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- 13h ago
नई दिल्ली। लालकिला मैदान में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध लव कुश रामलीला की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। शुक्रवार को आयोजित फुल ड्रेस रिहर्सल में रामायण के प्रमुख पात्रों की भव्य वेशभूषा, प्रभावशाली संवाद अदायगी और दमदार अभिनय ने आयोजन की तैयारियों की झलक प्रस्तुत की। इस दौरान लंकापति रावण का करीब 11 किलोग्राम वजनी चमचमाता मुकुट, उसकी रौबदार आवाज और भारी-भरकम पोशाक विशेष आकर्षण का केंद्र रही। वहीं, प्रभु श्रीराम की सौम्य छवि, माता सीता का गरिमामय व्यक्तित्व और महाबली हनुमान का ओजस्वी रूप भी दर्शकों का ध्यान खींचने वाला रहा।
रामलीला के मंचन से पहले हुई इस रिहर्सल में कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों के संवाद, भाव-भंगिमाओं, मंच पर प्रवेश और अभिनय के विभिन्न पहलुओं का अभ्यास किया। भव्य सेट, पारंपरिक परिधानों और आधुनिक तकनीक के समन्वय के साथ इस वर्ष भी रामायण की कथा को प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत करने की तैयारी की गई है। आयोजन समिति का प्रयास है कि दर्शकों को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन, माता सीता के त्याग, लक्ष्मण की निष्ठा, हनुमान जी की भक्ति और रावण के अहंकार से जुड़े प्रसंगों का जीवंत अनुभव कराया जाए।
लव कुश रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने इस अवसर पर रामलीला के प्रमुख किरदार निभाने वाले कलाकारों को मीडिया से रूबरू कराया। इस वर्ष फिल्म और टेलीविजन जगत से जुड़े कई कलाकार रामायण के प्रमुख पात्रों को मंच पर साकार करेंगे। आयोजन में विशाल मंच, आकर्षक वेशभूषा, विशेष मेकअप, आधुनिक लाइटिंग और भव्य दृश्य संयोजन के जरिए रामायण की कथा को दर्शकों तक पहुंचाने की तैयारी की गई है।
इस वर्ष प्रभु श्रीराम की महत्वपूर्ण भूमिका अभिनेता देवेश शर्मा निभा रहे हैं। टेलीविजन जगत में अपने अभिनय से पहचान बनाने वाले देवेश शर्मा ‘साम दाम दंड’ सहित कई परियोजनाओं में काम कर चुके हैं। इसके अलावा वह ‘युग’ धारावाहिक के 251 एपिसोड में मुख्य भूमिका निभा चुके हैं। अब उन्हें लालकिला मैदान की प्रतिष्ठित रामलीला में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का चरित्र निभाने का अवसर मिला है।
देवेश शर्मा ने इस भूमिका को अपने लिए विशेष सौभाग्य और जिम्मेदारी का विषय बताया। उन्होंने कहा कि देश की प्रसिद्ध लव कुश रामलीला कमेटी की ओर से प्रभु श्रीराम का किरदार निभाने के लिए चुना जाना उनके लिए गर्व की बात है। उनके अनुसार, श्रीराम का चरित्र केवल अभिनय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आस्था, मर्यादा, आदर्श और जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ है।
श्रीराम का चरित्र भारतीय जनमानस में सत्य, धर्म, त्याग, कर्तव्य और आदर्श जीवन के प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित है। ऐसे में इस भूमिका को मंच पर प्रस्तुत करने वाले कलाकार के लिए संवादों की शुद्धता के साथ-साथ चेहरे के भाव, शारीरिक भाषा और चरित्र की गरिमा बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होता है।
देवेश शर्मा के सामने चुनौती होगी कि वे श्रीराम के शांत, करुणामय और मर्यादित व्यक्तित्व को इस तरह प्रस्तुत करें कि विशाल मैदान में मौजूद दर्शक भी उनके अभिनय से जुड़ सकें। रामलीला के पारंपरिक स्वरूप में श्रीराम की विनम्रता और दृढ़ता दोनों को विशेष महत्व दिया जाता है। यही गुण इस पात्र को विशिष्ट बनाते हैं।
