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- 13h ago
नई दिल्ली। देश की प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल आयुष्मान भारत ने बुधवार को अपने आठ वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना के लाभार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि आयुष्मान भारत के माध्यम से 60 करोड़ से अधिक लोगों को सालाना पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवरेज उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थकेयर योजनाओं में से एक बताया और कहा कि इस पहल ने गरीब तथा मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए इलाज के खर्च का बोझ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि आठ वर्ष पहले आयुष्मान भारत की शुरुआत इस सोच के साथ की गई थी कि प्रत्येक भारतीय को बेहतर और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें। उनके अनुसार, योजना के तहत करोड़ों लाभार्थियों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध हुई है और इलाज के खर्च में बड़ी बचत संभव हुई है।
आयुष्मान भारत का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गंभीर बीमारियों और अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में इलाज के खर्च से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। योजना के तहत पात्र परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित उपचार के लिए कैशलेस और पेपरलेस सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
योजना का सबसे प्रमुख हिस्सा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) है। इसके अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को परिवार के आधार पर सालाना पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर उपलब्ध कराया जाता है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में परिवार को इलाज के लिए अपनी बचत खर्च करने या कर्ज लेने की स्थिति का सामना कम से कम करना पड़े।
प्रधानमंत्री के अनुसार आयुष्मान भारत के दायरे में अब 60 करोड़ से अधिक लोग आ चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी योजना की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देशभर में 48.54 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं और 13 करोड़ से अधिक लोगों ने उपचार का लाभ लिया है।
सरकार के अनुसार योजना के अंतर्गत सरकारी और निजी क्षेत्र के 39 हजार से अधिक अस्पताल सूचीबद्ध हैं। इन अस्पतालों के माध्यम से लाभार्थियों को विभिन्न प्रकार के उपचार की सुविधा मिल रही है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक योजना के माध्यम से अब तक दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के अस्पताल में भर्ती और उपचार संबंधी लाभ उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
आयुष्मान भारत का एक प्रमुख उद्देश्य परिवारों को इलाज के कारण होने वाले आर्थिक संकट से बचाना है। किसी गंभीर बीमारी के इलाज में अस्पताल का खर्च कई परिवारों की वर्षों की बचत को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सरकारी स्वास्थ्य कवरेज से पात्र परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देने की कोशिश की गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि योजना के माध्यम से इलाज के खर्च में बड़ी बचत संभव हुई है। सरकार का कहना है कि इससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी खर्च के कारण होने वाले आर्थिक दबाव को कम करने में मदद मिली है।
स्वास्थ्य सुरक्षा को केवल अस्पताल में इलाज तक सीमित न रखते हुए सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार इन केंद्रों पर अब तक 500 करोड़ से अधिक विजिट दर्ज की जा चुकी हैं।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का उद्देश्य लोगों को उनके आसपास ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इन केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य जांच, सामान्य बीमारियों की देखभाल, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग और अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
इससे स्वास्थ्य व्यवस्था में केवल गंभीर बीमारी के बाद अस्पताल पहुंचने के बजाय बीमारी की शुरुआती पहचान और प्राथमिक स्तर पर उपचार को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
आयुष्मान भारत को वर्ष 2018 में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े बदलाव की पहल के रूप में शुरू किया गया था। इसका व्यापक उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना और इलाज के कारण परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना था।
समय के साथ योजना का विस्तार किया गया और इसके तहत अधिक से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाने पर जोर दिया गया।
सरकार की स्वास्थ्य नीति में अब स्वास्थ्य बीमा के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, स्वास्थ्य ढांचे और डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाओं को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
योजना के सफल संचालन में सूचीबद्ध अस्पतालों का नेटवर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सरकारी अस्पतालों के साथ बड़ी संख्या में निजी अस्पतालों को भी योजना से जोड़ा गया है।
इससे लाभार्थियों को अपने क्षेत्र में उपलब्ध अस्पतालों में उपचार कराने का विकल्प मिलता है। सरकार का कहना है कि सूचीबद्ध अस्पतालों का व्यापक नेटवर्क योजना की पहुंच को देश के अलग-अलग हिस्सों तक ले जाने में मदद कर रहा है।
हालांकि, अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में अस्पतालों की उपलब्धता तथा सेवाओं का स्तर अलग हो सकता है। इसलिए योजना के प्रभाव को समझने के लिए केवल लाभार्थियों की संख्या के साथ-साथ उपचार की उपलब्धता, अस्पतालों की गुणवत्ता और लाभार्थियों के अनुभव जैसे पहलुओं को भी देखना महत्वपूर्ण है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने योजना की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि 48.54 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं।
आयुष्मान कार्ड लाभार्थियों की पहचान और योजना के तहत उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम है। कार्ड के माध्यम से पात्र व्यक्ति सूचीबद्ध अस्पतालों में योजना के अंतर्गत आने वाले उपचार का लाभ ले सकता है।
डिजिटल व्यवस्था के विस्तार के साथ लाभार्थियों की पहचान और उपचार से संबंधित प्रक्रियाओं को भी अधिक तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया गया है।
