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- 13h ago
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सामाजिक सुरक्षा और रेलवे कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि पात्र रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन के वेतन के बराबर उत्पादकता-आधारित बोनस दिया जाएगा। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार के लिए 53,428 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और दिव्यांगता पेंशन से संबंधित पात्रता नियमों में बदलाव किया गया है।
सरकार के इन फैसलों से जहां त्योहार से पहले लाखों रेलवे कर्मचारियों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है, वहीं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार से पात्र जरूरतमंद लोगों को राहत देने का लक्ष्य रखा गया है। दिव्यांगता पेंशन की पात्रता सीमा में कमी को भी महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पात्र रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिन के वेतन के बराबर उत्पादकता-आधारित बोनस (प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस यानी पीएलबी) को मंजूरी दी है। इस फैसले से करीब 11.40 लाख कर्मचारियों को लाभ मिलने की संभावना है। बोनस भुगतान पर लगभग 2,009.61 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रेल कर्मचारियों के लिए त्योहार से पहले एक महत्वपूर्ण सौगात बताया। रेलवे कर्मचारी पूरे वर्ष रेल परिचालन, यात्री सेवाओं, माल ढुलाई, पटरियों के रखरखाव, तकनीकी व्यवस्थाओं और सुरक्षा से जुड़े कामों में योगदान देते हैं। त्योहारों के दौरान भी बड़ी संख्या में कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं, ताकि यात्रियों की आवाजाही और माल परिवहन सुचारु रूप से जारी रह सके।
सरकार का कहना है कि उत्पादकता-आधारित बोनस रेलवे कर्मचारियों के योगदान को मान्यता देने और बेहतर कार्य प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने का माध्यम है। बोनस की राशि पात्रता और निर्धारित वेतन गणना के नियमों के अनुसार दी जाती है।
दिवाली और अन्य त्योहारों के दौरान परिवारों के खर्च बढ़ जाते हैं। ऐसे समय में बोनस कर्मचारियों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता देता है। रेलवे कर्मचारियों के लिए घोषित 78 दिन के बोनस से पात्र कर्मचारियों को त्योहार संबंधी जरूरतों और घरेलू खर्चों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि बोनस की वास्तविक राशि हर कर्मचारी के लिए समान होना आवश्यक नहीं है। इसका भुगतान निर्धारित नियमों और पात्रता के आधार पर किया जाएगा। कर्मचारियों को अपनी देय राशि और भुगतान की तारीख के संबंध में संबंधित रेलवे प्रशासन की आधिकारिक सूचना पर भरोसा करना चाहिए।
कैबिनेट के दूसरे बड़े फैसले के तहत सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे को बढ़ाने और उन्हें आगे जारी रखने के लिए 53,428 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन योजनाओं का विस्तार वर्ष 2031 तक करने की मंजूरी दी गई है।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद और कमजोर वर्गों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। इन योजनाओं के माध्यम से पात्र बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांग व्यक्तियों सहित विभिन्न श्रेणियों के लाभार्थियों को सहायता दी जाती है।
सरकार के इस फैसले का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि सामाजिक सुरक्षा सहायता अनेक परिवारों के लिए नियमित आय का एक महत्वपूर्ण सहारा होती है। योजनाओं के विस्तार और बजटीय प्रावधान से पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने की व्यवस्था को जारी रखने पर जोर दिया गया है।
हालांकि, अलग-अलग योजनाओं में लाभ की राशि, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और अन्य शर्तें भिन्न हो सकती हैं। इसलिए लाभार्थियों को संबंधित योजना के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार ही अपनी पात्रता की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
कैबिनेट के तीसरे फैसले में दिव्यांगता पेंशन से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, पहले संबंधित व्यवस्था में पेंशन के लिए 80 प्रतिशत दिव्यांगता की सीमा निर्धारित थी, जिसे घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है। इसका उद्देश्य पात्रता का दायरा बढ़ाना और अधिक दिव्यांग व्यक्तियों तक सामाजिक सुरक्षा का लाभ पहुंचाना है।
इस बदलाव से उन लोगों को राहत मिलने की संभावना है, जो पहले निर्धारित दिव्यांगता प्रतिशत की शर्त पूरी नहीं कर पाने के कारण संबंधित पेंशन के दायरे से बाहर रह जाते थे। पात्रता सीमा में कमी से अब 40 प्रतिशत दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को भी संबंधित नियमों के तहत लाभ मिल सकेगा।
यह बदलाव दिव्यांगजनों की आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। दिव्यांगता के कारण कई लोगों को रोजगार, नियमित आय और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा पेंशन उनके लिए आर्थिक सहायता का एक माध्यम बन सकती है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि नई व्यवस्था के तहत जन्म से दिव्यांग व्यक्तियों को भी पेंशन योजना के दायरे में शामिल करने का फैसला किया गया है। पहले संबंधित व्यवस्था में 18 वर्ष की उम्र से लाभ दिए जाने की बात सामने आई थी। इस बदलाव का उद्देश्य कम उम्र से ही पात्र दिव्यांग व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है।
जन्म से दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों को कई बार उपचार, देखभाल, शिक्षा और दैनिक जरूरतों से जुड़े अतिरिक्त खर्चों का सामना करना पड़ता है। ऐसे परिवारों के लिए सरकारी सहायता महत्वपूर्ण हो सकती है। कम उम्र से पात्रता उपलब्ध कराने का उद्देश्य परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करने और जरूरतमंद लोगों को सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाना है।
हालांकि, पेंशन की वास्तविक पात्रता, आवेदन की प्रक्रिया, भुगतान की राशि और लाभ शुरू होने की तारीख के लिए संबंधित योजना के विस्तृत सरकारी दिशा-निर्देश महत्वपूर्ण होंगे। केवल दिव्यांगता होने के आधार पर हर व्यक्ति को स्वतः पेंशन मिलने का निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।
कैबिनेट के इन फैसलों में दो प्रमुख पहलू दिखाई देते हैं। पहला, रेलवे कर्मचारियों को उनके कार्य प्रदर्शन के आधार पर आर्थिक प्रोत्साहन देना और दूसरा, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से पात्र जरूरतमंद वर्गों को सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था का विस्तार करना।
रेलवे कर्मचारियों के लिए बोनस का फैसला त्योहार से पहले आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने से जुड़ा है, जबकि दिव्यांगता पेंशन की पात्रता में बदलाव का उद्देश्य संबंधित योजना के लाभार्थियों का दायरा बढ़ाना है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए निर्धारित बजट से इन व्यवस्थाओं को आगे जारी रखने की योजना को समर्थन मिलेगा।
इन फैसलों का वास्तविक लाभ संबंधित योजनाओं के नियमों, पात्रता और क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। रेलवे कर्मचारियों और संभावित पेंशन लाभार्थियों को भुगतान तथा आवेदन से जुड़ी जानकारी के लिए संबंधित विभागों की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए।
कुल मिलाकर, मोदी कैबिनेट के इन फैसलों में रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिन के बोनस, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए 53,428 करोड़ रुपये के प्रावधान और दिव्यांगता पेंशन की पात्रता सीमा घटाने जैसे महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं। इनका उद्देश्य पात्र कर्मचारियों और जरूरतमंद लाभार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


