नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026 (यूटीएन)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में त्योहारों के दौरान लोगों से स्थानीय कारीगरों के बनाए प्रोडक्ट को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि इससे उनकी मेहनत को प्रोत्साहन मिलेगा और आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि देश में 'वोकल फॉर लोकल' की भावना मजबूत हो रही है और भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों में नयी पहचान मिल रही है मोदी ने कहा कि त्योहारों के इस मौसम में खरीदारी के दौरान लोग स्वदेशी प्रोडक्ट को ज्यादा महत्व देने लगे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार के पूर्णिया का मखाना ग्रीस पहुंच रहा है, जबकि कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव जा रही है। इससे भारतीय किसानों के लिए दुनिया के विभिन्न बाजारों के दरवाजे खुल रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने में गुणवत्ता के साथ-साथ उनकी पैकेजिंग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
*आदिवासी समुदायों की पैकेजिंग की सराहना*
प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों द्वारा तैयार उत्पादों की पैकेजिंग की सराहना की। उन्होंने कहा कि 'शबरी नेचुरल्स' के माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद बाजार में लाए जा रहे हैं। इन उत्पादों की पैकेजिंग में आदिवासी कला की झलक दिखाई देती है और इसके लिए इसे जापान का प्रतिष्ठित 'गुड डिजाइन अवॉर्ड' भी मिला है। उन्होंने बताया कि कर्नाटक का एक बांस आधारित स्टार्टअप बांस और कृषि अवशेषों से पैकेजिंग सामग्री तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के नवाचार स्थानीय उत्पादों को आकर्षक बनाने के साथ उनके बाजार का विस्तार करने में भी मददगार हैं।
मोदी ने खादी की बढ़ती लोकप्रियता का जिक्र करते हुए कहा कि इस वर्ष गांधी जयंती के अवसर पर एक ही दिन में खादी ग्रामोद्योग के उत्पादों की बिक्री 28 करोड़ रुपये से अधिक रही। यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब डेढ़ करोड़ रुपये अधिक है। उन्होंने कहा कि खादी की बढ़ती लोकप्रियता का लाभ उन लोगों तक भी पहुंच रहा है, जिनके कौशल और मेहनत से खादी, हस्तशिल्प और अन्य उत्पाद तैयार होते हैं।
*त्योहारों में स्थानीय कारीगरों से खरीदें सामान*
प्रधानमंत्री ने लोगों से त्योहारों के दौरान खरीदारी करते समय स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लोगों की खरीदारी से कारीगरों का उत्साह बढ़ेगा और 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को मजबूती मिलेगी। यह अभियान जितना आगे बढ़ेगा, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में देश उतनी ही तेजी से आगे बढ़ेगा।
*हेंवल नदी के पुनर्जीवीकरण के प्रयास सराहनीय*
प्रधानमंत्री ने टिहरी जिले की हेंवल नदी के पुनर्जीवीकरण का उल्लेख करते हुए स्थानीय ग्रामीणों,पर्यावरण प्रेमियों के प्रयासों सराहना की। उन्होंने ने नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ग्रामीणों और संबंधित विभागों की ओर से किए गए प्रयासों को जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। पहाड़ों में लगातार घटते जलस्रोतों और गर्मियों में गहराते पेयजल संकट के बीच हेंवल नदी की कहानी सामुदायिक सहभागिता की अहमियत को रेखांकित करती है।इस नदी से चंबा शहर से लेकर आसपास के करीब 80 गांव को शुद्ध पीने का पानी मिल रहा है।
*मन की बात के माध्यम से देश की लोकशक्ति की आराधना करता हूं*
पीएम मोदी ने बताया कि 12 साल पहले, विजयादशमी के मौके पर हमने 'मन की बात' की शुरुआत की थी. तब से अब तक ये यात्रा लगातार जारी है. उन्होंने कहा, 'मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से एक तरह से देश की लोकशक्ति की आराधना करता हूं. मुझे इसके माध्यम से देश के हर परिवार से जुड़ने का अवसर मिलता है.'
उन्होंने कहा, “मेरे लिए ‘मन की बात’ देश के सामान्य मानवी के परिश्रम, उसके पराक्रम, उसकी प्रतिबद्धता, उसके समर्पण और सेवा-भाव का गौरवगान करने का एक शुभ अवसर रहा है हमारे देश में सदियों से तीर्थ यात्रा की परंपरा रही है, मेरे लिए ‘मन की बात’ भी देश के लोगों के प्रयासों को करीब से जानने की और उनके योगदान को नमन करने की एक तीर्थ यात्रा से कम नहीं है.”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो लोग समाज और राष्ट्र के लिए जीते हैं, वे अपने आप में एक तीर्थ के ही स्वरूप हैं. 12 वर्षों में देश के हर कोने से ऐसे अनेक लोग सामने आए हैं जिनकी असाधारण कार्यों की ओर सामान्य रूप से समाज का ध्यान नहीं जाता. ‘मन की बात’ ने ऐसी अनगिनत प्रेरक कहानियों को आप सब के सामने लाने का काम किया है.
