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- 13h ago
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को चुनावी और राजनीतिक रूप से सक्रिय रखने के लिए देश के सभी 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नए प्रभारी और सह-प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने बुधवार को संगठनात्मक जिम्मेदारियों का यह बड़ा फेरबदल किया। नई सूची में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ राष्ट्रीय स्तर पर उभर रहे चेहरों को भी महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है।
नई नियुक्तियों में स्मृति ईरानी, राम माधव, सतीश पूनिया, हरीश द्विवेदी, सुनील बंसल और विनोद तावड़े जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। स्मृति ईरानी को हरियाणा और छत्तीसगढ़, राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड, सतीश पूनिया को पंजाब और जम्मू-कश्मीर तथा हरीश द्विवेदी को बिहार और कर्नाटक का प्रभारी बनाया गया है। सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल और तेलंगाना की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया है।
पार्टी की ओर से की गई यह नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं, जब 2027 में कई महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर समेत कई राज्यों में संगठनात्मक तैयारियां आने वाले समय में तेज होंगी।
भाजपा की नई सूची में सभी 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के लिए प्रभारी के साथ चार सह-प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। विनोद तावड़े के साथ जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, डॉ. प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को सह-प्रभारी बनाया गया है।
बिहार में हरीश द्विवेदी को प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ संगीता यादव और रोहन गुप्ता सह-प्रभारी होंगे। कर्नाटक का प्रभार भी हरीश द्विवेदी को दिया गया है।
असम में मंगल पांडे को प्रभारी बनाया गया है, जबकि फांगनोन कोन्याक और मनोज तिग्गा को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है। गुजरात में तरुण चुग प्रभारी होंगे और अजय महावर तथा गोमती साई सह-प्रभारी बनाई गई हैं।
भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी को दो राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें हरियाणा और छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया है। हरियाणा में भोला सिंह सह-प्रभारी होंगे, जबकि छत्तीसगढ़ में सिद्धार्थ शंभू को सह-प्रभारी बनाया गया है।
स्मृति ईरानी की नियुक्ति को संगठन में उनकी भूमिका के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है। वह केंद्र सरकार में मंत्री रह चुकी हैं और भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक अभियानों में सक्रिय रही हैं। नई जिम्मेदारी के तहत उन्हें दो राज्यों के संगठनात्मक कामकाज, पार्टी गतिविधियों और केंद्रीय नेतृत्व तथा प्रदेश संगठन के बीच समन्वय में भूमिका निभानी होगी।
हरियाणा में भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बना चुकी है, जबकि छत्तीसगढ़ भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राज्य है। ऐसे में दोनों राज्यों की संगठनात्मक जिम्मेदारी एक साथ मिलने से स्मृति ईरानी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
उत्तर प्रदेश के बस्ती से आने वाले भाजपा नेता हरीश द्विवेदी को बिहार और कर्नाटक का प्रभारी बनाया गया है। बिहार में उनके साथ संगीता यादव और रोहन गुप्ता को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है।
द्विवेदी इससे पहले भी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके हैं। भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री की टीम में स्थान देने के बाद अब दो बड़े राज्यों की जिम्मेदारी दी है।
बिहार की राजनीति में संगठन और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से प्रभारी की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। वहीं कर्नाटक दक्षिण भारत में भाजपा के लिए प्रमुख संगठनात्मक क्षेत्र है। इसलिए दोनों राज्यों की जिम्मेदारी एक साथ दिया जाना उनके सामने व्यापक संगठनात्मक दायित्व रखता है।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड का प्रभारी बनाया गया है। तमिलनाडु में उनके साथ निर्मल कुमार सुराना और डी.के. अरुणा सह-प्रभारी होंगे। उत्तराखंड में अरविंद मेनन और सांसद बांसुरी स्वराज सह-प्रभारी बनाई गई हैं।
राम माधव का संगठनात्मक अनुभव विशेष रूप से पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर सहित कई क्षेत्रों में रहा है। नई जिम्मेदारी में एक ओर तमिलनाडु जैसा दक्षिण भारतीय राज्य है, जहां भाजपा अपने संगठन का विस्तार करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड है, जहां 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठनात्मक तैयारी महत्वपूर्ण होगी।
