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- 13h ago
नई दिल्ली। देश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के प्रतीक लाल किला मैदान स्थित माधवदास पार्क में शुक्रवार को विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर खाद्य सुरक्षा, सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन की उपलब्धता और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। ग्लोबल ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (इंडिया) (जीटीटीसीआई) और श्री धार्मिक लीला कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में खाद्य सुरक्षा को वैश्विक प्राथमिकता बनाने, समाज के प्रत्येक वर्ग तक पौष्टिक भोजन की पहुंच सुनिश्चित करने और इस दिशा में सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में विभिन्न देशों के राजनयिकों, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के पदाधिकारियों, उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों और अन्य विशिष्ट अतिथियों की सहभागिता रही। आयोजन ने इस विचार को प्रमुखता से सामने रखा कि भोजन केवल मनुष्य की बुनियादी आवश्यकता ही नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य, सामाजिक समानता, आर्थिक विकास और मानवीय गरिमा का भी आधार है। सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकारों, सामाजिक संस्थाओं, उद्योग जगत और आम नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है।
विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर आयोजित इस पहल के माध्यम से खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक विषय को भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ते हुए व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। ऐतिहासिक लाल किला परिसर में आयोजित कार्यक्रम ने भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों के बीच संवाद स्थापित करने का अवसर प्रदान किया।
आज के समय में खाद्य सुरक्षा विश्व समुदाय के सामने मौजूद महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। बढ़ती जनसंख्या, बदलती जीवनशैली, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, पोषण संबंधी चुनौतियों, खाद्य अपव्यय और सभी वर्गों तक पर्याप्त भोजन की पहुंच जैसे विषयों पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है। ऐसे में विश्व खाद्य दिवस जैसे अवसर लोगों को यह समझने का अवसर प्रदान करते हैं कि सुरक्षित और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता केवल कृषि उत्पादन तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसका संबंध खाद्य उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण, स्वच्छता, उपभोक्ता जागरूकता और प्रभावी खाद्य प्रणालियों से भी है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य खाद्य सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए समाज में ऐसी जागरूकता विकसित करना था, जिसके माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित भोजन पहुंचाने की दिशा में ठोस प्रयासों को प्रोत्साहन मिल सके। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के प्रति सतर्कता, संतुलित पोषण के महत्व और खाद्य सुरक्षा से जुड़े विषयों पर सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया गया।
आयोजन के माध्यम से यह विचार सामने आया कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नीतिगत प्रयासों के साथ-साथ जनभागीदारी भी आवश्यक है। जब सरकारें, संस्थाएं, व्यवसायिक संगठन और नागरिक मिलकर इस दिशा में कार्य करते हैं, तभी सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन की उपलब्धता को व्यापक स्तर पर मजबूत किया जा सकता है।
श्री धार्मिक लीला कमेटी पिछले 103 वर्षों से ऐतिहासिक लाल किला परिसर में पारंपरिक रामलीला का आयोजन करती आ रही है। भारतीय धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं को संरक्षित करने में कमेटी की यह दीर्घकालीन भूमिका विशेष महत्व रखती है। इसी सांस्कृतिक मंच पर विश्व खाद्य दिवस का आयोजन भारतीय परंपरा को समकालीन वैश्विक विषयों से जोड़ने की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।
भारतीय संस्कृति में भोजन को जीवन, सेवा, सहयोग और मानवीय संवेदना से जोड़कर देखा जाता है। अन्न का सम्मान, जरूरतमंदों की सहायता और सामुदायिक सहभागिता जैसी परंपराएं समाज को एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदार बनने की प्रेरणा देती हैं। इसी व्यापक सांस्कृतिक दृष्टिकोण के अनुरूप खाद्य सुरक्षा के विषय को सामने लाना कार्यक्रम के उद्देश्य को और अधिक प्रासंगिक बनाता है।
