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- 11h ago
उत्तर प्रदेश: वाइल्डलाइफ़ SOS और वन अधिकारियों के बीच गुप्त रूप से जानकारी जुटाने और आपसी सहयोग के परिणामस्वरूप, हाल के वर्षों में भारत में तेंदुए की खाल की सबसे बड़ी बरामदगी में से एक संभव हो पाई। वन्यजीव अपराध के मामले में एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए, उत्तर प्रदेश वन विभाग और पुलिस ने वाइल्डलाइफ़ एसओएस से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर शिकार और तस्करी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफ़ाश किया। इस कार्रवाई में चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया और तेंदुए की दस खालें ज़ब्त की गईं।
विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर, मध्य भारत में सक्रिय शिकारियों और तस्करों के एक गिरोह का, बेहतरीन तालमेल और सर्जिकल सटीकता के साथ चलाए गए ऑपरेशन के ज़रिए पर्दाफ़ाश किया गया। कई महीनों तक, वाइल्डलाइफ़ एसओएस की एंटी-पोचिंग यूनिट 'फ़ॉरेस्ट वॉच' ने मिली जानकारी की बारीकी से जाँच की, संदिग्धों की गतिविधियों पर नज़र रखी और प्रवर्तन अधिकारियों को सूचित करने से पहले यह पक्का किया कि ज़ब्त की गई चीज़ें असली तेंदुए की खाल ही थीं।
वाइल्डलाइफ़ एसओएस से मिली जानकारी के आधार पर, उत्तर प्रदेश वन विभाग ने कई एजेंसियों के साथ मिलकर एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया। परिणामस्वरूप तेंदुए की दस खालें ज़ब्त की गईं और चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया, जो अभी वन विभाग और पुलिस की हिरासत में हैं। अधिकारी अपराधियों के कनेक्शन की जाँच कर रहे हैं और यह भी पता लगा रहे हैं कि तेंदुओं को कहाँ मारा गया था और तस्कर पहले कहाँ अपना कारोबार करते रहे हैं।
वन्यजीव संरक्षण संस्था ‘वाइल्डलाइफ़ SOS' भी इस मामले में वन विभाग को कानूनी सहायता दे रहा है।
आगरा के डीएफओ, IFS अधिकारी राजेश कुमार ने कहा, "वाइल्डलाइफ़ एसओएस से मिली ठोस जानकारी की वजह से हम सही समय पर आरोपियों को पकड़ पाए और वन्यजीव अपराध से जुड़ी अवैध सामग्री ज़ब्त कर पाए। मामले की जांच चल रही है और हम इस अवैध नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों का पता लगाने और दोषियों पर वाइल्डलाइफ़ (प्रोटेक्शन) एक्ट के तहत कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
वाइल्डलाइफ़ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, "यह एक बहुत ही दुखद घटना है, जब इंसानी लालच की वजह से दस तेंदुओं की जान चली गई! दस तेंदुओं की खालों की यह बरामदगी इस बात की कड़ी याद दिलाती है कि संगठित वाइल्डलाइफ़ अपराध हमारे देश की जैव-विविधता की संपत्ति के लिए खतरा हैं। वाइल्डलाइफ़ तस्करों के खिलाफ हर सफल ऑपरेशन आपराधिक नेटवर्क को तोड़ता है और खतरे में पड़ी वन्यजीव प्रजातियों की रक्षा करता है। हम इस सफल ऑपरेशन के लिए वन विभाग और पुलिस को बधाई देते हैं। वाइल्डलाइफ़ एसओएस ऐसे नेक कामों के लिए सहयोग और कानूनी मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है।"
वाइल्डलाइफ़ एसओएस की को-फ़ाउंडर और सेक्रेटरी, गीता शेषमणि ने कहा, "जंगल से हटाया गया हर तेंदुआ हमारे नाज़ुक इकोसिस्टम के लिए एक नुकसान है और इससे इस प्रजाति के लंबे समय तक बचे रहने पर खतरा पैदा होता है। दस तेंदुओं की खाल का मिलना यह दिखाता है कि संगठित शिकार करने वाले नेटवर्क किस बड़े पैमाने पर काम करते हैं। यह ऑपरेशन शिकार और गैर-कानूनी गतिविधियों की समस्या से निपटने के लिए एनजीओ और कानून की रखवाली करने वाली एजेंसियों के बीच सहयोग की अहमियत को दिखाता है।"
वाइल्डलाइफ़ एसओएस के कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स के डायरेक्टर, बैजू राज एम.वी. ने कहा, "वन्यजीवों की तस्करी करने वाले गिरोह बहुत शातिर और अच्छी तरह से संगठित होते हैं, और अक्सर राज्यों की सीमाओं के पार काम करते हैं।"
वाइल्डलाइफ़ एसओएस के सस्टेनेबिलिटी और स्पेशल प्रोजेक्ट्स के डायरेक्टर, वसीम अकरम ने कहा, "वन विभाग के साथ मिलकर ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले व्यक्ति के तौर पर, हम उत्तर प्रदेश वन विभाग और पुलिस की तेज़ी से की गई कार्रवाई की तारीफ़ करते है। यह ऑपरेशन अवैध शिकार करने वाले नेटवर्क के ख़िलाफ़ एक बड़े अभियान की शुरुआत है।"
भारतीय तेंदुए (पैंथेरा पार्डस फुस्का) को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित किया गया है, जिससे उसे भारत में सबसे ऊंचे स्तर की कानूनी सुरक्षा मिलती है। इसके बावजूद, संगठित आपराधिक नेटवर्क और अवैध वन्यजीव बाज़ारों के कारण खाल और शरीर के अंगों के लिए अवैध शिकार जंगली तेंदुओं की आबादी के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है।
श्रेष्ठ पचौरी
सीनियर प्रेस ऑफ़िसर
वाइल्डलाइफ़ SOS.


