यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 13h ago
नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना की प्रसिद्ध सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (एसकेएटी) ने पहली बार मेरठ के आसमान में अपने अद्भुत हवाई करतबों का प्रदर्शन कर शहरवासियों को रोमांच और गर्व से भर दिया। दो दिन तक चले इस भव्य हवाई प्रदर्शन को देखने के लिए एक लाख से अधिक लोग पहुंचे। आसमान में एक साथ उड़ते लाल-सफेद रंग के हॉक विमानों की कलाबाजियों और उनसे निकलती केसरिया, सफेद तथा हरे रंग की धुएं की धारियों ने वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। प्रदर्शन के दौरान पूरा आसमान मानो भारतीय तिरंगे की छटा से सजा नजर आया।
इस ऐतिहासिक प्रदर्शन को देखने के लिए मेरठ और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। बच्चों, युवाओं और परिवारों के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी, राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयंसेवक भी मौजूद रहे। जैसे ही सूर्यकिरण के विमान निर्धारित विन्यास में आसमान में दिखाई दिए, दर्शकों में उत्साह की लहर दौड़ गई। विमानों की तेज गति, बेहद कम अंतर पर उड़ान और एक के बाद एक प्रस्तुत किए गए कठिन हवाई करतबों ने दर्शकों को लंबे समय तक रोमांचित रखा।
इस आयोजन की खास बात यह भी रही कि सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम के तीन सदस्य मेरठ से ही जुड़े हुए हैं। इनमें हवाई करतब प्रस्तुत करने वाले दो पायलट भी शामिल हैं। मेरठ की धरती से जुड़े इन वायु योद्धाओं को आसमान में करतब दिखाते देखकर स्थानीय लोगों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। उनके प्रदर्शन ने शहरवासियों के लिए इस आयोजन को केवल एक एयर शो न रहकर गौरव और भावनात्मक जुड़ाव का अवसर बना दिया।
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भी मेरठ में सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम के प्रदर्शन को देखा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट कर इस शानदार आयोजन की सराहना की। उन्होंने सूर्यकिरण के प्रदर्शन को अनुशासन, सटीकता, टीम भावना और पेशेवर दक्षता का बेहतरीन समन्वय बताया। उन्होंने कहा कि टीम के प्रदर्शन भारतीय वायु सेना की शानदार क्षमताओं को प्रदर्शित करते हैं।
रक्षा राज्य मंत्री ने सूर्यकिरण टीम के पायलटों और सदस्यों के साहस, समर्पण तथा उत्कृष्ट पेशेवर कौशल की भी सराहना की। उनके अनुसार इस तरह के प्रदर्शन देशवासियों को भारतीय वायु सेना की कार्यक्षमता और उसके जवानों की प्रतिबद्धता से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
प्रदर्शन के पहले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स के माध्यम से सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम के पायलटों की सटीकता और साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि सूर्यकिरण के पायलटों ने आसमान को तिरंगे के रंगों से सजाते हुए अद्भुत सटीकता और साहस का प्रदर्शन किया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर को उत्तर प्रदेश और पूरे देश के लिए गर्व तथा प्रेरणा का क्षण बताया। आसमान में भारतीय तिरंगे के रंगों की छटा बिखेरते विमानों का दृश्य लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। प्रदर्शन के दौरान कई दर्शकों ने मोबाइल फोन से वीडियो बनाए और तस्वीरें खींचीं।
मेरठ में सूर्यकिरण के हवाई प्रदर्शन को देखने वाले गणमान्य व्यक्तियों में राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी, उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर तथा विधान परिषद सदस्य अश्विनी त्यागी और धर्मेंद्र भारद्वाज सहित अन्य लोग शामिल रहे।
गणमान्य व्यक्तियों के साथ बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भी प्रदर्शन का आनंद लिया। आसमान में विमानों की संरचना बदलते ही दर्शकों की निगाहें उनकी ओर टिक जाती थीं। कठिन से कठिन करतब के सफलतापूर्वक पूरा होने पर दर्शकों की तालियों और उत्साह की आवाज से पूरा क्षेत्र गूंज उठता था।
सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने वर्ष 2026 के प्रशिक्षण सत्र के सफल समापन के तुरंत बाद मेरठ के नागरिकों के सामने अपने नए विन्यास का प्रदर्शन किया। इस दौरान टीम ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा भारत में लाइसेंस के तहत निर्मित नौ विशेष लाल और सफेद रंग के हॉक एमके-132 विमानों का इस्तेमाल किया।
