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- 13h ago
नई दिल्ली। राजस्थान ने देश के स्कूली शिक्षा के राष्ट्रीय परिदृश्य में एक बार फिर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। एजुकेशनवर्ल्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग 2026-27 में राजस्थान के अलग-अलग शहरों के सरकारी, निजी, बोर्डिंग, डे स्कूल, इंटरनेशनल और बजट प्राइवेट स्कूलों ने विभिन्न श्रेणियों में उल्लेखनीय स्थान हासिल किए हैं। राज्य के कई संस्थान राष्ट्रीय स्तर की सूचियों में शीर्ष 10 में शामिल हुए हैं, जबकि कुछ स्कूलों ने अपनी-अपनी श्रेणियों में शीर्ष तीन में स्थान बनाकर राजस्थान की स्कूली शिक्षा की विविधता को सामने रखा है।
जयपुर, अजमेर, उदयपुर, पिलानी, नागौर, आबू रोड, अलवर, झुंझुनूं और धौलपुर के स्कूलों की उपलब्धियों ने इस राष्ट्रीय रैंकिंग में राजस्थान की उपस्थिति को व्यापक बनाया है। खास बात यह है कि सूची में केवल पारंपरिक रूप से प्रतिष्ठित निजी स्कूल ही नहीं, बल्कि सरकारी और बजट प्राइवेट स्कूल भी राष्ट्रीय स्तर पर जगह बनाने में सफल रहे हैं।
एजुकेशनवर्ल्ड ने बेंगलुरु स्थित एजेड रिसर्च पार्टनर्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से लगातार 20वीं वार्षिक एजुकेशनवर्ल्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग जारी की है। देशभर में किए गए इस सर्वेक्षण में 34 शहरों और 22 राज्यों को शामिल किया गया।
रैंकिंग प्रक्रिया में करीब 18,000 अभिभावकों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और शिक्षा सलाहकारों ने भाग लिया। देश के लगभग 4,500 स्कूलों का विभिन्न मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया गया। इस व्यापक सर्वेक्षण के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में स्कूलों की स्थिति निर्धारित की गई।
इस रैंकिंग का उद्देश्य केवल स्कूलों को क्रम देना नहीं, बल्कि स्कूली शिक्षा के अलग-अलग मॉडलों, उनकी विशेषताओं और शैक्षिक व्यवस्थाओं को सामने लाना भी बताया गया है।
राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित ‘आइवी लीग’ सूची में राजस्थान के तीन स्कूलों ने स्थान बनाया। इससे राज्य के स्कूलों की राष्ट्रीय पहचान को एक और मजबूती मिली।
अजमेर का मेयो कॉलेज बोर्डिंग स्कूल श्रेणी में 5-स्टार रेटिंग के साथ शामिल हुआ। वहीं जयपुर का जयश्री पेरिवाल इंटरनेशनल स्कूल इंटरनेशनल डे-कम-बोर्डिंग स्कूल श्रेणी में 5-स्टार रेटिंग के साथ सूचीबद्ध हुआ।
इसी सूची में जोधपुर का राजमाता कृष्णा कुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूल डे स्कूल श्रेणी में 2-स्टार रेटिंग के साथ शामिल हुआ।
इन संस्थानों की मौजूदगी यह बताती है कि राजस्थान में स्कूली शिक्षा का दायरा केवल किसी एक प्रकार के स्कूल तक सीमित नहीं है। राज्य में बोर्डिंग, इंटरनेशनल और डे स्कूल के अलग-अलग मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
डे स्कूलों की राष्ट्रीय श्रेणियों में राजस्थान के कई संस्थानों ने शीर्ष स्थान हासिल किए। जयपुर का महारानी गायत्री देवी गर्ल्स स्कूल गर्ल्स डे स्कूल श्रेणी में देश में तीसरे स्थान पर रहा।
