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- 13h ago
नई दिल्ली। भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और रोबोटिक सर्जरी इस बदलाव के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हो गई है। अस्पतालों में रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम की बढ़ती उपलब्धता, प्रशिक्षित विशेषज्ञों की संख्या में विस्तार और जटिल ऑपरेशन में इस तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारत के रोबोटिक सर्जरी क्षेत्र में नई संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
दिल्ली में आयोजित सोसाइटी ऑफ रोबोटिक सर्जरी (SRS) इंडिया 2026 इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने भारत की बढ़ती क्षमताओं पर चर्चा करते हुए कहा कि देश के पास वर्ष 2030 तक रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की क्षमता है। सम्मेलन की एक खास बात यह भी रही कि एसआरएस का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन पहली बार एशिया में आयोजित किया जा रहा है और इसके लिए दिल्ली को चुना गया।
इस सम्मेलन में देश-विदेश से जुड़े विशेषज्ञों ने रोबोटिक सर्जरी के मौजूदा विस्तार, प्रशिक्षण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ, टेली-सर्जरी, साइबर सुरक्षा और भविष्य की सर्जिकल तकनीकों पर चर्चा की।
रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में दिल्ली-एनसीआर की भूमिका तेजी से बढ़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र के 39 अस्पतालों में रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम स्थापित हो चुके हैं। इनमें से 11 अस्पतालों में एक से अधिक रोबोटिक सिस्टम मौजूद हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इन आंकड़ों को केवल अस्पतालों में मशीनों की संख्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके पीछे रोबोटिक तकनीक से सर्जरी करने वाले विशेषज्ञों, ऑपरेशन टीमों, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी टीम और अस्पतालों में विकसित हो रहे संपूर्ण सर्जिकल इकोसिस्टम की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
रोबोटिक सर्जरी के विस्तार के साथ अस्पतालों में ऐसी प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे की जरूरत भी बढ़ रही है। इसी वजह से दिल्ली-एनसीआर को देश में रोबोटिक सर्जरी के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।
दिल्ली-एनसीआर में रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी के इस्तेमाल में पिछले कुछ वर्षों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 में क्षेत्र में 2,257 रोबोटिक प्रक्रियाएं हुई थीं। इसके बाद इनकी संख्या लगातार बढ़ती गई।
इस आंकड़े के अनुसार 2021 से 2025 के बीच दिल्ली-एनसीआर में रोबोटिक-असिस्टेड प्रक्रियाओं की संख्या करीब पांच गुना हो गई। यह वृद्धि बताती है कि रोबोटिक तकनीक धीरे-धीरे चुनिंदा जटिल ऑपरेशन तक सीमित रहने के बजाय विभिन्न सर्जिकल क्षेत्रों में अपनी जगह बना रही है।
हालांकि रोबोटिक सर्जरी को अपनाने की रफ्तार अस्पताल, विशेषज्ञता, रोग की प्रकृति और उपलब्ध तकनीकी संसाधनों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
वर्ष 2025 के आंकड़ों में रोबोटिक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कई अलग-अलग चिकित्सा क्षेत्रों में दिखाई देता है। दिल्ली-एनसीआर में हुई रोबोटिक प्रक्रियाओं में करीब 33 प्रतिशत जनरल सर्जरी-बेनाइन, 30.2 प्रतिशत यूरोलॉजी, 22.1 प्रतिशत स्त्री रोग और करीब 10 प्रतिशत जनरल सर्जरी-मैलिग्नेंट प्रक्रियाएं थीं।
इससे संकेत मिलता है कि रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल केवल एक विशेष प्रकार की सर्जरी तक सीमित नहीं है। यूरोलॉजी, स्त्री रोग और जनरल सर्जरी के अलावा हेड एंड नेक, थोरेसिक और कार्डियक सर्जरी में भी रोबोटिक तकनीक के उपयोग का विस्तार हो रहा है।