*देश में अनेक पारंपरिक हुनर जो पीढ़ियों से हमारी पहचान का हिस्सा रहे हैं*
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में अनेक पारंपरिक हुनर हैं जो पीढ़ियों से हमारी पहचान का हिस्सा रहे हैं. अब उन परंपराओं से जुड़कर नए प्रयोग हो रहे हैं. इन्हें आज के समय के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है.
पीएम मोदी ने कहा कि पंजाब में ऐसा ही एक प्रयास काफी समय से चल रहा है, यहां 'खेती विरासत मिशन' नाम की एक संस्था ने जैविक खेती और पारंपरिक कृषि के तौर-तरीकों को नया जीवन देना शुरू किया. इस टीम के लोग पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना चाहते थे. इस पहल को 'नव-त्रिन्जन' नाम दिया गया.
उन्होंने कहा, "इस पहल के तहत यहां बिना केमिकल का इस्तेमाल किए ऑर्गेनिक कपास उगाई जाती है । यहां प्राकृतिक रंगों वाली कपास भी उगाई जाती है इससे तैयार धागे और कपड़े को रंगने के लिए अलग से केमिकल इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती । आप कल्पना कर सकते हैं, इससे पर्यावरण की कितनी बड़ी मदद हो रही है। साथियो, कुछ साल पहले 'नव-त्रिन्जन' ने एक वीविंग स्कूल भी शुरू किया | इसका लक्ष्य है बुनकरी के हुनर को नई पीढ़ी तक पहुंचाना | इस स्कूल ने भी बहुत सारी महिलाओं की लोगों की जिंदगी बदल दी है।"
*हजारों साल बाद भी नई सीख देती है रामायण*
सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता की सनातन परंपरा को नमन करते हुए पीएम मोदी ने महर्षि वाल्मीकि जयंती और महान स्वतंत्रता सेनानी भाई परमानंद जी के आदर्शों को याद किया.
पीएम मोदी ने कहा कि हजारों वर्ष बीत जाने के बाद भी वाल्मीकि रामायण हमें निरंतर प्रयास और समरसता की नई सीख देती है. उन्होंने कहा कि सोमवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती है. हजारों वर्ष बीत गए, लेकिन महर्षि वाल्मीकि की रामायण आज भी हमें कुछ नया सिखाती है. महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से हमें जीवन की गहरी सीख दी है. एक ओर वे निरंतर प्रयास करते रहने का संदेश देते हैं, तो दूसरी ओर सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता का महत्व समझाते हैं. वाल्मीकि रामायण में भगवान राम का चरित्र इन मूल्यों का बहुत सुंदर उदाहरण है.”
उन्होंने आगे कहा, “भगवान राम ने माता शबरी के प्रेम और भक्ति को अपनाया. निषादराज की मित्रता को सम्मान दिया. सबको साथ लेकर चलने का भाव, ये आदर्श आज भी हमें दिशा दिखाते हैं. इस भावना का प्रतिबिंब अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भी दिखाई देता है. वहां महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी के मंदिर भी बनाए गए हैं. मुझे संतोष है कि अयोध्या में एयरपोर्ट नाम भी महर्षि वाल्मीकि के नाम पर ही रखा गया है. ये प्रयास हमारी उसी महान परंपरा को समृद्ध करते हैं, जिसमें सेवा, समरसता और करुणा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है.”
*भाई परमानंद के त्याग को किया याद*
भाई परमानंद जी को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “भारत की माटी में ऐसे कितने ही महान व्यक्तित्व पैदा हुए जिन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी है. ऐसे ही एक महान व्यक्तित्व हैं, भाई परमानंद जी. कुछ ही दिनों बाद 4 नवंबर को हम उनकी 150वीं जयंती मनाएंगे. भाई परमानंद जी की प्रेरणा और आदर्श का बड़ा स्त्रोत था – आर्य समाज से उनका गहरा जुड़ाव.”
