17 सितंबर से मथुरा में शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान, 5 लाख दीपों से जगमगाएंगे धार्मिक स्थल
- 11h ago
मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की आहट के साथ ही ब्रजभूमि में भक्ति, उल्लास और उत्सव का रंग गहराने लगा है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को भव्य और दिव्य स्वरूप देने के लिए मथुरा-वृंदावन में तैयारियां अब अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। मंदिरों से लेकर प्रमुख बाजारों, चौराहों और मार्गों तक सजावट का काम तेजी से चल रहा है। शाम ढलते ही रंग-बिरंगी रोशनी से नहाया ब्रज श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
श्रीकृष्ण की जन्मनगरी मथुरा को इस बार विशेष अंदाज में सजाया जा रहा है। शहर के प्रमुख मार्गों और दीवारों पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, रासलीला, गीता के उपदेश और ब्रज संस्कृति से जुड़े प्रसंगों की आकर्षक वॉल पेंटिंग बनाई जा रही हैं। इन चित्रों के माध्यम से ब्रज की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक स्वरूप में श्रद्धालुओं के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है।
जन्माष्टमी से पहले ही मथुरा और वृंदावन की गलियों में कान्हा के जन्मोत्सव की झलक दिखाई देने लगी है। मंदिरों में विशेष सजावट की जा रही है, वहीं बाजारों में भी पर्व को लेकर रौनक बढ़ गई है। दुकानों पर श्रीकृष्ण की पोशाक, मुकुट, बांसुरी, झूले और पूजा सामग्री की बिक्री तेज हो गई है।
जन्माष्टमी को लेकर मथुरा और वृंदावन के प्रमुख मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों पर विशेष विद्युत सजावट की जा रही है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर के आसपास, बांके बिहारी मंदिर क्षेत्र, प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों को आकर्षक रोशनी से सजाया जा रहा है।
रात होते ही एलईडी लाइटों और रंगीन झालरों से सजे मंदिर और मार्ग अलग ही छटा बिखेर रहे हैं। कहीं भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को रोशनी के माध्यम से प्रदर्शित किया जा रहा है तो कहीं धार्मिक प्रसंगों को आकर्षक सजावट के जरिए जीवंत रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
वृंदावन में भी मंदिरों के आसपास और प्रमुख मार्गों पर सजावट का काम तेज हो गया है। श्रद्धालु दिन के साथ-साथ रात में भी सजावट देखने के लिए पहुंच रहे हैं। कई स्थानों पर रोशनी और सजावट के बीच सेल्फी लेते श्रद्धालु भी नजर आ रहे हैं।
मथुरा की सड़कों और प्रमुख स्थानों की दीवारों को भी जन्माष्टमी के रंग में रंगा जा रहा है। वॉल पेंटिंग के जरिए भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को चित्रित किया जा रहा है।
कहीं नन्हे कान्हा माखन चुराते नजर आएंगे तो कहीं मां यशोदा के साथ उनकी बाल लीलाओं को चित्रित किया जा रहा है। राधा-कृष्ण की झांकियों, गोवर्धन पूजा, कालिया नाग मर्दन और गीता के संदेशों से जुड़े चित्र भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
इन चित्रों का उद्देश्य केवल सजावट करना नहीं, बल्कि ब्रज की प्राचीन संस्कृति और श्रीकृष्ण की लीलाओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना भी है। इससे शहर की दीवारें भी धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश देने का माध्यम बन रही हैं।
जन्माष्टमी के पर्व को लेकर ब्रज के मंदिरों में भी विशेष तैयारियां की जा रही हैं। मंदिरों को फूलों, रंगीन वस्त्रों, विद्युत झालरों और आकर्षक सजावटी सामग्री से सजाया जा रहा है। जन्माष्टमी के दिन भगवान के विशेष श्रृंगार और झांकी को लेकर भी तैयारियां चल रही हैं।
रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। मंदिरों में भजन-कीर्तन, संकीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा।
कान्हा के जन्म के समय मंदिरों में घंटा-घड़ियाल और शंखनाद के बीच होने वाली आरती का दृश्य हर वर्ष श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है।
जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा-वृंदावन में देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने भी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि, वृंदावन के प्रमुख मंदिरों, गोवर्धन, बरसाना और अन्य धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष योजना तैयार की जा रही है। प्रमुख स्थानों पर बैरिकेडिंग, सीसीटीवी कैमरे और अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था की जा रही है।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग होल्डिंग एरिया बनाए जाने तथा जरूरत के अनुसार यातायात मार्गों में बदलाव की व्यवस्था भी की जा रही है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