माता सीता की भूमिका अभिनेत्री कावेरी प्रियम निभा रही हैं। वह टेलीविजन के कई चर्चित धारावाहिकों और ओटीटी परियोजनाओं में काम कर चुकी हैं। उनके प्रमुख धारावाहिकों में ‘ये रिश्ते हैं प्यार के’, ‘दिल माने ना’, ‘गुम है किसी के प्यार में’, ‘शक्ति’ और ‘जिद्दी’ शामिल हैं।
कावेरी प्रियम ने माता सीता के चरित्र को अपने अभिनय करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक बताया है। उनके अनुसार, माता सीता का व्यक्तित्व धैर्य, त्याग, आत्मसम्मान, मर्यादा और आंतरिक शक्ति का प्रतीक है। इस चरित्र को मंच पर जीवंत करना उनके लिए एक विशेष अनुभव है।
रामायण में माता सीता का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके जीवन से जुड़े प्रसंग धैर्य, कठिन परिस्थितियों में दृढ़ता और आत्मसम्मान की भावना को सामने लाते हैं। उनके चरित्र में कोमलता के साथ अदम्य साहस भी दिखाई देता है। यही कारण है कि माता सीता की भूमिका निभाने वाले कलाकार को भावनात्मक दृश्यों और गंभीर संवादों में विशेष संतुलन बनाए रखना पड़ता है।
लव कुश रामलीला के विशाल मंच पर कावेरी प्रियम के सामने इस चरित्र की संवेदनशीलता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की चुनौती होगी। उनकी वेशभूषा, आभूषण, मेकअप और संवाद अदायगी को भी माता सीता के पारंपरिक स्वरूप के अनुरूप तैयार किया जा रहा है, ताकि मंच पर उनके व्यक्तित्व की गरिमा स्पष्ट रूप से उभर सके।
महाबली हनुमान की भूमिका अभिनेता टाइगर पंकज कामद निभा रहे हैं। छोटे पर्दे पर विभिन्न पौराणिक और ऐतिहासिक चरित्रों को निभाने का अनुभव रखने वाले पंकज कामद अंगद, इंद्रदेव, परशुराम और युधिष्ठिर जैसे किरदारों में नजर आ चुके हैं। कई अन्य टेलीविजन धारावाहिकों में भी उन्होंने अभिनय किया है।
पंकज कामद के मुताबिक, विशाल मंच पर हजारों दर्शकों के सामने हनुमान जी की भूमिका को पूरी ऊर्जा, भक्ति और भावनाओं के साथ प्रस्तुत करना बड़ी चुनौती है। उन्होंने इस भूमिका को अपने अभिनय करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण और यादगार अनुभवों में से एक बताया।
महाबली हनुमान रामायण के ऐसे पात्र हैं, जिनका व्यक्तित्व अद्भुत बल, साहस, समर्पण और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट भक्ति से जुड़ा हुआ है। उनके चरित्र में वीरता के साथ विनम्रता और सेवाभाव का भी विशेष स्थान है। लंका में प्रवेश, माता सीता की खोज, लंका दहन और संजीवनी बूटी लाने जैसे प्रसंग हनुमान जी के पराक्रम और निष्ठा को दर्शाते हैं।
रामलीला के मंच पर हनुमान जी की भूमिका को प्रभावशाली बनाने के लिए कलाकार को संवादों के साथ शारीरिक ऊर्जा, भाव-भंगिमाओं और मंचीय उपस्थिति पर भी ध्यान देना होता है। विशाल मैदान में दर्शकों तक किरदार का प्रभाव पहुंचाने के लिए आवाज, गति और अभिनय के बीच संतुलन आवश्यक है। पंकज कामद इसी ऊर्जा और भावनात्मक जुड़ाव के साथ अपने किरदार को प्रस्तुत करने की तैयारी में जुटे हैं।
इस वर्ष रामलीला का सबसे चर्चित आकर्षण लंकापति रावण का किरदार माना जा रहा है, जिसे अभिनेता राजप्रेमी निभाएंगे। हिंदी फिल्म और टेलीविजन जगत में काम कर चुके राजप्रेमी ‘वीर’, ‘गदर’ और धारावाहिक ‘महाबली हनुमान’ सहित कई परियोजनाओं से जुड़े रहे हैं। इस बार वह अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली संवाद अदायगी और भव्य वेशभूषा के जरिए रावण के व्यक्तित्व को मंच पर साकार करेंगे।
