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- 13h ago
नई दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर 2026 को प्रस्तावित कांग्रेस की महारैली को लेकर व्यापारी संगठनों ने चिंता जताई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) समेत कई व्यापारी संगठनों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से अपील की है कि रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने पर विचार किया जाए। व्यापारियों का कहना है कि नवंबर की शुरुआत में धनतेरस और दीपावली की खरीदारी को लेकर बाजारों में भारी भीड़ रहती है। ऐसे में बड़ी राजनीतिक रैली होने से यातायात प्रभावित हो सकता है और दिल्ली के प्रमुख थोक एवं खुदरा बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही पर असर पड़ सकता है।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया एमएसएमई ट्रेड एसोसिएशन के चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर व्यापारियों की चिंताओं से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि व्यापारी लोकतांत्रिक मूल्यों और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान करते हैं, लेकिन त्योहारों के दौरान दिल्ली के प्रमुख बाजार क्षेत्रों में बड़ी रैलियों से बचा जाना चाहिए।
व्यापारी संगठनों ने अपनी अपील के समर्थन में तीन प्रमुख वजहें बताई हैं। इनमें त्योहारों के दौरान कारोबार का चरम पर होना, पहले से यातायात और अन्य व्यवधानों के कारण नुकसान होने का दावा तथा दिल्ली के प्रमुख बाजारों और रेलवे स्टेशनों पर संभावित असर शामिल हैं।
व्यापारी संगठनों का कहना है कि धनतेरस, दीपावली और भाई दूज दिल्ली के व्यापारिक कैलेंडर के सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में शामिल हैं। इन त्योहारों पर सोना-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, मिठाइयां, सूखे मेवे, वाहन, संपत्ति और उपहारों की खरीदारी बढ़ जाती है।
बृजेश गोयल के पत्र के मुताबिक, धनतेरस के अवसर पर दिल्ली में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है। व्यापारियों का कहना है कि ग्राहक त्योहार से कई दिन पहले ही खरीदारी शुरू कर देते हैं। इसलिए नवंबर की शुरुआत से ही बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और माल की आपूर्ति का सुचारु रहना जरूरी है।
व्यापारी संगठनों के अनुसार, अगर 1 नवंबर को रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित होती है, तो आसपास की सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है। इसका असर बाजारों तक पहुंचने वाले ग्राहकों और कारोबारियों पर पड़ने की आशंका है।
व्यापारी संगठन ने अपने पत्र में दावा किया है कि अक्टूबर के दौरान दिल्ली के कारोबारियों को लगभग 3 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। CTI के आकलन का हवाला देते हुए कहा गया है कि कनॉट प्लेस, इंडिया गेट और मध्य दिल्ली के अन्य इलाकों में रैलियों, मार्च और रास्तों पर प्रतिबंधों के कारण कारोबार प्रभावित हुआ।
पत्र के मुताबिक, कुछ थोक बाजारों में बाहर से माल पहुंचने में दिक्कत आई, जबकि खुदरा बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों से ठीक पहले इस तरह की बाधाएं कारोबारियों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकती हैं।
हालांकि, 3 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का यह आंकड़ा व्यापारी संगठन का दावा है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए अलग से उपलब्ध आंकड़ों या आधिकारिक आकलन को देखना जरूरी होगा।
व्यापारी संगठनों ने राहुल गांधी को लिखे पत्र में कहा है कि रामलीला मैदान के लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के कई प्रमुख थोक और खुदरा बाजार स्थित हैं। इन बाजारों से न केवल दिल्ली, बल्कि देश के दूसरे हिस्सों में भी बड़ी मात्रा में सामान की आपूर्ति होती है।
पत्र में जिन बाजारों का उल्लेख किया गया है, उनमें शामिल हैं:
चांदनी चौक
सदर बाजार
चावड़ी बाजार
भागीरथ पैलेस
खारी बावली
कश्मीरी गेट
नया बाजार
मोरी गेट
किनारी बाजार
