यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 13h ago
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन किया। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में भारत के तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है। उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब मिशन के दूसरे चरण के लिए 13.5 अरब डॉलर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सेमीकंडक्टर अब केवल एक औद्योगिक उत्पाद नहीं रह गया है, बल्कि आधुनिक अर्थव्यवस्था, डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, संचार, रक्षा, ऑटोमोबाइल, स्वास्थ्य, ऊर्जा और रणनीतिक क्षेत्रों के लिए बुनियादी आवश्यकता बन चुका है। ऐसे में भारत का लक्ष्य केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सिलिकॉन से सिस्टम तक एक संपूर्ण और आत्मनिर्भर इकोसिस्टम तैयार करना है।
उद्घाटन भाषण की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने हाल में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और नई दिल्ली घोषणापत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश, तकनीक तथा सहयोग के अवसर इसी बढ़ते वैश्विक विश्वास का हिस्सा हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत ने अपने सेमीकंडक्टर मिशन का पहला चरण शुरू करने के बाद अब उसके दूसरे चरण की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। उन्होंने बताया कि पहले चरण का आकार लगभग 8 अरब डॉलर था, जबकि दूसरे चरण के लिए 13.5 अरब डॉलर का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार इस क्षेत्र में नीतिगत सुधारों, वित्तीय सहायता और बेहतर नियामकीय ढांचे के माध्यम से निवेशकों तथा कंपनियों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है जिसमें वैश्विक कंपनियां भारतीय स्टार्टअप, डिजाइन कंपनियों और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर सकें। इससे भारत में केवल उत्पादन क्षमता ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि अनुसंधान, डिजाइन, नवाचार और उच्च-कौशल रोजगार के अवसर भी विकसित होंगे।
सेमीकॉन इंडिया 2026 की थीम ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक-इकोसिस्टम का निर्माण’ रखी गई है। इस थीम के माध्यम से भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को केवल चिप फैब्रिकेशन तक सीमित न रखते हुए पूरी वैल्यू चेन के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
इसमें सेमीकंडक्टर सामग्री और उपकरणों से लेकर चिप डिजाइन, निर्माण, असेंबली, टेस्टिंग, एडवांस पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सिस्टम निर्माण तक की पूरी प्रक्रिया को शामिल किया गया है।
इस व्यापक दृष्टिकोण का मकसद भारत में एक ऐसा औद्योगिक नेटवर्क तैयार करना है जिसमें चिप बनाने वाली कंपनियों के साथ-साथ डिजाइन फर्म, उपकरण निर्माता, सामग्री आपूर्तिकर्ता, पैकेजिंग कंपनियां, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता, स्टार्टअप और शोध संस्थान भी एक-दूसरे से जुड़े हों।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर की वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग प्रकार के कंपाउंड सेमीकंडक्टर के निर्माण से लेकर इकोसिस्टम में सिलिकॉन फोटोनिक्स को शामिल करने तक कई तकनीकी क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ये तकनीकें विशेष रूप से एआई-सक्षम इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए महत्वपूर्ण हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर, हाई-स्पीड कंप्यूटिंग और संचार नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता भी बढ़ रही है। ऐसे में उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीकों की भूमिका आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण हो सकती है।
प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर और उपकरण क्षेत्र से जुड़े उद्योगपतियों तथा कंपनियों के प्रतिनिधियों से भारत में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि इस दिशा में आवश्यक बुनियादी आधार पहले ही तैयार किया जा चुका है और सरकार सप्लाई चेन को अधिक मजबूत एवं विश्वसनीय बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही है।
सेमीकंडक्टर उद्योग को आज दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक तकनीकी इंडस्ट्री में गिना जाता है। स्मार्टफोन, कंप्यूटर और सर्वर से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन, आधुनिक मशीनरी, रक्षा उपकरण और एआई आधारित प्रणालियों तक लगभग हर प्रमुख तकनीकी क्षेत्र में चिप्स की आवश्यकता होती है।
