 2025 में हुआ।
मातृत्व के बाद विश्वस्तरीय एथलीट के रूप में दोबारा अपनी लय हासिल करना आसान नहीं था। इसके लिए उन्हें शारीरिक फिटनेस, गति और प्रतिस्पर्धा के स्तर को फिर से विकसित करने पर ध्यान देना पड़ा। उन्होंने बहामास की राजधानी नासाउ में अपने पिता के मार्गदर्शन में अभ्यास किया और अपनी गति को वापस पाने के लिए लगातार मेहनत की।
मिलर-उइबो ने स्वीकार किया कि वापसी के दौरान उन्हें धैर्य रखना सीखना पड़ा। वह चाहती थीं कि वह जल्द से जल्द पहले जैसी स्थिति में लौट आएं, लेकिन उन्हें समझ आया कि इसके लिए समय और नियमित अभ्यास की जरूरत है।
एक शीर्ष एथलीट के लिए वापसी का मतलब केवल शारीरिक रूप से फिट होना नहीं है। इसमें आत्मविश्वास हासिल करना, प्रशिक्षण की लय दोबारा बनाना और प्रतियोगिताओं के दबाव का सामना करने की क्षमता विकसित करना भी शामिल है। मिलर-उइबो के अनुभव ने उन्हें यह भरोसा दिया कि मेहनत और निरंतरता से वह दोबारा अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सत्र ने उन्हें अपनी गति वापस आने का विश्वास दिलाया है। अब वह 400 मीटर में फिर से प्रतिस्पर्धा करने के लिए उत्साहित हैं। उनके लिए यह वापसी इस बात का प्रमाण भी है कि जीवन के बड़े बदलावों के बाद भी खेल के प्रति समर्पण और सही तैयारी के जरिए नए लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
मिलर-उइबो ने बताया कि मां बनने के बाद खेल के प्रति उनका नजरिया भी बदला है। अब उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धियों के साथ अपने बच्चों को प्रेरित करना भी महत्वपूर्ण हो गया है।
उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि उनके बच्चे यह देखें कि उनकी मां क्या करती हैं और किस तरह मेहनत करके अपने लक्ष्य हासिल करती हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनकी उपलब्धियां बच्चों को भी अपने जीवन में मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास का महत्व समझने के लिए प्रेरित करेंगी।
मिलर-उइबो का अनुभव उन महिला खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जो मातृत्व के बाद अपने खेल करियर को आगे बढ़ाने की योजना बनाती हैं। हालांकि, प्रत्येक खिलाड़ी की परिस्थितियां अलग होती हैं और वापसी की प्रक्रिया व्यक्तिगत स्वास्थ्य, प्रशिक्षण तथा उपलब्ध सहयोग पर निर्भर करती है।
उनकी कहानी यह दिखाती है कि खेल में सफलता केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं होती। कठिन परिस्थितियों से उबरना, अपने शरीर को समझना, परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाना तथा लगातार आगे बढ़ने की इच्छा बनाए रखना भी एक खिलाड़ी की यात्रा के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
वर्ष 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों को लेकर मिलर-उइबो ने अपनी योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह अगले ओलंपिक में केवल एक स्पर्धा पर ध्यान केंद्रित करने के विकल्प पर विचार कर रही हैं। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि वह 200 मीटर में हिस्सा लेंगी या 400 मीटर में।
मिलर-उइबो के लिए 200 मीटर में ओलंपिक पदक जीतना लंबे समय से एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रहा है। दूसरी ओर, 400 मीटर में लगातार तीसरा ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने की संभावना भी उन्हें आकर्षित करती है। दोनों स्पर्धाओं में उनकी क्षमता और अनुभव को देखते हुए यह फैसला उनके आगामी करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
200 मीटर और 400 मीटर दोनों में विश्वस्तरीय प्रदर्शन करने के लिए अलग-अलग रणनीतियों और प्रशिक्षण की जरूरत होती है। 200 मीटर में अधिकतम गति, मोड़ पर नियंत्रण और दौड़ के अंतिम हिस्से तक तेजी बनाए रखना महत्वपूर्ण है। वहीं 400 मीटर में गति के साथ सहनशक्ति और ऊर्जा का प्रभावी प्रबंधन निर्णायक साबित होता है।