हॉक विमानों ने आसमान में एक के बाद एक कई रोमांचक संरचनाएं बनाईं। शानदार लूप, बैरल रोल, उल्टी उड़ान और प्रसिद्ध ‘डीएनए’ करतब ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। कुछ ही क्षणों में विमानों का समूह एक आकृति से दूसरी आकृति में बदलता नजर आया। कभी विमान एक सीधी संरचना में उड़ते दिखाई दिए तो कभी अलग-अलग दिशाओं में जाकर पुनः एक सटीक विन्यास में लौट आए।
इन करतबों के दौरान विमानों की गति और दिशा में बेहद तेजी से बदलाव होता है। इसके बावजूद टीम के सभी सदस्य निर्धारित दूरी, ऊंचाई और दिशा का बेहद सटीक पालन करते हैं। यही कारण है कि सूर्यकिरण का प्रत्येक प्रदर्शन केवल रोमांच का प्रदर्शन नहीं बल्कि उच्च स्तर के प्रशिक्षण, अनुशासन और आपसी समन्वय का उदाहरण भी माना जाता है।
सूर्यकिरण टीम के प्रदर्शन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में विमानों के बीच बेहद कम दूरी पर उड़ान भरना शामिल है। कई विन्यासों में विमान एक-दूसरे से पांच मीटर से भी कम दूरी पर उड़ान भरते हैं। इतनी कम दूरी पर तेज गति से उड़ते हुए विमानों को निर्धारित दिशा और ऊंचाई में बनाए रखना पायलटों के लिए अत्यंत उच्च स्तर की एकाग्रता और प्रशिक्षण की मांग करता है।
प्रत्येक पायलट को अपने विमान की स्थिति के साथ-साथ आसपास उड़ रहे अन्य विमानों की स्थिति और गति पर भी लगातार नजर रखनी होती है। छोटी-सी चूक भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। ऐसे में टीम के सदस्यों के बीच वर्षों से विकसित हुआ विश्वास, अनुशासन और आपसी तालमेल प्रदर्शन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मेरठ एयर शो की एक प्रमुख विशेषता हॉक एमके-132 विमानों से निकलने वाला रंगीन धुआं रहा। इन विमानों में देश में किए गए महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव के तहत ऐसे धुआं छोड़ने वाले उपकरण लगाए गए हैं, जिनसे अलग-अलग रंगों का धुआं निकलता है।
भारतीय वायु सेना के नाशिक स्थित बेस रिपेयर डिपो में किए गए बदलाव के बाद विमान आसमान में केसरिया, सफेद और हरे रंग की धुएं की धारियां बनाने में सक्षम हुए हैं। जब नौ विमानों ने एक साथ आकाश में उड़ान भरी और तिरंगे के रंगों की धारियां बनाईं तो नीचे खड़े दर्शकों ने तालियों और जयघोष के साथ उनका स्वागत किया।
तिरंगे के रंगों में रंगा आसमान इस प्रदर्शन की सबसे यादगार तस्वीरों में शामिल रहा। बच्चों और युवाओं में इस दृश्य को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। अनेक लोगों ने इस क्षण को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया।
वर्ष 1996 में गठित सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने तीन दशकों के सफर में भारतीय वायु सेना की पेशेवर क्षमता का देश और विदेश में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। टीम ने भारत में 800 से अधिक हवाई प्रदर्शन किए हैं।
सूर्यकिरण ने भारत के अलावा चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और दुबई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एयर शो में भी अपनी उड़ान क्षमता का प्रदर्शन किया है। इन आयोजनों के माध्यम से टीम ने भारतीय वायु सेना की पेशेवर दक्षता, अनुशासन और तकनीकी क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।
तीन दशक की यात्रा में सूर्यकिरण ने खुद को केवल हवाई करतब दिखाने वाली टीम तक सीमित नहीं रखा। भारतीय वायु सेना के दूत के रूप में टीम जहां भी जाती है, वहां भारतीय वायु सेना की कार्यशैली, अनुशासन और पेशेवर भावना की झलक प्रस्तुत करती है।
मेरठ में सूर्यकिरण का प्रदर्शन युवाओं के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक रहा। बड़ी संख्या में विद्यार्थी और एनसीसी कैडेट इस प्रदर्शन को देखने पहुंचे। आसमान में बेहद कम दूरी पर उड़ते विमानों और पायलटों के शानदार समन्वय को देखकर युवाओं में भारतीय वायु सेना और रक्षा सेवाओं के प्रति उत्सुकता बढ़ी।
सूर्यकिरण के प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य युवाओं को भारतीय वायु सेना की ओर आकर्षित करना और उनमें साहस, अनुशासन, टीम भावना तथा देशसेवा की भावना को मजबूत करना भी है। टीम के पायलटों का प्रशिक्षण और उनका प्रदर्शन युवाओं को यह संदेश देता है कि किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए कठिन प्रशिक्षण, निरंतर अभ्यास, अनुशासन और आत्मविश्वास आवश्यक हैं।
