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- 13h ago
नई दिल्ली। एशियाई खेलों में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय महिला गोल्फर प्रणवी उर्स को शुक्रवार को दिल्ली गोल्फ क्लब में एक करोड़ रुपये की सम्मान राशि का चेक प्रदान किया गया। पूर्व केंद्रीय खेल मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने डीपी वर्ल्ड इंडिया चैंपियनशिप के दौरान आयोजित एक विशेष समारोह में प्रणवी को यह चेक सौंपा। एएम ग्रीन आईजीपीएल की ओर से आयोजित इस सम्मान समारोह में भारतीय गोल्फ में प्रणवी के ऐतिहासिक योगदान की सराहना की गई।
जापान में आयोजित एशियाई खेलों में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर बनने के बाद प्रणवी उर्स को देश-विदेश में पहचान मिली है। उनका यह प्रदर्शन भारतीय गोल्फ के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। दिल्ली गोल्फ क्लब में आयोजित समारोह के दौरान उनकी मेहनत, खेल के प्रति समर्पण, दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की उपलब्धि को रेखांकित किया गया।
इस अवसर पर दिल्ली गोल्फ क्लब के अध्यक्ष राज खन्ना, आईजीपीएल के सीईओ उत्तम सिंह मुंडी, भारत गोल्फ प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक मानव जैनी और टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। विश्वस्तरीय गोल्फ प्रतियोगिता के दौरान आयोजित इस कार्यक्रम ने भारतीय गोल्फ में महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों को विशेष महत्व दिया।
सम्मान समारोह में प्रणवी उर्स ने अपनी सफलता के लिए सहयोग देने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अपने देश में सम्मानित होना उनके लिए विशेष अनुभव है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि उनकी उपलब्धि से भारत की अधिक से अधिक लड़कियां गोल्फ जैसे खेल को अपनाने के लिए प्रेरित होंगी।
पूर्व केंद्रीय खेल मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने प्रणवी उर्स को एक करोड़ रुपये की सम्मान राशि का चेक प्रदान करते हुए उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रणवी ने भारतीय गोल्फ को वह उपलब्धि दिलाई है, जिसका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था।
अनुराग ठाकुर के अनुसार, दिल्ली गोल्फ क्लब जैसे प्रतिष्ठित स्थल पर विश्वस्तरीय खिलाड़ियों और गोल्फ प्रेमियों के बीच प्रणवी को सम्मानित करना विशेष महत्व रखता है। उनकी सफलता ने भारतीय गोल्फ की संभावनाओं को नई पहचान दी है और युवा खिलाड़ियों के सामने एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल करने वाले खिलाड़ियों का सम्मान करना आवश्यक है, क्योंकि इससे खेल के प्रति युवाओं का उत्साह बढ़ता है। प्रणवी की उपलब्धि विशेष रूप से उन लड़कियों को प्रेरित कर सकती है, जो गोल्फ में अपना करियर बनाना चाहती हैं।
प्रणवी की सफलता यह भी दिखाती है कि भारतीय खिलाड़ी व्यक्तिगत स्पर्धाओं में विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा का सामना करते हुए शीर्ष स्थान हासिल कर सकते हैं। गोल्फ जैसे खेल में तकनीकी दक्षता, मानसिक मजबूती, एकाग्रता और लंबे समय तक निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है। ऐसे में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रणवी उर्स ने खुशी जाहिर करते हुए अनुराग ठाकुर और एएम ग्रीन आईजीपीएल का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर सम्मानित होना उनके लिए बेहद खास है, विशेषकर तब जब वह ऐसे टूर्नामेंट के दौरान सम्मान प्राप्त कर रही हैं, जिसमें दुनिया के कई शीर्ष गोल्फ खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।
प्रणवी ने कहा कि शीर्ष पुरुष पेशेवर खिलाड़ियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करना और उन्हें फिर से हराना उनके लिए प्रेरणादायक अनुभव है। अपने देश में खेल जगत के लोगों के बीच सम्मान प्राप्त करना उनके लिए अलग तरह की खुशी लेकर आया है।
