यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 13h ago
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यमुना नदी की सफाई और दिल्ली की जल निकासी व्यवस्था में सुधार को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार मई 2029 से पहले यमुना को स्वच्छ और निर्मल बनाने के अपने संकल्प को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब भाजपा 2029 में जनता के बीच आशीर्वाद मांगने पहुंचेगी, तब यमुना की सफाई के क्षेत्र में किए गए कामों का परिणाम सामने होगा। इस दौरान शाह ने दिल्ली जल बोर्ड की कुल 8,941 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन किया और कई नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने यमुना की दुर्दशा के लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने सीवर के गंदे पानी को नदी में गिरने से रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। शाह ने कहा कि दिल्ली की जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना, सीवर व्यवस्था को मजबूत करना और यमुना को प्रदूषण से मुक्त करना भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि दिल्ली में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यमुना नदी को स्वच्छ बनाने का संकल्प प्राथमिकता के साथ सामने रखा था। इसके बाद संबंधित विभागों और दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ योजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में काम शुरू किया गया।
गृह मंत्री के मुताबिक, यमुना की सफाई के लिए निर्धारित कार्ययोजना के तहत कम समय में 40 प्रतिशत से अधिक काम पूरा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि नदी को स्वच्छ बनाने के लिए केवल घोषणाएं करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए सीवर के पानी का शोधन, गंदे पानी के प्रवाह पर नियंत्रण और जल निकासी व्यवस्था में सुधार जैसे ठोस कदम उठाने जरूरी हैं।
शाह ने कहा कि दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में अब भाजपा की सरकारें हैं। ऐसे में तीनों राज्यों के बीच समन्वय स्थापित कर यमुना की सफाई के लिए समयबद्ध योजना तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि नदी की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित राज्यों को मिलकर काम करना होगा, क्योंकि यमुना का प्रदूषण केवल दिल्ली तक सीमित विषय नहीं है।
उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार निर्धारित समयसीमा के भीतर यमुना की सफाई को लेकर ठोस परिणाम सामने लाने का प्रयास करेगी। शाह ने कहा कि जब 2029 में भाजपा जनता के बीच दोबारा आशीर्वाद मांगने आएगी, तब यमुना को निर्मल बनाने के संकल्प के साथ जनता के सामने उपस्थित होगी।
केंद्रीय गृह मंत्री ने दिल्ली जल बोर्ड की करीब 9 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य राजधानी में गंदे पानी के शोधन, पेयजल आपूर्ति और सीवर व्यवस्था को बेहतर बनाना है। इन परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास को उन्होंने दिल्ली की बुनियादी सुविधाओं में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
शाह के अनुसार, यमुना में प्रदूषण का एक बड़ा कारण सीवर के पानी का पर्याप्त शोधन नहीं होना है। यदि गंदा पानी बिना उपचार के नदी में पहुंचता है, तो नदी की स्वच्छता प्रभावित होती है। इसलिए सरकार का प्रयास है कि सीवर नेटवर्क को मजबूत किया जाए, गंदे पानी को शोधित करने की क्षमता बढ़ाई जाए और लोगों को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना और घरों से निकलने वाले गंदे पानी का उचित निस्तारण सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से विभिन्न परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।
गृह मंत्री ने दावा किया कि इन योजनाओं के पूरा होने से दिल्ली के कई इलाकों में जल निकासी की समस्याओं को दूर करने, सीवर व्यवस्था को बेहतर बनाने और स्वच्छ पानी की उपलब्धता में सुधार लाने में मदद मिलेगी।
अमित शाह ने कहा कि भाजपा सरकार दिल्ली के प्रत्येक घर तक सीवर कनेक्शन पहुंचाने और नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगी। उन्होंने कहा कि शहर के विकास का आकलन केवल बड़ी इमारतों और सड़कों से नहीं किया जा सकता, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि आम नागरिकों को पीने का पानी, सीवर कनेक्शन और साफ-सुथरा वातावरण मिल रहा है या नहीं।
उन्होंने कहा कि सीवर व्यवस्था में सुधार से न केवल लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि गंदे पानी को सीधे यमुना में जाने से रोकने में भी मदद मिलेगी। इसके लिए सीवर नेटवर्क, जल शोधन संयंत्रों और जल निकासी से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करना आवश्यक है।
शाह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य दिल्ली के नागरिकों को ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिनका लाभ उन्हें लंबे समय तक मिल सके। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यमुना की सफाई और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता, क्योंकि दोनों विषय एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
