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नई दिल्ली। भारतीय फिल्म उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान और व्यापक कारोबारी मंच देने की दिशा में राजधानी दिल्ली में 26 से 30 अगस्त तक “फिल्म एक्सपो इंडिया” के उद्घाटन संस्करण का आयोजन किया जा रहा है। आयोजकों के मुताबिक, यह देश में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा एग्जीबिशन बनने जा रहा है। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में फिल्म निर्माण से लेकर तकनीक, विजुअल इफेक्ट्स, उपकरण, मनोरंजन, क्षेत्रीय सिनेमा और रचनात्मक कला से जुड़े कई पहलुओं को एक ही मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा।
इस एक्सपो में भारत के अलावा दूसरे देशों से भी फिल्म उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों, निर्माता-निर्देशकों, तकनीकी विशेषज्ञों, कलाकारों, निवेशकों और सरकारी प्रतिनिधियों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन का मकसद केवल फिल्मों का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री की पूरी वैल्यू चेन को एक साथ लाकर नए कारोबारी अवसर पैदा करना है।
फिल्म एक्सपो इंडिया का संचालन अभिनेता बिंदु दारा सिंह की कंपनी द्वारा किया जा रहा है। आयोजन को आईटीपीओ का सहयोग प्राप्त है। इसके अलावा दिल्ली टूरिज्म, महाराष्ट्र टूरिज्म, साहित्य अकादमी और प्रसार भारती जैसे संस्थान भी इस आयोजन से जुड़े हैं।
आयोजकों का कहना है कि फिल्म उद्योग आज केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ पर्यटन, होटल, परिवहन, फैशन, तकनीक, विज्ञापन, डिजिटल मीडिया और स्थानीय कारोबार के बड़े अवसर जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि एक्सपो को फिल्म उद्योग के साथ-साथ पर्यटन और रोजगार के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिंदु दारा सिंह ने एक्सपो की रूपरेखा और इसके उद्देश्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों को अक्सर अलग-अलग मंचों पर अपनी गतिविधियां प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है, लेकिन फिल्म एक्सपो इंडिया का प्रयास इन्हें एक साझा मंच पर लाना है।
उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ, कलाकार, उपकरण निर्माता, सेवा प्रदाता और निवेशक एक-दूसरे से सीधे जुड़ सकेंगे। इससे नए प्रोजेक्ट्स के लिए सहयोग और साझेदारी के रास्ते खुल सकते हैं।
बिंदु दारा सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी क्षेत्र में फिल्म की शूटिंग होने से केवल फिल्म यूनिट को ही लाभ नहीं होता, बल्कि स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन, खानपान, पर्यटन और दूसरे छोटे-बड़े व्यवसायों को भी काम मिलता है। इस लिहाज से फिल्म उद्योग रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
एक्सपो में फिल्म निर्माण की पूरी प्रक्रिया से जुड़े क्षेत्रों को जगह देने की तैयारी है। कैमरा, लाइटिंग, साउंड, शूटिंग उपकरण, एडिटिंग, पोस्ट प्रोडक्शन, विजुअल इफेक्ट्स और अन्य आधुनिक तकनीकों से जुड़े उत्पाद और सेवाएं यहां प्रदर्शित की जाएंगी।
फिल्म निर्माताओं और तकनीकी टीमों के लिए यह मंच खास तौर पर उपयोगी माना जा रहा है, क्योंकि एक ही स्थान पर उन्हें नई तकनीक और उपकरणों की जानकारी हासिल करने का अवसर मिलेगा। इससे फिल्म निर्माण की बदलती जरूरतों और नई तकनीकी संभावनाओं को समझने में भी मदद मिलेगी।
फिल्म उद्योग में तकनीक का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। शूटिंग से लेकर एडिटिंग, विजुअल इफेक्ट्स और कंटेंट तैयार करने तक नई तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। ऐसे में एक्सपो में आधुनिक तकनीक से जुड़े नए प्रयोग और उपकरण भी चर्चा का विषय रहेंगे।
