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- 10h ago
नई दिल्ली। देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए आपातकालीन सहायता व्यवस्था को और तेज एवं आधुनिक बनाने की तैयारी की जा रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अपनी 1033 हेल्पलाइन को नए तकनीकी स्वरूप में अपग्रेड करने की योजना बना रहा है। नई व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रियल टाइम लोकेशन ट्रैकिंग और स्मार्ट इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम जैसी तकनीकों को शामिल किया जाएगा।
नई व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना, वाहन खराब होने या अन्य आपात स्थिति में फंसे यात्रियों तक सहायता को पहले की तुलना में अधिक तेजी से पहुंचाना है। इसके लिए हेल्पलाइन को केवल फोन पर शिकायत दर्ज करने वाली सेवा के बजाय एक ऐसे एकीकृत आपातकालीन प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने की तैयारी है, जो कॉल प्राप्त होने से लेकर सहायता वाहन के मौके पर पहुंचने तक की प्रक्रिया को तकनीक के माध्यम से अधिक स्वचालित बनाएगा।
नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में कॉल करने वाले यात्री की रियल टाइम लोकेशन की पहचान शामिल होगी। वर्तमान व्यवस्था में कई बार यात्री को अपना स्थान बताने के लिए हाईवे का नाम, किलोमीटर संख्या, टोल प्लाजा, गांव, पेट्रोल पंप या अन्य लैंडमार्क बताना पड़ता है।
दुर्घटना या गंभीर आपात स्थिति में यात्री घबराया हुआ हो तो सही स्थान बताना और भी मुश्किल हो जाता है। कई बार आसपास कोई स्पष्ट पहचान योग्य स्थान नहीं होता। ऐसे में सहायता वाहन को घटनास्थल तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लग सकता है।
प्रस्तावित नई प्रणाली में कॉल करने वाले की लोकेशन तकनीकी माध्यम से स्वत: पहचानने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे हेल्पलाइन ऑपरेटर को घटनास्थल की जानकारी जल्दी उपलब्ध हो सकेगी और सहायता भेजने की प्रक्रिया शुरू करने में लगने वाला समय कम किया जा सकेगा।
नई 1033 हेल्पलाइन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वॉयस सिस्टम को भी शामिल करने की योजना है। इसका उद्देश्य अलग-अलग भारतीय भाषाओं और बोलियों में आने वाली कॉल को समझने और आवश्यक जानकारी को सिस्टम में दर्ज करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों पर अलग-अलग राज्यों के लोग यात्रा करते हैं। ऐसे में भाषा की विविधता आपातकालीन सहायता लेते समय चुनौती बन सकती है। एआई आधारित व्यवस्था विभिन्न भारतीय भाषाओं में यात्री की समस्या को समझकर उसे संबंधित सहायता प्रणाली तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।
हालांकि, आपात स्थिति में मानव ऑपरेटर की भूमिका समाप्त नहीं होगी। गंभीर मामलों में प्रशिक्षित ऑपरेटर यात्रियों से बातचीत कर आवश्यक जानकारी की पुष्टि कर सकेंगे और जरूरत के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
मौजूदा व्यवस्था में किसी यात्री को फोन पर अपनी समस्या बताने के बाद कई बार वाहन का स्थान, दिशा, सड़क का नाम या आसपास के लैंडमार्क जैसी जानकारी दोबारा देनी पड़ सकती है। विशेष रूप से दुर्घटना की स्थिति में यह प्रक्रिया समय लेने वाली हो सकती है।
नई प्रणाली में कॉल के दौरान एक बार आवश्यक जानकारी मिलने के बाद उसे डिजिटल सिस्टम में दर्ज किया जाएगा। इसके बाद संबंधित विभागों और आपात सेवा वाहनों तक जरूरी सूचना तेजी से पहुंचाई जा सकेगी।
इसका फायदा यह होगा कि यात्री को एक ही जानकारी अलग-अलग स्तर पर दोहराने की आवश्यकता कम होगी और हेल्पलाइन से लेकर फील्ड रिस्पांस टीम तक सूचना का प्रवाह अधिक व्यवस्थित हो सकेगा।
नई व्यवस्था में आपात वाहन भेजने की प्रक्रिया में भी बदलाव की योजना है। वर्तमान व्यवस्था में कई मामलों में उपलब्ध एंबुलेंस, क्रेन या पेट्रोलिंग वाहन को मुख्य रूप से दूरी के आधार पर चुना जाता है।
नई स्मार्ट प्रणाली में केवल यह नहीं देखा जाएगा कि कौन सा वाहन घटनास्थल से कितनी दूरी पर है, बल्कि यह भी आकलन किया जाएगा कि कौन सा वाहन वास्तविक परिस्थितियों में सबसे कम समय में मौके पर पहुंच सकता है।
इसके लिए सिस्टम लाइव ट्रैफिक, सड़क की स्थिति और वाहन की उपलब्धता जैसी सूचनाओं का इस्तेमाल करेगा। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार करीब 30 सेकंड में सबसे नजदीकी और उपयुक्त आपात वाहन का चयन करने की क्षमता विकसित की जाएगी।
इसमें सड़क पर वाहन के पहुंचने में लगने वाले अनुमानित समय का भी आकलन किया जाएगा।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर अलग-अलग परिस्थितियों में अलग तरह की सहायता की जरूरत पड़ती है। दुर्घटना होने पर एंबुलेंस की आवश्यकता हो सकती है, जबकि वाहन खराब होने या दुर्घटनाग्रस्त वाहन को हटाने के लिए क्रेन की जरूरत पड़ सकती है।
कुछ मामलों में मौके पर पेट्रोलिंग वाहन भेजकर यातायात को नियंत्रित करने या प्राथमिक सहायता देने की आवश्यकता हो सकती है।