उन्होंने अपनी सफलता को उन सभी लोगों को समर्पित किया, जिन्होंने उनके खेल करियर की शुरुआत से उनका साथ दिया। किसी भी खिलाड़ी की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि के पीछे अभ्यास, प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रणवी ने भी अपने सफर में साथ देने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी सफलता से देश की अधिक से अधिक लड़कियां गोल्फ में आगे आएंगी और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखेंगी।
प्रणवी का यह संदेश भारतीय महिला गोल्फ के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है। खेलों में सफल महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियां नई पीढ़ी को यह विश्वास दिलाती हैं कि मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।
प्रणवी उर्स ने तीन अक्टूबर को जापान में आयोजित एशियाई खेलों में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। वह एशियाई खेलों की व्यक्तिगत गोल्फ स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर बनीं।
उनकी इस जीत को भारतीय गोल्फ के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया। एशियाई खेलों में व्यक्तिगत स्पर्धा का स्वर्ण जीतने के लिए प्रणवी को कई अनुभवी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी। प्रतियोगिता के दौरान उतार-चढ़ाव के बावजूद उन्होंने अपना ध्यान बनाए रखा और अंतिम दौर में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया।
प्रणवी के प्रदर्शन ने यह साबित किया कि गोल्फ में केवल तकनीकी कौशल ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता भी निर्णायक होती है। कई बार प्रतियोगिता के दौरान एक खराब शॉट खिलाड़ी की स्थिति बदल सकता है, लेकिन शीर्ष स्तर के खिलाड़ी अपनी रणनीति पर दोबारा ध्यान केंद्रित करके मुकाबले में वापसी करते हैं।
प्रणवी की ऐतिहासिक जीत इसी तरह की खेल भावना और धैर्य का उदाहरण बनी। उनका स्वर्ण पदक भारतीय महिला गोल्फ के लिए एक नया अध्याय माना जा रहा है।
एशियाई खेलों की व्यक्तिगत गोल्फ स्पर्धा के अंतिम दौर की शुरुआत प्रणवी उर्स ने तीन शॉट की बढ़त के साथ की थी। हालांकि, तीसरे होल पर ट्रिपल बोगी के कारण उनकी बढ़त समाप्त हो गई और मुकाबला उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो गया।
गोल्फ में ट्रिपल बोगी का अर्थ किसी होल को उसके निर्धारित पार से तीन शॉट अधिक में पूरा करना होता है। इस तरह का परिणाम खिलाड़ी के कुल स्कोर पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है, विशेषकर तब जब प्रतियोगिता अंतिम दौर में पहुंच चुकी हो और पदक का फैसला नजदीक हो।
ऐसी स्थिति में प्रणवी ने धैर्य बनाए रखा। उन्होंने अपने खेल पर ध्यान केंद्रित किया और तीन बर्डी लगाकर वापसी की। बर्डी का अर्थ किसी होल को निर्धारित पार से एक शॉट कम में पूरा करना है। इन अहम शॉटों ने उन्हें मुकाबले में बनाए रखा और स्वर्ण पदक की दौड़ में बढ़त हासिल करने में मदद की।
प्रणवी ने प्रतियोगिता का समापन कुल 15-अंडर 265 के स्कोर के साथ किया। उन्होंने चीन की यिन रुओनिंग और सिंगापुर की शैनन टैन को एक शॉट से पीछे छोड़कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
यह मुकाबला दर्शाता है कि गोल्फ में अंतिम परिणाम तक एकाग्रता बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। शुरुआती बढ़त हमेशा जीत की गारंटी नहीं होती और एक खराब होल के बाद भी खिलाड़ी के पास वापसी का अवसर रहता है। प्रणवी ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संयम के साथ खेलते हुए यह उपलब्धि हासिल की।
एशियाई खेलों में प्रणवी उर्स का मुकाबला कई प्रतिभाशाली और अनुभवी अंतरराष्ट्रीय गोल्फ खिलाड़ियों से हुआ। चीन की यिन रुओनिंग और सिंगापुर की शैनन टैन जैसी खिलाड़ियों के बीच स्वर्ण पदक जीतना उनकी उपलब्धि को और महत्वपूर्ण बनाता है।