रावण का चरित्र रामायण के सबसे प्रभावशाली और जटिल पात्रों में से एक है। वह लंका का शक्तिशाली राजा, विद्वान और पराक्रमी योद्धा था, लेकिन उसका अहंकार और अनुचित निर्णय अंततः उसके विनाश का कारण बने। रामलीला में रावण की भूमिका को प्रभावी बनाने के लिए उसकी शक्ति, गर्व, क्रोध और अहंकार को अभिनय के माध्यम से उभारना महत्वपूर्ण होता है।
राजप्रेमी के किरदार की खासियत उनकी रौबदार आवाज और मंच पर दमदार उपस्थिति होगी। रावण के संवादों को इस तरह प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है कि उसके व्यक्तित्व की भव्यता और नाटकीय प्रभाव दर्शकों तक पहुंचे। इसके लिए आवाज के उतार-चढ़ाव, संवादों के बीच ठहराव, चेहरे के भाव और शारीरिक हाव-भाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
रावण की वेशभूषा में करीब 11 किलोग्राम वजन का चमचमाता मुकुट सबसे प्रमुख आकर्षण है। इसके साथ गहरे काले रंग की भारी पोशाक और विशेष आभूषण तैयार किए गए हैं। मुकुट का आकार, चमक और पोशाक की भव्यता मंच पर रावण की शाही छवि को उभारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
रिहर्सल के दौरान रावण के इस रूप ने रामलीला की तैयारियों को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी। आयोजन समिति का प्रयास है कि रावण के प्रवेश से लेकर उसके प्रमुख संवादों और युद्ध से जुड़े प्रसंगों तक मंचीय प्रभाव बना रहे।
रामलीला के भव्य स्वरूप को प्रभावशाली बनाने में कलाकारों के अभिनय के साथ उनकी वेशभूषा की भी अहम भूमिका होती है। इस वर्ष प्रमुख पात्रों की पोशाक तैयार करने की जिम्मेदारी अनुभवी कॉस्ट्यूम डिजाइनर विष्णु पाटिल और उनकी टीम संभाल रही है। विष्णु पाटिल बी.आर. चोपड़ा के धारावाहिक ‘महाभारत’, ‘देवों के देव महादेव’ सहित बड़े टेलीविजन प्रोजेक्ट और फिल्मों के लिए कॉस्ट्यूम तैयार कर चुके हैं।
विष्णु पाटिल पिछले करीब दो महीनों से रामलीला के प्रमुख पात्रों की वेशभूषा पर काम कर रहे हैं। इस दौरान पात्रों की पहचान, उनकी भूमिका, पारंपरिक स्वरूप और मंच पर दिखाई देने वाले प्रभाव को ध्यान में रखकर पोशाकों तथा आभूषणों की तैयारी की गई है।
उन्होंने बताया कि हर साल रावण के लिए नए अंदाज के अस्त्र-शस्त्र, मुकुट और विशिष्ट आभूषण तैयार करना बड़ी चुनौती होती है। रावण का चरित्र अपनी भव्यता और राजसी व्यक्तित्व के लिए जाना जाता है, इसलिए उसकी पोशाक में ऐसे रंगों, डिजाइन और आभूषणों का उपयोग किया जाता है, जो उसके प्रभावशाली स्वरूप को सामने ला सकें।
इस बार रावण के लिए गहरे काले रंग की भारी-भरकम पोशाक तैयार की गई है। इसके साथ करीब 11 किलोग्राम वजन का चमचमाता मुकुट बनाया गया है। इस मुकुट को तैयार करने में डिजाइन, आकार, चमक और मंच पर उसकी दृश्य उपस्थिति को ध्यान में रखा गया है। विशाल मंच और दर्शकों से दूरी को देखते हुए वेशभूषा के ऐसे तत्व महत्वपूर्ण हो जाते हैं, जो दूर से भी पात्र की पहचान स्पष्ट कर सकें।
श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की पोशाकों में बनारस और कांचीपुरम की पारंपरिक परिधानों से प्रेरणा ली गई है। इन पारंपरिक शैलियों के माध्यम से पात्रों के सांस्कृतिक और धार्मिक स्वरूप को उभारने की कोशिश की गई है। वहीं, रावण की पोशाक के लिए मुंबई और राजस्थान से विशेष सामग्री और डिजाइन तैयार करवाए गए हैं।
कॉस्ट्यूम डिजाइन टीम के लिए चुनौती केवल सुंदर पोशाक तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें मंचीय प्रस्तुति के अनुकूल बनाना भी है। कलाकारों को लंबे समय तक मंच पर रहना होता है और कई दृश्यों में तेज गति से अभिनय करना पड़ता है। ऐसे में वेशभूषा की भव्यता के साथ उसकी उपयोगिता और कलाकारों की सहजता भी महत्वपूर्ण रहती है।