विशेषज्ञों की ओर से फिल्म निर्माण के बदलते स्वरूप, डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार और दर्शकों की बदलती पसंद पर भी चर्चा की जाएगी। इससे युवा फिल्मकारों और नई प्रतिभाओं को उद्योग में आ रहे बदलावों को करीब से समझने का मौका मिलेगा।
फिल्म एक्सपो इंडिया में केवल प्रदर्शनी ही नहीं होगी, बल्कि इंडस्ट्री विशेषज्ञों के साथ कॉन्क्लेव और पैनल डिस्कशन भी आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में फिल्म निर्माण के मौजूदा ट्रेंड, नई तकनीक, क्षेत्रीय सिनेमा, फैशन और मनोरंजन उद्योग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी।
इन चर्चाओं में फिल्म उद्योग के अनुभवी लोगों के साथ नई पीढ़ी के फिल्मकारों और विशेषज्ञों को भी अपनी बात रखने का अवसर मिल सकता है। इससे इंडस्ट्री के अनुभव और नई सोच के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश होगी।
एक्सपो की एक महत्वपूर्ण विशेषता रीजनल सिनेमा पर दिया जाने वाला फोकस है। भारत में हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, बंगाली, मराठी, भोजपुरी और कई अन्य भाषाओं में लगातार फिल्मों का निर्माण हो रहा है।
क्षेत्रीय सिनेमा ने पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। ऐसे में एक्सपो के जरिए क्षेत्रीय फिल्म उद्योगों के निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को व्यापक नेटवर्किंग का अवसर मिल सकता है।
आयोजन में फिल्म कार्निवल को भी विशेष आकर्षण के तौर पर शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य आम दर्शकों को फिल्म निर्माण और सिनेमा की दुनिया का अनुभव कराने के साथ मनोरंजन से जोड़ना है।
फिल्म कार्निवल में सिनेमा से जुड़ी अलग-अलग गतिविधियां देखने को मिलेंगी। इसके अलावा थीम पार्क, डोम थिएटर और विजुअल आर्ट्स की प्रदर्शनी भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहने की उम्मीद है।
एक्सपो में प्रस्तावित डोम थिएटर दर्शकों को अलग तरह का सिनेमाई अनुभव देने की कोशिश करेगा। यहां फिल्म और विजुअल कंटेंट को सामान्य स्क्रीन से अलग प्रारूप में देखने का अवसर मिल सकता है।
इसके साथ फिल्म मेकिंग स्टोरी के माध्यम से दर्शकों को यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि किसी फिल्म की कहानी के पर्दे पर आने तक उसके पीछे कितने अलग-अलग लोगों और तकनीकों की भूमिका होती है।
सिनेमा और विजुअल आर्ट्स का संबंध काफी पुराना है। फिल्म एक्सपो इंडिया में विजुअल आर्ट्स को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। फिल्मों के पोस्टर, डिजाइन, विजुअल कॉन्सेप्ट और रचनात्मक प्रस्तुति से जुड़े पहलुओं को प्रदर्शित करने की तैयारी है।
फैशन को लेकर भी पैनल डिस्कशन और गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। फिल्म और फैशन इंडस्ट्री के बीच बढ़ते संबंधों को देखते हुए यह हिस्सा युवा कलाकारों और डिजाइनरों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
फिल्म इंडस्ट्री में आने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए भी यह आयोजन महत्वपूर्ण हो सकता है। अभिनय, लेखन, निर्देशन, सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग, साउंड, विजुअल इफेक्ट्स और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में करियर बनाने की कोशिश कर रहे युवाओं को उद्योग से जुड़े अनुभवी लोगों से मिलने का अवसर मिलेगा।
आयोजकों का उद्देश्य नई प्रतिभाओं को पहचान दिलाने और उन्हें फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों तक पहुंच उपलब्ध कराने का भी है। नेटवर्किंग के जरिए नए प्रोजेक्ट्स और सहयोग की संभावनाएं बनने की उम्मीद है।
बिंदु दारा सिंह ने फिल्म उद्योग के रोजगार सृजन की क्षमता पर विशेष जोर दिया। किसी फिल्म की शूटिंग के दौरान स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। कलाकारों और तकनीकी टीम के अलावा होटल, टैक्सी, कैटरिंग, सुरक्षा, सेट निर्माण, स्थानीय गाइड और अन्य सेवाओं की मांग भी बढ़ती है।