भारतीय राजनीति में राम माधव की भूमिका भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच समन्वय से भी जुड़ी रही है। हालांकि नई नियुक्ति के बाद उनकी तत्काल जिम्मेदारी दोनों राज्यों में पार्टी संगठन को मजबूत करने की होगी।
राजस्थान के भाजपा नेता सतीश पूनिया को पंजाब और जम्मू-कश्मीर का प्रभारी बनाया गया है। पंजाब में उनके साथ वीरेंद्र सचदेवा और डॉ. अलका गुर्जर को सह-प्रभारी बनाया गया है, जबकि जम्मू-कश्मीर में रीना कश्यप सह-प्रभारी होंगी।
पूनिया का संगठनात्मक अनुभव राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों में भी पार्टी के काम आया है। नई जिम्मेदारी में पंजाब जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य के साथ जम्मू-कश्मीर का दायित्व उन्हें दिया गया है।
पंजाब और जम्मू-कश्मीर दोनों राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं। ऐसे में भाजपा संगठन के लिए दोनों क्षेत्रों में अलग रणनीति और स्थानीय नेतृत्व के साथ समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा।
भाजपा के प्रमुख संगठनात्मक रणनीतिकारों में गिने जाने वाले सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल और तेलंगाना का प्रभारी बनाए रखा गया है। दोनों राज्यों में उनके साथ अलग-अलग सह-प्रभारी नियुक्त किए गए हैं।
तेलंगाना में अभय पाटिल और रेखा शर्मा तथा पश्चिम बंगाल में लाल सिंह आर्य, राजेंद्र सिंह और पिंकी कुशवाहा को सह-प्रभारी बनाया गया है।
सुनील बंसल लंबे समय तक उत्तर प्रदेश में भाजपा के संगठनात्मक कामकाज से जुड़े रहे हैं। बाद में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारियां दी गईं। नई सूची में भी पश्चिम बंगाल और तेलंगाना का प्रभार उनके पास बरकरार रखा गया है।
देश के सबसे बड़े राजनीतिक राज्यों में शामिल उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी भाजपा ने विनोद तावड़े को दी है। उनके साथ चार सह-प्रभारी नियुक्त किए गए हैं—जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, डॉ. प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा।
उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में सह-प्रभारियों की नियुक्ति से यह स्पष्ट है कि पार्टी राज्य के संगठनात्मक काम को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर संचालित करने की तैयारी में है।
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में प्रभारी और सह-प्रभारियों की टीम को संगठन, बूथ स्तर की गतिविधियों, कार्यकर्ता समन्वय और चुनावी तैयारियों से जुड़े कामों में भूमिका निभानी होगी।
बिहार का प्रभार हरीश द्विवेदी को दिया गया है। संगीता यादव और रोहन गुप्ता उनके साथ सह-प्रभारी होंगे। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब बिहार में विधानसभा चुनावी राजनीति के बाद संगठन को आगे की रणनीति तैयार करनी है।
बिहार जैसे बड़े राज्य में प्रभारी की जिम्मेदारी केवल चुनावी गतिविधियों तक सीमित नहीं रहती। प्रदेश संगठन, जिला इकाइयों, मोर्चों और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय भी इस भूमिका का हिस्सा होता है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे ए.के. एंटनी के बेटे अनिल एंटनी को भी महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी मिली है। उन्हें नगालैंड का प्रभारी बनाया गया है और गोवा में सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। गोवा में मुख्य प्रभारी भारती प्रवीन पवार हैं।
केरल से आने वाले अनिल एंटनी भाजपा में शामिल होने के बाद राष्ट्रीय संगठन में सक्रिय रहे हैं। नई नियुक्ति में उन्हें पूर्वोत्तर के नगालैंड जैसे राज्य की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि गोवा में भी संगठनात्मक कामकाज में उनकी भूमिका होगी।
भाजपा की सूची में अलग-अलग राज्यों के लिए वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। मध्य प्रदेश का प्रभार बिप्लब कुमार देब को, महाराष्ट्र का प्रभार बैजयंत जय पांडा को और ओडिशा का प्रभार डी. पुरंदेश्वरी को दिया गया है। राजस्थान में संजय भाटिया प्रभारी होंगे।
महाराष्ट्र में अमित मालवीय, सदानंद शेट तानावडे और कमलजीत सहरावत सह-प्रभारी होंगे। राजस्थान में कविता पाटीदार और कुलजीत चहल सह-प्रभारी नियुक्त किए गए हैं।
दिल्ली का प्रभार विनय सहस्रबुद्धे को दिया गया है। उनके साथ जम्मू-कश्मीर के सांसद जमयांग त्सेरिंग नामग्याल और दर्शनाबेन जरदोष को सह-प्रभारी बनाया गया है।
दिल्ली में भाजपा का संगठन लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहा है। नई नियुक्ति के बाद प्रदेश संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय की जिम्मेदारी नई टीम संभालेगी।
गुजरात का प्रभारी तरुण चुग को बनाया गया है। उनके साथ अजय महावर और गोमती साई सह-प्रभारी होंगी। गुजरात भाजपा के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण संगठनात्मक राज्य रहा है और यहां पार्टी का मजबूत कैडर नेटवर्क मौजूद है।
