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- 13h ago
बागपत। मेहनत से काम पूरा करने के बाद भी मजदूरी के लिए महीनों इंतजार करना दो श्रमिकों के लिए परेशानी का कारण बना रहा, लेकिन श्रम विभाग में शिकायत पहुंचने के बाद दोनों को आखिरकार उनका मेहनताना मिल गया। मजदूरी का भुगतान नहीं करने के मामलों में विभाग ने पहले शिकायतों की सुनवाई की, इसके बाद श्रमिकों के पक्ष में आदेश पारित किए। आदेश के बावजूद जब संबंधित पक्षों ने बकाया रकम का भुगतान नहीं किया तो श्रम विभाग ने रिकवरी की कार्रवाई शुरू कराई। रिकवरी के बाद दोनों श्रमिकों को उनकी बकाया मजदूरी के चेक उपलब्ध कराए गए।
मामला मकान निर्माण में राजमिस्त्री का काम करने वाले जमशेद और बड़ौत क्षेत्र में पत्थर लगाने का काम करने वाले परवेज से जुड़ा है। दोनों श्रमिकों ने संबंधित कार्य पूरा किया था, लेकिन काम पूरा होने के बाद भी उन्हें मेहनत के अनुरूप पारिश्रमिक नहीं मिल पाया। लंबे समय तक भुगतान का इंतजार करने के बाद दोनों ने श्रम विभाग का दरवाजा खटखटाया और अपनी-अपनी शिकायत दर्ज कराई।
श्रमिकों की शिकायत मिलने के बाद प्रकरणों को विभागीय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया गया। दोनों मामलों में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। इसके बाद सहायक श्रमायुक्त एमएल पाल के समक्ष मामलों की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान श्रमिकों की ओर से मजदूरी बकाया होने की बात रखी गई और संबंधित पक्षों से भी जवाब लिया गया।
विभागीय सुनवाई के बाद दोनों प्रकरणों में श्रमिकों के पक्ष में आदेश पारित किया गया। आदेश का उद्देश्य श्रमिकों को उनकी बकाया मजदूरी दिलाना था। हालांकि आदेश पारित होने के बाद भी जब निर्धारित राशि का भुगतान नहीं हुआ तो मामला फिर से कार्रवाई के अगले चरण में पहुंच गया।
श्रम विभाग के सामने चुनौती यह थी कि आदेश के बावजूद श्रमिकों को वास्तविक रूप से पैसा नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में विभाग ने मामले को केवल आदेश तक सीमित नहीं रखा और बकाया रकम की वसूली के लिए नियमानुसार रिकवरी की कार्रवाई शुरू कराई।
विभागीय कार्रवाई के बाद दोनों मामलों में बकाया मजदूरी की वसूली कराई गई। रिकवरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद श्रमिकों को उनकी देय राशि का भुगतान कराया गया। इससे लंबे समय से मजदूरी के लिए इंतजार कर रहे दोनों श्रमिकों को राहत मिली।
रिकवरी के बाद मकान निर्माण में राजमिस्त्री का काम करने वाले जमशेद को 2 लाख 56 हजार रुपये की बकाया मजदूरी का चेक दिया गया। वहीं बड़ौत में पत्थर लगाने का काम करने वाले परवेज को 39 हजार रुपये का चेक उपलब्ध कराया गया।
इस तरह दोनों श्रमिकों को कुल 2 लाख 95 हजार रुपये की बकाया मजदूरी प्राप्त हुई। लंबे समय से अटके भुगतान के मिलने से श्रमिकों को आर्थिक राहत मिली।
मजदूरी संबंधी मामलों में शिकायत के बाद आदेश पारित होना कार्रवाई का एक चरण है, लेकिन श्रमिक को वास्तविक भुगतान मिलने के बाद ही प्रक्रिया पूरी मानी जाती है। जमशेद और परवेज के मामलों में भी आदेश के बाद भुगतान नहीं होने पर विभाग ने आगे की कार्रवाई की और रिकवरी के माध्यम से बकाया धनराशि दिलाई।
इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट हुआ कि मजदूरी संबंधी शिकायतों में विभागीय स्तर पर सुनवाई के बाद यदि आदेश का पालन नहीं होता है तो नियमानुसार बकाया राशि की वसूली के लिए आगे की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
सहायक श्रमायुक्त एमएल पाल ने बताया कि मजदूरी संबंधी शिकायतों का नियमानुसार निस्तारण कर श्रमिकों को उनका देय पारिश्रमिक दिलाना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि शिकायत प्राप्त होने पर मामले की सुनवाई की जाती है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आदेश पारित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि यदि आदेश के बाद भी संबंधित पक्ष द्वारा बकाया मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता है तो नियमों के तहत रिकवरी की कार्रवाई की जाती है। जमशेद और परवेज के मामलों में भी आदेश के बाद भुगतान लंबित रहने पर इसी प्रक्रिया के तहत बकाया राशि की वसूली कराई गई और दोनों श्रमिकों को उनके भुगतान के चेक उपलब्ध कराए गए।
जमशेद और परवेज के मामले यह भी बताते हैं कि श्रमिकों के लिए मेहनत की कमाई समय पर मिलना कितना महत्वपूर्ण है। रोजाना काम करके परिवार की जरूरतें पूरी करने वाले श्रमिकों के लिए मजदूरी का भुगतान रुक जाना आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है। दोनों श्रमिकों ने अपने काम को पूरा किया, लेकिन पारिश्रमिक के लिए उन्हें विभागीय प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
शिकायत से लेकर सुनवाई, आदेश और फिर रिकवरी तक चली प्रक्रिया के बाद दोनों को बकाया राशि मिल सकी। विभागीय कार्रवाई के बाद जब दोनों श्रमिकों को उनके भुगतान के चेक सौंपे गए तो लंबे समय से लंबित मजदूरी का मामला आखिरकार समाप्त हुआ।
श्रम विभाग द्वारा की गई कार्रवाई का सीधा लाभ दोनों श्रमिकों को मिला। एक ओर जहां जमशेद को 2.56 लाख रुपये की बड़ी बकाया राशि प्राप्त हुई, वहीं परवेज को भी 39 हजार रुपये का भुगतान कराया गया। दोनों मामलों में विभाग ने शिकायत मिलने के बाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया और आदेश के अनुपालन के लिए रिकवरी की कार्रवाई की।
श्रम विभाग के अनुसार मजदूरी से संबंधित शिकायतों को नियमानुसार गंभीरता से लिया जाता है। ऐसे मामलों में श्रमिक अपनी समस्या विभाग के समक्ष रख सकते हैं। विभागीय स्तर पर मामले की जांच और सुनवाई के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। यदि आदेश के बाद भी भुगतान नहीं होता है तो बकाया राशि की वसूली के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाती है।
इस कार्रवाई के बाद दो श्रमिकों को न केवल उनका लंबित मेहनताना मिला, बल्कि यह भी सुनिश्चित हुआ कि मजदूरी के मामले में पारित आदेश को अमल में लाया जाए और बकाया भुगतान वास्तविक रूप से श्रमिकों तक पहुंचे।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।