यिन रुओनिंग एलपीजीए टूर पर छह खिताब जीत चुकी हैं। ऐसे अनुभवी खिलाड़ियों के बीच प्रणवी ने अपने खेल का स्तर बनाए रखा और अंतिम दौर में निर्णायक प्रदर्शन किया।
अंतरराष्ट्रीय गोल्फ में प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी ऊंचा होता है। खिलाड़ियों को अलग-अलग परिस्थितियों, कोर्स की बनावट, मौसम, हवा की गति और दबाव के अनुसार अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ता है। एकाग्रता और शॉट की सटीकता के साथ-साथ स्कोर को नियंत्रित रखने की क्षमता भी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रणवी की जीत ने भारतीय गोल्फ में मौजूद प्रतिभा को सामने लाने का काम किया। उनकी उपलब्धि से यह संदेश भी मिला कि भारतीय महिला खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने के साथ खेल की शीर्ष प्रतिभाओं को चुनौती देने की क्षमता रखती हैं।
प्रणवी उर्स के स्वर्ण पदक के साथ एशियाई खेलों में भारतीय गोल्फ के व्यक्तिगत स्वर्ण पदक का 24 वर्षों का इंतजार समाप्त हुआ। इससे पहले 2002 में बुसान एशियाई खेलों में शिव कपूर ने पुरुष वर्ग की व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था।
इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में प्रणवी की उपलब्धि भारतीय गोल्फ के लिए विशेष महत्व रखती है। जहां शिव कपूर की जीत ने पुरुष गोल्फ में भारत की क्षमता को सामने रखा था, वहीं प्रणवी ने महिला वर्ग में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतकर नई उपलब्धि दर्ज की।
खेलों में ऐसी सफलताएं केवल पदक तक सीमित नहीं रहतीं। वे संबंधित खेल की लोकप्रियता बढ़ाने, खिलाड़ियों के लिए नए अवसर पैदा करने और प्रशिक्षण तथा प्रतिस्पर्धा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए प्रेरणा भी देती हैं।
प्रणवी की सफलता भारतीय गोल्फ के विकास की संभावनाओं को रेखांकित करती है। इससे युवा खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल संस्थाओं को महिला गोल्फ में प्रतिभाओं की पहचान तथा उन्हें बेहतर अवसर देने के महत्व पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा मिल सकती है।
एशियाई खेलों में प्रणवी उर्स ने व्यक्तिगत स्पर्धा के साथ महिला टीम प्रतियोगिता में भी भारत के प्रदर्शन में अहम योगदान दिया। अदिति अशोक और दीक्षा डागर के साथ मिलकर उन्होंने भारतीय टीम को रजत पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
टीम स्पर्धा में खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन का संयुक्त परिणाम भारत की पदक संभावनाओं को निर्धारित करता है। ऐसे में प्रत्येक खिलाड़ी का प्रदर्शन टीम के अंतिम स्थान को प्रभावित करता है।
भारतीय महिला टीम का रजत पदक इस बात का संकेत है कि देश की महिला गोल्फ खिलाड़ियों में सामूहिक रूप से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है। प्रणवी, अदिति अशोक और दीक्षा डागर जैसी खिलाड़ियों का प्रदर्शन युवा गोल्फरों के लिए प्रेरणादायक हो सकता है।
व्यक्तिगत स्वर्ण और टीम रजत के साथ प्रणवी का एशियाई खेल अभियान भारतीय महिला गोल्फ के लिए उल्लेखनीय रहा। उनकी उपलब्धि ने भारतीय टीम के प्रदर्शन को नई पहचान देने के साथ महिला गोल्फ की ओर ध्यान आकर्षित किया।
एएम ग्रीन आईजीपीएल के सीईओ उत्तम सिंह मुंडी ने प्रणवी उर्स की उपलब्धि को भारतीय गोल्फ के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि प्रणवी के ऐतिहासिक स्वर्ण पदक को देश के प्रमुख गोल्फ मंच पर सम्मानित किया जाना चाहिए।
मुंडी के अनुसार, प्रणवी की सफलता वर्षों की मेहनत और भारतीय गोल्फ की प्रगति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रणवी ने पहले भी पेशेवर गोल्फ में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर एक बार फिर अपनी क्षमता साबित की है।
मुंडी ने प्रणवी को भारतीय गोल्फ में नई राह बनाने वाली खिलाड़ी बताया। उनका कहना था कि ऐसी उपलब्धियां खेल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और आने वाले समय में अन्य खिलाड़ियों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित कर सकती हैं।
