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- 13h ago
नई दिल्ली: दिल्ली में गुरुवार को नेहा बोरा और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जमकर हंगामा हुआ। प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत नेहा बोरा ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध रचना ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियों के साथ की। इसके बाद उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन को वोट देने के अधिकार की लड़ाई बताया। हालांकि, उनके संबोधन के दौरान दर्शकों की ओर से विरोध शुरू हो गया। कुछ लोग ‘बाहर जाओ’ के नारे लगाने लगे। लगातार हंगामे के कारण नेहा बोरा को अपना संबोधन बीच में ही रोकना पड़ा। इसके बाद अभिजीत दीपके ने माइक संभाला और लोगों को शांत कराने की कोशिश की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेहा बोरा और दीपके ने अपने समर्थकों तथा नागरिकों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कई गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने शुक्रवार शाम पांच बजे कनॉट प्लेस में प्रस्तावित तिरंगा मार्च में शामिल होने का आह्वान किया। उनके बयानों में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और आंदोलनकारी कार्यकर्ताओं की हिरासत जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में नेहा बोरा ने हिंदी कविता की पंक्तियां पढ़ीं, “जंजीर बढ़ाकर साध मुझे, हां हां दुर्योधन बांध मुझे।” उन्होंने इसके बाद एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन का जिक्र किया।
नेहा बोरा ने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं है, बल्कि पूरे देश में वोट देने के अधिकार से जुड़ा मुद्दा है। उनके मुताबिक, इस आंदोलन का उद्देश्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को सामने लाना है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वोट का अधिकार किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, जब मतदाता सूची और मतदान के अधिकार को लेकर सवाल उठते हैं, तो उसका असर व्यापक स्तर पर पड़ता है। इसी आधार पर उन्होंने आंदोलन को देशव्यापी मुद्दा बताया और इसे किसी पार्टी विशेष तक सीमित मानने से इनकार किया।
नेहा बोरा ने अपने संबोधन में जिन पंक्तियों का उल्लेख किया, वे रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध काव्य रचना ‘रश्मिरथी’ से जुड़ी हैं। यह रचना महाभारत के पात्र कर्ण के जीवन और उससे जुड़े प्रसंगों पर आधारित है।
उल्लेखित पंक्तियों का संबंध महाभारत के उस प्रसंग से है, जब भगवान श्रीकृष्ण पांडवों की ओर से शांति प्रस्ताव लेकर कौरवों की सभा में पहुंचते हैं। दुर्योधन शांति प्रस्ताव स्वीकार करने के बजाय श्रीकृष्ण को बंदी बनाने का प्रयास करता है। इसके बाद श्रीकृष्ण अपना विराट स्वरूप प्रकट करते हैं और अपनी शक्ति का परिचय देते हैं।
दिनकर ने इस प्रसंग को अपनी ओजपूर्ण काव्य शैली में प्रस्तुत किया है। कविता में चुनौती, साहस और शक्ति का भाव दिखाई देता है। नेहा बोरा ने इन्हीं पंक्तियों के माध्यम से अपने आंदोलन के संदर्भ में संदेश देने की कोशिश की।
अपने संबोधन के दौरान नेहा बोरा ने सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन दोनों को हिरासत में भेजने की कार्रवाई को केवल दो लोगों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, यह उन लोगों की आवाज से जुड़ा मामला है, जो देश में वोट देने के अधिकार को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
नेहा बोरा ने कहा कि नेताओं और कार्यकर्ताओं को न्यायिक हिरासत में भेजने से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उन्होंने अपने बयान में मताधिकार की रक्षा को आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य बताया।
उनका कहना था कि एसआईआर और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन किसी एक राजनीतिक दल का नहीं है, बल्कि इसमें उन सभी लोगों की भागीदारी हो सकती है, जो मतदाता अधिकारों के मुद्दे को महत्वपूर्ण मानते हैं।
नेहा बोरा की इन टिप्पणियों के बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद कुछ लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते आवाजें तेज होने लगीं और ‘बाहर जाओ’ के नारे लगाए जाने लगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा उस समय बढ़ा, जब नेहा बोरा एसआईआर के खिलाफ आंदोलन और अपने साथियों की न्यायिक हिरासत पर बोल रही थीं। दर्शकों की ओर से विरोध के स्वर सुनाई देने लगे। कुछ लोग लगातार ‘बाहर जाओ’ के नारे लगाने लगे।
नेहा बोरा ने कई बार लोगों को समझाने की कोशिश की। उन्होंने अपना संबोधन जारी रखने का प्रयास किया, लेकिन हंगामा कम नहीं हुआ। शोर बढ़ने के कारण उनकी बात सुनना मुश्किल हो गया और आखिरकार उन्हें अपना संबोधन रोकना पड़ा।
इसके बाद अभिजीत दीपके ने माइक संभाला और उपस्थित लोगों को समझाने की कोशिश की। हंगामे के बीच नेहा बोरा ने प्रेस क्लब के पदाधिकारियों से अनुरोध किया कि कार्यक्रम में बाधा डाल रहे लोगों को बाहर किया जाए। दीपके ने भी इसी तरह की मांग की।
हालांकि, विरोध और नारेबाजी जारी रहने के कारण प्रेस कॉन्फ्रेंस का माहौल तनावपूर्ण बना रहा। अंततः नेहा बोरा को अपना संबोधन समाप्त करना पड़ा और इसके बाद दीपके ने कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।
नेहा बोरा के संबोधन के बाद अभिजीत दीपके ने माइक संभाला। उन्होंने अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