पीएम मोदी ने कहा कि 20वीं सदी के बिल्कुल शुरुआती कालखंड में ही भाई परमानंद जी आर्य समाज के काम से दक्षिण अफ्रीका गए थे. वहां उनकी मुलाकात पूज्य बापू से भी हुई थी. उन्होंने गुयाना में गिरमिटिया समाज के बीच भी काम किया, जो उस समय आर्य समाज का एक बड़ा केंद्र था.
अपनी गुयाना यात्रा का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मुझे भी गुयाना की अपनी यात्रा के समय आर्य समाज के स्मारक पर जाने का सौभाग्य मिला था.”
उन्होंने यह भी कहा कि भाई परमानंद जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई थी. कहा जाता है कि भाई परमानंद जी ने ही लाला हरदयाल जी को अमेरिका जाने के लिए मनाया था. वे गदर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से भी एक थे. आजादी की लड़ाई में उनका प्रभाव इतना ज्यादा था कि अंग्रेजों ने उन्हें काला पानी की सजा दे दी थी. उनकी एक किताब है ‘आपबीती : काले पानी की कारावास कहानी’ स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को समझने के लिए ये किताब जरूर पढ़नी चाहिए.
प्रधानमंत्री ने कहा कि भाई परमानंद जी ने सजा खत्म होने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में कदम बढ़ाया. उन्होंने कहा, “आपको यह जानकार हैरानी होगी कि उन्होंने वीर भगत सिंह को भी पढ़ाया था. बाद के समय में वे कई वर्षों तक हिंदू महासभा से भी जुड़े रहे. यानि गांधी जी से लेकर गुयाना तक, गदर से लेकर अंडमान तक उनका व्यक्तित्व बहुत प्रेरणादायक है. मैं भाई परमानंद जी को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. युवा साथियों से मेरा आग्रह है कि वे उनके बारे में जानें और दूसरों को भी प्रेरित करें.”
*नॉर्थ-ईस्ट में मिलेट्स की खेती की एक समृद्ध परंपरा रही है*
प्रधानमंत्री ने कहा, "आप सभी को याद होगा कि भारत के आह्वान पर साल 2023 को 'इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स' के रूप में मनाया गया था। इसे पूरी दुनिया में बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। इस पहल के जरिए लोगों ने जाना कि सुपर फूड श्रीअन्न, यानि मिलेट्स, हमारी अपनी संस्कृति से कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं। नॉर्थ-ईस्ट में भी मिलेट्स की खेती की एक समृद्ध परंपरा रही है। लेकिन समय के साथ लोग इससे दूर हो रहे थे। अब ये स्थिति बदल रही है। मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले में खांडुली नाम का एक गांव है। यहां कई पीढ़ियों से मिलेट्स, स्थानीय खान-पान परंपरा का अहम हिस्सा रहे हैं। लेकिन कुछ समय से, यहां इनकी खेती करने वाले किसानों की संख्या कम हो रही थी, ऐसे में, यहां की दो सहेलियों ने एक नई पहल की। उन्होंने मिलेट्स से नए प्रोडक्ट्स बनाने पर ध्यान दिया। मिलेट्स का वैल्यू एडिशन करते हुए उन्होंने कुकीज, केक और मफिंस के साथ-साथ मिलेट्स से बने बेबी फूड भी तैयार किए | इससे मिलेट्स से बने प्रोक्ट्स की बिक्री बढ़ी और मिलेट्स की मांग भी बढ़ने लगी | ऐसे में यहां के किसानों ने भी फिर से मिलेट्स की खेती करना शुरु कर दिया है।"
उन्होंने कहा, "मेघालय के ही पश्चिम गारो हिल्स जिले के सादोलपाड़ा गांव में भी कुछ नए प्रयास हो रहे हैं। यहां के किसान चेकजिंग संगमा ने, मिलेट्स का महत्व समझते हुए आधुनिक तरीकों से इसकी खेती शुरु की है। इससे उनकी आय भी बढ़ी है और गांव में भी एक जागरुकता आई है। इसी तरह नगालैंड के कोहिमा का एक गांव है केजोमा। इस गांव में एक दशक से भी ज्यादा समय से मिलेट्स की खेती बंद थी। इसके चलते यहां एक पूरी पीढ़ी इस पारंपरिक फसल से अनजान रह गई। सोचिए, जिस फसल को उनके दादा-दादी उगाते थे, उसे गांव वाले ही भूलने लगे। साल 2024 में यहां के लोगों ने मिलेट्स की खेती फिर से शुरू की। 2025 में केजोमा ने अपना पहला मिलेट्स फेस्टिलव मनाया।"