रोबोटिक प्लेटफॉर्म सर्जन को ऑपरेशन के दौरान सूक्ष्म गतिविधियों और छोटे स्थानों में काम करने में तकनीकी सहायता प्रदान कर सकते हैं। हालांकि किसी मरीज के लिए रोबोटिक सर्जरी उपयुक्त है या नहीं, यह बीमारी, मरीज की स्थिति और संबंधित सर्जिकल विशेषज्ञ के चिकित्सकीय आकलन पर निर्भर करता है।
रोबोटिक सर्जरी का विस्तार केवल दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देशभर में रोबोटिक-असिस्टेड प्रक्रियाओं की संख्या भी पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ी है।
वर्ष 2021 में देश में ऐसी 8,912 प्रक्रियाएं दर्ज की गई थीं। यह संख्या बढ़कर वर्ष 2025 में 44,857 तक पहुंच गई। यानी इस अवधि में देशभर में रोबोटिक-असिस्टेड प्रक्रियाओं के इस्तेमाल में उल्लेखनीय विस्तार हुआ।
इस विस्तार के पीछे रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम की उपलब्धता के साथ-साथ विशेषज्ञ सर्जनों का प्रशिक्षण, अस्पतालों में तकनीकी क्षमता का विकास और मरीजों के बीच नई सर्जिकल तकनीकों के प्रति बढ़ती जागरूकता जैसे कारक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
एसआरएस इंडिया 2026 इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने वीडियो संदेश के माध्यम से सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने भारत में स्वास्थ्य नवाचार के मौजूदा दौर और तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर बात की।
उनके संदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ और सर्जिकल रोबोटिक्स को भविष्य की स्वास्थ्य तकनीकों से जोड़ा गया। इस क्षेत्र में भारत के लिए तकनीक को अपनाने के साथ-साथ नवाचार और नेतृत्व की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया।
रोबोटिक सर्जरी और डिजिटल हेल्थ का संयोजन भविष्य में सर्जिकल प्रशिक्षण, विशेषज्ञ परामर्श और चिकित्सा सेवाओं की पहुंच के नए मॉडल विकसित करने में भूमिका निभा सकता है।
एसआरएस इंडिया के आयोजन अध्यक्ष और मैक्स अस्पताल, नई दिल्ली के मिनिमल एक्सेस, बेरियाट्रिक एंड रोबोटिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. विवेक बिंदल ने दिल्ली-एनसीआर में रोबोटिक सिस्टम की बढ़ती संख्या को व्यापक विशेषज्ञता के विकास से जोड़ा।
उनके अनुसार 39 अस्पतालों में रोबोटिक सिस्टम और 11 अस्पतालों में मल्टीपल सिस्टम की मौजूदगी को केवल मशीनों की संख्या के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल करने वाली विशेषज्ञ टीमों और संस्थानों की बढ़ती क्षमता को भी दर्शाता है।
रोबोटिक सर्जरी के विस्तार के साथ सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता प्रशिक्षित मानव संसाधन की है। मशीन उपलब्ध होने के बाद भी उसका सुरक्षित और प्रभावी इस्तेमाल अनुभवी सर्जिकल टीम पर निर्भर करता है। इसलिए प्रशिक्षण, अनुभव और उचित मरीज चयन को इस क्षेत्र के विस्तार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
रोबोटिक सर्जरी में सर्जन सीधे रोबोट नहीं, बल्कि एक विशेष सर्जिकल सिस्टम को नियंत्रित करता है। सिस्टम सर्जन के निर्देशों के अनुसार उपकरणों को संचालित करता है। इस प्रक्रिया में सर्जन को सूक्ष्म गतिविधियों और ऑपरेशन के क्षेत्र को देखने में तकनीकी सहायता मिल सकती है।
इस तकनीक का इस्तेमाल कई प्रकार की सर्जरी में किया जा रहा है। खास तौर पर शरीर के उन हिस्सों में जहां छोटे स्थान में अत्यधिक सटीकता के साथ काम करने की आवश्यकता होती है, वहां रोबोटिक प्लेटफॉर्म उपयोगी हो सकते हैं।
हालांकि रोबोटिक सर्जरी को हर मरीज या हर बीमारी के लिए स्वचालित रूप से बेहतर विकल्प नहीं माना जा सकता। सर्जरी की तकनीक का चुनाव बीमारी की प्रकृति, मरीज की स्वास्थ्य स्थिति, उपलब्ध विशेषज्ञता और चिकित्सकीय जरूरत के आधार पर किया जाता है।
रोबोटिक सर्जरी के विकास के साथ अब भारत में टेली-सर्जरी की दिशा में भी प्रयोग और प्रदर्शन सामने आ रहे हैं। सम्मेलन में इससे जुड़ी उपलब्धियों पर भी चर्चा हुई।