यही मॉडल बड़े फिल्म एक्सपो के आयोजन पर भी लागू हो सकता है। देश-विदेश से आने वाले प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों के कारण होटल, परिवहन, खानपान और अन्य स्थानीय सेवाओं को फायदा मिलने की संभावना है।
फिल्म एक्सपो इंडिया को फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया, स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन और इंटरनेशनल चैंबर ऑफ मीडिया एंड एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री सहित कई प्रमुख संस्थाओं और ब्रांड्स का सहयोग मिलने की बात कही गई है।
इन संस्थाओं की भागीदारी से आयोजन को इंडस्ट्री के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। इससे निर्माताओं, लेखकों, तकनीकी विशेषज्ञों और मनोरंजन क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों के बीच संपर्क बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बिंदु दारा सिंह ने अपने आगामी प्रोजेक्ट “महाकालनाटक” के बारे में भी जानकारी साझा की। उन्होंने प्रोजेक्ट से जुड़े कलाकारों को मीडिया के सामने पेश किया।
इससे एक्सपो की शुरुआत के साथ ही फिल्म निर्माण से जुड़े आगामी प्रोजेक्ट्स और नए कलाकारों को भी चर्चा का मंच मिला। “महाकालनाटक” के कलाकारों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को मनोरंजन जगत से सीधे जोड़ने का काम किया।
दुनिया में फिल्म निर्माण का बाजार तेजी से बदल रहा है। भारत के पास बड़ी प्रतिभा, विविध लोकेशन, विशाल दर्शक वर्ग और मजबूत फिल्म उद्योग है। इसके बावजूद वैश्विक स्तर पर फिल्म निर्माण, तकनीक और निवेश के क्षेत्र में भारत के लिए अभी काफी संभावनाएं मौजूद हैं।
फिल्म एक्सपो इंडिया जैसे आयोजन भारतीय फिल्म उद्योग को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों, तकनीकी विशेषज्ञों और निवेशकों के साथ जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं। इससे भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रोडक्शन और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
आयोजकों के मुताबिक, फिल्म एक्सपो इंडिया को भविष्य में देश के दूसरे प्रमुख शहरों में भी आयोजित करने की योजना है। यदि पहला संस्करण सफल रहता है तो इसे अलग-अलग फिल्म निर्माण केंद्रों तक ले जाने की दिशा में काम किया जा सकता है।
मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता और अन्य शहरों में फिल्म उद्योग की मजबूत मौजूदगी को देखते हुए भविष्य में एक्सपो का विस्तार बड़े स्तर पर किया जा सकता है।
26 से 30 अगस्त तक दिल्ली में होने वाला यह आयोजन फिल्म प्रेमियों के साथ-साथ फिल्म उद्योग के पेशेवरों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ जहां दर्शकों को फिल्म कार्निवल, थीम पार्क और डोम थिएटर जैसी गतिविधियों के जरिए मनोरंजन मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ इंडस्ट्री के लोगों को तकनीक, निवेश, नेटवर्किंग और कारोबारी साझेदारी के नए अवसर मिल सकते हैं।
आयोजकों की योजना फिल्म एक्सपो इंडिया को केवल एक प्रदर्शनी तक सीमित रखने की नहीं, बल्कि इसे फिल्म उद्योग का ऐसा व्यापक मंच बनाने की है जहां क्रिएटिविटी, तकनीक, कारोबार, पर्यटन और मनोरंजन एक साथ दिखाई दें।
अगर यह पहल अपने उद्देश्य में सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में फिल्म एक्सपो इंडिया भारतीय सिनेमा के लिए एक ऐसा वार्षिक मंच बन सकता है, जहां देश-विदेश के फिल्म निर्माता, कलाकार, तकनीकी विशेषज्ञ और निवेशक एक साथ आकर नए प्रोजेक्ट्स और साझेदारियों की संभावनाएं तलाश सकें।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