यमुना की सफाई को लेकर अमित शाह ने आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने यमुना की सफाई को लेकर बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन उन वादों को पूरा करने के लिए पर्याप्त काम नहीं किया।
शाह ने केजरीवाल के यमुना में डुबकी लगाने संबंधी पुराने वादे का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता को केवल घोषणाओं और आश्वासनों से संतुष्ट नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, नदी की सफाई के लिए ठोस योजनाओं, प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी की आवश्यकता होती है।
गृह मंत्री ने यमुना से जुड़ी पिछली राजनीतिक घटनाओं का जिक्र करते हुए भी आम आदमी पार्टी पर कटाक्ष किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार ने नदी की स्वच्छता के मामले में अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई।
शाह ने कहा कि भाजपा सरकार का जोर योजनाओं को जमीन पर उतारने और जनता को उनका वास्तविक लाभ पहुंचाने पर है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में जल आपूर्ति और सीवर व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शुरू की गई परियोजनाएं आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
अमित शाह ने यमुना नदी की सफाई के लिए तीन राज्यों के बीच बेहतर तालमेल को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकारें होने से नदी की स्वच्छता के लिए संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है।
यमुना नदी कई क्षेत्रों से होकर गुजरती है और इसके प्रदूषण पर विभिन्न स्थानों से आने वाले गंदे पानी तथा अन्य स्रोतों का प्रभाव पड़ता है। ऐसे में नदी को साफ बनाने के लिए एक राज्य के स्तर पर किए गए प्रयासों के साथ-साथ दूसरे राज्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है।
शाह ने कहा कि सरकार इस विषय को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध कार्ययोजना के आधार पर काम कर रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि बेहतर समन्वय और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से यमुना को स्वच्छ बनाने के लक्ष्य की दिशा में प्रगति होगी।
उन्होंने कहा कि नदी की सफाई का उद्देश्य केवल प्रदूषण कम करना नहीं है, बल्कि दिल्ली के नागरिकों को स्वच्छ वातावरण और बेहतर जल व्यवस्था उपलब्ध कराना भी है।
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने यमुना की सफाई के अलावा राष्ट्रीय राजनीति और चुनावी मुद्दों पर भी विपक्ष को घेरा। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों द्वारा उठाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष चुनावों में हार के बाद विभिन्न बहाने बनाता है।
शाह ने कहा कि कभी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम को लेकर सवाल उठाए जाते हैं, तो कभी मतदाता सूची और वोट चोरी को लेकर आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि चुनावी परिणाम अनुकूल नहीं आने पर चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना उसकी राजनीतिक रणनीति बन गई है।
उन्होंने कहा, "दिल्ली में एक अलग खेल चल रहा है। लगातार सरकारें भारतीय जनता पार्टी की चुनकर आ रही हैं। उनको पेट में दर्द है, इसलिए इन्होंने वोट चोरी का बहाना बनाया। वो कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी लोगों के वोट से चुनकर नहीं आती, वोट चोरी करती है।"
गृह मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि होता है और राजनीतिक दलों को चुनावी परिणामों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि यदि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए जाते हैं, तो उन आरोपों को प्रमाणों और उचित प्रक्रियाओं के माध्यम से सामने लाया जाना चाहिए।
अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस वोट चोरी का मुद्दा उठाकर मतदाता सूची और घुसपैठियों से संबंधित सवालों पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
शाह ने राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि देश की जनता उनकी राजनीति को समझ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक विवाद का रूप दे रहा है।
गृह मंत्री ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों को इस विषय पर दोहरे मानदंड नहीं अपनाने चाहिए।
उन्होंने विपक्ष के प्रदर्शन और चुनाव आयोग को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी निशाना साधा। शाह ने कहा कि केवल राजनीतिक विरोध के आधार पर जनता के जनादेश को खारिज नहीं किया जा सकता।