प्रो. डॉ. अनूप कुमार के नेतृत्व में सरकारी संस्थान के सर्जन द्वारा भारत में पहली रोबोटिक टेली-सर्जरी किए जाने का दावा किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह प्रक्रिया गुरुग्राम से हैदराबाद स्थित प्रीति किडनी एंड यूरोलॉजी अस्पताल में 1,600 किलोमीटर से अधिक दूरी पर की गई।
इस तरह की तकनीक में सर्जन एक स्थान पर रहते हुए दूसरे स्थान पर मौजूद रोबोटिक सिस्टम के माध्यम से प्रक्रिया में भाग ले सकता है। यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर सुरक्षित और प्रभावी तरीके से विकसित होती है तो दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञ सर्जिकल सेवाओं की पहुंच को लेकर नई संभावनाएं बन सकती हैं।
रोबोटिक टेली-सर्जरी की संभावनाओं का एक अन्य प्रदर्शन डॉ. विवेक बिंदल के नेतृत्व में किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, वैशाली और चीन के चेंगदू के बीच करीब 5,000 किलोमीटर की दूरी पर क्रॉस-बॉर्डर लाइव रोबोटिक टेली-सर्जरी का प्रदर्शन किया गया।
इस तरह के प्रदर्शन यह दिखाते हैं कि रोबोटिक सर्जरी केवल अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर तक सीमित तकनीक नहीं रह रही है। हाई-स्पीड कनेक्टिविटी, डिजिटल सिस्टम और रोबोटिक प्लेटफॉर्म के संयोजन से भविष्य में अलग-अलग स्थानों पर मौजूद विशेषज्ञों को एक सर्जिकल प्रक्रिया से जोड़ने की संभावनाओं पर काम हो रहा है।
हालांकि वास्तविक क्लिनिकल इस्तेमाल के लिए तकनीकी विश्वसनीयता के साथ-साथ कानूनी, नियामकीय और मरीज की सुरक्षा से जुड़े कई पहलुओं का समाधान आवश्यक होगा।
टेली-सर्जरी में जहां संभावनाएं हैं, वहीं इसके साथ नई चुनौतियां भी जुड़ी हैं। सम्मेलन में कनेक्टिविटी, साइबर सुरक्षा, प्रशिक्षण, क्रेडेंशियलिंग, आपातकालीन तैयारी और नियामकीय आवश्यकताओं पर चर्चा हुई।
टेली-सर्जरी में ऑपरेशन के दौरान कनेक्टिविटी बाधित होने जैसी स्थिति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था आवश्यक होती है। इसी प्रकार मरीज की मेडिकल जानकारी और सर्जिकल सिस्टम की साइबर सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय बन जाती है।
यदि भविष्य में सीमाओं के पार या दूरदराज के क्षेत्रों में रोबोटिक टेली-सर्जरी का विस्तार होता है तो अलग-अलग क्षेत्रों के चिकित्सा नियमों, जिम्मेदारियों और आपातकालीन प्रोटोकॉल को भी स्पष्ट करना होगा।
रोबोटिक सर्जरी के विस्तार के साथ विशेषज्ञ सर्जनों और प्रशिक्षित मेडिकल टीमों की मांग भी बढ़ेगी। रोबोटिक सिस्टम चलाने के लिए केवल पारंपरिक सर्जिकल अनुभव पर्याप्त नहीं माना जाता; डॉक्टरों को संबंधित रोबोटिक प्लेटफॉर्म और उसकी तकनीकी क्षमताओं के अनुसार प्रशिक्षण की जरूरत होती है।
इसी तरह ऑपरेशन थिएटर में काम करने वाली पूरी टीम को रोबोटिक सर्जरी की प्रक्रिया, उपकरणों और आपातकालीन स्थितियों के लिए प्रशिक्षित करना आवश्यक है।
भारत यदि रोबोटिक सर्जरी में अपनी क्षमता बढ़ाता है तो मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों के लिए भी यह एक नया क्षेत्र बन सकता है। भविष्य में सर्जिकल प्रशिक्षण में सिमुलेशन, वर्चुअल रियलिटी और एआई आधारित शिक्षण उपकरणों का इस्तेमाल भी बढ़ सकता है।
रोबोटिक सर्जरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मेल चिकित्सा क्षेत्र में चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय बनता जा रहा है। भविष्य में एआई आधारित सिस्टम सर्जनों को इमेजिंग डेटा समझने, सर्जिकल योजना तैयार करने और प्रक्रिया के दौरान विभिन्न सूचनाओं को व्यवस्थित करने में सहायता कर सकते हैं।
हालांकि एआई आधारित चिकित्सा तकनीकों की भूमिका को लेकर सुरक्षा, सत्यापन, पारदर्शिता और चिकित्सकीय जिम्मेदारी जैसे प्रश्न भी महत्वपूर्ण रहेंगे। विशेषज्ञों की निगरानी और चिकित्सकीय निर्णय की भूमिका ऐसे सिस्टम के इस्तेमाल में केंद्रीय बनी रहेगी।
भारत जैसे विशाल देश में विशेषज्ञ सर्जिकल सेवाओं की उपलब्धता शहरों और बड़े चिकित्सा केंद्रों तक सीमित रहने की चुनौती लंबे समय से मौजूद है। रोबोटिक टेली-सर्जरी और टेली-मेंटोरिंग जैसी तकनीकें भविष्य में इस अंतर को कम करने में संभावित भूमिका निभा सकती हैं।
