यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 13h ago
नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की कला प्रदर्शनी से तस्वीरें हटाए जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातार तूल पकड़ रहा है। इस मामले में अब बीकानेर हाउस मैनेजमेंट सोसाइटी की ओर से सफाई सामने आई है। प्रबंधन का कहना है कि प्रदर्शनी में लगाई गई कुछ तस्वीरें संस्था की निर्धारित नीतियों के अनुरूप नहीं थीं, इसलिए उन्हें हटाने के लिए कहा गया। वहीं, रेहान वाड्रा ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि प्रदर्शनी शुरू होने से पहले बड़ी संख्या में तस्वीरें हटाने का निर्देश दिया गया और ऐसा नहीं करने पर कार्यक्रम रद्द करने की चेतावनी दी गई।
इस विवाद ने कला की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति के अधिकार और सार्वजनिक सांस्कृतिक संस्थानों के नियमों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस नेताओं ने तस्वीरें हटाए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि बीकानेर हाउस प्रबंधन ने अपनी बुकिंग नीति का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा है।
बीकानेर हाउस मैनेजमेंट सोसाइटी के अनुसार, संस्था एक सार्वजनिक सांस्कृतिक केंद्र है, जो कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए काम करती है। यहां आयोजित होने वाली प्रदर्शनियों और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों को संस्था के निर्धारित नियमों और नीतियों का पालन करना होता है।
प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनी में प्रदर्शित की गई कुछ तस्वीरें उसकी नीतियों के अनुरूप नहीं थीं। इसलिए संबंधित तस्वीरों को हटाने के लिए कहा गया। सोसाइटी का कहना है कि जो कलाकृतियां उसकी निर्धारित नीति के अनुरूप होंगी, उनका प्रदर्शन जारी रह सकता है।
प्रबंधन के इस बयान के बाद विवाद का केंद्र यह सवाल बन गया है कि तस्वीरों को किस आधार पर राजनीतिक सामग्री माना गया और संबंधित कलाकार को इसकी जानकारी किस तरह दी गई।
बीकानेर हाउस प्रबंधन ने अपने पक्ष में संस्था की बुकिंग नीति का उल्लेख किया है। उपलब्ध कराए गए विवरण के मुताबिक, प्रदर्शनी में ऐसी तस्वीरें, पेंटिंग या कलाकृतियां प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं है, जिनमें नग्नता, सांप्रदायिकता या राजनीतिक सामग्री शामिल हो।
नीति के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वाली सामग्री को तत्काल हटाया जा सकता है। साथ ही, दिशानिर्देशों का उल्लंघन होने पर कार्यक्रम को बिना रिफंड रद्द करने का प्रावधान भी बताया गया है।
प्रबंधन का तर्क है कि प्रदर्शनी आयोजित करने वाले लोगों को इन शर्तों का पालन करना जरूरी है। हालांकि, इस मामले में विवाद इसलिए बढ़ा है क्योंकि रेहान वाड्रा ने तस्वीरों को हटाने के निर्देश पर आपत्ति जताई और संबंधित तस्वीरों के बारे में स्पष्ट कारण मांगे।
अब इस पूरे मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित तस्वीरों की प्रकृति और बुकिंग नीति के प्रावधानों को लेकर प्रबंधन कितना विस्तृत स्पष्टीकरण देता है।
प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी का नाम 'नो आइडिया इज फाइनल' बताया गया है। यह प्रदर्शनी दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस में आयोजित की जा रही थी। रेहान के मुताबिक, प्रदर्शनी में कुल 105 तस्वीरें लगाई गई थीं, लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले बड़ी संख्या में तस्वीरों को हटाने के लिए कहा गया।
रेहान ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनी के उद्घाटन से पहले लगभग 70 से 75 तस्वीरें हटाने का निर्देश दिया गया। उनके मुताबिक, इन तस्वीरों का संबंध दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों से था।
उनका कहना है कि जब प्रबंधन ने पहली बार कुछ तस्वीरों को नीति के खिलाफ बताया, तो उन्होंने संबंधित तस्वीरों की पहचान और आपत्तियों के बारे में स्पष्ट जानकारी मांगी थी। रेहान के मुताबिक, उन्हें समय रहते संतोषजनक जवाब नहीं मिला और बाद में तस्वीरें हटाने का निर्देश दिया गया।