दरीबा बाजार
दरियागंज
अजमेरी गेट
जामा मस्जिद
झंडेवालान
करोल बाग
नबी करीम
आजाद मार्केट
लाजपत राय मार्केट
व्यापारी संगठनों का कहना है कि रैली के दौरान बैरिकेडिंग, यातायात डायवर्जन और भीड़ प्रबंधन के कारण इन बाजारों तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है। इससे थोक कारोबारियों, दुकानदारों, माल ढुलाई करने वालों और खरीदारी के लिए आने वाले ग्राहकों पर असर पड़ने की आशंका है।
रामलीला मैदान दिल्ली के व्यस्त इलाकों में स्थित है। यहां बड़ी संख्या में लोगों के जुटने पर आसपास की सड़कों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किए जाने की संभावना रहती है। व्यापारी संगठनों ने इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा है कि त्योहारों के दौरान रास्तों पर अतिरिक्त प्रतिबंध बाजारों की सामान्य गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं।
व्यापारियों के मुताबिक, बाजारों तक आसानी से पहुंचना ग्राहकों के लिए जरूरी है। यदि रास्ते बंद होते हैं या वाहनों को लंबे वैकल्पिक मार्गों से गुजरना पड़ता है, तो कुछ ग्राहक खरीदारी के लिए आने से बच सकते हैं।
हालांकि, रैली के दिन किन सड़कों पर प्रतिबंध लागू होंगे, कौन से रास्ते बदले जाएंगे और मेट्रो सेवाओं पर कोई असर पड़ेगा या नहीं, इसकी जानकारी संबंधित प्रशासन की आधिकारिक यातायात और सुरक्षा संबंधी घोषणाओं से ही स्पष्ट होगी।
व्यापारी संगठनों ने अपने पत्र में पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि इन स्टेशनों के माध्यम से प्रतिदिन बड़ी संख्या में व्यापारी, थोक खरीदार और अन्य यात्री दिल्ली आते-जाते हैं।
त्योहारों के दौरान दूसरे शहरों से आने वाले लोगों की खरीदारी में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में अगर रैली के कारण आसपास के मार्गों पर भीड़ बढ़ती है या यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है, तो बाहर से आने वाले खरीदारों को परेशानी हो सकती है।
व्यापारियों का तर्क है कि परिवहन संबंधी दिक्कतों के कारण कुछ ग्राहक दिल्ली आने की अपनी योजना बदल सकते हैं। इससे त्योहारों के दौरान होने वाले कारोबार पर असर पड़ने की आशंका है।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया एमएसएमई ट्रेड एसोसिएशन के चेयरमैन बृजेश गोयल ने अपने पत्र में कहा है कि व्यापारी संगठन लोकतांत्रिक मूल्यों और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का पूरा सम्मान करते हैं। इसके बावजूद उनका अनुरोध है कि धनतेरस, दीपावली और भाई दूज तक दिल्ली के प्रमुख बाजार क्षेत्रों में बड़ी रैलियों के आयोजन से बचा जाए।
उन्होंने राहुल गांधी से अपील की है कि 1 नवंबर की प्रस्तावित रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने पर विचार किया जाए। पत्र में उम्मीद जताई गई है कि कांग्रेस नेतृत्व त्योहारों के दौरान व्यापारियों की समस्याओं को समझते हुए उनकी मांग पर ध्यान देगा।
व्यापारी संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य राजनीतिक गतिविधियों का विरोध करना नहीं, बल्कि त्योहारों के दौरान कारोबार और ग्राहकों की आवाजाही को सुचारु बनाए रखना है।
व्यापारी संगठनों की इस अपील के बाद अब प्रस्तावित रैली की तारीख को लेकर कांग्रेस के रुख पर नजर रहेगी। संगठनों ने अपनी मांग के समर्थन में त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले कारोबार, यातायात संबंधी चुनौतियों और पहले हुए नुकसान का हवाला दिया है।
फिलहाल, व्यापारियों की ओर से रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने का अनुरोध किया गया है। इस अपील पर कांग्रेस की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और प्रस्तावित कार्यक्रम में कोई बदलाव होता है या नहीं, यह आगे स्पष्ट होगा।
व्यापारियों की मुख्य मांग यही है कि राजनीतिक कार्यक्रम और त्योहारों के कारोबार के बीच ऐसा संतुलन बनाया जाए, जिससे लोकतांत्रिक गतिविधियां भी जारी रहें और दिल्ली के बाजारों में खरीदारी तथा माल की आवाजाही भी प्रभावित न हो।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