इसी तरह नागौर के गोटन स्थित एलके सिंघानिया एजुकेशन सेंटर और उदयपुर के सेंट्रल पब्लिक स्कूल ने डे-कम-बोर्डिंग श्रेणी में पांचवां स्थान साझा किया।
आबू रोड का एचजी इंटरनेशनल स्कूल इसी क्रम में आठवें स्थान पर रहा, जबकि उदयपुर का महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल ने नौवां स्थान हासिल किया।
इन परिणामों में राजस्थान के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के स्कूलों की मौजूदगी दिखाई देती है। जयपुर और उदयपुर जैसे बड़े शहरों के साथ नागौर और आबू रोड जैसे शहरों के संस्थानों का राष्ट्रीय सूची में आना राज्य में स्कूली शिक्षा के व्यापक विस्तार को दर्शाता है।
राजस्थान की पहचान लंबे समय से आवासीय और बोर्डिंग शिक्षा के क्षेत्र में भी रही है। एजुकेशनवर्ल्ड की रैंकिंग में यह उपस्थिति दिखाई दी।
अजमेर का मेयो कॉलेज गर्ल्स स्कूल गर्ल्स बोर्डिंग स्कूल श्रेणी में देश में दूसरे स्थान पर रहा। वहीं पिलानी का बिड़ला बालिका विद्यापीठ, उदयपुर का हेरिटेज गर्ल्स स्कूल और पिलानी का विद्या निकेतन (बिड़ला पब्लिक स्कूल) अपनी-अपनी श्रेणियों में तीसरे स्थान पर रहे।
अलवर स्थित द सागर स्कूल को-एड डे-कम-बोर्डिंग रेजिडेंशियल श्रेणी में तीसरे स्थान पर रहा।
वहीं आबू रोड का दयानंद पैराडाइज स्कूल बॉयज बोर्डिंग श्रेणी में नौवें स्थान पर रहा।
इस तरह बोर्डिंग श्रेणी में राजस्थान के कई संस्थानों की मौजूदगी ने राज्य की आवासीय शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय रैंकिंग में प्रमुखता दिलाई।
इस रैंकिंग की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि राजस्थान के सरकारी स्कूल ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाई।
राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल, धौलपुर सरकारी बोर्डिंग स्कूल श्रेणी में देश में छठे स्थान पर रहा। यह उपलब्धि सरकारी क्षेत्र के स्कूलों की राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में मौजूदगी को रेखांकित करती है।
सरकारी स्कूलों के प्रदर्शन का महत्व इसलिए भी है क्योंकि देश में स्कूली शिक्षा का बड़ा हिस्सा सरकारी संस्थानों के माध्यम से संचालित होता है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में किसी सरकारी स्कूल की मौजूदगी शिक्षा व्यवस्था के विभिन्न मॉडलों को एक साथ देखने का अवसर देती है।
राजस्थान के मोदी वर्ल्ड स्कूल, झुंझुनूं ने बजट प्राइवेट स्कूल श्रेणी में चौथा स्थान हासिल किया। इससे यह संकेत मिलता है कि राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन में केवल महंगे या प्रीमियम स्कूल ही चर्चा में नहीं हैं, बल्कि अपेक्षाकृत किफायती निजी शिक्षा संस्थानों की उपलब्धियों को भी अलग श्रेणी में पहचान दी जा रही है।
बजट प्राइवेट स्कूल श्रेणी उन परिवारों के लिए विशेष महत्व रखती है जो निजी स्कूल में शिक्षा चाहते हैं, लेकिन शिक्षा पर अत्यधिक खर्च नहीं कर सकते। इस श्रेणी में राजस्थान के स्कूल का शीर्ष स्थानों में शामिल होना राज्य की निजी स्कूली शिक्षा की विविधता को सामने लाता है।
राजस्थान के ऐतिहासिक शैक्षणिक संस्थानों की मौजूदगी भी रैंकिंग में दिखाई दी। बिड़ला स्कूल, पिलानी ने विंटेज लिगेसी बॉयज बोर्डिंग श्रेणी में तीसरा स्थान हासिल किया।
