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- 13h ago
नई दिल्ली। राजस्थान सरकार के स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग द्वारा अंकेक्षण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए विकसित किए गए ऑडिट मैनेजमेंट सिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान मिली है। विभाग के इस डिजिटल नवाचार और उसके सफल क्रियान्वयन के लिए स्कॉच फाउंडेशन की ओर से गोल्ड स्कॉच अवार्ड प्रदान किया गया।
यह सम्मान इंडिया हैबिटेट सेंटर के सिल्वर ऑक हॉल में आयोजित स्कॉच फाउंडेशन के 109वें समिट में प्रदान किया गया। समारोह में स्कॉच फाउंडेशन के अध्यक्ष समीर कोचर ने स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग के निदेशक अपूर्व जोशी तथा विभाग के प्रतिनिधियों ओम प्रकाश शर्मा, गौरव गुप्ता और सुनीता बराड़ को यह पुरस्कार प्रदान किया।
स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की ओर से तैयार किए गए ऑडिट मैनेजमेंट सिस्टम का उद्देश्य पारंपरिक अंकेक्षण व्यवस्था को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ते हुए पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। इस प्रणाली के माध्यम से अंकेक्षण से जुड़े विभिन्न चरणों को ऑनलाइन किया गया है।
इसके अंतर्गत अंकेक्षण दलों का गठन, ऑडिट की प्लानिंग, अंकेक्षण का निष्पादन तथा ऑडिट के दौरान सामने आई अनुपालनाओं की निगरानी जैसे कार्यों को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इससे अंकेक्षण प्रक्रिया में समयबद्धता के साथ-साथ रिकॉर्ड के बेहतर रखरखाव और कार्यों की निगरानी में भी सुविधा मिल रही है।
विभाग के अनुसार इस सिस्टम को विकसित करने के पीछे प्रमुख उद्देश्य सरकारी संस्थाओं में वित्तीय प्रक्रियाओं और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा को अधिक प्रभावी बनाना तथा सामने आने वाली अनियमितताओं के निराकरण की प्रक्रिया को मजबूत करना है।
ऑडिट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं, नगरीय निकायों, विश्वविद्यालयों और देवस्थान विभाग से संबंधित संस्थाओं की अंकेक्षण प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का प्रयास किया गया है। इससे अलग-अलग संस्थाओं से संबंधित ऑडिट गतिविधियों को एक व्यवस्थित प्रणाली के माध्यम से संचालित करने में मदद मिल रही है।
सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और योजनाओं के अपेक्षित परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में भी यह व्यवस्था उपयोगी मानी जा रही है। अंकेक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों और अनियमितताओं की जानकारी को रिकॉर्ड करने के साथ-साथ उनके निराकरण और अनुपालन की स्थिति पर भी नजर रखी जा सकती है।
ऑडिट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से अंकेक्षण प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को ऑनलाइन किए जाने से विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास किया गया है। इससे यह भी सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है कि ऑडिट प्रक्रिया निर्धारित योजना और प्राथमिकताओं के अनुरूप आगे बढ़े।
सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और स्थानीय निकायों से जुड़ी गतिविधियों में सार्वजनिक धन के उपयोग की जांच अंकेक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में डिजिटल ऑडिट व्यवस्था को वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम के प्रावधानों के तहत विभिन्न संस्थाओं में संचालित योजनाओं और वित्तीय गतिविधियों का अंकेक्षण किया जाता है। अंकेक्षण के दौरान यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, प्रक्रिया संबंधी कमी या अन्य त्रुटि सामने आती है तो उसके निराकरण की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है।
ऑडिट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से अंकेक्षण में सामने आए मामलों और उनसे संबंधित अनुपालन को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने तथा उसकी प्रगति पर नजर रखने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे केवल अनियमितता सामने लाने के बजाय उसके समाधान तक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
राजस्थान सरकार के वित्त विभाग के मार्गदर्शन में विकसित इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने पर वित्त विभाग के प्रमुख शासन सचिव वैभव गालरिया ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इसे राजस्थान सरकार के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए इस पहल से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी।
उन्होंने जनहित में पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में किए गए प्रयासों की सराहना की। विभागीय अधिकारियों के अनुसार पुरस्कार से डिजिटल अंकेक्षण व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का उत्साह भी बढ़ेगा।
स्कॉच फाउंडेशन की ओर से शासन, विकास, प्रशासनिक सुधार और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले विभागों तथा संस्थाओं को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया जाता है। ऐसे में राजस्थान के स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग को मिला गोल्ड अवार्ड डिजिटल गवर्नेंस और ऑडिट व्यवस्था में किए गए नवाचार की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान के रूप में देखा जा रहा है।
समारोह में राजस्थान के अलावा देश के विभिन्न राज्यों के विभागों और संस्थानों को भी उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया गया। ओडिशा के शिक्षा विभाग के प्रमुख शासन सचिव और छत्तीसगढ़ के जनजातीय विभाग के प्रमुख शासन सचिव सहित विभिन्न राज्यों के अधिकारियों और संस्थानों को भी उनके विशिष्ट कार्यों के लिए स्कॉच अवार्ड प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुनीता नारायण को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में उनके कार्यों के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। समारोह में शासन व्यवस्था, विकास, पर्यावरण और सार्वजनिक क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न नवाचारों तथा उल्लेखनीय कार्यों को मंच से सम्मानित किया गया।
स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग का यह सम्मान ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब सरकारी कार्यप्रणाली में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर लगातार जोर दिया जा रहा है। अंकेक्षण जैसी महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने से दस्तावेजों के प्रबंधन, ऑडिट की योजना, कार्य की निगरानी और अनुपालन की स्थिति की समीक्षा को अधिक व्यवस्थित करने का अवसर मिलता है।
ऑडिट मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए विभाग ने अंकेक्षण प्रक्रिया को केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित रखने के बजाय उसे डिजिटल ट्रैकिंग और ऑनलाइन मॉनिटरिंग से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इससे भविष्य में ऑडिट प्रक्रिया के आंकड़ों का विश्लेषण करने, लंबित मामलों की पहचान करने और विभागीय स्तर पर बेहतर निगरानी करने में भी सहायता मिल सकती है।
सरकारी संस्थाओं और स्थानीय निकायों में वित्तीय संसाधनों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अंकेक्षण व्यवस्था इसी जिम्मेदारी का एक प्रमुख हिस्सा है। ऐसे में अंकेक्षण को तकनीक से जोड़कर अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
गोल्ड स्कॉच अवार्ड मिलने के बाद स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग के इस डिजिटल मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। विभाग के लिए यह सम्मान न केवल अब तक किए गए कार्यों की उपलब्धि है, बल्कि भविष्य में अंकेक्षण व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाने की जिम्मेदारी को भी रेखांकित करता है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


