17 सितंबर से मथुरा में शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान, 5 लाख दीपों से जगमगाएंगे धार्मिक स्थल
- 11h ago
बड़ौत। लोक कल्याण महामंडल विधान के दूसरे दिन नगर में धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। आचार्यश्री आर्जव सागर महाराज के सानिध्य में जैन श्रद्धालुओं ने भक्ति और श्रद्धा के साथ विनय सम्पन्नता भावना पूजन किया। विधि-विधान एवं धार्मिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर की आराधना कर सुख-शांति, समृद्धि और लोक कल्याण की कामना की।
कार्यक्रम के दौरान सौधर्म इंद्र-इंद्राणी बनने का सौभाग्य राजेश जैन, संगीता जैन एवं भारती को प्राप्त हुआ। ब्रह्मचारी गौरव भैया और ऋषिका दीदी के निर्देशन में जैन श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर की अष्ट द्रव्यों से विधिवत पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ भगवान के समक्ष अर्घ्य समर्पित किए।
विधान के दौरान सौधर्म इंद्र द्वारा मंडल पर 21 अर्घ्य समर्पित किए गए। इस दौरान पूरा आयोजन धार्मिक जयघोष और भक्ति गीतों से गूंजता रहा। संगीतकार संतोष म्यूजिकल ग्रुप द्वारा प्रस्तुत भजनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। विशेष रूप से “मैंने प्रभुजी के चरण पखारे” भजन को श्रद्धालुओं ने खूब सराहा। भक्ति संगीत के दौरान श्रद्धालु धार्मिक भाव में लीन नजर आए।
विधान के दौरान आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री आर्जव सागर महाराज ने कहा कि “करुणा, सहनशीलता और परपीड़ा में संवेदना ही धर्म की महानता है।” उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि धर्म का वास्तविक स्वरूप व्यक्ति के आचरण और व्यवहार में दिखाई देता है।
आचार्यश्री ने कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन में आने वाली आपत्ति और विपत्ति को समता एवं शांति के साथ सहन करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। जीवन में सुख-दुख, लाभ-हानि और परिस्थितियों का उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है। ऐसे समय में व्यक्ति यदि धैर्य और संयम बनाए रखता है तो यही उसकी आध्यात्मिक मजबूती का परिचायक है।
उन्होंने कहा कि अपनी विपत्ति में शांत रहना और दूसरों की विपत्ति में संवेदनशील होकर सहायता के लिए आगे आना ही सच्चे धर्म का परिचय है। उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाया कि जब किसी दूसरे व्यक्ति पर संकट आए तो केवल उसे देखकर दुखी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी मदद और संरक्षण के लिए अपनी सामर्थ्य के अनुसार प्रयास करना चाहिए।
आचार्यश्री आर्जव सागर महाराज ने कहा कि अपनी पीड़ा पर तो प्रत्येक व्यक्ति की आंखों में आंसू आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य ही नहीं, बल्कि अपनी पीड़ा में पशु भी कराह उठता है। लेकिन वास्तविक मानवता तब सामने आती है, जब कोई व्यक्ति दूसरे की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझकर उसके दुख से द्रवित हो और उसकी सहायता के लिए आगे आए।
उन्होंने कहा कि दूसरों के दुख को समझने के लिए संवेदनशील हृदय होना आवश्यक है। आज के समय में व्यक्ति अपने सुख और सुविधाओं तक सीमित होता जा रहा है। ऐसे में धर्म हमें केवल अपने लिए जीने की शिक्षा नहीं देता, बल्कि जरूरतमंदों के प्रति करुणा और सहयोग की भावना रखने का संदेश देता है।
आचार्यश्री ने कहा कि अपनी पीड़ा में मजबूत बने रहना और पराई पीड़ा में संवेदनशील होना ही धर्म की गहराई को प्रकट करता है। यदि व्यक्ति अपने व्यवहार में करुणा, सहनशीलता, संयम और परोपकार को स्थान दे तो समाज में आपसी प्रेम, सहयोग और सद्भाव की भावना मजबूत होगी।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना करना नहीं होना चाहिए, बल्कि इन आयोजनों से प्राप्त संदेश को अपने जीवन में उतारना भी जरूरी है। भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपने आचरण में अपनाकर ही व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी के दुख में उसके साथ खड़ा होना, जरूरतमंद की मदद करना, जीव मात्र के प्रति करुणा रखना और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना धर्म के महत्वपूर्ण गुण हैं। मनुष्य को अपने व्यवहार में अहिंसा, संयम और संवेदना को स्थान देना चाहिए।
लोक कल्याण महामंडल विधान के दूसरे दिन बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु धार्मिक आयोजन में शामिल हुए। पूजा-अर्चना के दौरान श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव से भगवान महावीर का स्मरण किया। अष्ट द्रव्यों से पूजा और अर्घ्य समर्पण के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।
धार्मिक भजनों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम के वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। संतोष म्यूजिकल ग्रुप के भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने धर्म, भक्ति और आध्यात्मिकता के वातावरण का अनुभव किया।
धर्मसभा के समापन पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के प्रवचनों को आत्मसात करते हुए करुणा, सहनशीलता और परपीड़ा में संवेदना के संदेश को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
धर्मसभा में संजीव जैन, संजय जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।