हिमाचल प्रदेश में श्रीकांत शर्मा को प्रभारी बनाया गया है और दर्शन सिंह सह-प्रभारी होंगी। झारखंड का प्रभार गजेंद्र पटेल को दिया गया है, जबकि सौरभ सिंह और निवेदिता सिंह सह-प्रभारी होंगे।
केरल का प्रभार प्रोफेसर एम. नागराजा को दिया गया है और एम. वेंकटेशन को सह-प्रभारी बनाया गया है। दक्षिण भारत में भाजपा के संगठनात्मक विस्तार की दृष्टि से केरल लंबे समय से पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राज्य रहा है।
महाराष्ट्र की जिम्मेदारी बैजयंत जय पांडा को दी गई है। उनके साथ अमित मालवीय, सदानंद शेट तानावडे और कमलजीत सहरावत सह-प्रभारी होंगे। राज्य में पार्टी और गठबंधन की राजनीति को देखते हुए संगठनात्मक समन्वय की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
भाजपा ने पूर्वोत्तर राज्यों के लिए भी अलग-अलग संगठनात्मक जिम्मेदारियां तय की हैं। मणिपुर में डॉ. राजदीप रॉय, मेघालय में कनाद पुरकायस्थ, मिजोरम में डॉ. भगवत कराड और त्रिपुरा में मृगांका देव बर्मन को प्रभारी बनाया गया है।
नगालैंड में अनिल एंटनी को जिम्मेदारी मिली है। अरुणाचल प्रदेश में देवेश कुमार और असम में मंगल पांडे को प्रभारी बनाया गया है।
राजस्थान का प्रभार संजय भाटिया को सौंपा गया है। उनके साथ कविता पाटीदार और कुलजीत चहल सह-प्रभारी होंगे।
नई नियुक्तियों का एक महत्वपूर्ण पहलू 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों में संगठनात्मक तैयारियों के लिए नई टीम को जिम्मेदारी दी गई है। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार इन राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।
इन नियुक्तियों के बाद राज्य प्रभारी संबंधित प्रदेश संगठनों के साथ समन्वय करेंगे। बूथ स्तर तक संगठन की गतिविधियां, सदस्यता और कार्यकर्ता संपर्क, प्रदेश इकाइयों की समीक्षा तथा चुनावी तैयारियों में प्रभारी की भूमिका रहती है।
भाजपा के इस फेरबदल में एक साथ कई स्तरों पर बदलाव दिखाई देता है। पार्टी ने अनुभवी संगठनात्मक नेताओं के साथ नए चेहरों को भी जिम्मेदारियां दी हैं। कई नेताओं को एक से अधिक राज्यों का प्रभार दिया गया है।
इस व्यवस्था के जरिए केंद्रीय संगठन और प्रदेश इकाइयों के बीच संपर्क को मजबूत करने की कोशिश की गई है। आने वाले महीनों में इन प्रभारियों के राज्यों में संगठनात्मक दौरे, बैठकें और प्रदेश इकाइयों की समीक्षा बढ़ सकती है।
उत्तर प्रदेश का प्रभार विनोद तावड़े को दिए जाने के साथ चार सह-प्रभारियों की नियुक्ति हुई है। यह टीम राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों और संगठनात्मक गतिविधियों पर काम करेगी।
2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश में बूथ स्तर के संगठन, कार्यकर्ता नेटवर्क, जिला इकाइयों और चुनावी तैयारियों के बीच समन्वय नई टीम के सामने प्रमुख काम होगा।
पश्चिम बंगाल और तेलंगाना दोनों में सुनील बंसल की जिम्मेदारी बरकरार रखी गई है। इन दोनों राज्यों में भाजपा के संगठनात्मक विस्तार को लेकर पार्टी लंबे समय से काम कर रही है।
बंगाल में स्थानीय संगठन और विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी की मौजूदगी बढ़ाना तथा तेलंगाना में संगठन को मजबूत करना उनके सामने प्रमुख कार्यों में शामिल रहेगा। दोनों राज्यों के लिए अलग-अलग सह-प्रभारी नियुक्त किए गए हैं।
प्रभारियों की नियुक्ति के बाद वास्तविक चुनौती राज्यों में संगठनात्मक फैसलों को जमीन तक पहुंचाने की होगी। प्रदेश नेतृत्व, जिला इकाइयों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाए रखना, स्थानीय मुद्दों को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाना और चुनावी तैयारियों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना नई टीम की जिम्मेदारी होगी।
खास तौर पर उन राज्यों में जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, इन नियुक्तियों के बाद संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रभारी और सह-प्रभारियों की नियुक्ति भाजपा के केंद्रीय संगठन में बड़े स्तर के पुनर्गठन को दर्शाती है। पार्टी ने कई वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी दी है और कई स्थानों पर सह-प्रभारियों की टीम बनाई है।
स्मृति ईरानी, हरीश द्विवेदी, राम माधव, सतीश पूनिया, सुनील बंसल और विनोद तावड़े को मिली जिम्मेदारियां इस नई संगठनात्मक संरचना के प्रमुख हिस्से हैं। अब इन नेताओं की भूमिका संबंधित राज्यों में पार्टी संगठन के संचालन और केंद्रीय नेतृत्व की प्राथमिकताओं को प्रदेश स्तर तक पहुंचाने में रहेगी।
नई नियुक्तियों के साथ भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अपने राज्यवार संगठनात्मक ढांचे को नया रूप दिया है। आने वाले समय में इन प्रभारियों की गतिविधियां, प्रदेश संगठनों के साथ उनकी बैठकें और राज्यों में होने वाले संगठनात्मक कार्यक्रम इस फेरबदल के अगले चरण को तय करेंगे।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