मेरठ लंबे समय से सैन्य परंपरा और रक्षा सेवाओं से जुड़ा शहर रहा है। ऐसे शहर में पहली बार सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का भव्य प्रदर्शन अपने आप में महत्वपूर्ण अवसर रहा। मेरठ से जुड़े सूर्यकिरण टीम के तीन सदस्यों की मौजूदगी ने आयोजन के महत्व को और बढ़ा दिया।
स्थानीय लोगों के लिए यह गर्व का विषय रहा कि उनके शहर से जुड़े पायलट देश की प्रतिष्ठित एरोबैटिक टीम का हिस्सा हैं और हजारों लोगों के सामने आसमान में अपने कौशल का प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके प्रदर्शन ने युवाओं के बीच यह संदेश भी पहुंचाया कि मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रतिभाएं देश की रक्षा सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
सूर्यकिरण का एयर शो देखने में जितना रोमांचक दिखाई देता है, उसके पीछे उतनी ही जटिल तैयारी और तकनीकी दक्षता होती है। आसमान में कुछ सेकंड के भीतर विमान जिस तेजी से अपनी दिशा और संरचना बदलते हैं, उसके लिए पायलटों को लंबे समय तक प्रशिक्षण लेना पड़ता है।
विमानों की गति, ऊंचाई, आपसी दूरी, मौसम की स्थिति और निर्धारित उड़ान पथ का लगातार ध्यान रखा जाता है। हर करतब पहले से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है। टीम के सदस्यों के बीच रेडियो संचार और आपसी समन्वय भी प्रदर्शन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
दर्शकों के लिए जहां यह कुछ मिनटों का रोमांचक दृश्य होता है, वहीं पायलटों और ग्राउंड टीम के लिए इसके पीछे लंबे समय की तैयारी, अभ्यास और तकनीकी जांच शामिल होती है।
सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का प्रदर्शन भारतीय वायु सेना की उड़ान दक्षता और पेशेवर प्रशिक्षण की झलक प्रस्तुत करता है। टीम के पायलटों को अत्यंत कठिन परिस्थितियों में सटीक उड़ान भरने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। हवाई प्रदर्शन के दौरान उनके बीच तालमेल और अनुशासन देखने लायक होता है।
सूर्यकिरण की लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि आम नागरिकों को भारतीय वायु सेना की कार्यप्रणाली और पायलटों के कौशल को करीब से देखने का अवसर मिलता है। ऐसे आयोजन लोगों और सशस्त्र बलों के बीच जुड़ाव को मजबूत करने में भी भूमिका निभाते हैं।
जैसे ही सूर्यकिरण के विमानों ने आसमान में प्रवेश किया, दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। विमान जब एक साथ ऊंचाई पर पहुंचे और तिरंगे के रंगों की धुएं की लकीरें छोड़ते हुए आगे बढ़े तो लोगों ने तालियों और उत्साह के साथ उनका स्वागत किया।
लूप और बैरल रोल जैसे करतबों के दौरान दर्शकों की निगाहें लगातार आसमान पर टिकी रहीं। विमान कुछ ही पलों में इतनी तेजी से अपनी संरचना बदलते कि दर्शकों को हर नए करतब के साथ रोमांच का अनुभव होता रहा।
दो दिनों तक चले इस प्रदर्शन ने मेरठवासियों को एक ऐसा अनुभव दिया, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। खासकर बच्चों और युवाओं के लिए यह आयोजन भारतीय वायु सेना की दुनिया को करीब से देखने और समझने का अवसर बना।
सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम अब भारतीय वायु सेना की पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। देश-विदेश में अपने प्रदर्शन के माध्यम से टीम भारतीय वायु सेना के साहस, अनुशासन, सटीकता और टीम भावना का संदेश देती है।
टीम की तीन दशक लंबी यात्रा में अनेक पायलटों और तकनीकी कर्मियों ने योगदान दिया है। उनकी मेहनत और प्रशिक्षण के कारण सूर्यकिरण ने देश में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई है।
मेरठ में हुआ प्रदर्शन भी इसी गौरवशाली यात्रा की एक महत्वपूर्ण कड़ी रहा। नौ हॉक एमके-132 विमानों का एक साथ आसमान में उड़ना, बेहद कम दूरी पर सटीक विन्यास बनाए रखना और तिरंगे के रंगों से आसमान को सजाना दर्शकों के लिए यादगार अनुभव बन गया।
सूर्यकिरण का यह प्रदर्शन केवल हवाई करतबों का आयोजन नहीं रहा, बल्कि इसमें भारतीय वायु सेना की पेशेवर क्षमता, तकनीकी दक्षता, अनुशासन, साहस, टीम भावना और देशसेवा की भावना की झलक भी दिखाई दी। मेरठ के आसमान में दो दिनों तक दिखाई दी सूर्यकिरण की उड़ान ने शहरवासियों को रोमांच के साथ गौरव और प्रेरणा का भी अनुभव कराया।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