इस घटना के बाद प्रदर्शनी और उसके आयोजन से जुड़े नियमों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई।
रेहान वाड्रा ने पूरे घटनाक्रम का विवरण देते हुए कहा कि प्रदर्शनी शुरू होने से लगभग 24 घंटे पहले बीकानेर हाउस प्रबंधन ने उनसे संपर्क किया था। उस समय उन्हें बताया गया कि कुछ तस्वीरें संस्था की नीति के खिलाफ हैं।
रेहान के अनुसार, उन्होंने प्रबंधन से पूछा कि किन तस्वीरों पर आपत्ति है और वे इस विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। उनका दावा है कि अगले दिन तक उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बाद डिप्टी रेजिडेंट कमिश्नर की ओर से संपर्क किया गया और तस्वीरें हटाने के लिए कहा गया।
रेहान ने आरोप लगाया कि उन्हें एक नोटिस भेजा गया, जिसमें शाम पांच बजे तक तस्वीरें नहीं हटाने पर भवन को सील करने और प्रदर्शनी रद्द करने की चेतावनी दी गई थी। उनके मुताबिक, नोटिस उन्हें दोपहर करीब 3:30 बजे मिला था।
उन्होंने कहा कि इसके बाद उनकी टीम ने निर्देशों का पालन करते हुए तस्वीरों को प्रदर्शनी स्थल से हटाना शुरू किया। रेहान के दावे के अनुसार, पहले तस्वीरों को पलटकर रखा गया, ताकि केवल फ्रेम का पिछला हिस्सा दिखाई दे। बाद में तस्वीरों को अलग स्थान पर रखा गया, लेकिन इस व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई गई।
ये सभी घटनाक्रम रेहान वाड्रा की ओर से बताए गए हैं। इन्हें लेकर प्रबंधन के विस्तृत पक्ष और संबंधित नोटिस की पूरी सामग्री सामने आने पर विवाद की परिस्थितियां और स्पष्ट हो सकती हैं।
रेहान वाड्रा ने अपने बयान में भारतीय तिरंगे से जुड़ी दो तस्वीरों का भी उल्लेख किया। उनका दावा है कि उन्होंने इन तस्वीरों को प्रदर्शनी में रहने दिया था, लेकिन बाद में उन्हें भी हटाने के लिए कहा गया।
रेहान के मुताबिक, उन्होंने प्रबंधन से सवाल किया कि भारतीय तिरंगे की तस्वीरें संस्था की नीति का उल्लंघन कैसे कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों से लिखित रूप में यह निर्देश देने को कहा था कि तिरंगे की तस्वीर हटाई जाए।
उनका आरोप है कि उन्हें ऐसा कोई लिखित निर्देश नहीं दिया गया, लेकिन बाद में एक तस्वीर स्वयं हटा दी गई। रेहान के अनुसार, अंत में एक तस्वीर ही प्रदर्शनी में बची रही।
तिरंगे की तस्वीर को लेकर सामने आए इस दावे ने विवाद को और संवेदनशील बना दिया है। हालांकि, तस्वीरों की वास्तविक विषयवस्तु, प्रबंधन की आपत्ति और उस समय की पूरी बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इस मामले के सभी पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
रेहान वाड्रा ने आरोप लगाया कि तस्वीरें हटाने के पीछे की वजह जानने के लिए उन्होंने बार-बार स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन उन्हें ठोस कारण नहीं बताया गया।
उनके मुताबिक, नोटिस में केवल यह कहा गया था कि संबंधित सामग्री संस्था की नीति का उल्लंघन करती है। रेहान ने सवाल उठाया कि जब तस्वीरों को हटाने का निर्देश दिया गया, तो प्रत्येक तस्वीर के बारे में स्पष्ट जानकारी और आपत्ति का आधार क्यों नहीं बताया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि वह पहले भी बीकानेर हाउस में कई प्रदर्शनियां आयोजित कर चुके हैं और वहां काम करने वाले लोगों के साथ उनके अच्छे संबंध रहे हैं। ऐसे में उन्हें समझ नहीं आया कि इस बार तस्वीरों को लेकर इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों की गई।
रेहान ने यह आशंका भी जताई कि कार्रवाई के पीछे किसी बाहरी दबाव की भूमिका थी या नहीं, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने किसी विशिष्ट व्यक्ति या संस्था के दबाव की पुष्टि नहीं की।
इस तरह विवाद के दो प्रमुख पहलू सामने आए हैं। एक ओर प्रबंधन अपनी निर्धारित नीतियों के पालन की बात कह रहा है, जबकि दूसरी ओर कलाकार का कहना है कि आपत्ति के स्पष्ट कारण और तस्वीरों को हटाने का आधार उन्हें पर्याप्त रूप से नहीं बताया गया।