पिलानी लंबे समय से उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा के प्रतिष्ठित संस्थानों के लिए जाना जाता रहा है। ऐसे में इस श्रेणी में बिड़ला स्कूल की मौजूदगी राजस्थान की पुरानी और स्थापित शैक्षणिक संस्थागत परंपरा को भी रेखांकित करती है।
एजुकेशनवर्ल्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग 2026-27 में स्कूलों का मूल्यांकन शैक्षिक उत्कृष्टता से जुड़े करीब 15 मानकों के आधार पर किया गया।
इनमें प्रमुख रूप से शिक्षक गुणवत्ता, शिक्षक कल्याण एवं विकास, स्कूल नेतृत्व, खेल शिक्षा, बुनियादी ढांचा और अन्य शैक्षिक मानक शामिल रहे।
इस तरह रैंकिंग में केवल परीक्षा परिणाम या अकादमिक उपलब्धियों को ही केंद्र में नहीं रखा गया, बल्कि स्कूल की व्यापक शैक्षिक व्यवस्था और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया गया।
किसी भी स्कूल की शैक्षिक गुणवत्ता में शिक्षक और स्कूल नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। रैंकिंग के मूल्यांकन मानकों में शिक्षक गुणवत्ता और शिक्षक कल्याण एवं विकास को शामिल किया जाना इसी व्यापक दृष्टिकोण की ओर संकेत करता है।
शिक्षकों के प्रशिक्षण, उनके विकास के अवसर और स्कूल नेतृत्व की कार्यप्रणाली का प्रभाव विद्यार्थियों के सीखने के वातावरण पर पड़ता है। इसी प्रकार बुनियादी ढांचे और खेल शिक्षा को शामिल किए जाने से यह स्पष्ट होता है कि स्कूल की गुणवत्ता को केवल कक्षा और पाठ्यपुस्तक तक सीमित करके नहीं देखा गया।
राजस्थान के परिणामों की खास बात यह है कि राज्य के स्कूल अलग-अलग श्रेणियों में सामने आए हैं। इनमें डे स्कूल, गर्ल्स स्कूल, बोर्डिंग स्कूल, को-एड डे-कम-बोर्डिंग, इंटरनेशनल स्कूल, सरकारी स्कूल, बजट प्राइवेट स्कूल और विंटेज लिगेसी स्कूल शामिल हैं।
इस विविधता से राजस्थान के स्कूली शिक्षा क्षेत्र की व्यापक तस्वीर सामने आती है। अलग-अलग सामाजिक और भौगोलिक क्षेत्रों में काम कर रहे संस्थानों ने अपने-अपने मॉडल के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
एजुकेशनवर्ल्ड के संस्थापक-संपादक दिलीप ठाकोर के अनुसार, एजुकेशनवर्ल्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग का उद्देश्य देश के स्कूल प्रबंधन को लगातार सुधार के लिए प्रेरित करना और बेहतर लर्निंग आउटकम की दिशा में काम करना है।
उनके अनुसार, रैंकिंग का एक उद्देश्य अभिभावकों को बच्चों के लिए स्कूल का चयन करने से पहले विस्तृत और तुलनात्मक जानकारी उपलब्ध कराना भी है। इसके अलावा देश के शीर्ष स्कूलों को अन्य संस्थानों के लिए उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत करना भी रैंकिंग के उद्देश्यों में शामिल है।
राष्ट्रीय स्तर की स्कूल रैंकिंग विभिन्न संस्थानों को अपनी शैक्षिक व्यवस्था की समीक्षा करने का अवसर भी देती है। स्कूल यह देख सकते हैं कि शिक्षक विकास, बुनियादी ढांचे, खेल, नेतृत्व और अन्य क्षेत्रों में उनकी स्थिति कैसी है तथा किन क्षेत्रों में सुधार की संभावनाएं हैं।
राजस्थान के स्कूलों की उपलब्धियां ऐसे समय में सामने आई हैं जब स्कूली शिक्षा में केवल परीक्षा परिणाम के बजाय विद्यार्थियों के समग्र विकास, कौशल, खेल, तकनीकी सुविधाओं और सीखने के वातावरण पर भी जोर बढ़ रहा है।