दीपके ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने ज्ञानेश कुमार के समर्थन में अपने ही नागरिकों के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाने को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल क्यों नहीं उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी इंडिया गठबंधन के बीच वोटों के अंतर का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों गठबंधनों के बीच अंतर महज दो प्रतिशत था। इस आंकड़े के आधार पर उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को महत्वपूर्ण बताया।
दीपके के ये बयान उनके राजनीतिक आरोपों और चुनावी प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों का हिस्सा थे। इन आरोपों की पुष्टि के लिए चुनाव आयोग का पक्ष और संबंधित आधिकारिक आंकड़े देखना जरूरी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिजीत दीपके ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत देश में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह ऐसे लोगों से मिले हैं, जिन्हें उनके अनुसार एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मृत घोषित कर दिया गया।
दीपके ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें बचाने के लिए अपने संसाधनों का इस्तेमाल किया। उन्होंने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और कुछ लोगों को मृत दर्ज किए जाने के दावों का उल्लेख किया।
मतदाता सूची में नामों के संशोधन, विलोपन और पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर किसी भी दावे का आकलन करने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, संबंधित राज्यों की मतदाता सूचियों और चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण की जरूरत होती है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया 13 करोड़ नाम हटाए जाने का आंकड़ा दीपके का दावा है; उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
अभिजीत दीपके ने अपने भाषण में नेहा बोरा और छात्र कार्यकर्ताओं के साथ कथित कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं को सड़कों पर घसीटा गया और विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया।
दीपके ने अपने बयान में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का नाम लेते हुए दावा किया कि विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिया गया है।
उन्होंने इन घटनाओं को आंदोलन और राजनीतिक विरोध के संदर्भ में पेश किया। हालांकि, अलग-अलग नेताओं और कार्यकर्ताओं से जुड़ी घटनाओं की परिस्थितियां, कार्रवाई का कानूनी आधार और संबंधित अधिकारियों का पक्ष अलग-अलग हो सकता है। इसलिए इन सभी मामलों को एक ही निष्कर्ष के रूप में देखने के बजाय प्रत्येक घटना के तथ्यों की अलग से पुष्टि आवश्यक है।
अपने संबोधन में दीपके ने दावा किया कि ट्रेनें रद्द की गईं और नक्सल प्रभावित इलाकों से सुरक्षा बलों को दिल्ली बुलाया गया है। उन्होंने इन घटनाओं का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देते हुए कहा कि वह भारत में आपातकाल लागू करके दिखाएं। उनका यह बयान केंद्र सरकार और आंदोलनकारियों के बीच राजनीतिक टकराव को लेकर उनकी तीखी प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया।
हालांकि, ट्रेनों को रद्द किए जाने के कारणों और सुरक्षा बलों की तैनाती के संबंध में स्वतंत्र पुष्टि के लिए रेलवे तथा संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी जरूरी है। केवल भाषण में किए गए दावों के आधार पर इन घटनाओं के कारण या उनके पीछे की मंशा को निश्चित नहीं माना जा सकता।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में अभिजीत दीपके ने लोगों से शुक्रवार शाम पांच बजे कनॉट प्लेस पहुंचने और प्रस्तावित तिरंगा मार्च में शामिल होने की अपील की।
उन्होंने कहा कि आशुतोष रांका और सौरव दास को तिरंगा फहराने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। दीपके ने राष्ट्रीय ध्वज के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि तिरंगा फहराना अपराध नहीं है और तिरंगे से बड़ा कुछ भी नहीं है।
उन्होंने राजनीतिक दलों, नागरिक समाज और आम नागरिकों से कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह किया। उनके मुताबिक, इस आयोजन के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और मताधिकार से जुड़े आंदोलन को लेकर संदेश दिया जाएगा।
दीपके की यह अपील ऐसे समय में आई है, जब कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को आम जनता के लिए बंद रखने का एनडीएमसी का नोटिस भी सामने आया है। पार्क बंद रखने के लिए प्रशासनिक कारण बताए गए हैं। इस फैसले और प्रस्तावित मार्च के बीच किसी सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
गुरुवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दो प्रमुख घटनाक्रम देखने को मिले। पहला, नेहा बोरा के संबोधन के दौरान विरोध और नारेबाजी के कारण कार्यक्रम बाधित हुआ। दूसरा, अभिजीत दीपके ने एसआईआर, चुनाव आयोग, मतदाता सूची और विपक्षी नेताओं की हिरासत को लेकर कई आरोप लगाए तथा तिरंगा मार्च में शामिल होने की अपील की।
नेहा बोरा ने आंदोलन को वोट देने के अधिकार की लड़ाई बताया, जबकि दीपके ने इसे चुनावी प्रक्रिया और केंद्र सरकार की भूमिका से जुड़े सवालों के साथ जोड़ा। दूसरी ओर, प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुए हंगामे ने यह भी दिखाया कि कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों के बीच विरोध और असहमति को लेकर तनाव की स्थिति बनी रही।
अब इस पूरे घटनाक्रम पर आगे की नजर प्रस्तावित तिरंगा मार्च, प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और मतदाता सूची से जुड़े दावों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण को लेकर रहेगी। कार्यक्रम के आयोजन और उसमें शामिल होने वाले लोगों की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