रेहान वाड्रा ने इस कार्रवाई को कलाकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संदर्भ में उठाया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक संस्थानों को जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए और केवल किसी सामग्री से असहमति होने के कारण कलाकारों की अभिव्यक्ति पर रोक नहीं लगनी चाहिए।
उनका तर्क है कि कला और कलाकारों के काम का मूल्यांकन स्पष्ट नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए। यदि किसी कलाकृति पर आपत्ति है, तो उसके बारे में कारण बताना और कलाकार को अपना पक्ष रखने का अवसर देना महत्वपूर्ण है।
रेहान ने कहा कि यदि भविष्य में किसी अन्य कलाकार की प्रदर्शनी के साथ भी ऐसी कार्रवाई होती है, तो उसके मामले में भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कला से जुड़े अधिकारों पर विचार किया जाना चाहिए।
इस बयान के बाद कांग्रेस नेताओं ने भी मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सांस्कृतिक गतिविधियों और कलात्मक अभिव्यक्ति से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता होनी चाहिए।
हालांकि, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रश्न उठने के साथ यह पहलू भी महत्वपूर्ण है कि सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शनियों के लिए निर्धारित नियम क्या हैं और उन्हें किस प्रकार लागू किया जाता है।
रेहान वाड्रा की मां और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस विवाद में अपने बेटे का समर्थन किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सत्ता के रवैये को लेकर टिप्पणी की।
प्रियंका गांधी ने लिखा, "जब ताकत रखने वाला कोई व्यक्ति दूसरे की अभिव्यक्ति से डरने लगता है तो उसे एहसास नहीं होता कि वह उस ताकत को पहले ही खो चुका है जिसे बचाने की वह कोशिश कर रहा है।"
उन्होंने आगे लिखा कि रेहान सच्चाई के साथ खड़े हैं और हर खूबसूरत चीज अपना रास्ता खोज लेगी। प्रियंका गांधी ने अपने बेटे पर गर्व जताते हुए कहा कि उन्हें हमेशा उस पर गर्व रहेगा।
प्रियंका गांधी की इस प्रतिक्रिया के बाद मामला केवल एक कला प्रदर्शनी से जुड़ा विवाद नहीं रहा, बल्कि इसने राजनीतिक बहस का रूप भी ले लिया। कांग्रेस नेताओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए सरकार और संबंधित व्यवस्था पर सवाल उठाए।
रेहान वाड्रा के पिता और कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा ने भी अपने बेटे के समर्थन में उसकी पोस्ट साझा की। उन्होंने इस विवाद को लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल उठाए।
रेहान के परिवार की प्रतिक्रियाओं के बाद कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी इस मामले पर अपनी बात रखी। पार्टी के नेताओं ने सवाल किया कि यदि प्रदर्शनी की तस्वीरें निर्धारित नीति के खिलाफ थीं, तो प्रबंधन को संबंधित तस्वीरों की पहचान और आपत्ति के आधार को स्पष्ट करना चाहिए था।
कांग्रेस नेताओं का रुख है कि कला से संबंधित मामलों में नियमों को पारदर्शी तरीके से लागू किया जाना चाहिए। वहीं, बीकानेर हाउस प्रबंधन की ओर से अब तक सामने आए जवाब का मुख्य आधार संस्था की बुकिंग नीति और उसके पालन की अनिवार्यता है।
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने भी रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी से तस्वीरें हटाए जाने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस कार्रवाई को सेंसरशिप के सवाल से जोड़ते हुए कहा कि यदि तिरंगे से जुड़ी तस्वीर भी ऐसी कार्रवाई से सुरक्षित नहीं है, तो समस्या कला में नहीं, बल्कि व्यवस्था में हो सकती है।
खेड़ा के मुताबिक, प्रदर्शनी से करीब 74 कलाकृतियां हटाई गईं और उनमें से लगभग आधी को राजनीतिक सामग्री बताया गया था। उनके बयान के अनुसार, तस्वीरों को हटाने का मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