लाल किला मैदान जैसे ऐतिहासिक स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि सांस्कृतिक आयोजन केवल परंपराओं के संरक्षण तक सीमित नहीं होते, बल्कि इनके माध्यम से सामाजिक जागरूकता, जनहित और अंतरराष्ट्रीय संवाद को भी प्रोत्साहित किया जा सकता है। इस प्रकार भारतीय सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक विकास से जुड़े विषयों के साथ जोड़ने का प्रयास आयोजन की प्रमुख विशेषताओं में शामिल रहा।
कार्यक्रम के दौरान श्री धार्मिक लीला कमेटी के महासचिव धीरज धर गुप्ता और ग्लोबल ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (इंडिया) के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने उपस्थित राजनयिकों, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और विशिष्ट अतिथियों का सम्मान किया। इस अवसर पर खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सभी लोगों के लिए सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
दोनों संस्थाओं की संयुक्त भागीदारी ने सांस्कृतिक संगठनों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने वाले मंचों के बीच समन्वय का महत्व रेखांकित किया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के संगठनों को एक साथ आकर कार्य करना चाहिए।
इस प्रकार आयोजन ने खाद्य सुरक्षा को केवल किसी एक देश या क्षेत्र की चुनौती के रूप में देखने के बजाय इसे साझा वैश्विक जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत किया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की सहभागिता ने इस विषय पर संवाद और सहयोग की आवश्यकता को भी प्रमुखता दी।
कार्यक्रम में चाड गणराज्य के राजदूत, कोमोरोस संघ के मानद महावाणिज्यदूत तथा चीन, यूनान, नाइजर और निकारागुआ के दूतावासों से जुड़े राजनयिक उपस्थित रहे। भारत में यूनेस्को के निदेशक डॉ. बेन्नो बोअर ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। इसके अतिरिक्त इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. के. जी. सुरेश की उपस्थिति ने आयोजन को विशिष्टता प्रदान की।
विभिन्न देशों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सहभागिता ने खाद्य सुरक्षा जैसे विषय की अंतरराष्ट्रीय प्रासंगिकता को सामने रखा। खाद्य सुरक्षा की चुनौतियां अलग-अलग देशों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार भिन्न हो सकती हैं, लेकिन सुरक्षित भोजन, पर्याप्त पोषण और बेहतर खाद्य प्रणालियों की आवश्यकता सभी समाजों के लिए महत्वपूर्ण है।
ऐसे आयोजनों के माध्यम से विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को साझा सामाजिक विषयों पर एक मंच पर आने और सहयोग की संभावनाओं को प्रोत्साहित करने का अवसर मिलता है। खाद्य सुरक्षा जैसे जनहित से जुड़े विषय पर आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी व्यापक उद्देश्य के अनुरूप रहा।
इथियोपिया, ईरान और जाम्बिया के प्रवासी समुदायों के प्रतिनिधियों की भागीदारी ने भी कार्यक्रम के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को विस्तार दिया। विभिन्न पृष्ठभूमियों से आए प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने सांस्कृतिक विविधता, पारस्परिक संवाद और साझा मानवीय सरोकारों के महत्व को रेखांकित किया।
खाद्य सुरक्षा का अर्थ केवल पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध कराना नहीं है। यह भी आवश्यक है कि भोजन स्वच्छ, सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और पोषण की दृष्टि से उपयोगी हो। किसी भी समाज में बेहतर स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए संतुलित आहार तथा सुरक्षित खाद्य पदार्थों की उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
खाद्य पदार्थों के उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में गुणवत्ता और स्वच्छता बनाए रखना आवश्यक है। खाद्य पदार्थों का उचित भंडारण, सुरक्षित परिवहन, स्वच्छ परिस्थितियों में तैयार करना और निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन करना खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
इसके अतिरिक्त उपभोक्ताओं को भी खाद्य पदार्थ खरीदते समय उनकी गुणवत्ता, पैकेजिंग, समाप्ति तिथि और भंडारण संबंधी निर्देशों पर ध्यान देना चाहिए। खाद्य पदार्थों की बर्बादी को कम करना और उपलब्ध संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करना भी खाद्य सुरक्षा के व्यापक लक्ष्य में योगदान दे सकता है।
विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने ऐसे विषयों पर जनजागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित किया। खाद्य सुरक्षा से संबंधित जानकारी को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाना और लोगों को अपनी दैनिक आदतों में सुरक्षित एवं जिम्मेदार खाद्य व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
खाद्य सुरक्षा पर चर्चा करते समय खाद्य पदार्थों की बर्बादी का विषय भी विशेष महत्व रखता है। दुनिया के अनेक हिस्सों में लोगों को पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराने की चुनौती बनी हुई है। ऐसे में भोजन का अनावश्यक अपव्यय रोकना, खाद्य संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने के प्रयासों को मजबूत करना महत्वपूर्ण है।
सामाजिक समारोहों, सार्वजनिक आयोजनों, घरेलू स्तर और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भोजन के जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहित किया जा सकता है। आवश्यकता के अनुसार भोजन तैयार करना, सुरक्षित बचे हुए भोजन का उचित प्रबंधन करना और खाद्य पदार्थों को खराब होने से बचाने के लिए बेहतर भंडारण व्यवस्था अपनाना उपयोगी कदम हैं।
कृषि उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने की प्रक्रिया में खाद्य पदार्थों की हानि कम करने के लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर आपूर्ति व्यवस्था और प्रभावी प्रबंधन की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इस दिशा में सरकारी संस्थाओं, उद्योग जगत, सामाजिक संगठनों और नागरिकों के बीच सहयोग खाद्य संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग में सहायक हो सकता है।
कार्यक्रम का व्यापक संदेश भी इसी भावना के अनुरूप रहा कि खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए जागरूकता के साथ-साथ जिम्मेदार व्यवहार और साझा प्रयासों को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
ग्लोबल ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (इंडिया) विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को संवाद और सहयोग के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सक्रिय मंच के रूप में कार्य करती है। विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर श्री धार्मिक लीला कमेटी के साथ संयुक्त आयोजन ने सांस्कृतिक संस्थाओं, राजनयिक मिशनों और अन्य क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम में जीटीटीसीआई के बोर्ड सदस्य कपिल खंडेलवाल और सुमित वर्मा भी शामिल हुए। उनकी उपस्थिति ने आयोजन में संस्था की भागीदारी को दर्शाया। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग, सामाजिक जागरूकता और जनहित से जुड़े विषयों को व्यापक स्तर पर सामने लाने के महत्व को रेखांकित किया गया।
वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए विभिन्न देशों, संस्थाओं और समुदायों के बीच संवाद आवश्यक है। खाद्य सुरक्षा का विषय कृषि, व्यापार, तकनीक, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक विकास जैसे अनेक क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस क्षेत्र में प्रभावी प्रयासों के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण और विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग की आवश्यकता रहती है।
जीटीटीसीआई और श्री धार्मिक लीला कमेटी की संयुक्त पहल ने इसी विचार को सामने रखा कि सांस्कृतिक मंचों का उपयोग अंतरराष्ट्रीय महत्व के विषयों पर जागरूकता बढ़ाने और समाज में सकारात्मक संवाद को प्रोत्साहित करने के लिए किया जा सकता है।
कार्यक्रम में श्री धार्मिक लीला कमेटी के सचिव प्रदीप शरण और कमेटी के अन्य सदस्यों ने भी अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया। आयोजन के दौरान भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और समसामयिक वैश्विक विषयों पर जनजागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को प्रमुखता दी गई।
कमेटी की दीर्घकालीन सांस्कृतिक परंपरा ने इस आयोजन को एक विशिष्ट पृष्ठभूमि प्रदान की। ऐतिहासिक लाल किला परिसर में आयोजित रामलीला वर्षों से लोगों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ती रही है। इसी परंपरा के बीच विश्व खाद्य दिवस का आयोजन इस बात का उदाहरण बना कि सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से व्यापक सामाजिक सरोकारों को भी सामने लाया जा सकता है।
ऐसे प्रयासों से सांस्कृतिक संस्थाओं की भूमिका केवल परंपराओं के आयोजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे जनहित के मुद्दों पर संवाद स्थापित करने, सामाजिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने और नई पीढ़ी को जिम्मेदार नागरिकता के प्रति जागरूक करने में भी योगदान दे सकती हैं।
