यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 13h ago
नई दिल्ली। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी की अध्यक्षता में आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलन में भाग लिया। सम्मेलन के दौरान उन्होंने राजस्थान में महिला सशक्तिकरण, बालिका शिक्षा, बाल कल्याण, पोषण सुधार और आंगनवाड़ी सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों तथा विभिन्न नवाचारों की जानकारी साझा की। बैठक में महिला एवं बाल विकास से संबंधित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, बच्चों के सर्वांगीण विकास और महिलाओं को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के विषयों पर चर्चा की गई।
दिया कुमारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में महिलाओं को सशक्त बनाने, बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने और बच्चों के स्वस्थ, सुरक्षित एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास किसी भी राज्य की सामाजिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार है। महिलाओं और बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, बालिकाओं को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन, जनजागरूकता और संबंधित विभागों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि राजस्थान सरकार की प्राथमिकता प्रदेश की प्रत्येक बेटी को शिक्षा प्राप्त करने और अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना है। बालिका शिक्षा समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। शिक्षित बेटियां न केवल अपने परिवार के विकास में योगदान देती हैं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभाती हैं।
उन्होंने कहा कि बालिकाओं को शिक्षा के साथ सुरक्षित वातावरण, आवश्यक सुविधाएं और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। इसके लिए परिवारों और समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ शिक्षा से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन भी महत्वपूर्ण है।
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों से बाल विवाह जैसी सामाजिक चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लड़कियों को अपने भविष्य के संबंध में बेहतर निर्णय लेने के अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इस दिशा में सरकार, शिक्षण संस्थानों, स्थानीय प्रशासन और समुदाय की साझा भूमिका महत्वपूर्ण है।
दिया कुमारी ने महिलाओं और बेटियों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करने पर जोर दिया, जिसमें वे बिना किसी भेदभाव के शिक्षा, रोजगार और सामाजिक गतिविधियों में भाग ले सकें। उन्होंने महिला सशक्तिकरण को परिवार और समाज की प्रगति से जोड़ते हुए योजनाओं के लाभ को व्यापक स्तर तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण समावेशी विकास के लिए आवश्यक है। महिलाओं को शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने से उनकी आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही परिवार और समाज के निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करना भी महत्वपूर्ण है।
सम्मेलन में महिला कल्याण से जुड़ी योजनाओं और नीतिगत प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक भागीदारी और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता जैसे विषयों को व्यापक महिला विकास के महत्वपूर्ण पहलुओं के रूप में देखा गया।
राजस्थान जैसे बड़े भौगोलिक क्षेत्र वाले राज्य में शहरी और ग्रामीण महिलाओं तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करना विशेष महत्व रखता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता, प्रशिक्षण और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सेवाओं को मजबूत बनाने से महिलाओं को योजनाओं का लाभ लेने में सहायता मिल सकती है।
महिला सशक्तिकरण के प्रयासों का उद्देश्य महिलाओं को केवल सहायता उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने, आर्थिक गतिविधियों में भाग लेने और समाज में अपनी भूमिका मजबूत करने के अवसर प्रदान करना भी है।
महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में बच्चों का पोषण एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। बच्चों के शुरुआती वर्षों में उचित पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और नियमित निगरानी उनके शारीरिक तथा मानसिक विकास के लिए आवश्यक होती है। पोषण संबंधी कमियों को दूर करने के लिए परिवारों में जागरूकता बढ़ाना और संबंधित सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
दिया कुमारी ने राजस्थान में पोषण और बाल कल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को साझा किया। इस संदर्भ में बच्चों को संतुलित आहार उपलब्ध कराने, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की पोषण संबंधी जरूरतों पर ध्यान देने तथा समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं।
बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए परिवारों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्यकर्मियों और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय आवश्यक है। समय पर स्वास्थ्य जांच, पोषण संबंधी परामर्श और आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता से बच्चों की जरूरतों की पहचान करने तथा उचित सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
पोषण सुधार के प्रयासों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों, संतुलित आहार और स्वच्छता संबंधी व्यवहार के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी उपयोगी हो सकता है। इसके साथ ही योजनाओं की नियमित निगरानी और उनके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों की पहचान करना भी जरूरी है।
आंगनवाड़ी केंद्र महिला एवं बाल विकास सेवाओं को समुदाय तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं तक पोषण एवं प्रारंभिक बाल देखभाल से संबंधित सेवाएं पहुंचाई जाती हैं।
आंगनवाड़ी सेवाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए केंद्रों में आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता, कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण, पोषण संबंधी जानकारी और परिवारों के साथ नियमित संपर्क महत्वपूर्ण है। इसके साथ बच्चों के विकास की निगरानी और जरूरत के अनुसार संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं से समन्वय भी आवश्यक होता है।
राजस्थान में आंगनवाड़ी सेवाओं को मजबूत बनाने के प्रयास ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकते हैं। इससे छोटे बच्चों और माताओं तक आवश्यक जानकारी तथा सहायता पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
सम्मेलन में राज्यों के स्तर पर किए जा रहे कार्यों और नवाचारों को साझा करने का अवसर मिला। ऐसे संवाद से विभिन्न राज्यों के अनुभवों को समझने, उपयोगी प्रक्रियाओं की पहचान करने और योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार के संभावित रास्ते तलाशने में सहायता मिल सकती है।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी की अध्यक्षता में आयोजित शिखर सम्मेलन में महिला एवं बाल विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं, नीतिगत प्राथमिकताओं, नवाचारों और राज्यों में किए जा रहे कार्यों पर विचार-विमर्श किया गया।
इस तरह के सम्मेलनों का उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूत करना तथा महिला एवं बाल कल्याण से जुड़ी चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना है। राज्यों में भौगोलिक परिस्थितियों, सामाजिक आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार योजनाओं को लागू करने के अलग-अलग अनुभव सामने आते हैं। इन अनुभवों को साझा करने से योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के अवसर तलाशे जा सकते हैं।
महिलाओं की सुरक्षा, बालिकाओं की शिक्षा, बच्चों के पोषण और आंगनवाड़ी सेवाओं जैसे विषयों पर नियमित संवाद से नीतिगत प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, योजनाओं के लाभार्थियों तक सेवाएं पहुंचाने में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर चर्चा कर उनके समाधान की दिशा में काम किया जा सकता है।
दिया कुमारी ने कहा कि महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ एवं बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है, जब उनकी जानकारी संबंधित लोगों तक पहुंचे और पात्र लाभार्थियों को समय पर सुविधाएं मिलें।
इसके लिए प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने, संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर सेवाओं की उपलब्धता पर ध्यान देना जरूरी है। योजनाओं की प्रगति का नियमित आकलन करने से यह समझने में मदद मिल सकती है कि किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है और किन उपायों से लाभार्थियों को अधिक प्रभावी सहायता दी जा सकती है।
महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में दीर्घकालिक सुधार के लिए सरकार के साथ समाज, परिवारों, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। बालिका शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और महिला सुरक्षा से जुड़े विषयों पर जागरूकता बढ़ाकर योजनाओं के प्रभाव को व्यापक बनाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, नई दिल्ली में आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलन में राजस्थान की ओर से महिला सशक्तिकरण, बालिका शिक्षा, बाल कल्याण, पोषण और आंगनवाड़ी सेवाओं से जुड़े प्रयासों को साझा किया गया। सम्मेलन ने इन क्षेत्रों में नीतिगत संवाद, राज्यों के अनुभवों के आदान-प्रदान और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर प्रदान किया। महिलाओं और बच्चों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा प्रत्येक बेटी को आगे बढ़ने के समान अवसर देने की दिशा में समन्वित प्रयासों को महत्वपूर्ण माना गया।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