जन्माष्टमी के दौरान उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रमुख धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी की जाएगी।
इसके साथ ही जरूरत के अनुसार ड्रोन कैमरों से भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखने की तैयारी है। पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार प्रमुख मार्गों और संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण कर रही हैं।
सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली और ब्रज के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कर सकें।
जन्माष्टमी पर मथुरा-वृंदावन में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से यातायात का दबाव भी काफी बढ़ जाता है। इसे देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारी की जा रही है।
प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव कम करने, पार्किंग व्यवस्था को व्यवस्थित करने और श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु रखने के लिए योजना बनाई जा रही है। शहर में प्रवेश करने वाले वाहनों और बाहर निकलने वाले वाहनों के लिए आवश्यकतानुसार अलग-अलग रूट निर्धारित किए जा सकते हैं।
श्रद्धालुओं से भी अपील की जा रही है कि वे प्रशासन द्वारा जारी यातायात निर्देशों का पालन करें और निर्धारित पार्किंग स्थलों का ही इस्तेमाल करें।
जन्माष्टमी के दौरान मथुरा-वृंदावन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए स्वच्छता व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नगर निगम की ओर से प्रमुख मंदिर मार्गों, बाजारों, चौराहों और श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए जा रहे हैं।
कूड़ा उठाने की व्यवस्था, सार्वजनिक स्थलों की सफाई और प्रमुख मार्गों पर नियमित निगरानी बढ़ाने की तैयारी है। प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को धार्मिक उत्सव के साथ स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
जन्माष्टमी नजदीक आते ही मथुरा-वृंदावन के बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। दुकानों पर कान्हा के लिए आकर्षक पोशाक, मुकुट, मोरपंख, बांसुरी और झूले सज गए हैं। घरों में लड्डू गोपाल की झांकी सजाने के लिए श्रद्धालु खरीदारी कर रहे हैं।
मथुरा के बाजारों में कान्हा की विभिन्न प्रकार की पोशाकें और श्रृंगार सामग्री लोगों को आकर्षित कर रही हैं। छोटे बच्चों के लिए भी कृष्ण और राधा की पोशाकों की मांग बढ़ गई है। जन्माष्टमी के चलते मिठाई की दुकानों पर भी विशेष तैयारियां शुरू हो गई हैं।
ब्रज में जन्माष्टमी केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहती। बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में भी भगवान श्रीकृष्ण की झांकी सजाते हैं। कहीं बाल गोपाल को पालने में झुलाया जाता है तो कहीं कृष्ण जन्म की झांकी बनाई जाती है।
बच्चों में भी जन्माष्टमी को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिलता है। कई स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं की ओर से कृष्ण-राधा रूप सज्जा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियां की जाती हैं।
वृंदावन की अंतरराष्ट्रीय पहचान के कारण जन्माष्टमी के दौरान यहां देश ही नहीं बल्कि विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या भी बढ़ जाती है। विदेशी श्रद्धालु भी राधा-कृष्ण की भक्ति में रंगे नजर आते हैं।
वृंदावन के मंदिरों में होने वाले भजन, संकीर्तन और धार्मिक आयोजनों का अलग ही आकर्षण रहता है। जन्माष्टमी के दौरान पूरा वातावरण कृष्णमय हो जाता है और मंदिरों से उठती भजन-कीर्तन की धुनें श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराती हैं।
जैसे-जैसे जन्माष्टमी का पर्व करीब आ रहा है, वैसे-वैसे ब्रज की फिजाओं में उत्साह और भक्ति का रंग गहराता जा रहा है। मथुरा की गलियों से लेकर वृंदावन के मंदिरों तक हर ओर कान्हा के स्वागत की तैयारियां दिखाई दे रही हैं।
श्रद्धालुओं की जुबां पर कृष्ण नाम है, मंदिरों में भजन गूंज रहे हैं और बाजारों में जन्माष्टमी की खरीदारी जोरों पर है। सजावट से जगमगाते मार्ग और मंदिर यह संकेत दे रहे हैं कि ब्रज जल्द ही उस पावन क्षण का साक्षी बनने वाला है, जब आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में पूरा ब्रज झूम उठेगा।
ब्रज की धरती पर हर ओर एक ही प्रतीक्षा है—कब घड़ी की सुइयां मध्यरात्रि का संकेत दें और नंद के घर आनंद छा जाए। कब मंदिरों में घंटा-घड़ियाल गूंजें, शंखनाद हो और भक्त एक स्वर में पुकार उठें—'नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।