सरकार के मुताबिक 13 करोड़ से अधिक लोगों को योजना के तहत उपचार का लाभ मिल चुका है। इसमें विभिन्न प्रकार की गंभीर बीमारियों और अस्पताल में भर्ती होने वाले उपचार शामिल हैं।
इसका उद्देश्य उन परिवारों को आर्थिक सहायता देना है जिनके लिए महंगा इलाज अपनी आय के अनुपात में बड़ा आर्थिक बोझ बन सकता है।
योजना के तहत उपचार की वास्तविक उपलब्धता संबंधित पैकेज, बीमारी, अस्पताल और राज्य में लागू व्यवस्था पर निर्भर करती है। इसलिए लाभार्थियों के लिए उपचार से पहले सूचीबद्ध अस्पताल और संबंधित पैकेज की जानकारी लेना महत्वपूर्ण होता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने आयुष्मान भारत के आठ वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल को स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच से जोड़ते हुए बधाई दी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने आठ वर्ष पहले 'सेवा का संकल्प' लिया था और इसके परिणामस्वरूप लाखों लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में बदलाव आया है।
नड्डा ने योजना के तहत करोड़ों लोगों को कवर किए जाने, करोड़ों आयुष्मान कार्ड बनाए जाने और बड़ी संख्या में मरीजों को उपचार का लाभ मिलने का उल्लेख किया।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी आयुष्मान भारत की आठवीं वर्षगांठ पर योजना को लेकर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुई इस योजना ने करोड़ों परिवारों के लिए बेहतर इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाया है।
गोयल के अनुसार गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए योजना इलाज के खर्च की चिंता को कम करने में मददगार रही है और स्वास्थ्य सुरक्षा का सहारा बनी है।
आयुष्मान भारत के विस्तार के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे को अधिक व्यापक बनाने पर भी जोर दिया गया है। विशेष रूप से बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य कवरेज बढ़ाने के निर्णयों को सरकार ने सामाजिक सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
वरिष्ठ नागरिकों में गंभीर बीमारियों और अस्पताल में भर्ती होने की संभावना बढ़ने के कारण स्वास्थ्य खर्च परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य कवरेज का विस्तार इस वर्ग के लिए उपचार की आर्थिक पहुंच से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
आयुष्मान भारत को केवल स्वास्थ्य बीमा योजना के रूप में देखना इसके व्यापक ढांचे का एक हिस्सा ही है। इसके साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करना, स्वास्थ्य जांच की सुविधा बढ़ाना, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और लोगों को उनके आसपास स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना भी सरकार की व्यापक स्वास्थ्य नीति का हिस्सा है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर बढ़ती विजिट इसी प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था के विस्तार का संकेत मानी जा रही है।
देश में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ने पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है। डिजिटल स्वास्थ्य पहचान, ऑनलाइन रिकॉर्ड और तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड तथा सेवाओं तक पहुंच को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
आयुष्मान भारत जैसी बड़ी योजना में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल लाभार्थियों की पहचान, अस्पतालों से संबंधित प्रक्रिया और उपचार के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत में बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच कई बार चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना योजना के व्यापक उद्देश्यों में शामिल है।
गंभीर बीमारी की स्थिति में सूचीबद्ध अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से आगे उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी स्वास्थ्य सेवा के अलग-अलग स्तरों को जोड़ने का प्रयास है।
आयुष्मान भारत की चर्चा में स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा दोनों पहलू महत्वपूर्ण हैं। किसी परिवार के सदस्य के गंभीर रूप से बीमार पड़ने पर केवल बीमारी का इलाज ही चुनौती नहीं होता, बल्कि अस्पताल का खर्च, काम से छुट्टी और आय में कमी भी परिवार को प्रभावित कर सकती है।
स्वास्थ्य कवरेज का उद्देश्य ऐसे खर्च को कम करना है। सरकार के अनुसार इस योजना से करोड़ों परिवारों को इलाज के समय आर्थिक सुरक्षा मिली है।
आयुष्मान भारत के आठ वर्ष पूरे होने के बाद अब योजना के सामने अगली चुनौती केवल कवरेज बढ़ाना नहीं, बल्कि लाभार्थियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना भी है।
इसके लिए अस्पतालों की पर्याप्त उपलब्धता, उपचार की गुणवत्ता, अस्पतालों द्वारा योजना के तहत मरीजों को स्वीकार करना, दावों का समय पर निपटारा, लाभार्थियों को सही जानकारी और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता जैसे विषय महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
योजना का वास्तविक प्रभाव इस बात से भी जुड़ा रहेगा कि लाभार्थियों को कागज पर उपलब्ध कवरेज के साथ जमीन पर समय पर और गुणवत्तापूर्ण इलाज कितना मिल पाता है।
आठ वर्ष पूरे होने पर सरकार ने आयुष्मान भारत को देश में स्वास्थ्य सुरक्षा के विस्तार की एक बड़ी पहल के रूप में प्रस्तुत किया है। 60 करोड़ से अधिक लोगों के कवरेज, 48.54 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड, 13 करोड़ से अधिक उपचार लाभ और 39 हजार से अधिक सूचीबद्ध अस्पतालों के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए सरकार ने योजना के विस्तार को रेखांकित किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आयुष्मान भारत का उद्देश्य हर भारतीय को बेहतर और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। वहीं स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी योजना को गरीब तथा जरूरतमंद परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ा।
आठ साल की यात्रा के बाद आयुष्मान भारत देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में एक प्रमुख कार्यक्रम के रूप में मौजूद है। आने वाले समय में इसके विस्तार के साथ-साथ सेवा की गुणवत्ता, अस्पतालों की पहुंच और लाभार्थियों के वास्तविक अनुभव पर भी ध्यान महत्वपूर्ण रहेगा।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