*पटेल जयंती पर रन फॉर यूनिटी से मजबूत होती है एकता*
उन्होंने कहा, "कुछ ही दिनों बाद 31 अक्तूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है। इस दिन को देश 'एकता दिवस' के तौर पर मनाता है। इस अवसर पर देशभर में 'एकता दौड़' यानि 'रन फॉर यूनिटी' का आयोजन होता है | 'रन फॉर यूनिटी' हमारी एकता को मजबूत करने का, देश के प्रति अपने संकल्प को दोहराने का, एक बहुत बड़ा मौका है। मेरा आप सभी से आग्रह है कि इस बार भी 'रन फॉर यूनिटी' में बढ़-चढ़कर के हिस्सा लें। अपने परिवार, अपने मित्रों और आस-पास के लोगों को भी अपने साथ जोड़ें।"
*फादर आफ फाइबर आप्टिक्स कहलाने वाल नरिंदर सिंह कपानी को किया याद*
पीएम मोदी ने कहा, "आज हमारे युवा इतने असाधारण काम इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें सही माहौल और समर्थन मिल रहा है। वरना, हमारे देश में प्रतिभाओं की कमी कभी नहीं रही। आज से कुछ ही दिनों बाद 31 अक्तूबर को, भारत के एक ऐसे ही महान वैज्ञानिक नरिंदर सिंह कपानी जी की 100वीं जन्मजयंती है। उन्हें दुनिया 'फादर ऑफ फाइबर ऑप्टिक्स' के रूप में जानती है। उनका जन्म पंजाब के मोगा जिले में हुआ था। प्रकाश को महीन फाइबर के माध्यम से आगे पहुंचाने की तकनीक में उनकी एडवांस रिसर्च ने कम्युनिकेशन की दुनिया को नई दिशा दी। आज इंटरनेट और डिजिटल कम्युनिकेशन के जिस युग में हम जी रहे हैं, उसकी कल्पना भी फाइबर ऑप्टिक्स के बिना बहुत मुश्किल है। आज इस अवसर पर हम नरिंदर सिंह कपानी जी को नमन करते हैं। मैं चाहूंगा, हमारे युवा कपानी जी जैसे वैज्ञानिकों के बारे में पढ़ें, जानें और उनसे प्रेरणा लें।"
*अंगदान के लिए लोगों को किया प्रेरित*
पीएम मोदी ने कहा, "इस तरह की एडवांस रिसर्च में ऑर्गन डोनेशन की बहुत बड़ी भूमिका होती है। जो लोग अपना जीवन पूरा करने के बाद आग दान करके जाते हैं, वो कितने ही लोगों का जीवन भी बचाते हैं और रिसर्च को भी संभव बनाते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण है - मध्य प्रदेश में नर्मदापुरम की शिवानी जी का। शिवानी जी एक सड़क दुर्घटना की शिकार हो गई थी। परिवार पर मुसीबत टूट पड़ी, लेकिन इस कठिन समय मे भी उनके परिवार ने एक ऐसा निर्णय लिया, जो हम सभी के लिए प्रेरणा हैं। यह फैसला था-शिवानी जी के अंग दान का। शिवानी जी के परिवार के इस फैसले से समाज और देश के लिए एक बड़ा संदेश गया है। मानवता के ऐसे एक कदम से किसी परिवार मे खुशियां फिर से लौट सकती हैं और साथ ही रिसर्च के कामों मे भी बड़ी मदद मिलती हैं।"
*आईआईटी मद्रास में ब्रेन सेंटर एक मिशाल है*
पीएम मोदी ने कहा, "इस महीने की शुरुआत में मैं चेन्नई गया था। मेरी मुलाकात वहां देश के कई वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवा प्रतिभाओं से हुई | हमारे युवा आज ऐसे विषयों पर भी काम कर रहे है जो पूरी मानवता का भविष्य बदल सकते हैं। ऐसा ही एक क्षेत्र है ब्रेन रिसर्च। इसी से जुड़े, 'सुधा गोपाल कृष्णन ब्रेन सेंटर' का मैंने आईआईटी मद्रास में लोकार्पण किया था। इस सेंटर ने एक ब्रेन इमेजिंग टेक्नॉलजी प्लेटफॉर्म बनाया है जो दुनिया भर के लिए मिसाल है।"
उन्होंने आगे कहा, "इसके जरिए मानव मस्तिष्क की हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल 3डी तस्वीरें तैयार की जा रही हैं। उनका लक्ष्य है आने वाले दिनों में 100 ह्यूमन ब्रेन की 3डी मैपिंग करके उनका बारीकी से अध्ययन करना।