रामलीला में प्रत्येक पात्र की पहचान को स्पष्ट बनाने के लिए मेकअप और रूप-सज्जा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रमुख कलाकारों के मेकअप, स्टाइल और लुक की जिम्मेदारी अनुभवी मेकअप डिजाइनर पंकज जीवराज चौटलिया संभाल रहे हैं। वह करीब तीन दशकों से मनोरंजन जगत में सक्रिय हैं और ‘बुलेट राजा’ तथा ‘रागिनी एमएमएस’ सहित कई फिल्मों एवं टेलीविजन परियोजनाओं से जुड़े रहे हैं।
चौटलिया अरुण गोविल, दीपिका, दारा सिंह, सोनाक्षी सिन्हा, राज बब्बर, मनोज तिवारी और विद्युत जामवाल सहित अनेक कलाकारों के साथ काम कर चुके हैं। इस बार वह मुंबई से अपनी टीम के साथ रामलीला में आए हैं और प्रमुख पात्रों के लिए विशेष मेकअप तथा अलग-अलग लुक तैयार कर रहे हैं।
रामलीला में मेकअप की भूमिका सामान्य मंचीय प्रस्तुति से कुछ अलग होती है। विशाल मैदान में बैठे दर्शकों को पात्रों के चेहरे के भाव और उनकी पहचान स्पष्ट दिखाई देनी चाहिए। इसके लिए चेहरे की बनावट, रंगों के संयोजन, आभूषणों और वेशभूषा के साथ मेकअप का तालमेल आवश्यक होता है।
श्रीराम और माता सीता के लिए सौम्य तथा गरिमामय रूप तैयार किया जा रहा है, जबकि हनुमान जी के व्यक्तित्व में वीरता और ऊर्जा को उभारने पर ध्यान दिया जाएगा। दूसरी ओर, रावण की रूप-सज्जा में उसके राजसी, शक्तिशाली और नाटकीय व्यक्तित्व को प्रमुखता दी जाएगी।
मेकअप टीम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंच पर प्रवेश करते ही दर्शक पात्र की पहचान कर सकें और उसके चरित्र के अनुरूप भावनात्मक जुड़ाव महसूस करें। वेशभूषा, आभूषण, मेकअप और प्रकाश व्यवस्था के समन्वय से रामलीला के प्रमुख दृश्य अधिक प्रभावशाली बनने की उम्मीद है।
लव कुश रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार के अनुसार, इस वर्ष आयोजन के लिए करीब 140 फुट लंबा, 60 फुट चौड़ा और 45 फुट ऊंचा विशाल मंच तैयार किया गया है। मंच पर भव्य मीनाक्षी मंदिर का सेट सजाया गया है, जो आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेगा।
इतने बड़े आकार के मंच और सेट को तैयार करना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसके निर्माण में गुजरात, कोलकाता, महाराष्ट्र, मयूरा और दिल्ली के करीब 40 कुशल कारीगर जुटे हैं। अलग-अलग स्थानों से आए कारीगर अपने अनुभव और तकनीकी कौशल के जरिए मंच को भव्य स्वरूप देने में योगदान दे रहे हैं।
मीनाक्षी मंदिर की स्थापत्य शैली भारतीय मंदिर कला की समृद्ध परंपरा से जुड़ी हुई है। मंच पर इस तरह के सेट का उपयोग रामलीला को दृश्य रूप से आकर्षक बनाने के साथ भारतीय स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत करने का अवसर भी देता है।
विशाल मंच पर रामायण के विभिन्न प्रसंगों के अनुरूप दृश्य संयोजन तैयार किए जाएंगे। पात्रों के प्रवेश, संवाद, युद्ध से जुड़े प्रसंग और अन्य महत्वपूर्ण दृश्यों के दौरान प्रकाश तथा मंच सज्जा का तालमेल प्रस्तुति को अधिक प्रभावशाली बनाने में मदद करेगा।
अर्जुन कुमार ने कहा कि कमेटी इस वर्ष भी भव्य मंच सज्जा, प्रभावशाली अभिनय, आकर्षक वेशभूषा और आधुनिक तकनीक के समन्वय से रामायण की गाथा प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध है। आयोजन की तैयारी में कलाकारों से लेकर तकनीकी टीम और कारीगरों तक सभी लोग जुटे हुए हैं।
लव कुश रामलीला की विशेषता पारंपरिक धार्मिक कथा को आधुनिक मंचीय तकनीक के साथ प्रस्तुत करना रही है। इस वर्ष भी विशाल सेट, अत्याधुनिक लाइटिंग, प्रभावशाली ध्वनि व्यवस्था और फिल्म-टेलीविजन जगत के कलाकारों की मौजूदगी के जरिए दर्शकों को रामायण के प्रसंगों से जोड़ने की तैयारी की गई है।