नई व्यवस्था में इन सेवाओं को एकीकृत इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम से जोड़ने की योजना है। इससे हेल्पलाइन पर सूचना मिलने के बाद उपलब्ध संसाधनों की स्थिति देखकर उचित सहायता भेजी जा सकेगी।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर सहायता वाहन के पहुंचने का समय ट्रैफिक की स्थिति पर काफी निर्भर करता है। किसी दुर्घटना के कारण सड़क पर जाम हो सकता है या किसी मार्ग पर यातायात का दबाव अधिक हो सकता है।
नई प्रणाली में लाइव ट्रैफिक और सड़क की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए सहायता वाहन का चयन किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसी स्थिति से बचना है जिसमें दूरी कम होने के बावजूद भारी ट्रैफिक के कारण वाहन को घटनास्थल तक पहुंचने में अधिक समय लग जाए।
इस तकनीकी बदलाव से आपातकालीन सहायता की पूरी प्रक्रिया को अधिक समय-केंद्रित बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
1033 हेल्पलाइन का संचालन करने वाली इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (आईएचएमसीएल) ने प्रस्तावित अपग्रेडेशन के लिए कंपनियों से सुझाव मांगे हैं। तकनीकी सुझाव और प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद आगे हेल्पलाइन के लिए टेंडर जारी किए जाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इससे पहले नई प्रणाली की तकनीकी जरूरतों, सॉफ्टवेयर, एआई क्षमता, लोकेशन ट्रैकिंग, आपातकालीन रिस्पांस और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के एकीकरण से जुड़े पहलुओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।
प्रस्तावित नई व्यवस्था में 1033 हेल्पलाइन को इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम के साथ-साथ राजमार्ग यात्रा ऐप से भी जोड़ने की योजना है।
इस एकीकरण से यात्रियों को हाईवे पर यात्रा के दौरान सहायता प्राप्त करने के लिए अलग-अलग माध्यमों पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है। हेल्पलाइन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच सूचना साझा होने से शिकायत और सहायता की प्रक्रिया अधिक समन्वित हो सकेगी।
भविष्य में इस तरह की व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों को सड़क सुरक्षा और आपातकालीन सहायता से संबंधित सेवाएं एक ही डिजिटल इकोसिस्टम के माध्यम से उपलब्ध कराना है।
सड़क दुर्घटनाओं में दुर्घटना के बाद का शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में देरी होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में आपातकालीन कॉल प्राप्त होने से लेकर एंबुलेंस के मौके पर पहुंचने तक हर चरण में समय बचाने का प्रयास महत्वपूर्ण हो जाता है।
नई 1033 हेल्पलाइन इसी प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में प्रस्तावित कदम है। लोकेशन स्वत: पहचानने, कॉल की जानकारी को तेजी से प्रोसेस करने और सबसे उपयुक्त वाहन का चयन करने जैसी सुविधाएं लागू होने पर रिस्पांस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद राष्ट्रीय राजमार्गों पर आपात स्थिति में यात्रियों को कई स्तरों पर सुविधा मिलने की उम्मीद है। सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि यात्री को अपनी लोकेशन समझाने में कम समय लग सकता है।
इसके अलावा:
एआई और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद आपातकालीन सेवाओं में मानवीय हस्तक्षेप महत्वपूर्ण रहेगा। गंभीर दुर्घटना, घायल व्यक्ति की स्थिति, आग लगने, एक से अधिक वाहनों की भिड़ंत या अन्य जटिल परिस्थितियों में प्रशिक्षित ऑपरेटर की भूमिका आवश्यक हो सकती है।
इसलिए प्रस्तावित व्यवस्था में एआई को मानव ऑपरेटर के विकल्प के बजाय सहायता प्रणाली के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा दिखाई गई है। एआई सूचना को तेजी से समझने और संसाधित करने में मदद करेगा, जबकि जरूरत पड़ने पर ऑपरेटर स्थिति की पुष्टि कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित कर सकेगा।
देश में राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क लगातार विस्तार कर रहा है और लंबी दूरी की सड़क यात्राओं में भी वृद्धि हुई है। ऐसे में दुर्घटना या अन्य आपात स्थिति में त्वरित सहायता की आवश्यकता भी महत्वपूर्ण होती जा रही है।
1033 हेल्पलाइन को एआई, रियल टाइम लोकेशन और स्मार्ट रिस्पांस सिस्टम से जोड़ने की प्रस्तावित योजना इसी दिशा में तकनीकी बदलाव के रूप में देखी जा रही है। यदि नई प्रणाली प्रभावी ढंग से लागू होती है तो हेल्पलाइन पर आने वाली सूचना से लेकर सहायता वाहन के घटनास्थल तक पहुंचने की प्रक्रिया को अधिक तेज, समन्वित और डेटा आधारित बनाया जा सकता है। फिलहाल आईएचएमसीएल की ओर से कंपनियों से सुझाव मांगे गए हैं। सुझावों के आधार पर तकनीकी आवश्यकताओं को अंतिम रूप देने और इसके बाद टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है। नई व्यवस्था के पूरी तरह लागू होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि एआई आधारित लोकेशन पहचान, लाइव ट्रैफिक विश्लेषण और स्मार्ट वाहन चयन जैसी सुविधाएं जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती हैं।