उन्होंने प्रणवी के पिछले प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने मुंबई में आयोजित आईजीपीएल आमंत्रण प्रतियोगिता में मिश्रित पेशेवर स्पर्धा जीतकर भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की थी। एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक ने उनके करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ दी।
एएम ग्रीन आईजीपीएल एक फ्रेंचाइजी आधारित पेशेवर गोल्फ लीग और टूर है। इसकी ओर से गोल्फ को व्यापक स्तर पर लोकप्रिय बनाने, प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अवसर उपलब्ध कराने और खेल के विकास को प्रोत्साहित करने पर ध्यान दिया जाता है।
दी गई जानकारी के अनुसार, लीग भारतीय गोल्फ संघ, महिला गोल्फ संघ, प्रोफेशनल गोल्फर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, द गोल्फ फाउंडेशन और स्पेशल ओलंपिक्स भारत के साथ मिलकर काम करती है।
गोल्फ को भारत में अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षण सुविधाओं, अकादमियों और गोल्फ कोर्स के विकास की आवश्यकता होती है। इस खेल को अक्सर सीमित सुविधाओं और अधिक खर्च से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में नए खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और खेल के बुनियादी ढांचे तक पहुंच बढ़ाना महत्वपूर्ण हो जाता है।
आईजीपीएल की ओर से ‘गोल्फ ऑन व्हील्स’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से भी गोल्फ की पहुंच बढ़ाने का उद्देश्य रखा गया है। इस प्रकार की पहल खेल से अपरिचित लोगों को इसके नियमों, तकनीक और अभ्यास से परिचित कराने में सहायक हो सकती हैं।
प्रणवी जैसी खिलाड़ियों की सफलता और पेशेवर गोल्फ प्रतियोगिताओं का विस्तार एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियां गोल्फ के प्रति रुचि बढ़ाती हैं, जबकि बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के अवसर नई प्रतिभाओं को आगे आने में मदद कर सकते हैं।
डीपी वर्ल्ड इंडिया चैंपियनशिप के दौरान दिल्ली गोल्फ क्लब में आयोजित सम्मान समारोह ने भारतीय गोल्फ की ऐतिहासिक उपलब्धि को व्यापक पहचान दिलाने का अवसर प्रदान किया। विश्वस्तरीय खिलाड़ियों की भागीदारी वाले टूर्नामेंट के दौरान प्रणवी को सम्मानित किया जाना उनके प्रदर्शन को पेशेवर गोल्फ जगत के बीच रेखांकित करता है।
समारोह में दिल्ली गोल्फ क्लब के अध्यक्ष राज खन्ना, आईजीपीएल के सीईओ उत्तम सिंह मुंडी, भारत गोल्फ प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक मानव जैनी और टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
गोल्फ क्लब और पेशेवर प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों के लिए प्रतिस्पर्धा के साथ नेटवर्किंग, अनुभव साझा करने और खेल के विकास से जुड़ने के महत्वपूर्ण मंच होते हैं। ऐसे आयोजनों में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सम्मानित करने से घरेलू खेल समुदाय और अंतरराष्ट्रीय गोल्फ जगत के बीच संवाद को भी बढ़ावा मिलता है।
प्रणवी के सम्मान समारोह का मुख्य उद्देश्य उनकी उपलब्धि को मान्यता देना और भारतीय महिला गोल्फ में उनके योगदान को सामने लाना रहा।
प्रणवी उर्स की उपलब्धि का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे भारत में गोल्फ अपनाने की इच्छुक लड़कियों को प्रेरणा मिल सकती है। खेलों में महिला खिलाड़ियों की सफलता समाज में प्रचलित धारणाओं को बदलने और अधिक परिवारों को अपनी बेटियों को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने में मदद करती है।
गोल्फ में करियर बनाने के लिए तकनीकी प्रशिक्षण, शारीरिक फिटनेस, मानसिक एकाग्रता, नियमित अभ्यास और प्रतियोगिताओं में अनुभव हासिल करना आवश्यक है। खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर पर उपयुक्त प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के अवसर मिलें, तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर सकते हैं।