दोनों स्पर्धाओं की तैयारी एक साथ करना संभव है, लेकिन ओलंपिक जैसे बड़े आयोजन में पदक की संभावना मजबूत करने के लिए किसी एक स्पर्धा पर अधिक ध्यान केंद्रित करना रणनीतिक विकल्प हो सकता है।
मिलर-उइबो ने स्पष्ट किया कि वह दोनों विकल्पों पर विचार करने के बाद अंतिम निर्णय लेंगी। उनके इस फैसले पर एथलेटिक्स जगत की भी नजर रहेगी, क्योंकि 2028 ओलंपिक में उनकी भागीदारी महिला स्प्रिंट स्पर्धाओं के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हो सकती है।
मिलर-उइबो ने 2016 के रियो ओलंपिक और 2020 के टोक्यो ओलंपिक में महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीते थे। इन दोनों उपलब्धियों ने उन्हें इस स्पर्धा की सबसे सफल आधुनिक धाविकाओं में शामिल किया।
लगातार दो ओलंपिक में 400 मीटर का स्वर्ण जीतना उनकी गति, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और बड़े मंच पर दबाव का सामना करने की योग्यता को दर्शाता है। अब यदि वह 2028 में भी इसी स्पर्धा में हिस्सा लेने का फैसला करती हैं, तो तीसरे ओलंपिक स्वर्ण की चुनौती उनके करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन सकती है।
हालांकि, ओलंपिक तक पहुंचने के लिए अभी उन्हें अपनी फिटनेस बनाए रखने, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करने और अन्य शीर्ष खिलाड़ियों से मुकाबला करने की तैयारी करनी होगी।
दूसरी ओर, 200 मीटर में ओलंपिक पदक जीतने का उनका सपना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस स्पर्धा में पदक हासिल करने से उनके करियर में एक नया आयाम जुड़ सकता है। ऐसे में उनके सामने अनुभव और नई चुनौती के बीच चुनाव करने का अवसर है।
वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन में इस वर्ष 41 हजार से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। लंबी दूरी की दौड़ में भाग लेने वाले धावकों की सराहना करते हुए मिलर-उइबो ने कहा कि हाफ मैराथन के लिए केवल शारीरिक क्षमता ही नहीं, बल्कि मजबूत मानसिकता और दृढ़ इच्छाशक्ति भी आवश्यक है।
हाफ मैराथन में 21.0975 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। इस दूरी को पूरा करने के लिए नियमित अभ्यास, सहनशक्ति, सही गति का चयन और ऊर्जा का संतुलित उपयोग जरूरी होता है। धावकों को दौड़ के दौरान थकान और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है, इसलिए प्रशिक्षण के साथ मानसिक तैयारी भी महत्वपूर्ण होती है।
मिलर-उइबो ने कहा कि एथलेटिक्स से संन्यास लेने के बाद भविष्य में मैराथन दौड़ना भी उनकी योजनाओं में शामिल है। यह विचार उनके खेल जीवन के अगले चरण की संभावनाओं को दर्शाता है।
एक स्प्रिंटर के रूप में उनका मुख्य अनुभव छोटी दूरी की तेज दौड़ से जुड़ा है, जबकि मैराथन के लिए अलग तरह की सहनशक्ति और लंबी अवधि की तैयारी की आवश्यकता होती है। ऐसे में भविष्य में मैराथन दौड़ना उनके लिए एक नई चुनौती होगी।
उनकी यह इच्छा यह भी दर्शाती है कि खेल के प्रति रुचि किसी एक स्पर्धा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। खिलाड़ी अपने करियर के अलग-अलग चरणों में नए अनुभव हासिल कर सकते हैं और विभिन्न प्रकार की चुनौतियों को स्वीकार कर सकते हैं।
भारत के खिलाड़ियों और युवा एथलीटों को संदेश देते हुए मिलर-उइबो ने कहा कि खेल में सफलता प्राप्त करने के लिए समय, मेहनत और धैर्य जरूरी हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को अभ्यास जारी रखने, खेल का आनंद लेने और अपनी तैयारी पर भरोसा रखने की सलाह दी।
उनके अनुसार, चोट और असफलताएं खेल का हिस्सा हैं। किसी प्रतियोगिता में खराब प्रदर्शन या चोट के कारण प्रशिक्षण में बाधा आने का मतलब यह नहीं है कि खिलाड़ी के लिए आगे बढ़ने के रास्ते बंद हो गए हैं। कई बार कठिन अनुभव ही बेहतर वापसी की नींव तैयार करते हैं।