पूरी दुनिया में ये इस तरह का पहला मिशन है। इस काम में परम शक्ति सुपर कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस ब्रेन सेंटर के निर्माण में देश की इंडस्ट्री ने सरकार के साथ मिलकर बड़ी भूमिका निभाई है। आईआईटी के कई पूर्व छात्र और शिक्षक भी इस रिसर्च सेंटर के लिए साथ आए है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "ये प्रोजेक्ट इतना अहम इसलिए है, क्योंकि विज्ञान की इतनी प्रगति के बावजूद भी मानव मस्तिष्क आज भी एक बड़ी वैज्ञानिक पहेली है। आज भी अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियां हैं, जिनका कोई ठोस इलाज नहीं है। इसलिए विज्ञान ह्यूमन ब्रेन की फंक्शनिंग को जितना गहराई से समझेगा, उतने ही नए स्कोप आने वाले समय में बनेंगे। ये भी तय हुआ है कि 100 ह्यूमन ब्रेन का ये डेटा आगे अलग-अलग क्षेत्र में शोध के लिए ओपन सोर्स के तौर पर उपलब्ध कराया जाएगा।"
*तकनीक के सहारे आसान हो रही लोगों की जिंदगी*
प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारे देश के लोगों की एक बड़ी विशेषता है। हम नई तकनीक को बहुत जल्दी अपना लेते हैं। हम सहज रूप से तकनीक को अपनी दैनिक जिंदगी का हिस्सा भी बना लेते हैं। 'ई-संजीवनी योजना' इसका एक बहुत अच्छा उदाहरण है। इससे पता चलता है कि लोगों के जीवन को आसान बनाने में तकनीक का कैसे बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। मुझे ये देखकर बहुत संतोष होता है कि इसके जरिए अब तक करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा बहुत बड़ा है। तकनीक की ताकत, हमारे डॉक्टरों के सेवाभाव, और देशवासियों के विश्वास का यह बेहतरीन उदाहरण है।"
उन्होंने कहा, "आज ई-संजीवनी सेवा अपने विशाल नेटवर्क के जरिए देश के दूरदराज के इलाकों में भी पहुंच चुकी है। इसका लाभ उठाने वाले लोगों की कहानियां आपको भावुक कर देंगी।
अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के ओहो-ताहाने को तेज बुखार था। सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। ऐसे में स्थानीय स्वास्थ्य कर्मी ने ई-संजीवनी के जरिए विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क किया। उस बच्चे को निमोनिया था और जैसे ही वो डॉक्टर की निगरानी में आया, उसकी स्थिति में तेजी से सुधार होने लगा।"
उन्होंने कहा, "आज ई-संजीवनी सेवा अपने विशाल नेटवर्क के जरिए देश के दूरदराज के इलाकों में भी पहुंच चुकी है। इसका लाभ उठाने वाले लोगों की कहानियां आपको भावुक कर देंगी।
अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के ओहो-ताहाने को तेज बुखार था। सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। ऐसे में स्थानीय स्वास्थ्य कर्मी ने ई-संजीवनी के जरिए विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क किया। उस बच्चे को निमोनिया था और जैसे ही वो डॉक्टर की निगरानी में आया, उसकी स्थिति में तेजी से सुधार होने लगा।"
उन्होंने कहा, "एक समय था डॉक्टर को दिखाने में छोटी-सी स्वास्थ्य जांच में भी लोगों को काफी समय लग जाता था, बहुत कठिनाइयां आती थी। आज देशभर में लगभग 1 लाख 90 हजार आयुष्मान आरोग्य मंदिर लोगों के जीवन में नई-नई सुविधाएं लेकर आए हैं। ये आरोग्य मंदिर एक प्रकार से, पंचायतों के वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित हो रहे हैं। सबसे सुखद बात यह है कि अब गांवों के लोग भी नियमित जांच करवा रहे हैं, ताकि वे स्वस्थ रहें। और इसमें ई-संजीवनी बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है।"
*खादी की लोकप्रियता निरंतर बढ़ रही है*
प्रधानमंत्री ने कहा, "जब स्थानीय उत्पादों की बात होती है तो खादी की चर्चा स्वाभाविक है । इस बार गांधी जयंती पर सिर्फ एक दिन में खादी ग्रामोद्योग के उत्पादों इसकी बिक्री 28 करोड़ रुपये से अधिक की रही | ये पिछले साल से भी डेढ़ करोड़ रुपये और ज्यादा ही है, यानी खादी की लोकप्रियता निरंतर बढ़ती जा रही है और इसका लाभ उन लोगों तक भी पहुंच रहा है, जिनके हुनर और मेहनत से खादी हैंडीक्राफ्ट जैसी अनेक चीजें तैयार होती हैं।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।