हालांकि, तस्वीरों की संख्या को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। रेहान ने अपनी बात रखते हुए लगभग 70 से 75 तस्वीरों का उल्लेख किया, जबकि कांग्रेस नेता ने करीब 74 कलाकृतियों की बात कही। इसलिए हटाई गई तस्वीरों की सटीक संख्या की पुष्टि संबंधित प्रदर्शनी की सूची और आधिकारिक दस्तावेजों से की जानी चाहिए।
बीकानेर हाउस प्रबंधन का मुख्य तर्क यह है कि संस्था की बुकिंग नीति सभी प्रदर्शनी आयोजकों पर लागू होती है और प्रदर्शित की जाने वाली सामग्री को निर्धारित शर्तों के अनुरूप होना चाहिए।
प्रबंधन के अनुसार, संस्था कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है, लेकिन यहां आयोजित कार्यक्रमों को उसकी नीतियों का पालन करना होगा। जिन तस्वीरों को नीति के खिलाफ माना गया, उन्हें हटाने के लिए कहा गया।
दूसरी ओर, रेहान वाड्रा का कहना है कि उन्हें तस्वीरों को हटाने के लिए कहा गया, लेकिन प्रत्येक तस्वीर पर आपत्ति का स्पष्ट आधार नहीं बताया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनी रद्द करने और भवन को सील करने की चेतावनी दी गई।
इसलिए पूरे मामले में तीन सवाल महत्वपूर्ण हैं। पहला, किन तस्वीरों को राजनीतिक सामग्री माना गया? दूसरा, क्या संबंधित तस्वीरों पर आपत्ति का स्पष्ट और लिखित आधार कलाकार को उपलब्ध कराया गया? तीसरा, क्या प्रबंधन ने अपनी बुकिंग नीति के अनुरूप निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया?
इन सवालों के जवाब मिलने से विवाद की परिस्थितियों को अधिक स्पष्टता से समझा जा सकेगा।
बीकानेर हाउस की घटना ने सार्वजनिक सांस्कृतिक संस्थानों में राजनीतिक सामग्री के प्रदर्शन को लेकर बहस को सामने ला दिया है। एक ओर संस्थानों के पास अपने परिसरों के इस्तेमाल के लिए नियम और शर्तें हो सकती हैं, तो दूसरी ओर कलाकारों की अभिव्यक्ति, पारदर्शिता और निष्पक्ष व्यवहार भी महत्वपूर्ण विषय हैं।
यदि किसी प्रदर्शनी में राजनीतिक सामग्री पर रोक लगाने की शर्त लागू है, तो उसके दायरे और अर्थ को स्पष्ट करना जरूरी हो सकता है। खासकर तब, जब किसी कलाकृति को राजनीतिक मानने या न मानने पर विवाद पैदा हो जाए।
ऐसी परिस्थितियों में संबंधित नियमों का समान रूप से पालन, निर्णय के कारणों का स्पष्ट उल्लेख और कलाकार को अपना पक्ष रखने का अवसर विवाद को कम करने में मदद कर सकता है।
इस मामले में रेहान वाड्रा ने कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए हैं, जबकि बीकानेर हाउस प्रबंधन ने अपनी नीति का हवाला दिया है। दोनों पक्षों के दावों और उपलब्ध दस्तावेजों की पूरी जानकारी सामने आने के बाद ही इस विवाद के सभी पहलुओं का आकलन किया जा सकेगा।
रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी से तस्वीरें हटाए जाने का विवाद अब कला, राजनीति और संस्थागत नियमों के बीच टकराव का मुद्दा बन गया है। कांग्रेस नेताओं ने कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं, जबकि बीकानेर हाउस प्रबंधन का कहना है कि संस्था की नीतियों का पालन करना जरूरी है।
आगे इस मामले में तस्वीरों की सूची, संबंधित नोटिस, बुकिंग नीति के प्रावधानों और प्रबंधन के विस्तृत स्पष्टीकरण की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इनसे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि तस्वीरें हटाने का निर्णय किन आधारों पर लिया गया और क्या कलाकार की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब दिया गया।
फिलहाल, विवाद के दोनों पक्षों के बयान सामने हैं। रेहान वाड्रा ने कार्रवाई को लेकर आपत्ति जताई है, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस नेताओं ने उनका समर्थन किया है, जबकि बीकानेर हाउस प्रबंधन ने नियमों के पालन को अपनी कार्रवाई का आधार बताया है।
कुल मिलाकर, रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी से तस्वीरें हटाए जाने का मामला अब केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं है। यह सार्वजनिक सांस्कृतिक संस्थानों की नीतियों, कला की स्वतंत्रता, निर्णयों में पारदर्शिता और राजनीतिक सामग्री के प्रदर्शन की सीमाओं को लेकर व्यापक बहस का विषय बन गया है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


