17 सितंबर से मथुरा में शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान, 5 लाख दीपों से जगमगाएंगे धार्मिक स्थल
- 12h ago
बिनौली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कुश्ती का परचम लहराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बागपत जनपद के जौहड़ी गांव निवासी युवा कुश्ती कोच सुखचैन स्वामी का अपने पैतृक गांव पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूल-मालाओं की वर्षा और ग्रामीणों के उत्साह के बीच उनका अभिनंदन किया गया। ग्रामीणों ने उन्हें गांव और जिले का गौरव बताते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि ने पूरे क्षेत्र का नाम राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोशन किया है।
सुखचैन स्वामी ने हाल ही में अजरबैजान की राजधानी बाकू में आयोजित अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारतीय फ्री स्टाइल टीम के कोच के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाई। 27 जुलाई से 2 अगस्त तक आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उनके मार्गदर्शन में भारतीय पहलवानों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक स्वर्ण, एक रजत और चार कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
कोच सुखचैन स्वामी के प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन का ही परिणाम रहा कि भारतीय पहलवान रविंद्र ने स्वर्ण पदक जीतकर विश्व विजेता बनने का गौरव हासिल किया। वहीं आर्यन खोखर ने रजत पदक पर कब्जा जमाया, जबकि हनुमत जाधव, प्रथमेश, आयुष और सक्षम ने कांस्य पदक जीतकर भारत की पदक तालिका को मजबूत किया। खिलाड़ियों के इस उत्कृष्ट प्रदर्शन ने भारतीय कुश्ती को नई पहचान दिलाई और विश्व मंच पर तिरंगे का मान बढ़ाया।
जौहड़ी निवासी किसान शीशपाल सिंह के छोटे पुत्र सुखचैन स्वामी बचपन से ही कुश्ती के प्रति समर्पित रहे हैं। उन्होंने स्वयं राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी के रूप में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और बाद में कोचिंग के क्षेत्र में कदम रखते हुए युवा खिलाड़ियों को तैयार करने का संकल्प लिया। वर्तमान में वे राष्ट्रीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष डॉ. एस.पी. देशवाल की मेरठ स्थित सत्यम कुश्ती अकादमी में कोच के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे देशभर से आने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आधुनिक तकनीकों के साथ प्रशिक्षण दे रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सुखचैन की सफलता वर्षों की कठिन मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने न केवल स्वयं खेल जगत में पहचान बनाई, बल्कि अब नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का कार्य भी कर रहे हैं। यही कारण है कि गांव लौटने पर उनका स्वागत किसी विजेता की तरह किया गया।
गांव में प्रवेश करते ही युवाओं और ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। फूल-मालाएं पहनाकर और पुष्पवर्षा कर उन्हें सम्मानित किया गया। स्वागत जुलूस के दौरान "भारत माता की जय" और "सुखचैन स्वामी जिंदाबाद" के नारों से पूरा माहौल देशभक्ति और उत्साह से भर गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण, खिलाड़ी और खेल प्रेमी उनके स्वागत में शामिल हुए।
सम्मान समारोह में वक्ताओं ने कहा कि खेलों में सफलता केवल खिलाड़ी की नहीं होती, बल्कि उसके पीछे कोच की मेहनत, रणनीति और मार्गदर्शन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। सुखचैन स्वामी ने अपने अनुभव और तकनीकी ज्ञान से भारतीय खिलाड़ियों को विश्व स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए तैयार किया। उनकी कोचिंग ने यह साबित किया कि यदि खिलाड़ियों को सही दिशा और प्रशिक्षण मिले तो वे दुनिया के किसी भी मंच पर भारत का नाम रोशन कर सकते हैं।
कोच सुखचैन स्वामी ने ग्रामीणों और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए बेहद भावुक करने वाला है। उन्होंने कहा कि किसी भी खिलाड़ी या कोच के लिए अपने गांव और अपने लोगों का प्यार सबसे बड़ा पुरस्कार होता है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार, गुरुजनों, वरिष्ठ प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों की अथक मेहनत को दिया।
उन्होंने कहा कि भारतीय पहलवानों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल उन्हें सही प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और निरंतर अभ्यास का अवसर उपलब्ध कराने की है। यदि खिलाड़ियों को बेहतर माहौल मिले तो भारत भविष्य में विश्व कुश्ती की महाशक्ति बन सकता है।
सुखचैन स्वामी ने युवाओं से खेलों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और स्वस्थ जीवन का आधार भी हैं। उन्होंने कहा कि गांवों में अपार खेल प्रतिभाएं मौजूद हैं, जिन्हें सही मार्गदर्शन देकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य भविष्य में भारत के लिए और अधिक विश्व एवं ओलंपिक पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को तैयार करना है। इसके लिए वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करते रहेंगे।
सम्मान समारोह के दौरान मौजूद वरिष्ठ नागरिकों ने कहा कि जौहड़ी गांव पहले भी खेल प्रतिभाओं के लिए जाना जाता रहा है और सुखचैन स्वामी ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है। उनकी उपलब्धि से गांव के बच्चों और युवाओं में खेलों के प्रति नया उत्साह पैदा हुआ है। अब अधिक से अधिक बच्चे कुश्ती सहित अन्य खेलों में अपना भविष्य बनाने के लिए प्रेरित होंगे।
इस अवसर पर गांव की प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज एवं "शूटर दादी" प्रकाशी तोमर ने भी सुखचैन स्वामी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से गांव के बच्चे विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं से नशे और बुरी संगत से दूर रहकर खेलों को अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मण सिंह, बबलू प्रधान, कोच रवि जाटव, राकेश फौजी, राजीव स्वामी, मोहित सोलंकी, सचिन, रामबीर सिंह, प्रदीप तोमर, विनोद प्रधान, आशीष सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, खिलाड़ी और गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने सुखचैन स्वामी को स्मृति चिह्न, शॉल और फूल-मालाएं भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
समारोह का समापन भारत माता के जयघोष और खिलाड़ियों के सम्मान के संकल्प के साथ हुआ। ग्रामीणों ने विश्वास जताया कि सुखचैन स्वामी भविष्य में भी अपनी कोचिंग के दम पर भारतीय पहलवानों को विश्व और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर पदक दिलाकर देश का गौरव बढ़ाते रहेंगे। उनकी उपलब्धि न केवल जौहड़ी और बागपत बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय बन गई है।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।