यदि किसी दूरदराज के अस्पताल में रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम और प्रशिक्षित स्थानीय टीम उपलब्ध हो तथा विशेषज्ञ किसी बड़े चिकित्सा केंद्र से सुरक्षित डिजिटल कनेक्शन के माध्यम से मार्गदर्शन दे सके, तो विशेषज्ञता की पहुंच का नया मॉडल विकसित हो सकता है।
फिलहाल इसे व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले तकनीकी, चिकित्सकीय, कानूनी और नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करना जरूरी होगा।
रोबोटिक सर्जरी के विस्तार के साथ लागत का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहेगा। रोबोटिक सिस्टम की खरीद, रखरखाव, तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और ऑपरेशन थिएटर की आवश्यकताओं पर निवेश करना पड़ता है।
इसलिए भविष्य की चुनौती केवल यह नहीं होगी कि भारत में कितने रोबोटिक सिस्टम स्थापित होते हैं, बल्कि यह भी होगी कि इन तकनीकों की सेवाएं कितने मरीजों तक और किस लागत पर पहुंचती हैं।
विशेषज्ञता के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और वहनीयता भी रोबोटिक सर्जरी के विस्तार का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगी।
एसआरएस इंडिया 2026 इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों द्वारा वर्ष 2030 तक भारत के रोबोटिक सर्जरी में वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की क्षमता की बात की गई। दिल्ली-एनसीआर में अस्पतालों और रोबोटिक सिस्टम की बढ़ती संख्या तथा देशभर में प्रक्रियाओं के बढ़ते आंकड़े इस क्षेत्र में हो रहे विस्तार को दर्शाते हैं।
लेकिन वैश्विक नेतृत्व केवल मशीनों की संख्या से तय नहीं होगा। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाली सर्जिकल विशेषज्ञता, प्रशिक्षण, अनुसंधान, मरीजों की सुरक्षा, तकनीकी नवाचार, टेली-सर्जरी के लिए विश्वसनीय कनेक्टिविटी और स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था जैसे कई पहलुओं का विकास जरूरी होगा।
एसआरएस इंडिया 2026 इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का दिल्ली में आयोजन भारत में रोबोटिक सर्जरी के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है। पहली बार एशिया में आयोजित हो रहा एसआरएस का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारत में इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और संस्थानों के बढ़ते नेटवर्क को सामने लाने का अवसर भी बना।
सम्मेलन में रोबोटिक सर्जरी के वर्तमान इस्तेमाल से लेकर भविष्य की टेली-सर्जरी, एआई, डिजिटल हेल्थ, प्रशिक्षण और साइबर सुरक्षा तक अनेक विषयों पर चर्चा हुई।
दिल्ली-एनसीआर में 39 अस्पतालों तक पहुंच चुके रोबोटिक सिस्टम और वर्ष 2025 में 10,937 रोबोटिक प्रक्रियाओं का आंकड़ा इस क्षेत्र के विस्तार को दर्शाता है। वहीं देशभर में 2025 में 44,857 रोबोटिक-असिस्टेड प्रक्रियाओं का आंकड़ा बताता है कि यह तकनीक भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में धीरे-धीरे अपनी जगह मजबूत कर रही है।
भारत में रोबोटिक सर्जरी का मौजूदा विस्तार केवल अस्पतालों में नई मशीनों के आने की कहानी नहीं है। इसके साथ सर्जिकल विशेषज्ञता, मेडिकल प्रशिक्षण, डिजिटल हेल्थ, एआई और टेली-सर्जरी जैसे क्षेत्रों का विकास भी जुड़ा हुआ है।
यदि तकनीकी विकास के साथ मरीजों की सुरक्षा, प्रशिक्षित मानव संसाधन, लागत, नियामकीय व्यवस्था और समान स्वास्थ्य पहुंच जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाता है, तो रोबोटिक सर्जरी आने वाले वर्षों में भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
2030 तक भारत की भूमिका कितनी मजबूत होती है, यह आने वाले वर्षों में तकनीक के विस्तार, विशेषज्ञता के विकास और इन चुनौतियों के समाधान पर निर्भर करेगा। फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती रोबोटिक सर्जरी और देशभर में प्रक्रियाओं की बढ़ती संख्या इस क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव की तस्वीर जरूर पेश करती है।