एक खिलाड़ी के करियर में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक मजबूती भी जरूरी है। लक्ष्य तक पहुंचने की प्रक्रिया में अनुशासन, नियमित अभ्यास और अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन पर काम करना महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मिलर-उइबो की अपनी यात्रा भी इसी संदेश को मजबूत करती है। दो ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने के बाद मातृत्व और वापसी की चुनौतियों का सामना करना उनके लिए एक नया अनुभव रहा। इसके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए अभ्यास जारी रखा।
युवा खिलाड़ियों के लिए उनकी सलाह का सार यही है कि सफलता को केवल परिणामों के आधार पर नहीं देखना चाहिए। प्रशिक्षण के दौरान सुधार, अपनी क्षमता पर विश्वास और मुश्किल समय में निरंतर प्रयास भी खिलाड़ी की प्रगति के महत्वपूर्ण संकेत हैं।
शौना मिलर-उइबो ने 2016 में रियो ओलंपिक और 2020 में टोक्यो ओलंपिक में महिलाओं की 400 मीटर दौड़ का स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। वह फ्रांस की मैरी-जोसे पेरेक के बाद इस स्पर्धा में ओलंपिक खिताब का सफलतापूर्वक बचाव करने वाली दूसरी महिला धाविका हैं।
उनकी उपलब्धियां केवल ओलंपिक तक सीमित नहीं रहीं। वर्ष 2022 में यूजीन में आयोजित विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी उन्होंने 400 मीटर का स्वर्ण पदक जीता। इस सफलता ने अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स में उनकी मजबूत स्थिति को और स्पष्ट किया।
400 मीटर की दौड़ में उनकी पहचान तेज गति, दौड़ के दौरान नियंत्रण और अंतिम चरण में प्रतिस्पर्धियों को चुनौती देने की क्षमता के लिए रही है। बड़े आयोजनों में लगातार सफलता हासिल करने के लिए जिस तरह की तैयारी और मानसिक दृढ़ता की जरूरत होती है, मिलर-उइबो ने अपने करियर में उसका प्रदर्शन किया है।
अब विश्व रिकॉर्ड तोड़ने की उनकी महत्वाकांक्षा उनके करियर का अगला बड़ा लक्ष्य है। इसके साथ ही 2028 ओलंपिक में 200 या 400 मीटर में से किसी एक स्पर्धा को चुनने का फैसला भी उनके भविष्य को दिशा देगा।
प्रोकैम इंटरनेशनल द्वारा आयोजित वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन का 21वां संस्करण रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से शुरू होगा। आयोजन में 41 हजार से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है।
यह प्रतियोगिता पेशेवर एथलीटों और आम धावकों को एक साझा मंच प्रदान करती है। इसके माध्यम से लोगों को फिटनेस के प्रति जागरूक करने, नियमित दौड़ने की आदत विकसित करने और सामाजिक उद्देश्यों के लिए भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी के रूप में मिलर-उइबो की उपस्थिति आयोजन के लिए विशेष आकर्षण है। उनकी उपलब्धियां और व्यक्तिगत अनुभव युवा खिलाड़ियों तथा फिटनेस में रुचि रखने वाले लोगों को प्रेरित कर सकते हैं।
इस बार उनकी भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब वह अपने करियर के अगले बड़े लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। 400 मीटर का विश्व रिकॉर्ड तोड़ने की कोशिश, लॉस एंजिलिस ओलंपिक में पदक जीतने की तैयारी और मातृत्व के बाद अपनी गति वापस हासिल करने का अनुभव उनकी खेल यात्रा के प्रमुख पहलू हैं।
कुल मिलाकर, शौना मिलर-उइबो के लिए अगला दौर नई चुनौतियों और महत्वाकांक्षी लक्ष्यों का है। दो ओलंपिक स्वर्ण पदक और विश्व चैंपियनशिप की सफलता के बाद अब उनकी नजर 400 मीटर के विश्व रिकॉर्ड पर है। वहीं, 2028 ओलंपिक में 200 मीटर के पदक या 400 मीटर में तीसरे स्वर्ण के बीच चुनाव उनके करियर का अहम फैसला होगा। दिल्ली हाफ मैराथन के मंच से उनका संदेश भी स्पष्ट है—लक्ष्य बड़ा हो तो मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