विश्व खाद्य दिवस प्रत्येक वर्ष 16 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य भुखमरी, कुपोषण और खाद्य असुरक्षा जैसी चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सभी लोगों के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयासों को प्रोत्साहित करना है।
यह दिवस खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की स्थापना की स्मृति से भी जुड़ा हुआ है। इसका व्यापक उद्देश्य दुनिया भर में खाद्य प्रणालियों को मजबूत बनाने, कृषि और पोषण से संबंधित मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने तथा खाद्य सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना है।
विश्व खाद्य दिवस हमें याद दिलाता है कि भोजन तक पहुंच एक महत्वपूर्ण मानवीय आवश्यकता है और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दीर्घकालीन नीतियों, बेहतर उत्पादन प्रणालियों, प्रभावी वितरण व्यवस्था और जनभागीदारी की आवश्यकता है। पर्याप्त भोजन के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता, सुरक्षा और पोषण संबंधी उपयोगिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से आम नागरिकों को खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने, खाद्य संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहित करने और समाज के कमजोर वर्गों तक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में संवाद को आगे बढ़ाया जा सकता है।
जीटीटीसीआई और श्री धार्मिक लीला कमेटी की संयुक्त पहल ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक विकास से जुड़े विषयों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। कार्यक्रम का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों, सांस्कृतिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के बीच सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करना भी रहा।
ऐतिहासिक लाल किला मैदान में आयोजित यह कार्यक्रम सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और समकालीन सामाजिक विषयों पर चर्चा के बीच संबंध स्थापित करने का अवसर बना। इससे यह संदेश सामने आया कि समाज की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भी सक्रिय भूमिका निभाई जा सकती है।
खाद्य सुरक्षा जैसे विषय पर जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है। केवल एक दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों तक सीमित रहने के बजाय इस विषय को दैनिक जीवन, सामाजिक गतिविधियों, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक संवाद का हिस्सा बनाना महत्वपूर्ण है। सुरक्षित भोजन, संतुलित पोषण, स्वच्छता और खाद्य अपव्यय को कम करने जैसे विषयों पर निरंतर जागरूकता समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मदद कर सकती है।
कार्यक्रम का समापन खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने और सभी लोगों के लिए सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साझा लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता के संदेश के साथ हुआ।
इस संयुक्त आयोजन ने यह रेखांकित किया कि खाद्य सुरक्षा केवल कृषि या खाद्य उत्पादन से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास, पर्यावरणीय स्थिरता और मानवीय गरिमा से भी गहराई से संबंधित है। इसके लिए विभिन्न देशों की सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, उद्योग जगत, सामाजिक संगठनों और नागरिकों को अपनी-अपनी भूमिका निभानी होगी।
राजनयिकों, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और सांस्कृतिक संस्थाओं की सहभागिता के बीच आयोजित इस कार्यक्रम ने साझा मानवीय सरोकारों को महत्व देने का संदेश दिया। साथ ही इसने भारतीय सांस्कृतिक मंचों की उस संभावित भूमिका को भी सामने रखा, जिसके माध्यम से सामाजिक जागरूकता और वैश्विक सहयोग को नई दिशा दी जा सकती है।
जीटीटीसीआई और श्री धार्मिक लीला कमेटी की यह संयुक्त पहल खाद्य सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करने और इस विषय पर व्यापक जनजागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास के रूप में प्रस्तुत हुई। कार्यक्रम का मूल संदेश स्पष्ट रहा कि सुरक्षित, पर्याप्त और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना किसी एक संस्था या देश का कार्य नहीं, बल्कि पूरी मानवता की साझा जिम्मेदारी है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