अमित शाह ने अपने भाषण में कांग्रेस के विभिन्न राज्यों में चुनावी प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी को कई राज्यों में लंबे समय से सत्ता हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर, दिल्ली और असम का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए। शाह ने तर्क दिया कि जिन राज्यों में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता में नहीं लौटी, वहां की स्थिति को केवल हाल के चुनावी मुद्दों या केंद्र की मौजूदा सरकार से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपनी राजनीतिक स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए और जनता के बीच अपने काम तथा नीतियों के आधार पर समर्थन हासिल करने का प्रयास करना चाहिए।
शाह के इस बयान का उद्देश्य कांग्रेस के वोट चोरी संबंधी आरोपों का राजनीतिक जवाब देना और पार्टी के चुनावी प्रदर्शन को लेकर सवाल खड़े करना था।
केंद्रीय गृह मंत्री ने अपने संबोधन में भाजपा के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष जिस तरह की राजनीति कर रहा है, उसके आधार पर उन्हें विश्वास है कि भाजपा लंबे समय तक सत्ता में बनी रहेगी।
शाह ने कहा, "जब मैं कहता हूं कि 30 साल तक भाजपा की सरकार रहेगी, तो ये जनता को कहते हैं कि देखो वोट चोरी है, वरना अमित शाह जी को कैसे मालूम पड़ा।"
उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह देश की जनता के बीच रहते हैं और उन्हें जनता के मूड तथा राजनीतिक परिस्थितियों का आकलन करने के लिए बार-बार विदेश जाने की जरूरत नहीं है।
गृह मंत्री ने कांग्रेस की राजनीति को नकारात्मक बताते हुए कहा कि विपक्ष को केवल आरोप लगाने के बजाय जनता का विश्वास जीतने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक रणनीति उसे सत्ता में वापस लाने में सफल नहीं होगी।
शाह ने अपने भाषण के दौरान यह भी कहा कि 2014 से 2030 तक कांग्रेस की सरकार बनने की संभावना नहीं है। उनका यह बयान विपक्ष के खिलाफ भाजपा के राजनीतिक हमले का प्रमुख हिस्सा रहा।
अमित शाह ने चुनाव आयोग और न्यायपालिका को लेकर विपक्ष के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब चुनावी परिणाम विपक्ष के पक्ष में आते हैं, तब चुनाव आयोग और मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाए जाते, लेकिन हार मिलने पर संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर आरोप लगाए जाते हैं।
शाह ने केरल और तेलंगाना में चुनावी जीत का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष को सभी परिस्थितियों में एक समान दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
उन्होंने अदालतों के फैसलों का जिक्र करते हुए भी कहा कि किसी राजनीतिक दल को केवल अपने पक्ष में आने वाले निर्णयों को सही और विरोध में आने वाले निर्णयों को गलत नहीं बताना चाहिए।
गृह मंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखना आवश्यक है। उनके अनुसार, राजनीतिक मतभेदों को संस्थाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठाने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
अमित शाह ने राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ राज्यों से कार्यकर्ताओं को इकट्ठा करके दिल्ली में प्रदर्शन करने से जनता के जनादेश को झुठलाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि देश की जनता राजनीतिक दलों की गतिविधियों को देख रही है और उनके बयानों तथा कार्यों का आकलन कर रही है। शाह ने विपक्ष से आग्रह किया कि वह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करे और जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने पर ध्यान दे।
गृह मंत्री ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर भी राजनीतिक कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को देश के लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझना चाहिए।
शाह के बयान से स्पष्ट था कि यमुना सफाई के कार्यक्रम के मंच से उन्होंने दिल्ली की बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति, विपक्ष की रणनीति और चुनावी मुद्दों पर भी भाजपा का पक्ष रखा।
अमित शाह ने आम आदमी पार्टी पर हमला जारी रखते हुए पंजाब की राजनीति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने आंदोलन के माध्यम से राजनीतिक समर्थन हासिल किया, लेकिन उनके अनुसार, शासन और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों पर उसे जवाब देना चाहिए।
शाह ने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा, "केजरीवाल जी, मेरे पास आपकी हर बात का जवाब है, मगर मैं जवाब तब दूंगा जब पंजाब में भी आप सरकार को हम उखाड़कर फेंक देंगे।"
इस बयान के माध्यम से गृह मंत्री ने पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार को चुनौती दी और संकेत दिया कि भाजपा वहां भी पार्टी के खिलाफ अपना राजनीतिक अभियान तेज करेगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने के बाद जनता की अपेक्षाओं को पूरा नहीं किया। हालांकि, ये आरोप अमित शाह के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और इन पर आम आदमी पार्टी का पक्ष अलग हो सकता है।
शाह ने कहा कि भाजपा विपक्षी दलों की राजनीति का जवाब जनता के बीच जाकर देगी और अपने काम के आधार पर समर्थन मांगेगी।
