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- 13h ago
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (Special Intensive Revision) को लेकर चल रहा विवाद अब दिल्ली की सड़कों तक पहुंच चुका है। एक ओर अग्रवाल और वैश्य संगठनों से जुड़े लोगों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में प्रदर्शन कर एसआईआर की प्रक्रिया का समर्थन किया, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस, यूथ कांग्रेस, छात्र संगठनों और अन्य समूहों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तथा एसआईआर को लेकर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
इस तरह एक ही मुद्दे को लेकर राजधानी में दो अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिलीं। एक प्रदर्शन में ज्ञानेश कुमार के समर्थन में नारे और पोस्टर दिखाई दिए, जबकि दूसरे प्रदर्शनों में उनके इस्तीफे की मांग की गई। 25 सितंबर को यूथ कांग्रेस ने रायसीना रोड से जंतर-मंतर तक मार्च निकाला था। वहीं वैश्य और अग्रवाल संगठनों की ओर से आयोजित समर्थन कार्यक्रम में ज्ञानेश कुमार के पक्ष में नारे लगाए गए।
दिल्ली में हुए समर्थन प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में नारे लगाए। पोस्टरों और बैनरों के जरिए एसआईआर को जरूरी बताते हुए मतदाता सूची की जांच और उसमें सुधार की प्रक्रिया का समर्थन किया गया।
प्रदर्शन के दौरान ‘ज्ञानेश कुमार तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं’ और ‘पूरे देश का वैश्य समाज आपके साथ है’ जैसे नारे लगाए गए। आयोजकों की ओर से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि एसआईआर को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच समाज का एक हिस्सा चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया और उसके नेतृत्व का समर्थन करता है।
प्रदर्शन में ऐसे पोस्टर भी दिखाई दिए जिनमें मतदाता सूची से कथित रूप से बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों के नाम हटाने की मांग के संदर्भ में ज्ञानेश कुमार के समर्थन में नारे लिखे थे। हालांकि, किसी व्यक्ति या समूह के नागरिक होने अथवा मतदाता सूची में पात्र होने का निर्धारण संबंधित कानूनी प्रक्रिया और दस्तावेजों के आधार पर होता है।
समर्थन प्रदर्शन में कुछ लोगों के हाथों में ‘ज्ञानेश कुमार का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ जैसे संदेश वाले पोस्टर भी नजर आए।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मतदाता सूची का सत्यापन और उसमें मौजूद गलतियों को दूर करना चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार मतदाता सूची में पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करने और अपात्र नामों को नियमों के तहत हटाने के लिए पुनरीक्षण जैसी प्रक्रिया की जरूरत हो सकती है।
आयोजकों ने चुनाव आयोग को एक संवैधानिक संस्था बताते हुए उसके कामकाज के प्रति समर्थन जताया।
समर्थन प्रदर्शन की अगुवाई हिंदूवादी नेता जय भगवान गोयल ने की। रिपोर्टों के अनुसार, गोयल ने ज्ञानेश कुमार के काम की सराहना की और उनके लिए भारत रत्न की मांग तक रखी।
उन्होंने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज पर सवाल संवैधानिक प्रक्रिया और तथ्यों के आधार पर उठाए जाने चाहिए।
यह बयान प्रदर्शन के समर्थन पक्ष की राय को दर्शाता है। दूसरी ओर, विपक्षी दल और विरोध प्रदर्शन करने वाले संगठन एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अलग-अलग आपत्तियां उठा रहे हैं।
जहां दिल्ली में वैश्य और अग्रवाल संगठनों की ओर से ज्ञानेश कुमार के समर्थन में प्रदर्शन हुआ, वहीं 25 सितंबर को इंडियन यूथ कांग्रेस ने उनके इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च निकाला।
यूथ कांग्रेस का मार्च रायसीना रोड से जंतर-मंतर की ओर बढ़ा। प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए। यह कार्यक्रम कांग्रेस के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा था।
दिल्ली में प्रदर्शन से पहले जंतर-मंतर क्षेत्र में पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई और बैरिकेडिंग की गई थी। विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया।
एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विरोध केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। 25 सितंबर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई राज्यों में प्रदर्शन किए। दिल्ली के अलावा बिहार, पंजाब, असम, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और अन्य स्थानों पर भी विरोध कार्यक्रमों की खबरें सामने आईं। कुछ स्थानों पर पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया गया और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
कांग्रेस ने राज्य इकाइयों से अपने-अपने राज्यों में चुनाव आयोग के कार्यालयों तक मार्च निकालने को कहा था। पार्टी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग भी उठाई गई।
25 सितंबर को जंतर-मंतर पर अन्य संगठनों की ओर से भी विरोध प्रदर्शन हुए। एआईएसए सहित विभिन्न समूहों के प्रदर्शन में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां जताई गईं और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए गए।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन स्थल पर भारी पुलिस और आरएएफ की तैनाती की गई थी। प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई। कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया।
इन प्रदर्शनों में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कुछ वक्ताओं ने एसआईआर को रोकने और चुनाव आयोग की भूमिका की जांच की मांग की।
एसआईआर को लेकर मौजूदा विवाद में मूल रूप से मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं।