एआई के विस्तार ने इस आवश्यकता को और बढ़ा दिया है। बड़े डेटा सेंटर और एआई कंप्यूटिंग सिस्टम को अत्यधिक शक्तिशाली प्रोसेसर, मेमोरी और नेटवर्किंग चिप्स की जरूरत होती है।
इसी कारण भारत अपने सेमीकंडक्टर कार्यक्रम को केवल इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के हिस्से के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि इसे डिजिटल अर्थव्यवस्था और भविष्य की तकनीकी क्षमता से जोड़कर आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में नीति, फंडिंग और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के स्तर पर लगातार सुधार किए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आने वाली कंपनियों को परियोजनाओं की स्थापना और विस्तार के दौरान आवश्यक सहयोग मिले।
उन्होंने कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय स्टार्टअप और डिजाइन कंपनियों के साथ साझेदारी कर सकती हैं। इससे तकनीक के हस्तांतरण, संयुक्त अनुसंधान, उत्पाद विकास और वैश्विक बाजारों तक पहुंच के नए अवसर बन सकते हैं।
सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश के साथ-साथ डिजाइन और बौद्धिक संपदा का विकास भी महत्वपूर्ण है। भारत में पहले से मौजूद आईटी और इंजीनियरिंग प्रतिभा को सेमीकंडक्टर डिजाइन तथा सिस्टम डेवलपमेंट के साथ जोड़ने की दिशा में भी यह सम्मेलन महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध करा रहा है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जापान की एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा भारत की सॉवरिन क्रेडिट रेटिंग में सुधार किए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करीब 35 वर्षों के बाद ऐसा अपग्रेड हुआ है।
प्रधानमंत्री ने इसे भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और देश के प्रति अंतरराष्ट्रीय विश्वास से जोड़ते हुए कहा कि एक तरफ भारतीय अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है और दूसरी तरफ दुनिया का भरोसा भी बढ़ रहा है।
उन्होंने हाल में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने इसकी सफल मेजबानी की और नई दिल्ली घोषणापत्र को सभी की सहमति से अपनाया गया। प्रधानमंत्री के अनुसार, ये घटनाक्रम भारत की वैश्विक भूमिका और विश्वसनीयता को दर्शाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सितंबर महीने में हुई विभिन्न आर्थिक और तकनीकी गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में वित्तीय तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और आर्थिक विकास के कई क्षेत्रों में समानांतर रूप से प्रगति हो रही है।
उन्होंने मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां एजेंटिक एआई, टोकनाइजेशन और क्वांटम टेक्नोलॉजी के माध्यम से समावेशी वित्तीय व्यवस्था पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लगभग 3,000 किलोमीटर नेटवर्क के पूरी तरह चालू होने और तिमाही जीडीपी आंकड़ों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है।
सेमीकॉन इंडिया 2026 को भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में से एक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। सम्मेलन में 600 से अधिक कंपनियां भाग ले रही हैं और लगभग 50,000 आगंतुकों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
आयोजन में 52 देशों के प्रतिनिधि, 400 से अधिक अधिकारी और 150 से अधिक वक्ता हिस्सा ले रहे हैं। इससे सम्मेलन को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग, नीति निर्माताओं और निवेशकों के बीच संवाद के बड़े मंच के रूप में देखा जा रहा है।
प्रदर्शनी में जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन के छह कंट्री पवेलियन बनाए गए हैं। इसके अलावा 12 राज्यों के बूथ भी लगाए गए हैं।
सेमीकॉन इंडिया 2026 में केवल बड़ी वैश्विक कंपनियों पर ही ध्यान नहीं दिया गया है। कार्यक्रम में स्टार्टअप पवेलियन, इनोवेशन शोकेस, स्टूडेंट हैकाथॉन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन भी शामिल हैं।
इसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर उद्योग में नई पीढ़ी के इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों को अवसर उपलब्ध कराना है। चिप डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम, एआई हार्डवेयर और अन्य उभरती तकनीकों पर काम कर रहे युवाओं तथा स्टार्टअप को उद्योग के विशेषज्ञों और संभावित निवेशकों के सामने अपनी क्षमताएं प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।
