17 सितंबर से मथुरा में शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान, 5 लाख दीपों से जगमगाएंगे धार्मिक स्थल
- 11h ago
मथुरा। मंगलवार तड़के हुई मूसलाधार बारिश ने एक ओर लोगों को उमस और भीषण गर्मी से राहत पहुंचाई, वहीं दूसरी ओर शहर की जल निकासी व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर भी सामने ला दी। कुछ ही देर की तेज बारिश के बाद नया बस स्टैंड पुल के नीचे इतना अधिक जलभराव हो गया कि प्रमुख मार्ग पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। सड़क कई फीट तक पानी में डूब गई, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और हजारों लोगों को घंटों तक जाम और अव्यवस्था का सामना करना पड़ा।
सुबह का समय होने के कारण सड़क पर कार्यालय जाने वाले कर्मचारी, स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राएं, व्यापारी, यात्री और रोजमर्रा के काम से निकलने वाले लोग बड़ी संख्या में मौजूद थे। लेकिन पुल के नीचे भरे पानी ने उनकी रफ्तार पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया। भूतेश्वर, नया बस स्टैंड, स्टेट बैंक चौराहा और आसपास के मार्गों पर देखते ही देखते लंबा ट्रैफिक जाम लग गया।
जलभराव के कारण दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ी। कई बाइक और स्कूटर पानी के बीच बंद हो गए, जिन्हें चालक धक्का देकर बाहर निकालते दिखाई दिए। कुछ लोग अपने जूते-चप्पल हाथ में लेकर घुटनों तक भरे पानी में पैदल निकलते नजर आए। कार, ऑटो और ई-रिक्शा चालक भी धीरे-धीरे पानी पार करते रहे, जबकि कई वाहन चालकों ने जोखिम न लेते हुए दूसरे मार्गों का सहारा लिया।
स्थानीय लोगों के अनुसार पुल के नीचे हर वर्ष बारिश के दौरान यही स्थिति बनती है। थोड़ी देर की बारिश भी इस स्थान को तालाब में बदल देती है। जल निकासी के लिए बनाए गए नाले या तो पर्याप्त क्षमता के नहीं हैं या फिर उनकी नियमित सफाई नहीं होने से पानी की निकासी बाधित हो जाती है। परिणामस्वरूप सड़क पर पानी भर जाता है और यातायात प्रभावित होता है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुछ छोटे वाहन पानी में फंस गए थे, जिन्हें स्थानीय लोगों की मदद से बाहर निकाला गया। कई ई-रिक्शा चालकों ने यात्रियों को बीच रास्ते में उतार दिया क्योंकि अधिक पानी में वाहन ले जाना जोखिम भरा था। स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
बारिश के कारण सड़क पर बने गड्ढे पूरी तरह पानी में छिप गए, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया। वाहन चालकों को यह अंदाजा नहीं लग पा रहा था कि सड़क कहां समतल है और कहां गहरा गड्ढा है। ऐसे में कई दोपहिया वाहन असंतुलित होते-होते बचे। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते पानी की निकासी नहीं होती तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था।
व्यापारियों ने बताया कि सुबह के समय जाम लगने से बाजार आने वाले ग्राहकों की संख्या भी प्रभावित हुई। दुकानदारों को समय पर सामान नहीं मिल सका और कई व्यवसायिक गतिविधियां भी बाधित रहीं। सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी इसका असर देखने को मिला। बसों और ऑटो को निर्धारित समय से काफी देरी हुई, जिससे यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नया बस स्टैंड पुल के नीचे जलभराव की समस्या कोई नई नहीं है। हर मानसून में यही स्थिति बनती है और हर बार अस्थायी रूप से पानी निकालकर समस्या को खत्म मान लिया जाता है। लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
क्षेत्रवासियों ने मांग की कि इस स्थान पर जल निकासी की वैज्ञानिक और स्थायी व्यवस्था विकसित की जाए। यदि नालों की नियमित सफाई, पंपिंग सिस्टम की व्यवस्था और सड़क के ढाल (स्लोप) में आवश्यक सुधार किया जाए तो हर बारिश में होने वाली इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है।
नागरिकों का कहना है कि शहर के प्रमुख मार्गों पर जलभराव केवल यातायात की समस्या नहीं है, बल्कि यह आमजन की सुरक्षा, आपातकालीन सेवाओं और नगर की समग्र व्यवस्था से भी जुड़ा विषय है। यदि इसी दौरान किसी मरीज को अस्पताल ले जाना पड़े या किसी आपात स्थिति में एंबुलेंस को गुजरना हो, तो ऐसी स्थिति गंभीर संकट पैदा कर सकती है।
बारिश रुकने के बाद धीरे-धीरे पानी का स्तर कम होने लगा और कुछ घंटों बाद यातायात सामान्य हो सका। हालांकि तब तक हजारों लोग जाम, देरी और असुविधा का सामना कर चुके थे। सड़क पर जमा पानी हटने के बाद भी कीचड़ और फिसलन बनी रही, जिससे लोगों को सावधानी बरतनी पड़ी।
शहरवासियों ने नगर निगम और संबंधित विभागों से मांग की है कि केवल बरसात के दौरान अस्थायी इंतजाम करने के बजाय जलभराव वाले स्थलों का स्थायी सर्वे कराया जाए और ऐसी योजना बनाई जाए जिससे भविष्य में प्रमुख मार्गों पर पानी जमा न हो। उनका कहना है कि स्मार्ट सिटी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे मथुरा में यदि मुख्य सड़कों पर हर बारिश के बाद जलभराव की स्थिति बनी रहती है, तो यह विकास कार्यों और शहरी प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि बदलते मौसम और तेज वर्षा की घटनाओं को देखते हुए शहरी जल निकासी व्यवस्था को आधुनिक तकनीक के अनुरूप विकसित करना आवश्यक हो गया है। नियमित नाला सफाई, वर्षा जल निकासी की प्रभावी योजना, पंपिंग स्टेशनों की उपलब्धता और संवेदनशील स्थानों की सतत निगरानी जैसी व्यवस्थाएं ही भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं से राहत दिला सकती हैं।
मंगलवार की बारिश ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि शहर में जलभराव की समस्या केवल असुविधा का विषय नहीं, बल्कि शहरी अवसंरचना की एक गंभीर चुनौती है। जब तक नया बस स्टैंड पुल के नीचे और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी जल निकासी व्यवस्था नहीं बनाई जाती, तब तक हर मानसून में लोगों को इसी तरह जाम, जलभराव और परेशानी का सामना करना पड़ता रहेगा।