इस रैंकिंग में राज्य के विभिन्न शहरों के स्कूलों की मौजूदगी भी उल्लेखनीय रही। जयपुर से लेकर अजमेर, उदयपुर, पिलानी, नागौर, आबू रोड, अलवर, झुंझुनूं और धौलपुर तक के संस्थानों ने अलग-अलग श्रेणियों में स्थान बनाया।
इससे राजस्थान के शिक्षा मानचित्र में केवल राजधानी या बड़े शहरों का ही प्रतिनिधित्व नहीं दिखता, बल्कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में संचालित शैक्षणिक संस्थानों की राष्ट्रीय स्तर पर मौजूदगी सामने आती है।
राजस्थान की सूची में एक ओर मेयो कॉलेज, बिड़ला स्कूल पिलानी और अन्य स्थापित संस्थानों जैसे पुराने नाम दिखाई देते हैं, तो दूसरी ओर इंटरनेशनल, बजट प्राइवेट और आधुनिक डे-कम-बोर्डिंग मॉडल के स्कूल भी राष्ट्रीय सूची में शामिल हैं।
यह मिश्रण राजस्थान के स्कूली शिक्षा क्षेत्र में परंपरा और आधुनिक शिक्षा मॉडल दोनों की मौजूदगी को दर्शाता है। पुराने संस्थानों की विरासत के साथ नए संस्थान भी अपनी शैक्षिक व्यवस्थाओं के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
रैंकिंग में खेल शिक्षा को मूल्यांकन के मानकों में शामिल किया जाना भी महत्वपूर्ण है। आज स्कूलों में विद्यार्थियों के शारीरिक विकास, टीमवर्क, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता के लिए खेलों की भूमिका को शिक्षा का हिस्सा माना जाता है।
राजस्थान के कई बोर्डिंग और डे-कम-बोर्डिंग स्कूलों में खेल एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं। राष्ट्रीय रैंकिंग में खेल शिक्षा को एक मूल्यांकन मानक के रूप में शामिल किए जाने से स्कूलों की समग्र शैक्षिक व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित होता है।
एजुकेशनवर्ल्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग 2026-27 में राजस्थान के कई स्कूलों का शीर्ष श्रेणियों में स्थान बनाना राज्य के स्कूली शिक्षा क्षेत्र के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है। अलग-अलग श्रेणियों में स्कूलों की मौजूदगी से यह भी पता चलता है कि राज्य में शिक्षा के कई मॉडल समानांतर रूप से विकसित हो रहे हैं।
हालांकि किसी भी रैंकिंग को स्कूल की पूरी तस्वीर का एकमात्र आधार नहीं माना जा सकता। स्कूल चुनते समय अभिभावकों के लिए फीस, दूरी, पाठ्यक्रम, शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात, विद्यार्थी की जरूरतें, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां, सुरक्षा, छात्रावास की व्यवस्था और स्कूल का वातावरण जैसे अन्य पहलुओं पर भी विचार करना महत्वपूर्ण होता है।
कुल मिलाकर एजुकेशनवर्ल्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग 2026-27 में राजस्थान के स्कूलों का प्रदर्शन राज्य की स्कूली शिक्षा की विविधता और विभिन्न संस्थानों की राष्ट्रीय उपस्थिति को सामने लाता है। जयपुर के गर्ल्स डे स्कूल से लेकर अजमेर और पिलानी के बोर्डिंग संस्थानों, धौलपुर के सरकारी स्कूल, झुंझुनूं के बजट प्राइवेट स्कूल और उदयपुर-आबू रोड के डे-कम-बोर्डिंग संस्थानों तक कई तरह के स्कूल इस सूची में दिखाई देते हैं।
राजस्थान के लिए यह रैंकिंग राज्य के अलग-अलग शिक्षा मॉडल, संस्थागत विरासत और बदलती स्कूली जरूरतों के बीच बन रहे व्यापक शैक्षिक परिदृश्य की तस्वीर पेश करती है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