सम्मेलन के दौरान छह कंट्री राउंडटेबल आयोजित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य विभिन्न देशों की कंपनियों और संस्थाओं के बीच सहयोग तथा संयुक्त उद्यमों के लिए संभावनाओं को बढ़ाना है।
सेमीकंडक्टर उद्योग की वैश्विक प्रकृति को देखते हुए किसी एक देश के लिए पूरी वैल्यू चेन तैयार करना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में अलग-अलग देशों की तकनीकी क्षमता, पूंजी, उपकरण, डिजाइन और विनिर्माण विशेषज्ञता को जोड़ना उद्योग के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
आयोजन में महिला नेतृत्व पर केंद्रित एक विशेष मंच भी रखा गया है। इसका उद्देश्य तकनीकी एवं विनिर्माण क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी, नेतृत्व और करियर अवसरों से जुड़े विषयों पर चर्चा करना है।
सेमीकंडक्टर उद्योग में उच्च-कौशल वाली प्रतिभा की जरूरत को देखते हुए वर्कफोर्स डेवलपमेंट सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उद्योग के विस्तार के साथ इंजीनियरिंग, डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग, पैकेजिंग, रिसर्च और तकनीकी प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की मांग बढ़ने की संभावना है।
सेमीकॉन इंडिया 2026 में नया ‘रेत से सिलिकॉन से सिस्टम तक’ वैल्यू-चेन अनुभव भी प्रमुख आकर्षण है। इसके माध्यम से सेमीकंडक्टर के निर्माण की पूरी यात्रा को समझाने का प्रयास किया जा रहा है।
सेमीकंडक्टर निर्माण की शुरुआत कच्चे माल और अत्यधिक शुद्ध सिलिकॉन से होती है। इसके बाद वेफर निर्माण, डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और टेस्टिंग जैसे कई जटिल चरण आते हैं। अंततः इन्हीं चिप्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और विभिन्न प्रकार के सिस्टम में किया जाता है।
भारत इसी पूरी श्रृंखला में अपनी क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि देश केवल तैयार इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का बाजार न रहे, बल्कि उनके पीछे मौजूद महत्वपूर्ण तकनीकी और औद्योगिक मूल्य श्रृंखला में भी मजबूत भूमिका निभाए।
सेमीकंडक्टर उद्योग का महत्व आर्थिक लाभ से आगे बढ़कर रणनीतिक क्षेत्र तक पहुंच चुका है। वैश्विक स्तर पर चिप सप्लाई में व्यवधान का असर ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार और औद्योगिक उत्पादन जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
ऐसे में घरेलू क्षमता बढ़ाने के साथ विश्वसनीय वैश्विक साझेदारियों का निर्माण भारत की औद्योगिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। भारत की बड़ी घरेलू अर्थव्यवस्था, इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग, इंजीनियरिंग प्रतिभा और डिजिटल इकोसिस्टम को सेमीकंडक्टर निवेश के संभावित आधार के रूप में देखा जा रहा है।
सेमीकंडक्टर संयंत्रों और उनसे जुड़े सप्लायर नेटवर्क में निवेश से प्रत्यक्ष रोजगार के साथ अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। उपकरण, सामग्री, लॉजिस्टिक्स, इंजीनियरिंग सेवाएं, निर्माण, परीक्षण और रखरखाव जैसी गतिविधियों में नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
इसके अलावा चिप डिजाइन और रिसर्च में निवेश भारत की उच्च तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने में भूमिका निभा सकता है। इससे घरेलू कंपनियों को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी मूल्य श्रृंखला में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका हासिल करने का अवसर मिल सकता है।
सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक किया जा रहा है। तीन दिवसीय सम्मेलन और प्रदर्शनी के दौरान वैश्विक सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के प्रतिनिधि, नीति निर्माता, निवेशक, शोधकर्ता, स्टार्टअप, शिक्षाविद और छात्र एक मंच पर मौजूद हैं।
सम्मेलन में डिस्प्ले उद्योग की प्रगति, नई तकनीकों, निवेश, संयुक्त उद्यम, वैश्विक सहयोग, स्टार्टअप, प्रतिभा विकास और भविष्य की सेमीकंडक्टर जरूरतों पर चर्चा की जा रही है।
प्रधानमंत्री के संबोधन के साथ सम्मेलन का मुख्य संदेश यही रहा कि भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केवल विनिर्माण क्षमता खड़ी करने के बजाय एक व्यापक, विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। दूसरे चरण के लिए 13.5 अरब डॉलर का लक्ष्य इसी व्यापक रणनीति का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