समर्थन करने वाले समूहों का कहना है कि मतदाता सूची में गलत, अपात्र या दोहराए गए नामों की पहचान करना जरूरी है और इसके लिए व्यापक पुनरीक्षण की प्रक्रिया आवश्यक हो सकती है।
विरोध करने वाले दल और संगठन इस प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटने की आशंका, प्रक्रिया की पारदर्शिता और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
इसलिए विवाद का एक प्रमुख बिंदु यह है कि मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की प्रक्रिया किस तरीके से संचालित की जाए और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो।
भारत निर्वाचन आयोग देश में चुनाव प्रक्रिया संचालित करने वाली संवैधानिक संस्था है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वर्तमान में ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त हैं और उन्होंने 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था।
एसआईआर को लेकर जारी बहस के बीच आयोग की भूमिका सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई है। एक ओर आयोग की ओर से मतदाता सूची को अद्यतन और व्यवस्थित रखने की प्रक्रिया पर जोर दिया जाता है, दूसरी ओर विपक्षी दल इस प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और संभावित प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं।
इस पूरे विवाद के बीच मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयोग के भीतर एसआईआर से संबंधित कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद का भी उल्लेख किया गया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की 25 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर से संबंधित फैसलों पर कई मौकों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।
इन रिपोर्टों ने विवाद को और चर्चा में ला दिया। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से संस्थागत विचार-विमर्श में अलग-अलग राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है और आयोग ने अपने निर्णयों को सर्वसम्मत बताया है।
कांग्रेस ने एसआईआर और मतदाता सूची में किए गए बदलावों को लेकर स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है। पार्टी का कहना है कि पूरी प्रक्रिया की जांच और मतदाता सूची में हुए बदलावों की समीक्षा होनी चाहिए।
कांग्रेस की ओर से 25 सितंबर को देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। दिल्ली सहित कई राज्यों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग और राज्य निर्वाचन कार्यालयों की ओर मार्च किया।
वहीं, प्रदर्शनकारियों के एक अन्य समूह ने जंतर-मंतर पर एसआईआर के खिलाफ नारे लगाए और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
समर्थन प्रदर्शन में शामिल संगठनों की ओर से कहा गया कि एसआईआर को केवल राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, मतदाता सूची की शुद्धता लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची में है तो उसकी जांच होनी चाहिए और यदि कोई पात्र नागरिक सूची से बाहर है तो उसे उचित प्रक्रिया के तहत शामिल किया जाना चाहिए।
उनका जोर मतदाता सूची के सत्यापन और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर रहा।
दूसरी ओर, एसआईआर का विरोध कर रहे राजनीतिक दलों और संगठनों की चिंता प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटने और सत्यापन के तरीके को लेकर है।
विरोध करने वाले समूहों का कहना है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वास्तविक और पात्र मतदाताओं को किसी तकनीकी, दस्तावेजी या प्रशासनिक कारण से मताधिकार से वंचित न होना पड़े।
यही कारण है कि विरोध प्रदर्शन में एसआईआर को रोकने, समीक्षा करने और चुनाव आयोग की भूमिका पर जवाबदेही तय करने जैसी मांगें उठाई गईं।
एसआईआर को लेकर दिल्ली की सड़कों पर सामने आई तस्वीर इस पूरे विवाद की राजनीतिक तीव्रता को दिखाती है। एक तरफ वैश्य और अग्रवाल संगठनों से जुड़े लोग ज्ञानेश कुमार के समर्थन में नारे लगाते नजर आए, तो दूसरी तरफ यूथ कांग्रेस और अन्य संगठनों के प्रदर्शन में उनके इस्तीफे की मांग उठी।
इस तरह एक ही मुद्दे पर दो अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समूहों ने अपनी-अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखी।
समर्थन प्रदर्शन में ‘ज्ञानेश कुमार तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं’ का नारा प्रमुख रहा, जबकि विरोध प्रदर्शनों में ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ जैसी मांगें सामने आईं।
एसआईआर को लेकर जारी विवाद आने वाले दिनों में भी राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है। एक ओर मतदाता सूची के सत्यापन और सुधार की प्रक्रिया को लेकर समर्थन जारी है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल और नागरिक संगठन प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाताओं के अधिकार और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
निर्वाचन आयोग की आधिकारिक मतदाता सेवा व्यवस्था में SIR-2026 से संबंधित मतदाता सूची और नाम खोजने की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
आगे की बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा यह रहेगा कि मतदाता सूची को अद्यतन करने के साथ पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने के लिए क्या प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं और राजनीतिक दलों तथा नागरिक संगठनों की आपत्तियों पर किस प्रकार प्रतिक्रिया दी जाती है।
फिलहाल दिल्ली में हुए समर्थन और विरोध प्रदर्शनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एसआईआर अब केवल चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा प्रशासनिक विषय नहीं रह गया है। यह राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों के बीच व्यापक सार्वजनिक बहस का मुद्दा बन चुका है।