प्रणवी की जीत उन युवा खिलाड़ियों के लिए उदाहरण है, जो बड़े मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखती हैं। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि खेल में निरंतरता, धैर्य और कठिन परिस्थितियों में संयम बनाए रखना सफलता की राह में महत्वपूर्ण है।
महिला गोल्फ के विकास के लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण सुविधाओं, प्रशिक्षकों, आर्थिक सहायता, प्रतियोगिताओं और खेल के प्रति जागरूकता का विस्तार भी आवश्यक है। प्रणवी का सम्मान समारोह इन विषयों पर चर्चा और नए खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान करता है।
प्रणवी उर्स का एशियाई खेलों में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतना भारतीय महिला गोल्फ के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। अदिति अशोक और दीक्षा डागर जैसी खिलाड़ियों के साथ भारत में महिला गोल्फ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में उनकी सफलता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इस उपलब्धि के बाद देश में महिला गोल्फ को लेकर रुचि बढ़ने की संभावनाएं हैं। हालांकि, इस रुचि को दीर्घकालिक विकास में बदलने के लिए खेल संस्थाओं, प्रशिक्षण केंद्रों, आयोजकों और प्रायोजकों के बीच निरंतर सहयोग आवश्यक होगा।
प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से लेकर पेशेवर प्रतियोगिताओं तक पहुंचाने के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण और पर्याप्त प्रतिस्पर्धी अवसर उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। इसी प्रकार महिला खिलाड़ियों के लिए आर्थिक सहयोग और खेल संबंधी संसाधनों तक पहुंच उनके करियर को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है।
प्रणवी को एक करोड़ रुपये की सम्मान राशि का चेक प्रदान किया जाना उनकी उपलब्धि को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस तरह के सम्मान खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सार्वजनिक पहचान देते हैं और खेलों में उत्कृष्टता हासिल करने के प्रयासों को प्रोत्साहित करते हैं।
प्रणवी उर्स को दिया गया एक करोड़ रुपये का चेक समारोह की प्रमुख विशेषता रहा, लेकिन उनकी उपलब्धि का महत्व केवल सम्मान राशि तक सीमित नहीं है। एशियाई खेलों में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने भारतीय महिला गोल्फ के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया।
तीन शॉट की बढ़त के साथ अंतिम दौर शुरू करने के बाद ट्रिपल बोगी का सामना करना और फिर बर्डी के जरिए वापसी करते हुए स्वर्ण पदक जीतना उनके प्रदर्शन की चुनौतीपूर्ण प्रकृति को दिखाता है। चीन और सिंगापुर की खिलाड़ियों को पीछे छोड़कर जीत हासिल करना उनके लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सफलता रही।
व्यक्तिगत स्वर्ण के साथ महिला टीम स्पर्धा में रजत पदक ने भी भारतीय गोल्फ में उनके योगदान को विशेष बनाया। इस उपलब्धि ने भारतीय खिलाड़ियों की प्रतिस्पर्धी क्षमता को सामने लाने के साथ युवा गोल्फरों के लिए एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया।
दिल्ली गोल्फ क्लब में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान अनुराग ठाकुर और एएम ग्रीन आईजीपीएल के प्रतिनिधियों ने उनकी उपलब्धि की सराहना की। प्रणवी ने भी अपने करियर में साथ देने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि उनकी सफलता से अधिक लड़कियां गोल्फ की ओर आकर्षित होंगी।
प्रणवी उर्स की ऐतिहासिक जीत और उन्हें मिला सम्मान भारतीय महिला गोल्फ के विकास, नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और देश में इस खेल की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश देते हैं। उनका स्वर्ण पदक यह याद दिलाता है कि निरंतर मेहनत, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


