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- 13h ago
नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच चल रहा विवाद मंगलवार को और तेज हो गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में मतदाता सूची में बदलाव, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर पार्टी ने कई मुद्दे उठाए। खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी रखी।
बैठक में कांग्रेस ने मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने और SIR की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि चुनावी सूची में होने वाले बदलावों की पूरी जानकारी राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं के सामने पारदर्शी तरीके से रखी जानी चाहिए। कांग्रेस ने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक विवाद न बताते हुए चुनावी प्रक्रिया में मतदाताओं के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जोड़कर पेश किया।
CWC बैठक में खड़गे ने चुनाव आयोग से संबंधित कई मांगें सामने रखीं। इनमें मतदाता सूची में किए गए बदलावों का पूरा विवरण सार्वजनिक करना, जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं उन्हें इसकी जानकारी देना और उन्हें अपील का अवसर उपलब्ध कराना प्रमुख मांगों में शामिल हैं। कांग्रेस ने राजनीतिक दलों को चुनावी आंकड़े समय पर उपलब्ध कराने तथा कथित विसंगतियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग भी रखी।
कांग्रेस की मांगों को broadly इस तरह समझा जा सकता है—
1. मतदाता सूची में बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए।
कांग्रेस चाहती है कि SIR अथवा अन्य पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में कितने नाम जोड़े गए, कितने हटाए गए और किन कारणों से बदलाव किए गए, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक हो।
2. नाम हटाए गए मतदाताओं को सूचना दी जाए।
पार्टी का कहना है कि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से हटने की स्थिति में उसे इसकी जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि वह समय रहते आपत्ति या अपील दर्ज कर सके।
3. मतदाताओं को अपील का पर्याप्त अवसर मिले।
कांग्रेस ने कहा है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में प्रभावित व्यक्ति के लिए शिकायत और अपील की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
4. राजनीतिक दलों को चुनावी डेटा समय पर उपलब्ध कराया जाए।
कांग्रेस का कहना है कि राजनीतिक दलों को मतदाता सूची और उससे जुड़े आंकड़ों तक पर्याप्त और समयबद्ध पहुंच मिलनी चाहिए, ताकि वे सूची में होने वाले बदलावों की जांच कर सकें।
5. कथित विसंगतियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हो।
पार्टी ने चुनावी आंकड़ों में सामने आने वाली कथित गड़बड़ियों या विसंगतियों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग रखी है।
CWC बैठक में खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराई। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आयोग की स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई। कांग्रेस का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़े सवालों का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ है।
यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबरों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। हालांकि, आयोग ने इन खबरों को अलग तरीके से पेश किया है।
चुनाव आयोग ने पहले स्पष्ट किया था कि तीन सदस्यीय आयोग में अलग-अलग विषयों पर सदस्यों की राय या टिप्पणियां होना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने SIR से संबंधित फैसलों को लेकर औपचारिक असहमति या विभाजन की खबरों को खारिज किया और कहा कि आयोग के फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं। आयोग के अनुसार अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
इससे विवाद का एक प्रमुख पहलू यह बन गया है कि जहां विपक्षी दल आयोग के भीतर मतभेद और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आयोग इन दावों को अपनी नियमित निर्णय प्रक्रिया और अंतिम सर्वसम्मति के संदर्भ में देख रहा है।
खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर मुख्य चुनाव आयुक्त पर दबाव डालने का आरोप लगाते हुए नैतिक आधार पर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग की। यह आरोप कांग्रेस की ओर से लगाया गया है; सरकार की ओर से इस आरोप को स्वीकार किए जाने की कोई पुष्टि इन रिपोर्टों में नहीं है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने इस पूरे विवाद को चुनावी हार या जीत तक सीमित रखने के बजाय लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़ा विषय बताया। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बना रहना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण करना है। इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में नामों की जांच, नए पात्र मतदाताओं को शामिल करने और अपात्र या अन्य कारणों से सूची में नहीं रहने वाले नामों की समीक्षा जैसे मुद्दे सामने आते हैं।
विवाद तब बढ़ा जब मतदाता सूची में बड़े स्तर पर हुए बदलावों और नामों के हटने को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए। कांग्रेस ने इन बदलावों के आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग तेज कर दी है। पार्टी का आरोप है कि यदि बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं तो प्रभावित मतदाताओं को इसकी जानकारी और अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलना चाहिए।
हालांकि, मतदाता सूची के पुनरीक्षण में नाम हटाए जाने के अलग-अलग प्रशासनिक कारण हो सकते हैं और किसी भी संख्या को सीधे तौर पर गलत तरीके से नाम हटाने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसी वजह से वास्तविक आंकड़े, प्रक्रिया और प्रत्येक मामले की स्थिति इस बहस में महत्वपूर्ण हैं।
कांग्रेस की मांगों में चुनावी डेटा तक राजनीतिक दलों की पहुंच का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। पार्टी का तर्क है कि यदि राजनीतिक दलों को मतदाता सूची में हुए बदलावों का पर्याप्त डेटा उपलब्ध हो तो वे संभावित विसंगतियों की पहचान कर सकते हैं और संबंधित अधिकारियों के सामने आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।
दूसरी ओर, चुनावी डेटा जारी करने में मतदाताओं की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण प्रश्न है। इसलिए किसी भी नई व्यवस्था में पारदर्शिता के साथ-साथ मतदाताओं की निजता और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा का संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।
CWC बैठक में कांग्रेस ने इस मुद्दे को आगे भी उठाने का संकेत दिया है। पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर व्यापक राजनीतिक अभियान की बात कही है। रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस इस विषय को संसद के साथ-साथ सार्वजनिक स्तर पर भी उठाने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले समय में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में मतदाता सूची का पुनरीक्षण, पात्र मतदाताओं के नामों की मौजूदगी और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता राजनीतिक बहस के प्रमुख विषय बने रह सकते हैं।
SIR विवाद में फिलहाल कांग्रेस और चुनाव आयोग की स्थिति अलग-अलग दिखाई दे रही है। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है और प्रभावित मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए अतिरिक्त कदम जरूरी हैं। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय या टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया है और अंतिम निर्णय निर्धारित कानूनी एवं संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।
इसलिए पूरे विवाद का आकलन करते समय राजनीतिक आरोपों और चुनाव आयोग की आधिकारिक स्थिति को अलग-अलग देखना महत्वपूर्ण होगा। मतदाता सूची में वास्तविक बदलाव, हटाए गए नामों के कारण, आपत्ति और अपील की प्रक्रिया तथा आयोग द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले आंकड़े आगे की बहस में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
CWC बैठक के बाद SIR और चुनाव आयोग से जुड़ा राजनीतिक विवाद और आगे बढ़ने की संभावना है। कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग की जवाबदेही, मतदाता सूची में पारदर्शिता और CEC के पद को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग अपने फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप और सर्वसम्मत बता रहा है।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग कांग्रेस की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और SIR से संबंधित मतदाता आंकड़ों तथा प्रक्रिया को लेकर आगे कौन-सी जानकारी सार्वजनिक होती है।
फिलहाल इस पूरे विवाद का केंद्र मतदाता सूची में बदलाव, मतदाताओं को सूचना और अपील का अधिकार, चुनावी डेटा की उपलब्धता तथा चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया बना हुआ है। आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों, चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं से यह बहस और स्पष्ट हो सकती है।