आधुनिक तकनीक का उपयोग मंच पर दृश्यों की स्पष्टता, संवादों की प्रभावी प्रस्तुति और कथा के नाटकीय प्रभाव को बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, रामलीला का मूल आकर्षण उसकी कथा, पात्रों के आदर्श और धार्मिक-सांस्कृतिक संदेश में ही निहित रहता है।
श्रीराम की मर्यादा, माता सीता का धैर्य, लक्ष्मण की निष्ठा, हनुमान जी की भक्ति और रावण के अहंकार से जुड़ी कथा पीढ़ियों से भारतीय समाज में लोकप्रिय रही है। रामलीला जैसे सार्वजनिक आयोजन इन प्रसंगों को सामूहिक रूप से देखने और समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
आयोजन समिति की कोशिश है कि पारंपरिक कथा की गरिमा बनाए रखते हुए मंचन को इस तरह प्रस्तुत किया जाए कि अलग-अलग आयु वर्ग के दर्शक उससे जुड़ सकें। कलाकारों की लोकप्रियता और तकनीकी भव्यता दर्शकों को आकर्षित करने के साथ रामायण की कथा को नए मंचीय रूप में प्रस्तुत करने का माध्यम बनेंगी।
लव कुश रामलीला कमेटी के महासचिव सुभाष गोयल ने बताया कि इस वर्ष रामलीला का मंचन 11 अक्तूबर से 21 अक्तूबर 2026 तक किया जाएगा। दशहरा 20 अक्तूबर को मनाया जाएगा। आयोजन के दौरान रामायण के प्रमुख प्रसंगों को क्रमबद्ध तरीके से मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।
सुभाष गोयल के अनुसार, भव्य मंच, अत्याधुनिक लाइटिंग, शानदार सेट, फिल्म और टेलीविजन कलाकारों की मौजूदगी तथा भारतीय संस्कृति की झलक इस वर्ष के आयोजन के प्रमुख आकर्षण होंगे। कमेटी का प्रयास है कि दर्शकों को धार्मिक आस्था के साथ मनोरंजन और सांस्कृतिक अनुभव का भी अवसर मिले।
उन्होंने बताया कि 11 अक्तूबर को रामलीला के शुभारंभ पर गणपति पूजन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और सांसद प्रवीण खंडेलवाल के करकमलों से संपन्न होगा। उद्घाटन कार्यक्रम के साथ ही रामलीला के मंचन की औपचारिक शुरुआत होगी।
आयोजन के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कलाकार अपनी भूमिकाओं का अभ्यास कर रहे हैं, कॉस्ट्यूम और मेकअप टीमें अंतिम रूप-सज्जा में जुटी हैं तथा कारीगर मंच और सेट को तैयार करने में लगे हैं।
फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान रावण का 11 किलोग्राम वजनी मुकुट और उसकी भव्य वेशभूषा विशेष चर्चा में रही। रावण के किरदार में राजप्रेमी की रौबदार आवाज, दमदार संवाद और मंच पर प्रभावशाली उपस्थिति इस वर्ष रामलीला के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी के पात्रों को भी पारंपरिक स्वरूप और विशेष रूप-सज्जा के साथ तैयार किया जा रहा है। इन किरदारों के माध्यम से रामायण के विभिन्न भावों—मर्यादा, करुणा, धैर्य, भक्ति, वीरता और धर्म की स्थापना—को मंच पर सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
लालकिला मैदान में होने वाली लव कुश रामलीला धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के रूप में दर्शकों को एक साथ जोड़ने का अवसर प्रदान करती है। इस वर्ष भव्य मंच, विशाल मीनाक्षी मंदिर सेट, अनुभवी कलाकारों, विशेष कॉस्ट्यूम डिजाइन और आधुनिक तकनीक के समन्वय से आयोजन को आकर्षक बनाने की तैयारी है।
11 अक्तूबर से शुरू होने वाले मंचन को लेकर कलाकारों और आयोजन समिति की तैयारियां अपने अंतिम दौर में हैं। अब दर्शकों की निगाहें रामलीला के शुभारंभ और मंच पर साकार होने वाले उन प्रमुख दृश्यों पर टिकी हैं, जिनमें श्रीराम की मर्यादा, हनुमान जी की भक्ति और रावण की भव्यता एक साथ दिखाई देगी।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