अमित शाह ने दिल्ली में कूड़े के बड़े ढेरों और ठोस कचरा प्रबंधन के मुद्दे पर भी पिछली सरकारों को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि कूड़े के पहाड़ों को लेकर लंबे समय तक राजनीति की गई, लेकिन समस्या का समाधान करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए।
शाह ने कहा कि भाजपा सरकार ने दिल्ली में कूड़े के पहाड़ों को कम करने की दिशा में काम किया है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दो वर्षों में इन स्थानों पर उल्लेखनीय बदलाव दिखाई देगा और वहां बगीचे जैसी सुविधाएं विकसित करने की दिशा में प्रगति होगी।
उन्होंने कहा कि राजधानी को स्वच्छ बनाने के लिए केवल नदी की सफाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कचरा प्रबंधन, सीवर व्यवस्था, जल निकासी और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता पर भी ध्यान देना होगा।
गृह मंत्री के अनुसार, दिल्ली की सफाई और पर्यावरण सुधार से संबंधित विभिन्न प्रयासों का लाभ नागरिकों को मिलना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार इन समस्याओं के समाधान के लिए काम कर रही है।
यमुना नदी को स्वच्छ बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सीवर प्रबंधन को सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक माना जाता है। दिल्ली में घरेलू और अन्य अपशिष्ट जल का उचित उपचार सुनिश्चित करना नदी के प्रदूषण को कम करने के प्रयासों का अहम हिस्सा है।
अमित शाह ने अपने संबोधन में सीवर के गंदे पानी को यमुना में जाने से रोकने और जल शोधन की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड की परियोजनाओं का उद्देश्य भी इसी प्रकार की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है।
यमुना की सफाई के लिए जल शोधन संयंत्रों की क्षमता, सीवर नेटवर्क की स्थिति, नालों से आने वाले प्रदूषण और परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन जैसे विषय महत्वपूर्ण होंगे। इन व्यवस्थाओं में सुधार के साथ नियमित निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल भी जरूरी है।
सरकार की ओर से प्रस्तुत लक्ष्य को देखते हुए आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परियोजनाओं के माध्यम से कितना गंदा पानी शोधित किया जाता है, सीवर कनेक्शन का विस्तार कितनी तेजी से होता है और नदी के पानी की गुणवत्ता में कितना सुधार आता है।
अमित शाह ने दिल्ली की जनता को भरोसा दिलाया कि यमुना को स्वच्छ बनाने और राजधानी की जल व्यवस्था सुधारने के लिए शुरू की गई परियोजनाओं से लोगों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य निर्धारित समयसीमा के भीतर परिणाम देना है।
8,941 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को लेकर सरकार के सामने अब उनके प्रभावी क्रियान्वयन की चुनौती होगी। इन योजनाओं की सफलता का आकलन केवल खर्च की गई राशि या उद्घाटन की संख्या से नहीं, बल्कि नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं और यमुना के प्रदूषण में होने वाली वास्तविक कमी से किया जाएगा।
यदि सीवर नेटवर्क का विस्तार, गंदे पानी का उपचार और जल निकासी व्यवस्था में सुधार निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप होता है, तो इससे दिल्ली की स्वच्छता और पर्यावरण की स्थिति बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, यमुना को पूरी तरह स्वच्छ बनाने के लिए निरंतर प्रयास, नियमित निगरानी और विभिन्न एजेंसियों की जवाबदेही आवश्यक होगी। इसलिए आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं की प्रगति और नदी की जल गुणवत्ता में होने वाले बदलाव पर विशेष नजर रहेगी।
अमित शाह का यह बयान कि भाजपा 2029 में निर्मल यमुना के साथ जनता के सामने आएगी, दिल्ली में नदी की सफाई को लेकर सरकार की राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
एक ओर सरकार 8,941 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के जरिए सीवर, पेयजल और जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष पिछली सरकारों की भूमिका और मौजूदा सरकार के दावों पर सवाल उठा सकता है।
ऐसे में यमुना की सफाई का मुद्दा आने वाले समय में दिल्ली की राजनीति का महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है। जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही होगा कि घोषित योजनाओं से नदी के प्रदूषण में कितनी कमी आती है, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता कितनी बेहतर होती है और सीवर संबंधी समस्याओं का समाधान कितनी तेजी से होता है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार यमुना को स्वच्छ बनाने के अपने संकल्प को लेकर आगे बढ़ रही है। अब इन दावों की वास्तविक सफलता परियोजनाओं के क्रियान्वयन और निर्धारित समयसीमा तक सामने आने वाले परिणामों से तय होगी।
फिलहाल, अमित शाह का संदेश स्पष्ट है—दिल्ली की जल व्यवस्था में सुधार, हर घर तक सीवर कनेक्शन और यमुना की सफाई सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि 2029 में जनता के बीच पहुंचने तक यमुना को निर्मल बनाने की दिशा में ठोस परिणाम सामने होंगे।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


